छत्तीसगढ़
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 : रमेन डेका राज्यपाल छत्तीसगढ़ का उदबोधन, पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर
रायपुर।
प्रिय भाईयों, बहनों और प्यारे बच्चों…
77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं…
यह पवित्र अवसर हमें राष्ट्र की एकता और अखण्डता को सहेजते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता है। गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र की महान परंपरा तथा हमारे संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।
हम इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंह, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर से लेकर शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुंडाधुर समेत उन सभी नायकों का स्मरण करते हैं, जिनके देश प्रेम और त्याग से हमें हमारा गणतंत्र प्राप्त हुआ।
आज के ही दिन हमें एक ऐसा संविधान प्राप्त हुआ, जो देश के सभी नागरिकों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार प्रदान करता है।
हम सबका सौभाग्य है कि हम विश्व के सबसे बड़े और सबसे सुंदर गणतंत्र में निवास करते हैं।
इस गणतंत्र का स्वप्न हमारे पुरखों ने देखा। बाबा गुरु घासीदास जी ने मनखे-मनखे एक समान का संदेश दिया। संविधान में समानता का अधिकार इस भावना को अभिव्यक्त करता है। शहीद वीरनारायण सिंह ने लोगों की भूख की पीड़ा देखी थी और इसे मिटाने के लिए अंग्रेजों से संघर्ष किया।
हम एक ऐसे लोककल्याणकारी राज्य में रह रहे हैं, जहां सामाजिक-आर्थिक न्याय के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ इन्हें लागू करने में मॉडल राज्य है। मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ उन राज्यों में अग्रणी है, जहां सबसे पहले खाद्य सुरक्षा दी गई।
हमारे लिए संविधान पवित्र दस्तावेज है। 1975 में इमरजेंसी लगाकर इसे तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश हुई लेकिन हमारे लोकतंत्र सेनानियों के अदम्य साहस से यह कोशिश सफल नहीं हुई। छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जो अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ ही अपने लोकतंत्र सेनानियों का भी पूरा सम्मान करता है और उन्हें सम्मान निधि प्रदान करता है।
आज के दिन हम देश की सरहदों और आंतरिक सीमा में राष्ट्र की रक्षा के लिए जुटे जवानों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। हम उन सभी नागरिकों के प्रति भी सम्मान प्रकट कर रहे हैं जो अपनी कड़ी मेहनत से राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगे हुए हैं। आप सभी की कोशिशों का ही परिणाम है कि भारत ने जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का गौरव हासिल कर लिया है।
वर्ष 2000 में अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया। रजत जयंती वर्ष में हमने छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया है और इसके लिए अंजोर विजन डाक्यूमेंट के रूप में रोडमैप भी तैयार किया है।
मुझे विक्टर ह्यूगो (victor hugo) का कथन याद आता है कि दुनिया की कोई भी ताकत उस विचार को रोक नहीं सकती, जिसका समय आ गया है। भारत विकसित देशों की कतार में खड़ा होने के लिए तेजी से बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप हम भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
देश के 19 प्रतिशत से अधिक आयरन का उत्पादन हम करते हैं। 20-20 प्रतिशत सीमेंट, एल्यूमीनियम और कोयले का उत्पादन हमारे प्रदेश में होता है और हम देश का पॉवर हब बनने की ओर अग्रसर हैं।
देश के सबसे बड़े रेलवे पुल चिनाब में हमारे भिलाई स्टील प्लांट का फौलाद है। देश की नौसेना सरहदों को संभालने वाले आईएनएस विक्रांत में हमारा फौलाद है। मुंबई के बांद्रा-वर्ली सी लिंक ब्रिज में छत्तीसगढ़ में तैयार स्टील इस्तेमाल हुआ है। विकसित भारत मैन्युफैक्चरिंग की उछाल से बनेगा और कोर सेक्टर के मामले में सबसे अधिक संभावनाएं छत्तीसगढ़ में है।
छत्तीसगढ़ देश के सबसे तेजी से उभरते हुए राज्यों में से एक है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में तेजी से अधोसंरचना का विस्तार हुआ है। विशाखापट्नम एवं रांची को जोड़ने वाली एक्सप्रेस वे तैयार हो रही है। PMGSY से कोने-कोने में ग्रामीण सड़कें बिछ गई हैं। वर्ष 2014 से अब तक रेलवे के जो प्रोजेक्ट्स बने हैं और जो पाइपलाइन में हैं उन्हें शामिल किया जाए तो रेलवे ट्रैक की लंबाई उतनी ही होती है जितना रेलवे के इतिहास से वर्ष 2014 तक बिछी थी। खरसिया-परमालकसा जैसे रेलवे ट्रैक के माध्यम से
छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को जोड़ा जा रहा है। वन्दे भारत जैसी अत्याधुनिक और सुविधापूर्ण ट्रेन नागरिकों को मिली हैं। उड़ान योजना के तहत प्रदेश के एयरपोर्ट्स को अपग्रेड किया गया है और प्रदेश को देश के प्रमुख शहरों से बढ़िया कनेक्टिविटी मिली है। रायपुर एयरपोर्ट से कार्गो की शुरूआत भी हो चुकी है।
हमारी नई औद्योगिक नीति ने प्रदेश में निवेश के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। 7 लाख 83 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव राज्य को मिले हैं। इनसे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
बरसों तक छत्तीसगढ़ ने माओवादी हिंसा की यातना झेली है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने सुनियोजित रणनीति के माध्यम से माओवाद के विरुद्ध लड़ाई छेड़ी।
मैं प्रदेश के बहादुर जवानों के साहस की भरपूर प्रशंसा करता हूँ। आप लोगों ने रात-दिन जागकर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी अपना मनोबल ऊंचा रखा है। हमारे जवानों ने जहर फैलाने वाले माओवाद के थिंकटैंक को न्यूट्रलाइज किया है।
हमने माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र में आस्था प्रकट करने की अपील की। बहुत से माओवादियों ने हिंसा को छोड़कर संविधान को अपनाया।
हमने नक्सलियों के पुनर्वास की नई नीति तैयार की। दो सालो में ही 2500 से अधिक नक्सलियों ने संविधान में आस्था प्रकट की। बस्तर की धरती से हम इस साल के मार्च महीने तक माओवाद को पूरी तरह से समाप्त कर देंगे।
बस्तर ने माओवाद का बड़ा नुकसान सहा है। अब बस्तर के जख्मों को तेजी से भरने का काम हमें करना है। इसके लिए हमने ठोस Roadmap तैयार किया है। नई औद्योगिक नीति में जनजातीय क्षेत्रों में निवेश पर सर्वाधिक अनुदान प्रावधान हैं। जनजातीय लोगों के लिए उद्यम आरंभ करने पर सस्ती जमीन और विशेष रियायतें हैं। एक हजार करोड़ के निवेश अथवा 1000 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर विशेष अनुदान की व्यवस्था भी है।
नियद नेल्ला नार (Niyad Nella Naar) जैसी योजनाओं के माध्यम से नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन इलाकों में सतत विकास पर जोर रहा है
ताकि स्थानीय वनोपज आदि संसाधनों के बेहतर दोहन से जनजातियों की आय बढ़े। वन धन केंद्रों के माध्यम से संग्राहकों को संग्रहण का उचित भुगतान हो रहा है।
प्रधानमंत्री द्वारा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना आदि प्रमुख योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक विकास कार्य कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं आदि कर्मयोगी अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा छत्तीसगढ़ को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में सम्मानित किया गया है।
बस्तर में बंद पड़े अनेक स्कूल हमने पुनः आरंभ किये हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का नेतृत्व इन्हीं स्कूलों में से निकले प्रतिभाशाली बच्चे करेंगे।
माओवादी हिंसा के चलते प्रदेश के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी ठप पड़ी थीं। अब इनका कायाकल्प (Rejuvenation) हो रहा है। सुकमा के चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ। अब यहां सीजेरियन डिलीवरी भी हो रही है। मोबाइल मेडिकल वैन दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी पहुंच रही हैं। अभी पिछले महीने ही 51 मोबाइल मेडिकल वैन को विशेष पिछड़ी जनजाति वाली बसाहटों के लिए भेजा गया है।
MBBS की पढ़ाई हिंदी में शुरू होने से जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को भी सुविधा हो रही है। दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कालेज शुरू होने से स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ मेडिकल एजुकेशन का विस्तार होगा।
शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। बच्चों के समग्र विकास में शिक्षा की अहम भूमिका को देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया गया है। इसके माध्यम से बच्चे भारत के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के साथ ही आधुनिक ज्ञान-विज्ञान भी सीख रहे हैं।
Newton और Galileo की तरह ही आर्यभट्ट (Aryabhatta) और ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta) जैसे हमारे खगोलविदों और गणितज्ञों ने आज से सैकड़ों बरस पहले ऐसे गणितीय सूत्रों को खोजा, जिससे यूनिवर्स की हमारी समझ मजबूत हुई, दुर्भाग्य से इन्हें सिलेबस में मामूली जगह दी गई। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इन्हें शामिल किया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषाओं में बच्चों को पढ़ाने पर फोकस किया गया है इसे ध्यान में रखकर प्रदेश में स्थानीय भाषाओं में शिक्षा दी जा रही है। इससे बच्चों का शिक्षा के प्रति फोकस बढ़ा है।
दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था हो, इसके लिए Rationalization को अपनाया गया है। विद्या समीक्षा केंद्रों के माध्यम से 9 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे है। उच्च शिक्षा में भी हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया है। नवा रायपुर को हम एजुकेशन हब के रूप में तैयार कर रहे हैं। यहां National Institute of Fashion Technology, National Institute of Electronics & Information Technolony, National Forensic Sciences University जैसी संस्थाएं आरंभकर रहे हैं।
युवाओं के skills training की भी हमने भरपूर व्यवस्था की है। लाइवलीहुड कालेज के माध्यम से हर साल कुशल युवा तैयार किये जा रहे हैं। इस साल 13 हजार युवा लाइवलीहुड कालेज से प्रशिक्षित हुए हैं।
नई औद्योगिक नीति में कोर सेक्टर के साथ ही आधुनिक समय के आईटी, एआई, फार्मा जैसे सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षक प्रावधान किये गये हैं। मुझे इस बात की हार्दिक खुशी है कि छत्तीसगढ़ आधुनिक उद्योगों की स्थापना में भी आगे है। यहां सेमीकंडक्टर प्लांट का काम प्रगति पर है। एआई डाटा सेंटर पार्क अस्तित्व में आ रहा है। आईटी सेक्टर भी तेजी से तरक्की कर रहा है।
हमारा प्रदेश कृषि प्रधान है। हमारी सरकार किसानों को फसल का सबसे अच्छा मूल्य दे रही है। हम किसानों से 3100 रुपए प्रति Quintal तथा 21 Quintal प्रति acre धान खरीदी कर रहे हैं।
हम जैविक खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रहे हैं। पूरी दुनिया में आर्गेनिक फूड की डिमांड बढ़ी है। छत्तीसगढ़ की जमीन organic farming के लिए काफी अनुकूल है।
देश-दुनिया में Millets की मांग भी तेजी से बढ़ी है। हमारे किसानों के लिए इस क्षेत्र में काफी अवसर हैं। कृषि के साथ पशुपालन को भी महत्व दे रहे हैं। एनडीडीबी से प्रदेश के मिल्क फेडरेशन का एमओयू होने के बाद तेजी से इस पर काम हो रहा है। ड्रोन दीदी को ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करते देखना सुखद है। यह बताता है कि खेती काफी हाईटेक हो चुकी है और इसमें महिलाएं भी पीछे नहीं है।
हमारी मातृशक्ति के खाते में महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने एक हजार रुपए दिए जा रहे हैं। यह उनकी मेहनत का सम्मान है। प्रदेश की करीब 70 लाख महिलाएं इस पैसे से अपनी जरूरत पूरा करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई और भविष्य में निवेश कर रही है।
प्रधानमंत्री जी ने बीते वर्षों में महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक बड़े निर्णय लिये, इनमें से एक महत्वपूर्ण लक्ष्य देश में तीन करोड़ लखपति दीदी देश भर में तैयार करने का भी है। छत्तीसगढ़ में भी इस लक्ष्य को लेकर तेजी से कार्य हो रहा है और अब तक प्रदेश में 4 लाख 93 हजार लखपति दीदी बन चुकी हैं।
हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से कार्य कर रही है। तरक्की की राह पर सबको जोड़ने के उद्देश्य से दिव्यांगजनों की बेहतरी के लिए भी अनेक निर्णय लिये गये हैं। दिव्यांगजनों के हित में राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम की बकाया ऋण राशि एकमुश्त वापस की गई, ताकि निगम द्वारा दिव्यांगजनों को शिक्षा एवं स्वरोजगार के लिए 3 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
प्रधानमंत्री जी की फ्लैगशिप योजनाएं किस तरह आपस में समन्वय से काम करती हैं इसका सुंदर उदाहरण प्रधानमंत्री आवास योजना है। प्रदेश में हमने 18 लाख आवास मंजूर किये, इन घरों में Centering लगनी थी। इनकी Supply Self Help Groups ने की, हमारी 8 हजार से अधिक Self Help Group की बहनें इस योजना के लिए Centering तथा निर्माण सामग्री की Supply में लगी और ऐसा करते हुए वे लखपति दीदी बन चुकी हैं।
सम्मानित अटल जी ने हमारे राज्य का निर्माण किया है। वे सुशासन को सबसे ज्यादा महत्व देते थे। हमारी सरकार ने सुशासन को हर स्तर पर अपनाया है। E-Office के आ जाने से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है तथा निर्णय लेने की गति तेज हुई है। Biometric System से सरकारी कामकाज बेहतर हो रहा है।
मोदी जी ने वर्ष 2070 तक Zero carbon emissions का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ इस उद्देश्य को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। हमारे यहां तेजी से Green energy को अपनाया जा रहा है। ग्रीन स्टील के निर्माण में हमारी अग्रणी भूमिका होगी। एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत अब तक 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाये गये हैं।
भविष्य में जल संकट से निपटना भी हमारी महत्वपूर्ण चुनौती है। इसके लिए राज्य सरकार कई स्तर पर काम कर रही है। हम नदियों को जोड़ने के लिए सर्वे आरंभ कर रहे हैं। इंद्रावती और महानदी जैसी नदियों को जोड़ने से एक-एक बूंद का इस्तेमाल सही तरह से हो सकेगा। पानी की हर बूंद को बचाने के लिए हम शहरों में वाटर हारवेस्टिंग का काम प्राथमिकता से कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में मिशन मोड पर भू-जल संवर्धन के लिए स्ट्रक्चर बनाए हैं। 2 सालों में एक हजार से अधिक नये तालाब खोदे गये तथा 5 हजार से अधिक तालाबों का रिनोवेशन किया गया है। अमृत सरोवर योजना फेस-2 के तहत 10 हजार से अधिक डबरी तथा 72 सरोवर बनाये गये हैं। पानी के विवेकपूर्ण
इस्तेमाल पर जितनी ज्यादा जागरूकता बढ़ेगी, हम जल संकट से उतना ही दूर रहेंगे। तालाब और डबरी निर्माण के लिए लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। विशेषकर हम बड़े किसानों को अपने खेतों में तालाब निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
प्लास्टिक प्रदूषण आज के समय की अहम समस्या है। माइक्रो प्लास्टिक का प्रदूषण इस सीमा तक पहुंच गया है कि रिसर्च में माँ के दूध में भी इसके कण मिले हैं। इस गंभीर समस्या का सामना करने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। प्लास्टिक के उपयोग के खतरों के संबंध में लगातार जागरूकता अभियान शासन द्वारा चलाये जा रहे हैं। इन अभियानों का अच्छा असर हो रहा है और लोग अब इनके इस्तेमाल से कतराने लगे हैं।
बीते एक दशक में प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से देश की सूरत को संवारने में अहम भूमिका निभाई है। स्वच्छता सर्वेक्षण के माध्यम से नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के संबंध में अग्रणी रहने की ललक बढ़ी है। स्वच्छता सर्वेक्षण में रायपुर को प्रॉमिसिंग स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला और गार्बेज फ्री सिटीज की रेटिंग में 7 स्टार मिला। तीन लाख से
दस लाख जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में बिलासपुर को पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। बिल्हा को 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में प्रथम स्थान मिला। यह गौरव की बात है कि प्रधानमंत्री जी ने मन की बात में बिल्हा की स्वच्छता दीदियों की प्रशंसा की।
आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए उपयोगी अधोसंरचना तैयार की गई है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत प्रदेश में 81 लाख परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाये गये हैं। 4 लाख 96 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाये गये हैं। स्वास्थ्य से जुड़े हुए सभी कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य की 4106 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो गई हैं तथा इसके उपचार की सफलता दर 90 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है।
हमारा प्रदेश सिकल सेल की समस्या से जूझता रहा है। इस संकट से उबरने के लिए प्रभावी कार्य किये गये हैं। दो वर्षों में 1 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को जेनेटिक कार्ड वितरण हो चुका है और कुल 1 करोड़ 52 लाख लोगों की स्क्रीनिंग कर ली गई है।
अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 2 लाख 81 हजार से अधिक मोतियाबिंद आपरेशन हुए हैं। मोतियाबिंद आपरेशन के लिए शासन ने एम्स से भी एमओयू किया है। परीक्षा से पूर्व बच्चों का आई टेस्ट कर लिया जाए, इसके पुख्ता इंतजाम किये गये हैं और इसके तहत 1 लाख 62 हजार चश्मों का वितरण स्कूली बच्चों को किया गया है।
राज्य की रजत जयंती के अवसर पर हमने छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का आयोजन किया। हमने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का आयोजन किया। हमने रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन भी किया। अब ट्राइबल खेलों की मेजबानी भी करने जा रहे हैं।
गणतंत्र दिवस का शुभ दिन राष्ट्र के लिए नये संकल्प लेने का भी दिन होता है। आइये यह संकल्प लें कि विकसित छत्तीसगढ निर्माण में अपनी पूरी भागीदारी देंगे।
मैं आप सभी को पुनः गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।
जय भारत, जय छत्तीसगढ़
कोरबा
ऐतिहासिक ठेका मजदूर महासभा में भारी संख्या में श्रमिक हुए शामिल, पारित हुए तीन बड़े प्रस्ताव और कुसमुंडा घोषणा-पत्र
RCWF के प्रो. भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर एकजुट हुए कोयला मजदूर, अधिकारों के लिए फूंक डाला बिगुल
जून से अगस्त तक चलेगा डेटा संग्रह अभियान, सीएमडी बिलासपुर हेडक्वार्टर का होगा महा-घेराव
OSHWC कोड 2020 की धारा 57 को लागू करने और ठेका श्रमिकों को नियमित करने की उठी पुरजोर मांग

कोरबा/कुसमुंडा। राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर गत शुक्रवार 12 जून 2026 को कुसमुंडा के महतारी अंगना (कबीर चौक) में ठेका मजदूर महासभा का ऐतिहासिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ इस। महासभा में एसईसीएल (SECL) और विभिन्न कोयला खदानों में कार्यरत भारी संख्या में ठेका श्रमिकों, मजदूर प्रतिनिधियों और श्रमिक संगठनों ने हिस्सा लेकर अपनी एकजुटता का शंखनाद किया ।

महासभा के मंच पर प्रमुख अतिथि के रूप में प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे, मोहम्मद नासिर खान, भावेन्द्र तिवारी, UBKKS संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप, CKS (गैर-राजनीतिक संगठन) के अतुल दास महंत, उमा, गोपाल गोंडवाना पार्टी से गणेश सिंह ऊईके और प्रखर समाजसेवी नेत्री अनुसुईया राठौर सहित कई श्रमिक नेता उपस्थित रहे ।
मजदूरों की रीढ़ पर टिका है कोयला उद्योग- श्रमिक नेता

मंच पर उपस्थित अतिथियों ने अपने संबोधन में ठेका मजदूरों की दयनीय स्थिति पर गहरा प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि कोयला खदानों की मुख्य और अनिवार्य गतिविधियों (Core Activities) जैसे ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, डम्पर संचालन, रूफ बोल्टिंग और कोयला उत्खनन में रात-दिन खटने वाले ठेका मजदूर ही इस उद्योग की असली रीढ़ हैं। नेताओं ने आह्वान किया कि अब वक्त आ गया है, जब सभी मजदूरों को एक मंच पर आकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करना होगा ।
महासभा में सर्वसम्मति से पारित हुए तीन ऐतिहासिक प्रस्ताव







प्रस्ताव क्रमांक 1 नियमितीकरण और धारा 57 का क्रियान्वयन:- ओ.एस.एच.डब्ल्यू. कोड, 2020 की धारा 57 का हवाला देते हुए मांग की गई कि खदानों के कोर कार्यों में ठेका प्रथा पूरी तरह बंद हो। दशकों से MDO और EPC मॉडल के तहत काम कर रहे ठेका श्रमिकों को चरणबद्ध तरीके से SECL/प्रधान नियोक्ता के नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाए ।
प्रस्ताव क्रमांक 2 श्रम कानूनों में विधिक संशोधन की मांग:- कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट 1970 के नियम 25(2)(v)(a) के तहत समान कार्य के लिए समान वेतन और ठेका प्रथा के उन्मूलन के जो प्रावधान थे, उन्हें नए OSHW Code 2020 में भी शामिल करने हेतु केंद्र सरकार से आवश्यक संशोधन की मांग की गई ।
प्रस्ताव क्रमांक 3 NCWA-IV की कण्डिका 11.5.1 का स्मरण:- एसईसीएल को याद दिलाया गया कि नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट के तहत वह स्थायी प्रकृति के कार्यों में ठेका मजदूर न लगाने के लिए बाध्य है, अतः सभी कोर एक्टिविटी वाले श्रमिकों को तत्काल एसईसीएल के रोल (On-Roll) पर समायोजित किया जाए ।
जारी हुआ कुसमुंडा घोषणा-पत्र





महासभा में सर्वसम्मति से ऐतिहासिक कुसमुंडा घोषणा-पत्र जारी किया गया, जिसमें स्थायी कार्य के लिए स्थायी रोजगार और समान कार्य, समान वेतन, समान सम्मान के सिद्धांतों को बुलंद किया गया। घोषणा-पत्र में मांग की गई कि हर ठेका श्रमिक को नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, रोजगार कार्ड, सामाजिक सुरक्षा, आवास और चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से मिलनी चाहिए ।
बिलासपुर सीएमडी मुख्यालय के घेराव का ऐलान

महासभा को संबोधित करते हुए RCWF के प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे ने एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा की घोषणा की उन्होंने बताया कि जून से अगस्त 2026 के बीच खदानों में कार्यरत सभी ठेका मजदूरों का एक विस्तृत डेटा (आंकड़े) इकट्ठा किया जाएगा। इसके पश्चात मजदूरों के हक में एक विशाल मांग पत्र सौंपने के लिए बिलासपुर स्थित एसईसीएल सीएमडी (CMD) हेडक्वार्टर का ऐतिहासिक घेराव किया जाएगा ।
आयोजनकर्ताओं को साधुवाद, संघर्ष रहेगा जारी

इस विशाल कार्यक्रम को जमीन पर सफल बनाने वाले स्थानीय मजदूर नेताओं अशोक पटेल, गोविंदा सारथी, विनोद सारथी, संतोष चौहान, ललित महिलांगे, प्रकाश जयसवाल, महावीर यादव, छाल से अजय सिंह ठाकुर सहित अन्य कर्मठ कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत को मंच द्वारा साधुवाद दिया गया ।
कार्यक्रम के समापन पर UBKKS संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने सभी आगंतुक मजदूरों और मंचस्थ अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा मजदूरों के हक की यह तो सिर्फ शुरुआत है, आगे इस लड़ाई को और पैना और तेज करने के लिए हम सबको अपनी कमर कसनी होगी ।





छत्तीसगढ़
रायपुर : फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका



रायपुर। फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से देश और दुनिया को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।
राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।
कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
रायपुर : स्ट्रीट वेंडर्स के सपनों को मिली नई उड़ान
छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल
रायपुर। कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।

छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।
कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं।
पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।
छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।
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