छत्तीसगढ़
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 2026 : रमेन डेका राज्यपाल छत्तीसगढ़ का उदबोधन, पुलिस परेड ग्राउंड, रायपुर
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Divya Akashरायपुर।
प्रिय भाईयों, बहनों और प्यारे बच्चों…
77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आप सभी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं…
यह पवित्र अवसर हमें राष्ट्र की एकता और अखण्डता को सहेजते हुए देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा देता है। गणतंत्र दिवस भारतीय लोकतंत्र की महान परंपरा तथा हमारे संवैधानिक मूल्यों की समृद्ध विरासत का प्रतीक है।
हम इस अवसर पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, सरदार भगत सिंह, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर से लेकर शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुंडाधुर समेत उन सभी नायकों का स्मरण करते हैं, जिनके देश प्रेम और त्याग से हमें हमारा गणतंत्र प्राप्त हुआ।
आज के ही दिन हमें एक ऐसा संविधान प्राप्त हुआ, जो देश के सभी नागरिकों को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार प्रदान करता है।
हम सबका सौभाग्य है कि हम विश्व के सबसे बड़े और सबसे सुंदर गणतंत्र में निवास करते हैं।
इस गणतंत्र का स्वप्न हमारे पुरखों ने देखा। बाबा गुरु घासीदास जी ने मनखे-मनखे एक समान का संदेश दिया। संविधान में समानता का अधिकार इस भावना को अभिव्यक्त करता है। शहीद वीरनारायण सिंह ने लोगों की भूख की पीड़ा देखी थी और इसे मिटाने के लिए अंग्रेजों से संघर्ष किया।
हम एक ऐसे लोककल्याणकारी राज्य में रह रहे हैं, जहां सामाजिक-आर्थिक न्याय के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसी जरूरतों को पूरा किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ इन्हें लागू करने में मॉडल राज्य है। मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ उन राज्यों में अग्रणी है, जहां सबसे पहले खाद्य सुरक्षा दी गई।
हमारे लिए संविधान पवित्र दस्तावेज है। 1975 में इमरजेंसी लगाकर इसे तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश हुई लेकिन हमारे लोकतंत्र सेनानियों के अदम्य साहस से यह कोशिश सफल नहीं हुई। छत्तीसगढ़ ऐसा राज्य है, जो अपने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ ही अपने लोकतंत्र सेनानियों का भी पूरा सम्मान करता है और उन्हें सम्मान निधि प्रदान करता है।
आज के दिन हम देश की सरहदों और आंतरिक सीमा में राष्ट्र की रक्षा के लिए जुटे जवानों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। हम उन सभी नागरिकों के प्रति भी सम्मान प्रकट कर रहे हैं जो अपनी कड़ी मेहनत से राष्ट्र निर्माण के कार्य में लगे हुए हैं। आप सभी की कोशिशों का ही परिणाम है कि भारत ने जापान को पीछे छोड़कर विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने का गौरव हासिल कर लिया है।
वर्ष 2000 में अटल जी ने छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया। रजत जयंती वर्ष में हमने छत्तीसगढ़ को वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनाने का संकल्प लिया है और इसके लिए अंजोर विजन डाक्यूमेंट के रूप में रोडमैप भी तैयार किया है।
मुझे विक्टर ह्यूगो (victor hugo) का कथन याद आता है कि दुनिया की कोई भी ताकत उस विचार को रोक नहीं सकती, जिसका समय आ गया है। भारत विकसित देशों की कतार में खड़ा होने के लिए तेजी से बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप हम भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
देश के 19 प्रतिशत से अधिक आयरन का उत्पादन हम करते हैं। 20-20 प्रतिशत सीमेंट, एल्यूमीनियम और कोयले का उत्पादन हमारे प्रदेश में होता है और हम देश का पॉवर हब बनने की ओर अग्रसर हैं।
देश के सबसे बड़े रेलवे पुल चिनाब में हमारे भिलाई स्टील प्लांट का फौलाद है। देश की नौसेना सरहदों को संभालने वाले आईएनएस विक्रांत में हमारा फौलाद है। मुंबई के बांद्रा-वर्ली सी लिंक ब्रिज में छत्तीसगढ़ में तैयार स्टील इस्तेमाल हुआ है। विकसित भारत मैन्युफैक्चरिंग की उछाल से बनेगा और कोर सेक्टर के मामले में सबसे अधिक संभावनाएं छत्तीसगढ़ में है।
छत्तीसगढ़ देश के सबसे तेजी से उभरते हुए राज्यों में से एक है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में तेजी से अधोसंरचना का विस्तार हुआ है। विशाखापट्नम एवं रांची को जोड़ने वाली एक्सप्रेस वे तैयार हो रही है। PMGSY से कोने-कोने में ग्रामीण सड़कें बिछ गई हैं। वर्ष 2014 से अब तक रेलवे के जो प्रोजेक्ट्स बने हैं और जो पाइपलाइन में हैं उन्हें शामिल किया जाए तो रेलवे ट्रैक की लंबाई उतनी ही होती है जितना रेलवे के इतिहास से वर्ष 2014 तक बिछी थी। खरसिया-परमालकसा जैसे रेलवे ट्रैक के माध्यम से
छत्तीसगढ़ के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों को जोड़ा जा रहा है। वन्दे भारत जैसी अत्याधुनिक और सुविधापूर्ण ट्रेन नागरिकों को मिली हैं। उड़ान योजना के तहत प्रदेश के एयरपोर्ट्स को अपग्रेड किया गया है और प्रदेश को देश के प्रमुख शहरों से बढ़िया कनेक्टिविटी मिली है। रायपुर एयरपोर्ट से कार्गो की शुरूआत भी हो चुकी है।
हमारी नई औद्योगिक नीति ने प्रदेश में निवेश के लिए नई संभावनाएं पैदा की हैं। 7 लाख 83 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव राज्य को मिले हैं। इनसे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
बरसों तक छत्तीसगढ़ ने माओवादी हिंसा की यातना झेली है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमने सुनियोजित रणनीति के माध्यम से माओवाद के विरुद्ध लड़ाई छेड़ी।
मैं प्रदेश के बहादुर जवानों के साहस की भरपूर प्रशंसा करता हूँ। आप लोगों ने रात-दिन जागकर कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी अपना मनोबल ऊंचा रखा है। हमारे जवानों ने जहर फैलाने वाले माओवाद के थिंकटैंक को न्यूट्रलाइज किया है।
हमने माओवादियों से हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतंत्र में आस्था प्रकट करने की अपील की। बहुत से माओवादियों ने हिंसा को छोड़कर संविधान को अपनाया।
हमने नक्सलियों के पुनर्वास की नई नीति तैयार की। दो सालो में ही 2500 से अधिक नक्सलियों ने संविधान में आस्था प्रकट की। बस्तर की धरती से हम इस साल के मार्च महीने तक माओवाद को पूरी तरह से समाप्त कर देंगे।
बस्तर ने माओवाद का बड़ा नुकसान सहा है। अब बस्तर के जख्मों को तेजी से भरने का काम हमें करना है। इसके लिए हमने ठोस Roadmap तैयार किया है। नई औद्योगिक नीति में जनजातीय क्षेत्रों में निवेश पर सर्वाधिक अनुदान प्रावधान हैं। जनजातीय लोगों के लिए उद्यम आरंभ करने पर सस्ती जमीन और विशेष रियायतें हैं। एक हजार करोड़ के निवेश अथवा 1000 से अधिक स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर विशेष अनुदान की व्यवस्था भी है।
नियद नेल्ला नार (Niyad Nella Naar) जैसी योजनाओं के माध्यम से नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन इलाकों में सतत विकास पर जोर रहा है
ताकि स्थानीय वनोपज आदि संसाधनों के बेहतर दोहन से जनजातियों की आय बढ़े। वन धन केंद्रों के माध्यम से संग्राहकों को संग्रहण का उचित भुगतान हो रहा है।
प्रधानमंत्री द्वारा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान एवं प्रधानमंत्री जनमन योजना आदि प्रमुख योजनाओं के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक विकास कार्य कराए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना एवं आदि कर्मयोगी अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु द्वारा छत्तीसगढ़ को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य के रूप में सम्मानित किया गया है।
बस्तर में बंद पड़े अनेक स्कूल हमने पुनः आरंभ किये हैं। मुझे पूरा भरोसा है कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत का नेतृत्व इन्हीं स्कूलों में से निकले प्रतिभाशाली बच्चे करेंगे।
माओवादी हिंसा के चलते प्रदेश के धुर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं भी ठप पड़ी थीं। अब इनका कायाकल्प (Rejuvenation) हो रहा है। सुकमा के चिंतागुफा स्वास्थ्य केंद्र को राष्ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ। अब यहां सीजेरियन डिलीवरी भी हो रही है। मोबाइल मेडिकल वैन दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में भी पहुंच रही हैं। अभी पिछले महीने ही 51 मोबाइल मेडिकल वैन को विशेष पिछड़ी जनजाति वाली बसाहटों के लिए भेजा गया है।
MBBS की पढ़ाई हिंदी में शुरू होने से जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को भी सुविधा हो रही है। दंतेवाड़ा के गीदम में मेडिकल कालेज शुरू होने से स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ मेडिकल एजुकेशन का विस्तार होगा।
शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी है। बच्चों के समग्र विकास में शिक्षा की अहम भूमिका को देखते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया गया है। इसके माध्यम से बच्चे भारत के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति के साथ ही आधुनिक ज्ञान-विज्ञान भी सीख रहे हैं।
Newton और Galileo की तरह ही आर्यभट्ट (Aryabhatta) और ब्रह्मगुप्त (Brahmagupta) जैसे हमारे खगोलविदों और गणितज्ञों ने आज से सैकड़ों बरस पहले ऐसे गणितीय सूत्रों को खोजा, जिससे यूनिवर्स की हमारी समझ मजबूत हुई, दुर्भाग्य से इन्हें सिलेबस में मामूली जगह दी गई। अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इन्हें शामिल किया गया है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्थानीय भाषाओं में बच्चों को पढ़ाने पर फोकस किया गया है इसे ध्यान में रखकर प्रदेश में स्थानीय भाषाओं में शिक्षा दी जा रही है। इससे बच्चों का शिक्षा के प्रति फोकस बढ़ा है।
दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी शिक्षकों की पर्याप्त व्यवस्था हो, इसके लिए Rationalization को अपनाया गया है। विद्या समीक्षा केंद्रों के माध्यम से 9 हजार स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे है। उच्च शिक्षा में भी हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को अपनाया है। नवा रायपुर को हम एजुकेशन हब के रूप में तैयार कर रहे हैं। यहां National Institute of Fashion Technology, National Institute of Electronics & Information Technolony, National Forensic Sciences University जैसी संस्थाएं आरंभकर रहे हैं।
युवाओं के skills training की भी हमने भरपूर व्यवस्था की है। लाइवलीहुड कालेज के माध्यम से हर साल कुशल युवा तैयार किये जा रहे हैं। इस साल 13 हजार युवा लाइवलीहुड कालेज से प्रशिक्षित हुए हैं।
नई औद्योगिक नीति में कोर सेक्टर के साथ ही आधुनिक समय के आईटी, एआई, फार्मा जैसे सेक्टर में निवेश के लिए आकर्षक प्रावधान किये गये हैं। मुझे इस बात की हार्दिक खुशी है कि छत्तीसगढ़ आधुनिक उद्योगों की स्थापना में भी आगे है। यहां सेमीकंडक्टर प्लांट का काम प्रगति पर है। एआई डाटा सेंटर पार्क अस्तित्व में आ रहा है। आईटी सेक्टर भी तेजी से तरक्की कर रहा है।
हमारा प्रदेश कृषि प्रधान है। हमारी सरकार किसानों को फसल का सबसे अच्छा मूल्य दे रही है। हम किसानों से 3100 रुपए प्रति Quintal तथा 21 Quintal प्रति acre धान खरीदी कर रहे हैं।
हम जैविक खेती को विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रहे हैं। पूरी दुनिया में आर्गेनिक फूड की डिमांड बढ़ी है। छत्तीसगढ़ की जमीन organic farming के लिए काफी अनुकूल है।
देश-दुनिया में Millets की मांग भी तेजी से बढ़ी है। हमारे किसानों के लिए इस क्षेत्र में काफी अवसर हैं। कृषि के साथ पशुपालन को भी महत्व दे रहे हैं। एनडीडीबी से प्रदेश के मिल्क फेडरेशन का एमओयू होने के बाद तेजी से इस पर काम हो रहा है। ड्रोन दीदी को ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव करते देखना सुखद है। यह बताता है कि खेती काफी हाईटेक हो चुकी है और इसमें महिलाएं भी पीछे नहीं है।
हमारी मातृशक्ति के खाते में महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने एक हजार रुपए दिए जा रहे हैं। यह उनकी मेहनत का सम्मान है। प्रदेश की करीब 70 लाख महिलाएं इस पैसे से अपनी जरूरत पूरा करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई और भविष्य में निवेश कर रही है।
प्रधानमंत्री जी ने बीते वर्षों में महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक बड़े निर्णय लिये, इनमें से एक महत्वपूर्ण लक्ष्य देश में तीन करोड़ लखपति दीदी देश भर में तैयार करने का भी है। छत्तीसगढ़ में भी इस लक्ष्य को लेकर तेजी से कार्य हो रहा है और अब तक प्रदेश में 4 लाख 93 हजार लखपति दीदी बन चुकी हैं।
हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास की भावना से कार्य कर रही है। तरक्की की राह पर सबको जोड़ने के उद्देश्य से दिव्यांगजनों की बेहतरी के लिए भी अनेक निर्णय लिये गये हैं। दिव्यांगजनों के हित में राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम की बकाया ऋण राशि एकमुश्त वापस की गई, ताकि निगम द्वारा दिव्यांगजनों को शिक्षा एवं स्वरोजगार के लिए 3 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
प्रधानमंत्री जी की फ्लैगशिप योजनाएं किस तरह आपस में समन्वय से काम करती हैं इसका सुंदर उदाहरण प्रधानमंत्री आवास योजना है। प्रदेश में हमने 18 लाख आवास मंजूर किये, इन घरों में Centering लगनी थी। इनकी Supply Self Help Groups ने की, हमारी 8 हजार से अधिक Self Help Group की बहनें इस योजना के लिए Centering तथा निर्माण सामग्री की Supply में लगी और ऐसा करते हुए वे लखपति दीदी बन चुकी हैं।
सम्मानित अटल जी ने हमारे राज्य का निर्माण किया है। वे सुशासन को सबसे ज्यादा महत्व देते थे। हमारी सरकार ने सुशासन को हर स्तर पर अपनाया है। E-Office के आ जाने से सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ी है तथा निर्णय लेने की गति तेज हुई है। Biometric System से सरकारी कामकाज बेहतर हो रहा है।
मोदी जी ने वर्ष 2070 तक Zero carbon emissions का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ इस उद्देश्य को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा। हमारे यहां तेजी से Green energy को अपनाया जा रहा है। ग्रीन स्टील के निर्माण में हमारी अग्रणी भूमिका होगी। एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत अब तक 7 करोड़ से अधिक पौधे लगाये गये हैं।
भविष्य में जल संकट से निपटना भी हमारी महत्वपूर्ण चुनौती है। इसके लिए राज्य सरकार कई स्तर पर काम कर रही है। हम नदियों को जोड़ने के लिए सर्वे आरंभ कर रहे हैं। इंद्रावती और महानदी जैसी नदियों को जोड़ने से एक-एक बूंद का इस्तेमाल सही तरह से हो सकेगा। पानी की हर बूंद को बचाने के लिए हम शहरों में वाटर हारवेस्टिंग का काम प्राथमिकता से कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में मिशन मोड पर भू-जल संवर्धन के लिए स्ट्रक्चर बनाए हैं। 2 सालों में एक हजार से अधिक नये तालाब खोदे गये तथा 5 हजार से अधिक तालाबों का रिनोवेशन किया गया है। अमृत सरोवर योजना फेस-2 के तहत 10 हजार से अधिक डबरी तथा 72 सरोवर बनाये गये हैं। पानी के विवेकपूर्ण
इस्तेमाल पर जितनी ज्यादा जागरूकता बढ़ेगी, हम जल संकट से उतना ही दूर रहेंगे। तालाब और डबरी निर्माण के लिए लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है। विशेषकर हम बड़े किसानों को अपने खेतों में तालाब निर्माण के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
प्लास्टिक प्रदूषण आज के समय की अहम समस्या है। माइक्रो प्लास्टिक का प्रदूषण इस सीमा तक पहुंच गया है कि रिसर्च में माँ के दूध में भी इसके कण मिले हैं। इस गंभीर समस्या का सामना करने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। प्लास्टिक के उपयोग के खतरों के संबंध में लगातार जागरूकता अभियान शासन द्वारा चलाये जा रहे हैं। इन अभियानों का अच्छा असर हो रहा है और लोग अब इनके इस्तेमाल से कतराने लगे हैं।
बीते एक दशक में प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत अभियान के माध्यम से देश की सूरत को संवारने में अहम भूमिका निभाई है। स्वच्छता सर्वेक्षण के माध्यम से नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के संबंध में अग्रणी रहने की ललक बढ़ी है। स्वच्छता सर्वेक्षण में रायपुर को प्रॉमिसिंग स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला और गार्बेज फ्री सिटीज की रेटिंग में 7 स्टार मिला। तीन लाख से
दस लाख जनसंख्या वाले शहरों की श्रेणी में बिलासपुर को पूरे देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। बिल्हा को 20 हजार से कम आबादी वाले शहरों की श्रेणी में प्रथम स्थान मिला। यह गौरव की बात है कि प्रधानमंत्री जी ने मन की बात में बिल्हा की स्वच्छता दीदियों की प्रशंसा की।
आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए उपयोगी अधोसंरचना तैयार की गई है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत प्रदेश में 81 लाख परिवारों के आयुष्मान कार्ड बनाये गये हैं। 4 लाख 96 हजार से अधिक वरिष्ठ नागरिकों के आयुष्मान वय वंदना कार्ड बनाये गये हैं। स्वास्थ्य से जुड़े हुए सभी कार्यक्रमों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य की 4106 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त हो गई हैं तथा इसके उपचार की सफलता दर 90 प्रतिशत से बढ़कर 92 प्रतिशत हो गई है।
हमारा प्रदेश सिकल सेल की समस्या से जूझता रहा है। इस संकट से उबरने के लिए प्रभावी कार्य किये गये हैं। दो वर्षों में 1 करोड़ से ज्यादा नागरिकों को जेनेटिक कार्ड वितरण हो चुका है और कुल 1 करोड़ 52 लाख लोगों की स्क्रीनिंग कर ली गई है।
अंधत्व निवारण कार्यक्रम के तहत 2 लाख 81 हजार से अधिक मोतियाबिंद आपरेशन हुए हैं। मोतियाबिंद आपरेशन के लिए शासन ने एम्स से भी एमओयू किया है। परीक्षा से पूर्व बच्चों का आई टेस्ट कर लिया जाए, इसके पुख्ता इंतजाम किये गये हैं और इसके तहत 1 लाख 62 हजार चश्मों का वितरण स्कूली बच्चों को किया गया है।
राज्य की रजत जयंती के अवसर पर हमने छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव का आयोजन किया। हमने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम का आयोजन किया। हमने रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन भी किया। अब ट्राइबल खेलों की मेजबानी भी करने जा रहे हैं।
गणतंत्र दिवस का शुभ दिन राष्ट्र के लिए नये संकल्प लेने का भी दिन होता है। आइये यह संकल्प लें कि विकसित छत्तीसगढ निर्माण में अपनी पूरी भागीदारी देंगे।
मैं आप सभी को पुनः गणतंत्र दिवस की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।
जय भारत, जय छत्तीसगढ़
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कोरबा
15-Member Media Delegation from Sikkim Visits Gevra Coal Mine
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3 hours agoon
February 10, 2026By
Divya AkashWitnesses green, safe and modern coal mining practices up close
Korba. Under the joint aegis of the Press Information Bureau (PIB), Sikkim and Chhattisgarh, Ministry of Information & Broadcasting, Government of India, a 15-member media delegation from Sikkim visited the Gevra Coal Mine on 10 February 2026. The visit was organized with the objective of providing first-hand exposure to the role of SECL in ensuring national energy security, its environmental initiatives, and its sustainable mining practices.
During the visit, the media delegation observed state-of-the-art Heavy Earth Moving Machinery (HEMM) operations at Gevra, Asia’s largest coal mine. The delegation was briefed on blast-free coal extraction using surface miners, an environment-friendly, safe and efficient mining practice that reflects SECL’s commitment to sustainable operations.

The media representatives also witnessed the environment-friendly coal dispatch system through First Mile Connectivity (FMC), which ensures reduced dust emissions, enhanced transparency and improved operational efficiency. In addition, the delegation appreciated the dense plantation developed using the Miyawaki method at Gevra, highlighting SECL’s focused efforts towards ecological restoration and green mining.
Sharing their experiences, the journalists stated that it was the first time they had observed coal mining operations so closely. They commended SECL’s balanced approach towards ensuring the nation’s energy security while simultaneously prioritizing environmental protection and community welfare.
Following the Gevra mine visit, the delegation interacted with SECL management at the SECL Headquarters, Bilaspur. The interaction was held with Shri N. Franklin Jayakumar, Director (Technical–Operations), Shri Biranchi Das, Director (HR), and Shri Ramesh Chandra Mahapatra, Director (Technical–Planning/Projects). Detailed discussions were held on SECL’s future roadmap, sustainable development goals, and corporate social responsibility initiatives.

कोरबा
सिक्किम से 15-सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने किया गेवरा खदान का भ्रमण
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3 hours agoon
February 10, 2026By
Divya Akashहरित, सुरक्षित और आधुनिक कोयला खनन प्रक्रियाओं को नज़दीक से देखा
कोरबा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) सिक्किम एवं छत्तीसगढ़, के संयुक्त तत्वधान में सिक्किम से 15-सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने दिनांक 10 फरवरी 2026 को एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान गेवरा का दौरा किया। यह दौरा देश की ऊर्जा सुरक्षा में एसईसीएल भूमिका, पर्यावरणीय प्रयासों और सतत खनन पहलों को प्रत्यक्ष रूप से समझने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान गेवरा में अत्याधुनिक एचईएमएम संचालन का अवलोकन किया। मीडिया दल को सरफेस माइनर के माध्यम से ब्लास्ट-फ्री कोयला उत्खनन की प्रक्रिया की जानकारी दी गई, जो पर्यावरण-अनुकूल होने के साथ-साथ सुरक्षित और प्रभावी खनन का उदाहरण है।

इसके अतिरिक्त, प्रतिनिधिमंडल ने फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी के माध्यम से की जा रही पर्यावरण-अनुकूल कोयला डिस्पैच प्रणाली को भी देखा, जिससे धूल-उत्सर्जन में कमी, पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित होती है। इसके साथ ही गेवरा में विकसित मियावाकी पद्धति से किए गए सघन पौधारोपण को भी मीडिया सदस्यों ने सराहा।
पत्रकारों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह पहली बार है जब उन्होंने कोयला खनन कार्यों को इतनी नज़दीक से देखा। उन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक कल्याण के प्रति एसईसीएल के संतुलित दृष्टिकोण की सराहना की।
गेवरा दौरे के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में एसईसीएल प्रबंधन से एन फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (तक.) संचालन, बिरंची दास, निदेशक (एचआर), रमेश चन्द्र महापात्र, निदेशक (तक.) योजना/परियोजना- के साथ संवाद किया, जहाँ संगठन की भावी योजनाओं, सतत विकास लक्ष्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व पहलों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कोरबा
सरस्वती सायकिल योजना: सीतामणी स्कूल में नवमी की छात्राएं सायकिल पा कर खुश हुईं
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3 hours agoon
February 10, 2026By
Divya Akashहर वर्ग का ध्यान रखती है भाजपा सरकार-वैभव शर्मा
कोरबा। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सीतामणी में आज भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष वैभव शर्मा के मुख्य आतिथ्य में सरस्वती सायकिल योजना के तहत कक्षा नवमी की छात्राओं को सायकिलों का वितरण किया गया। इस अवसर पर श्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार हर वर्ग का ध्यान रखती है। सरस्वती सायकिल योजना से छात्राओं को विद्यालय आने में काफी सहुलियत होती है और समय की भी बचत होती है। सरस्वती सायकिल योजना से छात्राओं की रूचि उच्च कक्षाओं में पढ़ने के लिए होती है। उन्होंने भाजपा सरकार की योजनाओं को भी गिनाया और कहा कि भाजपा सरकार की योजनाओं से छत्तीसगढ़ तेजी से विकास कर रहा है और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ को भी विकसित बनाने का संकल्प प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए।
इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य सहित विद्यालय के व्यख्याता एवं एसएमडीसी के सदस्यगण श्रीमती मामौनी भौमिक, श्रीमती सुनीता निर्मलकर, तुषार साहू, मनीराम साहू, प्रभात मिश्रा सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे।
नवनियुक्त भाजयुमो जिला अध्यक्ष का भव्य स्वागत

विद्यालय परिवार ने इस अवसर पर भाजयुमो के नवनियुक्त जिला अध्यक्ष वैभव शर्मा का विद्यालय परिवार ने भव्य स्वागत किया। स्वागत से अभिभूत वैभव शर्मा ने सभी का आभार जताया।
परिसर में किया गया पौधरोपण

कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद मुख्य अतिथि वैभव शर्मा सहित सभी अतिथियों एवं विद्यालय परिवार ने पौध रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।


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