देश
मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान, संसद को संबोधित किया:बोले- सेशेल्स से हमारा 256 साल पुराना रिश्ता, 5 भारतीयों से हुई इसकी शुरुआत
विक्टोरिया, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मोदी को अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। सम्मान मिलने पर PM मोदी ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का आभार जताया।

PM मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित किया। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। उन्होंने कहा कि सेशेल्स से भारत का रिश्ता सिर्फ 50 साल पुराना नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत अगस्त 1770 में हुई थी। जब ‘थेलेमाक’ जहाज से यहां 5 भारतीय पहुंचे थे।
मोदी ने कहा कि जब लोग दुनिया का नक्शा देखते हैं, तो उन्हें सेशेल्स हिंद महासागर में बसे कुछ छोटे-छोटे द्वीपों का एक समूह दिखाई देता है। लेकिन हमारे लिए सेशेल्स सिर्फ द्वीपों का समूह नहीं, बल्कि इससे कहीं बढ़कर है।

पीएम मोदी को राष्ट्रपति पैट्रिक ने सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया।

सेशेल्स की राजधानी विक्टोरिया में शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी ने सेशेल्स कोस्ट गार्ड को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल ‘लेस्पवार’ सौंपा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल ‘पीएस लेस्पवार’ सौंपा। इससे सेशेल्स की समुद्री निगरानी और उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में गश्त की क्षमता मजबूत होगी।
पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को अब तक 3 बड़े सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान पर्यावरण की रक्षा, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और लंबे समय तक पर्यावरण को सुरक्षित रखने की दिशा में किए गए काम के लिए मिला है।
पर्यावरण के क्षेत्र में मोदी को अब तक 3 बड़े अवार्ड मिल चुके हैं। इससे पहले मई 2026 में संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने उन्हें एग्रीकोला मेडल से सम्मानित किया था। संयुक्त राष्ट्र ने साल 2018 में प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवॉर्ड’ प्रदान किया था।
PM मोदी के सेशेल्स दौरे की खास बातें
1. गोल्डन जुबली नेशनल डे में मुख्य अतिथि
PM मोदी 29 जून को सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे।
2. 175 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज
भारत ने सेशल्स के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1651 करोड़) के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा भारत ने सेशेल्स को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ‘पीएस लेस्पवार’ गिफ्ट किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल PS लेस्पवार सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को गिफ्ट किया। यह सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा।
3. नए समझौतों पर हस्ताक्षर
- प्रत्यर्पण संधि: सुरक्षा और कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समझौता हुआ।
- स्वास्थ्य सेवा: भारत सेशेल्स में एक नेशनल हॉस्पिटल बनाने में मदद करेगा।
- अंतरिक्ष और कृषि: अंतरिक्ष की खोज और कृषि के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने हाथ मिलाया है।
4. मोदी ने कोको डी मेर पौधा लगाया
कोको डी मेर का पौधा और इसका फल सिर्फ सेशल्स पर ही प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसके फल के अंदर मिलने वाला बीज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी बीज माना जाता है। एक अकेले बीज का वजन 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है।
कोको डी मेर के नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। मादा फल महिला के कूल्हे जैसा दिखाई देता है। इसे ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है। वहीं, नर फूल पुरुष के जननांग जैसा दिखता है। इस अनूठी बनावट के कारण सदियों से इस पौधे को लेकर कई तरह की लोककथाएं और पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं।
इस पेड़ को वयस्क होने और फल देने में 20 से 40 साल का समय लगता है। एक फल को पूरी तरह पककर तैयार होने में 6 से 7 साल लग जाते हैं। यह पेड़ बेहद लंबी उम्र जीता है; माना जाता है कि ये 200 से 350 साल तक जीवित रह सकते हैं।
प्राचीन काल में, जब यह फल समुद्र में तैरता हुआ मालदीव या भारत के तटों पर पहुंच जाता था, तो लोग सोचते थे कि यह समुद्र के तल में उगने वाले किसी जादुई पेड़ का फल है। इसी वजह से फ्रांसीसी भाषा में इसका नाम ‘कोको डी मेर’ पड़ा, जिसका अर्थ होता है समुद्र का नारियल।

सेशेल्स से जुड़ी खास बातें जानिए…
सेशेल्स की पहली बस्ती में शामिल थे 5 भारतीय
पुर्तगाली नाविक वास्को द गामा ने पहली बार सेशेल्स को 1502 में खोज की थी। तब यहां पर लोगों की कोई स्थाई बसावट नहीं थी। इसके बाद कई सदियों तक अरब और यूरोपीय जहाज यहां रुकते रहे, लेकिन कोई स्थायी आबादी नहीं बनी।
पहली बार 1770 में फ्रांस ने पहली स्थायी बस्ती बसाई। इसी दल में 15 फ्रांसीसी बसने वाले, 7 अफ्रीकी गुलाम और 5 भारतीय शामिल थे। इन्हें सेशेल्स का पहला स्थायी निवासी माना जाता है। इसके बाद 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान बिहार के भोजपुरी भाषी इलाकों से भी लोग यहां आकर बसने लगे। 20वीं सदी से तमिलनाडु और गुजरात से भी बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारी, मजदूर और निर्माण कार्य से जुड़े लोग सेशेल्स पहुंचे।
सेशेल्स के पूर्व राष्ट्रपति के पूर्वज बिहार से
आज करीब 1.20 लाख आबादी वाले इस देश में भारतीय मूल के लोग लगभग 8% हैं। भारतीय मूल के लोगों में बिहारी समुदाय तीसरा सबसे बड़ा समूह माना जाता है। साल 2020 में राष्ट्रपति बने वेवेल रामकलावन की जड़ें भी बिहार से जुड़ी हैं।
रामकलावन के परदादा करीब 138 साल पहले बिहार के गोपालगंज जिले के परसौनी गांव से कोलकाता पहुंचे थे। वहां से उन्हें गन्ने के खेतों में काम करने के लिए मॉरीशस भेजा गया। बाद में उनका परिवार सेशेल्स में बस गया। साल 2018 में, जब रामकलावन विपक्ष के सांसद थे, तब उन्होंने अपने पूर्वजों के गांव परसौनी का दौरा भी किया था।
सेशेल्स के कछुए लंबी उम्र के लिए मशहूर
दुनिया में कछुओं की 360 से ज्यादा प्रजातियां हैं। इनमें से सेशेल्स में पाया जाने वाला अल्डाब्रा जायंट कछुआ सबसे प्रसिद्ध प्रजातियों में से एक है। यह प्रजाति अपनी बेहद लंबी उम्र (औसत उम्र 150 साल) के लिए जानी जाती है।
दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जानवर जोनाथन भी इसी प्रजाति का कछुआ है। जोनाथन की उम्र करीब 194 साल मानी जाती है। उसका जन्म लगभग 1832 में हुआ था। वह 1882 में करीब 50 साल की उम्र में सेशेल्स से सेंट हेलेना भेज दिया गया था।
वैज्ञानिक उसकी लंबी उम्र का राज जानने के लिए उसके डीएनए का अध्ययन कर रहे हैं। उनका मानना है कि उसकी कोशिकाएं इंसानों की कोशिकाओं की तरह तेजी से बदलाव नहीं करतीं। इससे उम्र बढ़ने और लंबी जिंदगी से जुड़े नए रहस्यों का पता चल सकता है।

दुनिया का सबसे उम्रदराज जीवित कछुआ। इसका नाम जोनाथन है। यह एल्डाब्रा जायंट कछुए की प्रजाति का है और अटलांटिक महासागर में स्थित सेंट हेलेना द्वीप पर रहता है।
मोदी बोले- भारत और सेशेल्स के राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे
पीएम मोदी ने सेशेल्स दौरे पर कहा- सेशेल्स भारत का महत्वपूर्ण समुद्री पड़ोसी और ‘विजन महासागर (MAHASAGAR)’ का प्रमुख साझेदार है। इस साल भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के संबंध आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों, विविधता के सम्मान और लोगों के गहरे जुड़ाव पर आधारित हैं।
फरवरी 2026 में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के बाद अब इस दौरे में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। दोनों देश हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, समृद्धि और विकास को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे।
मैं सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाला पहला भारतीय प्रधानमंत्री बनूंगा। यह अवसर दोनों देशों के मजबूत लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं को दर्शाता है। सेशेल्स में बसे भारतीय समुदाय से मिलने का भी अवसर मिलेगा, जिसने पीढ़ियों से दोनों देशों की मित्रता को मजबूत किया है।
मुझे विश्वास है कि यह यात्रा भारत-सेशेल्स संबंधों को और गहरा करेगी, हिंद महासागर में समुद्री सहयोग बढ़ाएगी और सुरक्षित, शांतिपूर्ण व समृद्ध हिंद महासागर क्षेत्र के साझा दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी।
मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था।
उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी। इस दौरे का सबसे बड़ा उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और समुद्री सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना था।
मोदी की इस यात्रा के दौरान भारत ने सेशेल्स को दूसरा डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान देने की घोषणा की, ताकि समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा मजबूत हो सके।
मोदी ने भारत की मदद से बने तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन किया। यह हिंद महासागर में जहाजों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने की भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा था।
उस समय चीन हिंद महासागर के द्वीपीय देशों में अपना प्रभाव बढ़ा रहा था। ऐसे में मोदी का दौरा भारत की ‘पड़ोसी पहले’ और हिंद महासागर में रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की नीति का अहम हिस्सा माना गया।
देश
Goldman Sachs की चेतावनी, खाने-पीने की चीजें हो सकती हैं महंगी
नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिकी निवेश बैंक Goldman Sachs ने नई रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में आने वाले समय में खाद्य महंगाई बढ़ सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, मौसम से जुड़े जोखिम, बढ़ती ऊर्जा लागत और महंगे उर्वरकों का असर खाद्य आपूर्ति पर पड़ सकता है, जिससे रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट में यह भी कहा है कि 2026 के अंत में मजबूत अल-नीनो (El Niño) मौसम पैटर्न आने की संभावना है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें बारिश का पैटर्न बिगड़ जाता है। कहीं ज्यादा बारिश होती है तो कहीं सूखा पड़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम प्रतिकूल रहा, तो चावल, सब्जियों और अन्य प्रमुख खाद्यान्न फसलों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उत्पादन में कमी आने से बाजार में आपूर्ति घट सकती है, जिससे खाद्य पदार्थों की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल और उर्वरकों की बढ़ती कीमतें किसानों की लागत बढ़ा रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे परिवहन और कृषि दोनों की लागत बढ़ रही है। इसका असर अंततः उपभोक्ताओं तक महंगे खाद्य उत्पादों के रूप में पहुंच सकता है।
किन देशों पर होगा ज्यादा असर?
Goldman Sachs के अनुसार, थाईलैंड, इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया जैसे देशों पर इसका प्रभाव अधिक देखने को मिल सकता है, क्योंकि ये देश पहले से ही खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव का सामना करते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि खाद्य महंगाई बढ़ती है, तो आम परिवारों के मासिक खर्च पर दबाव बढ़ सकता है। चावल, खाद्य तेल, सब्जियां और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित होने की संभावना है।
देश
महंगे होने से ठंडे पड़े AC, लेकिन आइसक्रीम और कोल्ड ड्रिंक्स की जमकर हुई बिक्री
मुंबई, एजेंसी। चालू वित्त वर्ष की जून तिमाही में गर्मी से जुड़े उत्पादों की मांग में मिला-जुला रुख देखने को मिला है। मौसम में आए बदलाव और महंगाई के दबाव के कारण एयर कंडीशनर (एसी) की बिक्री अपेक्षा से कमजोर रही है। वहीं ठंडे पेय, आइसक्रीम, डेयरी उत्पाद और अन्य ताजगी देने वाले उत्पादों की मांग मजबूत बनी रही। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि जून में कई हिस्सों में बेमौसम बारिश, आंधी और शाम के समय अपेक्षाकृत कम तापमान रहने से एसी की जरूरत कम महसूस हुई।

वहीं बढ़ती कीमतों के कारण उपभोक्ता महंगे एसी खरीदने के बजाय एयर कूलर और पंखों जैसे अपेक्षाकृत सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। गोदरेज एंटरप्राइजेज समूह के कारोबार प्रमुख और ईवीपी (उपकरण कारोबार) कमल नंदी ने कहा कि ठंडक प्रदान करने वाले उत्पादों की श्रेणी में मांग का रुख मिला-जुला रहा।

रेफ्रिजरेटर की मांग सामान्य और प्रीमियम दोनों वर्गों में मजबूत बनी हुई है जबकि मानसून के आगमन के साथ वॉशिंग मशीन की मांग भी बढ़ रही है। हालांकि उन्होंने कहा कि जून में पूरे देश खासकर उत्तर भारत में एसी की बिक्री में उल्लेखनीय गिरावट आई है। उनके अनुसार उद्योग स्तर पर एसी की बिक्री घटी है। इसकी बड़ी वजह मौसम में बदलाव है।

कई क्षेत्रों में आंधी-बारिश और रात के समय तापमान कम रहने से लोगों को एसी की जरूरत पहले जैसी नहीं रही। इसके अलावा महंगाई के चलते उपभोक्ता गैर-जरूरी खर्च टाल रहे हैं। नंदी ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई दौर की मूल्य वृद्धि के कारण एसी की कीमतें करीब 18 से 20 प्रतिशत तक बढ़ चुकी हैं।
इसी वजह से कई उपभोक्ता एसी की जगह एयर कूलर और पंखों को प्राथमिकता दे रहे हैं। एक प्रमुख एसी कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस बार गर्मी का मौसम उद्योग की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा विशेषकर जून का महीना कमजोर रहा। हालांकि चालू वर्ष में अब तक उद्योग के कारोबार के मूल्य में लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है जिसका मुख्य कारण प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी और ऊंची कीमतें हैं। इसके उलट पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों ने गर्मियों के दौरान मजबूत मांग दर्ज की।

कोका-कोला भारत और दक्षिण-पश्चिम एशिया के उपाध्यक्ष (ग्राहक विकास) अभिषेक गुप्ता ने कहा कि कंपनी को पूरे गर्मी के मौसम में अच्छी मांग मिल रही है। छोटे पैक, क्विक कॉमर्स और चलते-फिरते उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति से बिक्री को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि कंपनी अपने बॉटलिंग साझेदारों के साथ मिलकर ठंडे पेय की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कूलिंग ढांचे और वितरण नेटवर्क का विस्तार कर रही है।

डेयरी क्षेत्र में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने कहा कि जून तिमाही में कंपनी के ताजा डेयरी उत्पादों और आइसक्रीम कारोबार की बिक्री मात्रा में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि आइसक्रीम, दही, डेयरी पेय और मूल्यवर्धित डेयरी उत्पादों की मजबूत मांग ने इस वृद्धि को गति दी।

हैवमोर आइसक्रीम के प्रबंध निदेशक देबब्रत मुखर्जी ने कहा कि कोन, स्टिक और सिंगल-सर्व कप जैसे त्वरित उपभोग वाले उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। फटाफट सामान पहुंचाने वाले मंच और तत्काल उपभोग की बढ़ती प्रवृत्ति से इन उत्पादों की बिक्री को विशेष बल मिला है।
डीएस ग्रुप के कारोबार प्रमुख (मसाला) संदीप घोष ने कहा कि गर्मियों के दौरान रायता मसाला, छाछ मसाला, जलजीरा और काला नमक जैसे पारंपरिक उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। उन्होंने कहा कि यह रुझान दर्शाता है कि पारंपरिक भारतीय स्वाद और पेय आज भी ग्रामीण और शहरी, दोनों बाजारों में उपभोक्ताओं की पहली पसंद बने हुए हैं।
देश
निस्वार्थ सेवा का पर्याय बना कमलादेवी जनसेवा संस्थान, पर्यावरण संरक्षण से लेकर मानव सेवा तक निभा रहा अग्रणी भूमिका
बिना किसी चंदे के समाजहित में संचालित हो रहे सेवा कार्य, पर्यावरण, सड़क सुरक्षा, शिक्षा और जनजागरूकता के क्षेत्र में बना प्रेरणास्रोत
सुमन नेहरा
सीकर, राजस्थान। समाज सेवा को समर्पित कमलादेवी जनसेवा संस्थान (रजि.) आज राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर में निस्वार्थ जनसेवा का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। 11 नवंबर 2020 को संस्थापक अध्यक्ष डॉ. एस. के. फगेड़िया ने अपनी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती कमलादेवी की स्मृति में इस संस्थान की स्थापना की। संस्था राजस्थान सरकार के सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत होने के साथ-साथ भारत सरकार के नीति आयोग की दर्पण आईडी से भी मान्यता प्राप्त है।

संस्थान के अंतर्गत संचालित “कमूल – एक सहारा (KAMUL)” अभियान समाज के कमजोर, असहाय, मजबूर, उत्पीड़ित एवं लाचार वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने का सतत प्रयास कर रहा है। संस्था प्रत्येक वर्ष फरवरी माह में साधारण सभा आयोजित कर वर्षभर की सामाजिक गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करती है।

संस्थान द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकारी विद्यालयों एवं कार्यालयों में निःशुल्क पौधों का वितरण एवं पौधारोपण, भीषण गर्मी में पक्षियों और पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था, जरूरतमंदों को सर्दियों में कंबल वितरण, सड़क सुरक्षा अभियान के तहत वाहनों पर रेडियम स्टीकर लगाना तथा गोवंश की सुरक्षा के लिए रेडियम बेल्ट बांधने जैसे अनेक जनहितकारी कार्य नियमित रूप से किए जाते हैं।

इसके अतिरिक्त हाईवे पर अवैध कट बंद कराने, स्कूलों एवं कच्ची बस्तियों में बाल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने तथा पर्यावरण संरक्षण एवं सड़क सुरक्षा के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाकर संस्था समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश दे रही है। सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को पर्यावरण मित्र सम्मान, कम्मू राष्ट्र गौरव सम्मान एवं राष्ट्र रत्न कम्मू अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जाता है।
विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि संस्था अपने सभी सेवा कार्य पूर्णतः निःशुल्क एवं निस्वार्थ भाव से संचालित करती है। संस्था किसी भी व्यक्ति से चंदा या आर्थिक सहयोग नहीं लेती, बल्कि इसके 15 सदस्य स्वयं अपने संसाधनों से सेवा कार्यों का संचालन करते हैं।

मानव सेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए संस्थान को जिला, राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इनमें गांधी सेवा रत्न अवॉर्ड, राष्ट्र विभूति सम्मान, सरदार पटेल दिव्य रत्न अवॉर्ड, राष्ट्र गौरव सम्मान, वृक्ष मित्र सम्मान, अम्बेडकर कीर्ति सम्मान, पर्यावरण मित्र सम्मान एवं मां भारती सेवा सम्मान प्रमुख हैं।
संस्थान के प्रमुख पदाधिकारी:
संस्थापक अध्यक्ष: डॉ. एस. के. फगेड़िया
सचिव: सुमन नेहरा
कोषाध्यक्ष: विकास फगेड़िया
मीडिया प्रभारी: शैतानाराम जाखड़
कमलादेवी जनसेवा संस्थान अपनी सेवा, समर्पण और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से समाज के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है तथा जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर नई मिसाल कायम कर रहा है।
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