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छत्तीसगढ़

बीजेपीनेता की हत्या मामले में जांच करेगी एसआईटी

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कांकेर में दुकानें-यात्री बसें बंद, डिप्टी सीएम शर्मा बोले- कांग्रेसियों-नक्सलियों में मिलीभगत

कांकेर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के कांकेर में भाजपा नेता की हत्या मामले में डिप्टी ष्टरू विजय शर्मा ने कांग्रेसियों-नक्सलियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि वो कॉम्प्रोमाइज्ड रहे हैं। भाजपा की सरकार आने से नक्सली बौखलाए हुए हैं। पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष और भाजपा जिला उपाध्यक्ष असीम राय की रविवार रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके विरोध में सोमवार को कांकेर के ज्यादातर इलाके बंद है। इसके चलते सारी दुकानें और यात्री बसों का संचालन भी बंद है।

भाजपा पार्षद के होटल में तोडफ़ोड़

बांदे, पखांजूर, कापसी और बडग़ांव में भी बंद का असर देखने को मिला है। इससे पहले रविवार देर रात गुस्साए लोगों ने भाजपा पार्षद विकास पाल के होटल में तोडफ़ोड़ कर दी थी। आरोप है कि विकास पाल ने नगर पंचायत पखांजूर में अध्यक्ष बनाने के लिए कांग्रेस का साथ दिया था।

जांच के लिए एसआईटी का गठन

हत्या की जांच के लिए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया है। अफसरों के मुताबिक, रंजिश के चलते हत्या की आशंका है। फिलहाल अभी तक शव का अंतिम संस्कार नहीं किया गया है। कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप, संगठन मंत्री पवन साय और पूर्व वन मंत्री महेश गागड़ा पहुंचे हुए हैं।

घटनास्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज, संदिग्ध हिरासत में

पुलिस अधीक्षक दिव्यांग पटेल ने बताया कि घटना स्थल से मिले सीसीटीवी फुटेज व अन्य टेक्निकल जानकारी मिली है। संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। आठ साल पहले असीम राय पर आपसी रंजिश के चलते किए गए हमले के दोनों आरोपियों से भी पुलिस पूछताछ कर रही है।

जानें पूरा मामला

कांकेर के पखांजूर में पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष और बीजेपी नेता असीम राय की गोली मारकर हत्या कर दी गई। रविवार देर शाम करीब 8 बजे अज्ञात लोगों ने वारदात को अंजाम दिया। फायरिंग पखांजूर के पुराना बाजार में हुई। गोली लगने के बाद उन्हें अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। बताया जा रहा है कि रविवार रात 8 बजे असीम राय रोजाना की तरह पखांजूर थाना से महज कुछ दूर पहले स्कूटी से गढ़चिरौली मार्ग तिराहे से गुजर रहे थे, जहां रविवार को छोटा बाजार लगता है। इसी का फायदा उठाते हुए अज्ञात हमलावर बाइक से आए और फायरिंग कर दी।

आईजी बोले- मामले की जांच की जा रही

वहीं पखांजूर में बीजेपी नेता की हत्या को लेकर बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने कहा कि जांच के बाद ही कुछ स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है।

9 जनवरी को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग

पखांजूर नगर पंचायत में अभी कांग्रेस का कब्जा है। यहां कांग्रेस के बप्पा गांगुली अध्यक्ष हैं, जिनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया है। 9 जनवरी को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग भी होनी है। बीजेपी के पक्ष में 11 पार्षद हैं। कहा जा रहा है कि वोटिंग से पहले किसी ने टारगेट कर वारदात को अंजाम दिया है। बीजेपी के 8 पार्षद जीते थे और कांग्रेस के 7 पार्षद जीते थे, जिसमें से अध्यक्ष चुनाव में बीजेपी के 2 पार्षदों ने क्रॉस वोटिंग की थी, जिससे कांग्रेस ने अपना अध्यक्ष बना लिया था।

8 साल पहले भी आपसी रंजिश में हुआ था हमला

बताया जा रहा है असीम राय पर 8 साल पहले भी आपसी रंजिश में हमला किया गया था। वहीं अभी पखांजूर नगर पंचायत में अध्यक्ष पद को लेकर विवाद चल रहा है।

9 महीने में 9 नेताओं की हत्या

9 महीने में 9 बीजेपी नेताओं की हत्या हुई है। हालांकि अभी असीम राय की हत्या आपसी रंजिश में हुई या नक्सलियों ने की यह साफ नहीं हो पाया है। इससे पहले 8 नेताओं की नक्सलियों ने हत्या की थी। इनमें 3 नारायणपुर जिले से ही थे। 10 फरवरी को नारायणपुर के ही बीजेपी उपाध्यक्ष सागर साहू की हत्या की गई थी। एक महीने पहले छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सलियों ने बीजेपी नेता कोमल मांझी की गला रेत कर हत्या कर दी थी। बताया जा रहा है कि सुबह मंदिर से लौटते वक्त साधारण वेशभूषा में पहुंचे नक्सलियों ने कोमल मांझी को पकड़ लिया और गला रेत दिया।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : विशेष लेख : मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम

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’कम समय में घने जंगल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई दिशा’

  •   धनंजय राठौर ,  संयुक्त संचालक 
  •  अशोक कुमार चंद्रवंशी,  सहायक जनसंपर्क अधिकारी 
मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम

वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी तकनीक एक बेहद प्रभावी और लोकप्रिय विधि बन गई है। जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक केवल 2-3 वर्षों में बंजर भूमि को घने, आत्मनिर्भर सूक्ष्म वनों में बदल देती है। पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में यह विधि 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।
         छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। राज्य में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा इस तकनीक के जरिए शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा रही है। मियावकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में लगाया जाता है, जिससे मात्र 3 से 5 वर्षों में घना जंगल तैयार हो जाता है।

’राज्य में तेजी से बढ़ रहा सघन वनीकरण’
       छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 से मियावकी पद्धति के तहत लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है। वर्ष 2022 में कोटा मण्डल में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार पौधे तथा 0.3 हेक्टेयर में 7 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2023 में कोटा के भिल्मी क्षेत्र में 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधों का रोपण किया गया। वहीं गेवरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में कोटा के उच्चभट्टी क्षेत्र में 3.2 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इसके अलावा रायगढ़ मण्डल के तिलईपाली और छाल क्षेत्रों में कुल 3.75 हेक्टेयर भूमि पर 37 हजार 500 पौधों का सफल रोपण किया गया।
’वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जारी’
         वर्तमान में राज्य के कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य तेजी से जारी है। बारनवापारा मण्डल में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत 6 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। कोरबा और रायगढ़ क्षेत्रों में साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के सहयोग से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। वहीं विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत महानदीकोलफील्ड लिमिटेड द्वारा 1.9 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अरपा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरित क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।

’पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बहुआयामी लाभ’
         विशेषज्ञों के अनुसार मियावकी वन सामान्य जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह तकनीक वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, भू-जल स्तर सुधारने और मिट्टी संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन वनों की शुरुआती वर्षों में देखभाल की जाती है, जिसके बाद ये जंगल स्वतः विकसित होने लगते हैं। इससे रखरखाव की लागत कम होती है और लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ मिलता है। 
’बंजर डंप क्षेत्र से हरित जंगल बनने की ओर गेवरा की प्रेरक पहल’
          छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र के 12.45 हेक्टेयर डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।

’जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां तैयार हो रहा जंगल’
        कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है और ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष तथा अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पौधों का उगना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक पद्धति और सतत प्रयासों से इस बंजर भूमि को अब हरियाली में बदला जा रहा है।
’वैज्ञानिक तरीके से किया गया पौधारोपण’
         डंप क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग किया गया। जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए तथा 3 से 4 फीट ऊंचाई वाले स्वस्थ पौधों का रोपण किया गया। इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए भी उपयुक्त आवास बन सकेगा।
निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता
        शुरुआती 2-3 वर्षों की देखभाल के बाद, यह वन पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाता है और इसे किसी उर्वरक या पानी की आवश्यकता नहीं होती है। रोपण के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, खाद, निंदाई-गुड़ाई, घास कटाई और सुरक्षा का कार्य लगातार किया जा रहा है। मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2025 से 2029 तक पांच वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड गेवरा को सौंपा जाएगा।
’हरित भविष्य की ओर मजबूत पहल’
       कम जगह में घने जंगल बनाकर शहरों में प्रदूषण (धूल और ध्वनि) को कम करने में सहायक होते हैं। ये वन पारंपरिक वनों की तुलना में 30 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। गेवरा की यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर प्रयासों से बंजर और पत्थरीली भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र सघन हरित वन और जैव विविधता से भरपूर मानव निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।

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कोरबा

उद्यमिता विकास प्रशिक्षण हेतु 12 आवेदकों का चयन

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कोरबा। रायपुर में आयोजित होने वाले उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 23 अप्रैल 2026 तक इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं सारणीकरण किया गया, जिसके आधार पर कुल 12 आवेदकों का चयन किया गया है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 मई 2026 से प्रारम्भ होना सुनिश्चित है।चयनित आवेदकों की सूची इस प्रकार है-विकास कुमार, कौशलेंद्र सिंह, योगिता धाकड़े, विष्णु सिंह राठिया, आशुतोष मार्वल, अजय डहरिया, गौरव अग्रवाल, अमित कुमार चैहान, स्वप्निल पाटिल, राजकुमारी, वीरेंद्र कुमार तरुण, वंशिका सिंह सेंगर।

प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित आगे की जानकारी चयनित अभ्यर्थियों को समय-समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।

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कोरबा

सुरक्षित भविष्य कि ओर एक कदम – अपनी बेटी को दें सुरक्षा का उपहार

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कोरबा। बेटियों के उज्जवल भविष्य और स्वस्थ जीवन में कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। यह टीका विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुँह का कैंसर)  से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने जिले के सभी पात्र बालिकाओं, अभिभावकों एवं नागरिकों से अपील किया है कि वे पात्र बालिकाओं (जिन किशोरियों ने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो, लेकिन 15 वर्ष का जन्मदिन न मनाया हो ) का एचपीवी का टीकाकरण करावं। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित और डॉक्टर द्वारा प्रमाणित है। एचपीवी टीका राष्ट्रीय टीकाकरण के अंतर्गत मेडिकल कालेज संबद्ध जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में  निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

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