छत्तीसगढ़
पायलट ने भाजपा से घुसपैठियों पर 11 साल का हिसाब-मांगा:धमतरी में बोले- SIR प्रक्रिया में बेवजह मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे
धमतरी,एजेंसी। संविधान दिवस पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव सचिन पायलट धमतरी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भाजपा से पूछा कि उसने पिछले 11 सालों में कितने घुसपैठियों को देश से बाहर भेजा है, इसकी सूची जारी करे।
सचिन पायलट ने भाजपा पर घुसपैठियों के नाम पर लोगों को भयभीत करने का आरोप लगाया। उन्होंने भाजपा को चुनौती देते हुए कहा कि केंद्र में उनकी सरकार को 11 साल हो गए हैं, वे बताएं कि उन्होंने कितने बांग्लादेशियों को भारत से बाहर भेजा है।
उन्होंने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) मुद्दे पर भी बात की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा लोगों को भ्रमित कर रही है और बेवजह मतदाताओं के नाम सूची से काटे जा रहे हैं। SIR प्रक्रिया हमेशा लोकतंत्र में शुद्धिकरण और नए मतदाता जोड़ने की प्रक्रिया रही है।
लेकिन, अब यह आशंका का विषय बन गई है। यह प्रक्रिया बहुत जल्दबाजी में कराई जा रही है, यहां तक कि उन जगहों पर भी जहां चुनाव में अभी तीन साल बाकी हैं। इस प्रक्रिया को जटिल बनाकर कुछ हासिल करना चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी के सभी सदस्यों को इस पर डटे रहना होगा।

मीडिया से चर्चा करते हुए कही ये बातें
मीडिया से चर्चा करते हुए सचिन पायलट ने कहा कि संविधान दिवस के दिन सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि बाबा साहब अंबेडकर ने जो संविधान बनाया है, उसमें सभी को अधिकार दिए गए हैं। दबाव की राजनीति, टकराव की राजनीति और नफरत के लिए उसमें कोई जगह नहीं है।
दुर्भाग्य से देश में ऐसा माहौल बनाया जा रहा है, जहां द्वेष, टकराव और दुश्मनी की भावना बढ़ रही है तथा एजेंसियों का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, जो संविधान के बिल्कुल विपरीत है।

छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ ओपन स्कूल बोर्ड के रिजल्ट जारी:12वीं में 71% और 10वीं में 58.39% स्टूडेंट्स पास, दोनों कक्षाओं में लड़कियां आगे रहीं
रायपुर,एजेंसी। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बुधवार को छत्तीसगढ़ स्टेट ओपन स्कूल की ओर से आयोजित हाई स्कूल (10वीं) और हायर सेकेंडरी (12वीं) मुख्य परीक्षा मार्च-अप्रैल 2026 के परिणाम घोषित किए।
इस साल 12वीं का ओवरऑल रिजल्ट 71% रहा, जबकि 10वीं में 58.39% स्टूडेंट्स पास हुए। दोनों ही परीक्षाओं में छात्राओं ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए लड़कों से अधिक पास प्रतिशत दर्ज किया।
12वीं में लड़कियों का रिजल्ट 72.17% और लड़कों का 70.01% रहा। वहीं 10वीं में छात्राओं का पास प्रतिशत 59.82% और लड़कों का 57.43% दर्ज किया गया।

12वीं में कुल 40 हजार से ज्यादा ने कराया था रजिस्ट्रेशन
12वीं में कुल 40,256 स्टूडेंट्स ने परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 38,683 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें कुल 24,823 स्टूडेंट्स पास हुए और ओवरऑल पास प्रतिशत 71% दर्ज किया गया।
लड़कियों का रिजल्ट 72.17% रहा, जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 70.01% दर्ज हुआ। यानी लड़कियां 2.16% की बढ़त के साथ आगे रहीं।
40 हजार में से 38 हजार स्टूडेंट्स परीक्षा में बैठे
इस बार परीक्षा के लिए कुल 40,256 स्टूडेंट्स ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें 21,725 लड़के और 18,531 लड़कियां थीं। हालांकि 161 स्टूडेंट्स का परीक्षा फॉर्म निरस्त हो गया। इसके बाद 38,683 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए।
| वर्ग | लड़के | लड़कियां | कुल |
| रजिस्टर्ड | 21,725 | 18,531 | 40,256 |
| परीक्षा में शामिल | 20,851 | 17,832 | 38,683 |
| रिजल्ट घोषित | 19,002 | 15,959 | 34,961 |
24,823 स्टूडेंट्स पास, 9,594 ने हासिल की फर्स्ट डिवीजन
रिजल्ट में सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स ने फर्स्ट और सेकंड डिवीजन हासिल की। कुल 9,594 स्टूडेंट्स ने फर्स्ट डिवीजन प्राप्त की, जबकि 10,368 स्टूडेंट्स सेकंड डिवीजन से पास हुए।
| डिवीजन | संख्या |
| फर्स्ट डिवीजन | 9,594 |
| सेकंड डिवीजन | 10,368 |
| थर्ड डिवीजन | 4,738 |
| पास | 123 |
| कुल पास | 24,823 |
लड़कियां फर्स्ट डिवीजन में भी आगे
फर्स्ट डिवीजन हासिल करने वाले विद्यार्थियों में भी लड़कियों का प्रदर्शन मजबूत रहा। 4,756 लड़कियों ने फर्स्ट डिवीजन प्राप्त की, जबकि लड़कों की संख्या 4,838 रही। कुल परीक्षार्थियों की तुलना में लड़कियों का सफलता अनुपात ज्यादा दिखाई दिया।
वहीं सेकंड डिवीजन में 5,643 लड़के और 4,725 लड़कियां सफल रहीं। थर्ड डिवीजन में 2,748 लड़के और 1,990 लड़कियां शामिल रहीं।
3,682 विद्यार्थियों का रिजल्ट RTD
परीक्षा परिणाम में 3,682 विद्यार्थियों का रिजल्ट RTD श्रेणी में गया। इसमें लड़कों की संख्या 1,821 और लड़कियों की संख्या 1,861 रही। वहीं 40 विद्यार्थियों का रिजल्ट RWI/RWC/RWS श्रेणी में रखा गया
10वीं में भी लड़कियों ने मारी बाजी
12वीं की तरह 10वीं में भी इस बार लड़कियों ने रिजल्ट में बाजी मारी है। लड़कियों का पास प्रतिशत 59.82% रहा, जबकि लड़कों का रिजल्ट 57.43% दर्ज किया गया। यानी छात्राएं 2.39% की बढ़त के साथ आगे रहीं।
परीक्षा के लिए कुल 33,693 विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 31,852 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए। कुल 18,578 विद्यार्थी सफल घोषित किए गए। ओवरऑल रिजल्ट 58.39% रहा।
33 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों ने कराया था रजिस्ट्रेशन
इस बार परीक्षा के लिए 20,163 लड़कों और 13,530 लड़कियों सहित कुल 33,693 विद्यार्थियों ने आवेदन किया था। हालांकि 177 विद्यार्थियों का फॉर्म निरस्त हो गया। इसके बाद 31,852 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए।
| वर्ग | लड़के | लड़कियां | कुल |
| रजिस्टर्ड | 20,163 | 13,530 | 33,693 |
| परीक्षा में शामिल | 18,997 | 12,855 | 31,852 |
| रिजल्ट घोषित | 18,974 | 12,839 | 31,813 |
18,578 विद्यार्थी पास, सबसे ज्यादा सेकंड डिवीजन
इस बार सबसे ज्यादा विद्यार्थियों ने सेकंड डिवीजन हासिल की। कुल 7,700 विद्यार्थियों ने सेकंड डिवीजन प्राप्त की, जबकि 5,874 विद्यार्थियों ने फर्स्ट डिवीजन हासिल की।
| डिवीजन | संख्या |
| फर्स्ट डिवीजन | 5,874 |
| सेकंड डिवीजन | 7,700 |
| थर्ड डिवीजन | 4,947 |
| पास | 57 |
| कुल पास | 18,578 |
लड़कियां हर वर्ग में मजबूत प्रदर्शन में आगे
फर्स्ट डिवीजन में 3,404 लड़के और 2,470 लड़कियां सफल रहीं। वहीं सेकंड डिवीजन में 4,520 लड़के और 3,180 लड़कियां पास हुईं। थर्ड डिवीजन में 2,932 लड़के और 2,015 लड़कियां शामिल रहीं।
हालांकि संख्या में लड़के ज्यादा रहे, लेकिन कुल परीक्षार्थियों के अनुपात में लड़कियों का प्रदर्शन बेहतर रहा। यही वजह है कि उनका पास प्रतिशत लड़कों से अधिक दर्ज किया गया।
39 विद्यार्थियों का रिजल्ट रोका गया
रिजल्ट में 39 विद्यार्थियों को RWI/RWC/RWS श्रेणी में रखा गया है। इनमें 23 लड़के और 16 लड़कियां शामिल हैं। बोर्ड की ओर से इन मामलों की अलग से समीक्षा की जाएगी।
कोरबा
कोयला गैसीकरण को मिली नई गति : केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी
भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में भी संभावनाओं पर कार्य जारी
बिलासपुर/कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी प्रदान की है। यह योजना वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने तथा एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथेनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस योजना के अंतर्गत लगभग 75 मिलियन टन कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत नई परियोजनाओं को प्लांट एवं मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। परियोजनियों का चयन पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

केंद्र सरकार द्वारा कोयला गैसीकरण क्षेत्र में दी जा रही इस नई गति का प्रभाव देश की प्रमुख कोयला कंपनियों में भी दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा भी कोयला गैसीकरण की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। SECL के भटगांव क्षेत्र स्थित महामाया खदान में कोल गैसीफिकेशन की संभावनाओं का परीक्षण एवं अध्ययन किया जा रहा है। यह पहल भविष्य में कोयले के वैकल्पिक एवं स्वच्छ उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
कोयला गैसीकरण तकनीक के माध्यम से कोयले को ‘सिंथेसिस गैस’ (Syngas) में परिवर्तित किया जाता है, जिसका उपयोग उर्वरक, रसायन, ईंधन तथा अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है। इससे न केवल आयातित ईंधनों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश में वैल्यू एडिशन एवं औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
सरकार के अनुसार इस योजना से लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की संभावना है तथा लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। साथ ही कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।
भारत के पास लगभग 401 बिलियन टन कोयला एवं 47 बिलियन टन लिग्नाइट भंडार उपलब्ध हैं। ऐसे में कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत एवं ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल माना जा रहा है।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़-BJP बैठक की इनसाइड स्टोरी:शिवप्रकाश बोले- जीत के उत्साह में डूबिए मत, नेताओं से कहा- मीडिया में नहीं फील्ड पर एक्टिव रहे
रायपुर, एजेंसी। रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में 2 दिनों तक चली बीजेपी की मैराथन बैठकों में मंच पर जितनी औपचारिक बातें हुईं, उससे कहीं ज्यादा चर्चा बंद कमरों में हुई।
12 मई को प्रदेश पदाधिकारियों और कोर कमेटी की बैठक हुई, जबकि अगले दिन प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित की गई। नई प्रदेश कार्यकारिणी की यह पहली बैठक थी, इसलिए संगठन के अंदर इसे सिर्फ औपचारिक बैठक नहीं बल्कि नई दिशा तय करने वाली मीटिंग माना जा रहा था।

बैठक के दौरान सबसे ज्यादा जिस बयान की चर्चा रही, वह बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश का था। उन्होंने नेताओं और पदाधिकारियों को साफ कहा कि पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में मिले ‘विजय के उत्साह में डूब मत जाइए, अब संगठन को और ज्यादा मेहनत करनी है।’

संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने कार्यकर्ताओं से साफ कहा- विजय के उत्साह में डूब मत जाइए, मेहनत करिए।
बंगाल जीत के बाद छत्तीसगढ़ मॉडल पर फोकस
बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल चुनाव की जीत का जिक्र कई बार हुआ। नेताओं ने इसे संगठनात्मक मॉडल की सफलता बताया। चर्चा यह रही कि जिस तरह पश्चिम बंगाल में बूथ स्तर तक नेटवर्क मजबूत किया गया, उसी मॉडल को अब छत्तीसगढ़ में पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में लागू किया जाएगा।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कई जिलों से आए पदाधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए कि सिर्फ सोशल मीडिया और बयानबाजी से संगठन मजबूत नहीं होगा। बूथ स्तर पर नियमित संपर्क, कार्यकर्ता बैठक और फील्ड एक्टिविटी बढ़ानी होगी।
‘बंगाल की जीत, पार्टी विचारधारा की जीत’
संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने पश्चिम बंगाल की जीत को सिर्फ चुनावी सफलता नहीं बल्कि वैचारिक जीत बताया। कहा कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की कर्मभूमि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत पार्टी की विचारधारा की जीत है।
साथ ही उन्होंने असम समेत दूसरे राज्यों में मिली सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी विकसित भारत और समरस समाज के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है।

बीजेपी में दो दिनों तक लगातार बड़ी बैठकें चली।
नई कार्यकारिणी को पहला संदेश ‘संगठन चुनावी मोड में रहे’
बैठक में बार-बार एक ही बात दोहराई गई कि संगठन अब लगातार चुनावी मोड में रहेगा। लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी अब पंचायत और निकाय चुनावों पर पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं। यही वजह है कि प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में एक नया संगठनात्मक कैलेंडर तय किया गया।
इसके तहत हर महीने 4 स्तरों पर बैठकें होंगी। पहले हफ्ते में मंडल पदाधिकारी और कार्यसमिति की बैठक, दूसरे सप्ताह में जिले की बैठक, तीसरे सप्ताह में शक्ति केंद्र बैठक और चौथे सप्ताह में बूथ समिति की बैठक आयोजित की जाएगी और इसी दिन पीएम मोदी की मन की बात कार्यकर्ता एक साथ बैठकर करेंगे।।
पार्टी का मानना है कि लगातार समीक्षा और जमीनी फीडबैक के जरिए संगठन को एक्टिव रखा जा सकता है। बैठक में मौजूद नेताओं के मुताबिक, इस बार सिर्फ भाषण नहीं हुए, बल्कि हर स्तर के पदाधिकारियों को ‘माइक्रो मॉनिटरिंग’ का संदेश दिया गया।
बूथ स्तर तक रिपोर्टिंग, कार्यक्रमों की समीक्षा और राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी सीधे ऊपर तक पहुंचाने की व्यवस्था पर चर्चा हुई।
प्रदेश प्रभारी के बिना हुई बैठक
नई प्रदेश कार्यकारिणी, पदाधिकारी और कोर कमेटी की बैठक में पहली बार ऐसा हुआ जब प्रदेश प्रभारी मौजूद नहीं रहे। छत्तीसगढ़ बीजेपी के प्रभारी नितिन नबीन इस समय राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
20 जनवरी को उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद से यह चर्चा लगातार चल रही है कि छत्तीसगढ़ को जल्द नया प्रभारी मिल सकता है।
बैठक के दौरान भी कई नेताओं के बीच यही चर्चा रही कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद छत्तीसगढ़ संगठन में भी नए समीकरण दिखाई दे सकते हैं। पार्टी के अंदरखाने यह माना जा रहा है कि जून तक नए प्रभारी को लेकर तस्वीर साफ हो सकती है।

बैठक में नेताओं के लिए टारगेट तय किए गए।
कोर कमेटी में बदलाव ने बढ़ाई हलचल
2 दिनों की बैठकों में सबसे ज्यादा राजनीतिक चर्चा कोर कमेटी में हुए बदलाव को लेकर रही। बीजेपी की कोर कमेटी से कई बड़े और पुराने चेहरों को बाहर कर दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, पूर्व मंत्री पुत्रूलाल मोहले, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह, मंत्री रामविचार नेताम, विक्रम उसेंडी, रेणुका सिंह, बृजमोहन और गौरीशंकर अग्रवाल जैसे नेताओं को कमेटी से बाहर किया गया है।
वहीं नई सूची में वित्त मंत्री ओपी चौधरी, डिप्टी सीएम विजय शर्मा, अमर अग्रवाल, लता उसेंडी और शिवरतन शर्मा को जगह दी गई है।
हालांकि पार्टी इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन गलियारों में यही चर्चा रही कि बीजेपी अब धीरे-धीरे नई पीढ़ी और एक्टिव फील्ड नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी देने की रणनीति पर काम कर रही है।
बड़ी गाड़ियों के कारवां पर भी चर्चा
बैठक के दौरान एक और दिलचस्प चर्चा नेताओं के काफिलों को लेकर रही। पेट्रोल-डीजल बचाने और कारकेड कम करने को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार अपील करते रहे हैं। कई राज्यों में मंत्री और नेता अपने काफिले कम भी कर रहे हैं।
लेकिन बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बड़ी संख्या में वाहन पहुंचे। कई पदाधिकारी दो-दो और तीन-तीन गाड़ियों के साथ पहुंचे। पार्किंग से लेकर मुख्य गेट तक गाड़ियों की लंबी कतारें लगी रहीं।
हालांकि कुछ बीजेपी प्रवक्ता ई-रिक्शा से भी पहुंचे, जिसकी चर्चा पार्टी दफ्तर में होती रही। लेकिन कई नेताओं के बीच यह सवाल भी उठा कि जब डिजिटल दौर में अधिकांश बैठकें वर्चुअल हो सकती हैं, तब इतनी बड़ी संख्या में वाहनों के साथ बैठक आयोजित करना क्या जरूरी था?
सरकार और संगठन के बीच तालमेल पर जोर
बैठक के दौरान सरकार और संगठन के बीच तालमेल का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। पार्टी नेताओं ने कहा कि सरकार की योजनाओं और फैसलों को बूथ स्तर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी संगठन की होगी।
अंदरखाने क्या है सबसे बड़ा संदेश?
बैठकों के बाद बीजेपी के अंदर सबसे बड़ा संदेश यही माना जा रहा है कि पार्टी अब सिर्फ सत्ता चलाने के बजाय संगठन को लगातार एक्टिव रखने की रणनीति पर काम कर रही है।
शिवप्रकाश का ‘विजय के उत्साह में मत डूबिए’ वाला संदेश भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। बीजेपी नेतृत्व यह संकेत देना चाहता है कि बंगाल और दूसरे राज्यों की जीत के बाद भी संगठन को ढील नहीं दी जाएगी।
नई कार्यकारिणी की पहली बैठक में जिस तरह बूथ से लेकर प्रदेश स्तर तक हर महीने बैठकें तय की गईं, कोर कमेटी में बदलाव हुआ और पंचायत-निकाय चुनावों पर फोकस बढ़ाया गया, उससे साफ है कि बीजेपी ने अगले राजनीतिक चरण की तैयारी अभी से शुरू कर दी है।
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