कोरबा
बेटे की मौत पर अनिल अग्रवाल ने लिखा-वो मेरी दुनिया था
पटना,एजेंसी। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया है। उनकी उम्र केवल 49 साल थी। अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी जानकारी दी।
अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनके बेटे अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। उन्होंने अपने बेटे को एक खिलाड़ी, संगीतकार और लीडर बताया, जो अपनी गर्मजोशी, विनम्रता और दयालुता के लिए जाने जाते थे।
अग्रवाल ने X पर एक पोस्ट में लिखा- ‘आज मेरे जीवन का सबसे दुखद दिन है। मेरे प्यारे बेटे अग्निवेश ने हमें बहुत जल्द ही अलविदा कह दिया। मेरे लिए, वे सिर्फ मेरे बेटे नहीं थे, वे मेरे दोस्त थे, मेरा गौरव थे, मेरी दुनिया थे, परिवार इस क्षति से व्याकुल हैं। किरण और मैं टूट गए हैं।’
अनिल अग्रवाल ने बेटे के साथ तस्वीरें शेयर की हैं…

बेटे के निधन की जानकारी देते हुए अनिल अग्रवाल ने ये फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की।

फैमिली के साथ अनिल अग्रवाल और बेटे अग्निवेश अग्रवाल। (फोटो वेदांता ग्रुप के चेयरपर्सन ने सोशल मीडिया पर शेयर की।)
बिहार के पटना से निकलकर ग्लोबल बिजनेस मैन बनने वाले अनिल अग्रवाल आज वेदांता ग्रुप के चेयरमैन हैं। फोर्ब्स की जुलाई 2025 लिस्ट के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 35,000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। जिससे वे बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में वे 16वें स्थान पर हैं, जबकि एनआरआई वेल्थ क्रिएटर्स में चौथे स्थान पर हैं।
मेटल किंग के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल के परिवार की जड़ें राजस्थान में रही हैं। उनके पिता कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए थे। इससे पहले परिवार कुछ समय तक राजस्थान में रहा था। अनिल अग्रवाल का जन्म पटना में हुआ, पर उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर के चौमूं और सीकर में की। जानिए कैसे पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने लंदन तक का सफर पूरा किया। कैसे वो मेटल किंग बने…
पटना टु लंदन वाया मुंबई
अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना के मारवाड़ी परिवार में हुआ। सरकारी स्कूल में पढ़े। पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल एल्यूमीनियम कंडक्टर के छोटे कारोबारी थे। पिता के बिजनेस में हाथ बंटाया।
19 की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में मुंबई पहुंचे। वहां 9 बिजनेस किए, सभी फेल रहे। फिर वेदांता की स्थापना की।
वेदांता, जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। इसके फाउंडर अनिल अग्रवाल इंडिया के मेटल मैन के नाम से जाने जाते हैं। कंपनी का मार्केट कैप करीब 83 हजार करोड़ रुपए है।
हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘मैंने सोचा नहीं था कि साधारण आदमी होते हुए राष्ट्र निर्माण से योगदान दूंगा।’ मालूम हो, वेदांता ने 8 साल में 3.39 लाख करोड़ रुपए टैक्स का योगदान दिया है।
एक टिफिन बॉक्स-बिस्तर लेकर मुंबई गए
अनिल अग्रवाल चार भाई-बहन थे। पिता की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी। वे पटना में ही एक छोटी सी एल्युमिनियम कंडक्टर की दुकान चलाते थे।
अनिल की शुरुआती पढ़ाई पटना में ही हुई। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें पटना से बाहर जाना था, लेकिन उन्होंने तय किया कि वे पिता के बिजनेस में हाथ बटाएंगे। इसके बाद वे पिता के साथ काम करने लगे।
हालांकि कुछ सालों बाद अनिल का मन फिर से बाहर जाने का करने लगा। 19 साल की उम्र में वे पटना से मुंबई आ गए। साथ में था एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर। अनिल ने पिता को बिजनेस करते देखा था, इसलिए उन्हें नौकरी की दुनिया पसंद नहीं आई।

अनिल अग्रवाल पिता के साथ बैठे हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में अनिल ने लिखा था कि इतनी व्यस्तता के बावजूद हर दिन वे पिता से बात करते थे।
छोटे-छोटे धंधे में हाथ आजमाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली
मुंबई आने के बाद कुछ सालों तक अनिल अग्रवाल अलग-अलग धंधे में हाथ आजमाते रहे। कुछ समय तक स्क्रैप का भी बिजनेस किया।
कैंब्रिज में एक बार बोलते हुए उन्होंने बताया था कि मेरे शुरुआती 30 साल संघर्ष में बीते। सालों तक डिप्रेशन में रहा। उसके बाद मुंबई में एक घर लिया। फिर पत्नी और बेटे को भी बुला लिया।
कैंब्रिज में स्पीच के दौरान अनिल ने पत्नी की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने उस छोटे से मकान को घर बना दिया।
एक बार सोशल मीडिया पर अनिल ने बताया था ‘मैंने बहुत उम्मीदों से पहली कंपनी खरीदी, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। दस साल बहुत मुश्किल हालात में गुजरे।
इसके बाद 1976 में शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी। तब मेरे पास वर्कर्स को सैलरी देने और रॉ मटेरियल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे।
दिन-दिनभर मैं पेमेंट क्लियर कराने के लिए बैंकों के चक्कर काटता था। इसके बाद मैंने अलग-अलग फील्ड में 9 बिजनेस शुरू किए। हर बिजनेस में असफलता मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।’

पत्नी किरण के साथ अनिल अग्रवाल। अनिल अपनी कामयाबी के लिए पत्नी को क्रेडिट देते हैं।
1976 में शुरू की वेदांता रिसोर्सेज
इसके बाद 1976 में अनिल ने एक नई कंपनी शुरू की और नाम रखा वेदांता रिसोर्सेज। शुरुआत में ही इस बिजनेस में उन्हें फायदा होने लगा। इस प्रॉफिट का उन्होंने दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करने में इस्तेमाल किया।
1993 में उन्होंने औरंगाबाद में एल्युमिनियम शीट्स और फॉइल्स बनाने का प्लांट लगाया। इसके साथ ही यह भारत की पहली कॉपर रिफाइनरी प्राइवेट कंपनी बन गई।
सरकार के एक फैसले ने अनिल अग्रवाल को भारत का ‘मेटल किंग’ बना दिया
2001 में भारत सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी का ऑफर दिया। तब वेदांता रिसोर्सेज ने भारत एल्युमिनियम कंपनी में 51% शेयर खरीद लिए। यह सौदा 551.50 करोड़ रुपए में हुआ।
अगले ही साल वेदांता ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में 65% हिस्सेदारी खरीद ली। इस तरह वेदांता रिसोर्सेज दो पब्लिक सेक्टर कंपनियों में आधे से ज्यादा शेयर की हिस्सेदार बन गई। कहा जाता है कि जब इन दोनों कंपनियों में वेदांता ने हिस्सेदारी खरीदी तब इनकी हालत अच्छी नहीं थी।
दोनों ही माइनिंग कंपनियां थीं। वेदांता का भी इसी सेक्टर में बिजनेस था। ऐसे में, अनिल अग्रवाल के इस फैसले से वेदांता को खूब फायदा हुआ। यहीं से मेटल प्रोडक्शन सेक्टर में अनिल अग्रवाल स्थापित हो गए। उन्हें भारत का ‘मेटल मैन’ कहा जाने लगा।
पहली भारतीय फर्म जो लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई
2001 में वेदांता की सिस्टर कंपनी स्टरलाइड इंडस्ट्रीज, ब्रोकर हर्षद मेहता के साथ शेयर प्राइज के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में फंस गई। इसमें BPL और विडियोकॉन जैसी कंपनियां भी शामिल थीं।
शेयर बाजार में नियम-कानूनों को देखने वाली संस्था सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI ने तब स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को कैपिटल मार्केट में बैन कर दिया।
2003 में अनिल अग्रवाल लंदन चले गए। यहां कंपनी को नए नाम वेदांता रिसोर्सेज नाम से खड़ा किया। इसी साल उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया।
यह पहली बार था जब कोई भारतीय कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। इसके बाद दूसरी और भी भारतीय कंपनियां लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुईं। अनिल अग्रवाल को ऑफरिंग से करीब 7 हजार करोड़ रुपए का फायदा भी हुआ।
अब जानिए अनिल अग्रवाल की फैमिली को
अनिल अग्रवाल अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी किरण अग्रवाल को देते हैं। उन्होंने न केवल पारिवारिक मोर्चे पर सहयोग दिया, बल्कि वेदांता समूह की सामाजिक कामों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।
अनिल अग्रवाल के दो बच्चे थे जिसमें बेटे अग्निवेश अग्रवाल ने 49 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। बेटी प्रिया अग्रवाल है।
अग्निवेश अग्रवाल वेदांता ग्रुप की इकाई तलवंडी साबो पावर लिमिटेड में बोर्ड सदस्य थे। वहीं, प्रिया अग्रवाल वेदांता के बोर्ड में शामिल हैं। साथ ही वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं।
अनिल अग्रवाल के इकलौते बेटे थे अग्निवेश
अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार से आने वाले अग्निवेश ने जीवन में खेल, संगीत और नेतृत्व के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
उन्होंने मेयो कॉलेज, अजमेर से पढ़ाई की, इसके बाद फुजैराह गोल्ड की स्थापना की और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। अपने पेशेवर योगदान के साथ-साथ वे सरल, संवेदनशील और मानवीय स्वभाव के लिए जाने जाते थे।
पूजा बांगुर से अग्निवेश की शादी हुई थी
अग्निवेश की शादी पूजा बांगुर से हुई थी। पूजा बांगुर श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक हरि मोहन बंगुर की बेटी हैं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दो कारोबारी घराने के बच्चों की ये शादी उस जमाने की सबसे महंगी शादियों में शुमार हुई थी।
पूजा ने अग्निवेश अग्रवाल से गोवा के फोर्ट अगुआडा रिसॉर्ट के एक निजी समुद्र तट पर शादी की थी। दोनों की शादी में मुंबई और कोलकाता से जेट एयरवेज के चार्टर्ड विमान से 600 से अधिक मेहमान आए थे।
अग्निवेश अग्रवाल का करियर
अग्निवेश ने वेदांता समूह और उससे जुड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे हिंदुस्तान जिंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे और 2019 में उन्होंने यह पद छोड़ दिया था। इसके अलावा, उन्होंने वेदांता द्वारा समर्थित कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) में निदेशक मंडल के अध्यक्ष के रूप में काम किया।
साथ ही यूएई में स्थित एक बहुमूल्य धातु शोधन कंपनी, फुजैराह गोल्ड एफजेडसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक की भी जिम्मेदारी निभाई थी। इसके अलावा वे ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और स्टेरलाइट डिस्प्ले टेक्नोलॉजीज सहित समूह की अन्य सहायक कंपनियों में निदेशक पद संभाले।
2013 में बैंकर आकर्ष से हुई बहन प्रिया की शादी
अग्निवेश की बहन प्रिया अग्रवाल हेब्बर की शादी 2013 से बैंकर आकर्ष हेब्बर से हुई थी। उनकी एक बेटी माही है। उन्होंने ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान और व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। प्रिया वेदांता लिमिटेड में ईएसजी, निवेशक संबंध, कॉर्पोरेट संचार, मानव संसाधन, डिजिटल और सामाजिक प्रभाव विभागों का संचालन करती हैं।

कोरबा
मौत के 3 दिन बाद खोदी गई नवविवाहिता की कब्र:मायके वाले बोले-पति ने अफेयर के शक में मार-डाला, हसबैंड ने कहा-बीमारी से गई जान
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में मौत के 3 दिन बाद ही नवविवाहिता की कब्र खोदकर लाश निकाली गई है। मायके पक्ष ने बेटी की हत्या करने और पति पर अफेयर के शक को लेकर अक्सर मारपीट करने का आरोप लगाया। इसकी लिखित शिकायत पुलिस से की गई।

जिसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शव को कब्र से बाहर निकाला गया। हालांकि, पति का कहना है कि, पत्नी की बीमारी से मौत हुई है। अब पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असल वजह सामने आ पाएगी। घटना श्यांग थाना क्षेत्र के छिरहुट गांव की है।
3 साल पहले हुई थी शादी
जानकारी के अनुसार, रायगढ़ जिले के ग्राम कुमा निवासी घूरई बाई (23) की शादी 3 साल पहले कोरबा जिले के छिरहुट गांव के दिलीप बैगा से हुई थी। दंपती का डेढ़ साल का एक बच्चा भी है। परिजनों के अनुसार, 16 जून को घूरई की मौत हो गई थी, जिसके बाद 17 जून को बिना पोस्टमॉर्टम कराए शव को दफना दिया गया था।
मायके वालों ने जताई हत्या की आशंका
मृतका के मायके पक्ष का आरोप है कि, पति दिलीप बैगा कैरेक्टर पर शक को लेकर अक्सर पत्नी से विवाद करता था। परिजनों को मौत की सूचना मिलने के बाद शक हुआ और उन्होंने पति पर हत्या कर शव दफनाने का आरोप लगाया। इसके बाद उन्होंने श्यांग थाने में शिकायत की और शव निकालकर जांच करने की मांग की।
पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में हुई कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया। 19 जून को एसडीओपी, थाना प्रभारी, सीन ऑफ क्राइम टीम और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कब्र की खुदाई कराई गई। शव को बाहर निकालकर पंचनामा किया गया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे।
पति ने कहा- बीमारी से हुई मौत
पति दिलीप बैगा ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उसका कहना है कि पत्नी की तबीयत अचानक खराब हुई थी और बीमारी के कारण उसकी मौत हुई। उसने हत्या के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है।
डेढ़ साल के बच्चे को लेकर भी चिंता
घटना के बाद गांव में दंपती के डेढ़ साल के बच्चे की परवरिश को लेकर भी चर्चा है। मायके पक्ष का कहना है कि, यदि जांच में हत्या की पुष्टि होती है, तो बच्चे को न्याय मिलना चाहिए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का कहना है कि, श्यांग पुलिस ने मृतका के परिजनों के बयान दर्ज कर मर्ग कायम कर लिया है। पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कोरबा
तेज रफ्तार बाइक ठेले से टकराई:निगमकर्मी की मौके पर मौत, पुलिस जांच में जुटी
कोरबा। कोरबा के बुधवारी बाईपास मार्ग पर शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे हुए भीषण सड़क हादसे में एक बाइक सवार की मौके पर ही मौत हो गई। तेज रफ्तार बाइक सड़क पर जा रहे एक ठेले से टकरा गई। हादसे का लाइव वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है।

मृतक की पहचान सुनील गुप्ता (35) के रूप में हुई है। वह बालको क्षेत्र के निवासी थे और नगर निगम में कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, नो एंट्री खुलने के बाद बुधवारी बाईपास मार्ग पर भारी वाहनों और दोपहिया वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है।
ठेले के पीछे जा भिड़ी बाइक

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुनील गुप्ता टीपी नगर की ओर से बाइक पर आ रहे थे। इसी दौरान बुधवारी की ओर जा रहे ठेला चालक कृष्णा कुमार के ठेले से उनकी बाइक पीछे से टकरा गई।
ठेला चालक ने पुलिस को बताया कि बाइक की रफ्तार काफी तेज थी। उसके अनुसार, चालक ने ब्रेक लगाने का प्रयास भी नहीं किया और सीधे ठेले के पिछले हिस्से से जा भिड़ा।
सिर में गंभीर चोट, मौके पर मौत
टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार सुनील गुप्ता के सिर में गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। दुर्घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा भेज दिया गया।
हादसे का वीडियो वायरल
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में बाइक और ठेले की टक्कर के बाद की स्थिति दिखाई दे रही है। हालांकि पुलिस ने लोगों से दुर्घटना से जुड़े वीडियो और अफवाहों को बिना पुष्टि के साझा नहीं करने की अपील की है।
पुलिस ने शुरू की जांच
हादसे की सूचना मिलते ही मानिकपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने क्षतिग्रस्त बाइक को हटाकर यातायात बहाल कराया और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई की।
मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है तथा दुर्घटना के कारणों की पड़ताल की जा रही है।

मानिकपुर चौकी पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची।
सड़क सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि बुधवारी बाईपास मार्ग पर नो एंट्री खुलने के बाद भारी वाहनों और तेज रफ्तार दोपहिया वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है। इससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है। लोगों ने प्रशासन से इस मार्ग पर यातायात नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
कोरबा
कोरबा में सर्पदंश से महिला की मौत:सिविल लाइन थाने में भी निकला सांप, थाना प्रभारी के चेंबर से हुआ रेस्क्यू
कोरबा। कोरबा जिले में मौसम बदलने और बारिश की शुरुआत के साथ ही सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। शनिवार को पसान गांव में एक 38 वर्षीय महिला की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई। वहीं सिविल लाइन थाना परिसर में थाना प्रभारी के चेंबर में सांप निकलने से पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। दोनों घटनाओं के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, पसान गांव निवासी भीमकुंवर (38) शनिवार सुबह अपने घर में साफ-सफाई कर रही थीं। इसी दौरान जमीन में छिपे एक जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया। महिला की चीख सुनकर परिजन मौके पर पहुंचे और सांप को मार दिया।

इसी सांप के काटने से महिला की मौत हो गई
घर की सफाई के दौरान सांप ने डसा
महिला के पति चैन सिंह गोड ने बताया कि सर्पदंश के तुरंत बाद भीमकुंवर को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा रेफर कर दिया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
परिजनों के अनुसार, मृतका अपने पीछे पति और दो बेटियों को छोड़ गई हैं। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।

थाना प्रभारी के चेंबर में मिला सांप
इसी बीच दूसरी घटना सिविल लाइन थाना में सामने आई। थाना प्रभारी आस्था वर्मा के चेंबर में एक सांप कुंडली मारकर बैठा मिला। सांप को देखते ही थाने में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिसकर्मियों ने तत्काल स्नेक कैचर टीम को सूचना दी। सूचना मिलने पर स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी मौके पर पहुंचे और सुरक्षित तरीके से सांप का रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ दिया।
मौसम बदलने से बढ़ा खतरा
स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी ने बताया कि बारिश और मौसम में बदलाव के कारण सांप अपने बिलों से बाहर निकल रहे हैं। खेतों, घरों और सरकारी कार्यालयों में भी सांपों के निकलने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि बरसात के मौसम में घर की साफ-सफाई करते समय विशेष सावधानी बरतें। झाड़ियों, अंधेरे स्थानों और गड्ढों में हाथ डालने से पहले जांच कर लें। यदि कहीं सांप दिखाई दे तो उसे मारने का प्रयास न करें, बल्कि तुरंत रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना दें।

सावधानी ही बचाव
विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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