Connect with us

कोरबा

बेटे की मौत पर अनिल अग्रवाल ने लिखा-वो मेरी दुनिया था

Published

on

पटना,एजेंसी। वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के बेटे अग्निवेश का निधन हो गया है। उनकी उम्र केवल 49 साल थी। अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पोस्ट में इसकी जानकारी दी।

अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनके बेटे अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। उन्होंने अपने बेटे को एक खिलाड़ी, संगीतकार और लीडर बताया, जो अपनी गर्मजोशी, विनम्रता और दयालुता के लिए जाने जाते थे।

अग्रवाल ने X पर एक पोस्ट में लिखा- ‘आज मेरे जीवन का सबसे दुखद दिन है। मेरे प्यारे बेटे अग्निवेश ने हमें बहुत जल्द ही अलविदा कह दिया। मेरे लिए, वे सिर्फ मेरे बेटे नहीं थे, वे मेरे दोस्त थे, मेरा गौरव थे, मेरी दुनिया थे, परिवार इस क्षति से व्याकुल हैं। किरण और मैं टूट गए हैं।’

अनिल अग्रवाल ने बेटे के साथ तस्वीरें शेयर की हैं…

बेटे के निधन की जानकारी देते हुए अनिल अग्रवाल ने ये फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की।

बेटे के निधन की जानकारी देते हुए अनिल अग्रवाल ने ये फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की।

फैमिली के साथ अनिल अग्रवाल और बेटे अग्निवेश अग्रवाल। (फोटो वेदांता ग्रुप के चेयरपर्सन ने सोशल मीडिया पर शेयर की।)

फैमिली के साथ अनिल अग्रवाल और बेटे अग्निवेश अग्रवाल। (फोटो वेदांता ग्रुप के चेयरपर्सन ने सोशल मीडिया पर शेयर की।)

बिहार के पटना से निकलकर ग्लोबल बिजनेस मैन बनने वाले अनिल अग्रवाल आज वेदांता ग्रुप के चेयरमैन हैं। फोर्ब्स की जुलाई 2025 लिस्ट के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 35,000 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। जिससे वे बिहार के सबसे अमीर व्यक्ति बन गए हैं। हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2025 में वे 16वें स्थान पर हैं, जबकि एनआरआई वेल्थ क्रिएटर्स में चौथे स्थान पर हैं।

मेटल किंग के नाम से मशहूर अनिल अग्रवाल के परिवार की जड़ें राजस्थान में रही हैं। उनके पिता कारोबार के सिलसिले में बिहार चले गए थे। इससे पहले परिवार कुछ समय तक राजस्थान में रहा था। अनिल अग्रवाल का जन्म पटना में हुआ, पर उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर के चौमूं और सीकर में की। जानिए कैसे पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने लंदन तक का सफर पूरा किया। कैसे वो मेटल किंग बने…

पटना टु लंदन वाया मुंबई

अनिल अग्रवाल का जन्म 1954 में पटना के मारवाड़ी परिवार में हुआ। सरकारी स्कूल में पढ़े। पिता द्वारका प्रसाद अग्रवाल एल्यूमीनियम कंडक्टर के छोटे कारोबारी थे। पिता के बिजनेस में हाथ बंटाया।

19 की उम्र में बेहतर भविष्य की तलाश में मुंबई पहुंचे। वहां 9 बिजनेस किए, सभी फेल रहे। फिर वेदांता की स्थापना की।

वेदांता, जिंक, लेड, एल्युमिनियम और सिल्वर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है। इसके फाउंडर अनिल अग्रवाल इंडिया के मेटल मैन के नाम से जाने जाते हैं। कंपनी का मार्केट कैप करीब 83 हजार करोड़ रुपए है।

हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, ‘मैंने सोचा नहीं था कि साधारण आदमी होते हुए राष्ट्र निर्माण से योगदान दूंगा।’ मालूम हो, वेदांता ने 8 साल में 3.39 लाख करोड़ रुपए टैक्स का योगदान दिया है।

एक टिफिन बॉक्स-बिस्तर लेकर मुंबई गए

अनिल अग्रवाल चार भाई-बहन थे। पिता की आमदनी बहुत ज्यादा नहीं थी। वे पटना में ही एक छोटी सी एल्युमिनियम कंडक्टर की दुकान चलाते थे।

अनिल की शुरुआती पढ़ाई पटना में ही हुई। इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें पटना से बाहर जाना था, लेकिन उन्होंने तय किया कि वे पिता के बिजनेस में हाथ बटाएंगे। इसके बाद वे पिता के साथ काम करने लगे।

हालांकि कुछ सालों बाद अनिल का मन फिर से बाहर जाने का करने लगा। 19 साल की उम्र में वे पटना से मुंबई आ गए। साथ में था एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर। अनिल ने पिता को बिजनेस करते देखा था, इसलिए उन्हें नौकरी की दुनिया पसंद नहीं आई।

अनिल अग्रवाल पिता के साथ बैठे हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में अनिल ने लिखा था कि इतनी व्यस्तता के बावजूद हर दिन वे पिता से बात करते थे।

अनिल अग्रवाल पिता के साथ बैठे हैं। एक सोशल मीडिया पोस्ट में अनिल ने लिखा था कि इतनी व्यस्तता के बावजूद हर दिन वे पिता से बात करते थे।

छोटे-छोटे धंधे में हाथ आजमाया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली

मुंबई आने के बाद कुछ सालों तक अनिल अग्रवाल अलग-अलग धंधे में हाथ आजमाते रहे। कुछ समय तक स्क्रैप का भी बिजनेस किया।

कैंब्रिज में एक बार बोलते हुए उन्होंने बताया था कि मेरे शुरुआती 30 साल संघर्ष में बीते। सालों तक डिप्रेशन में रहा। उसके बाद मुंबई में एक घर लिया। फिर पत्नी और बेटे को भी बुला लिया।

कैंब्रिज में स्पीच के दौरान अनिल ने पत्नी की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्होंने उस छोटे से मकान को घर बना दिया।

एक बार सोशल मीडिया पर अनिल ने बताया था ‘मैंने बहुत उम्मीदों से पहली कंपनी खरीदी, लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ। दस साल बहुत मुश्किल हालात में गुजरे।

इसके बाद 1976 में शमशेर स्टर्लिंग केबल कंपनी खरीदी। तब मेरे पास वर्कर्स को सैलरी देने और रॉ मटेरियल खरीदने के लिए पैसे नहीं थे।

दिन-दिनभर मैं पेमेंट क्लियर कराने के लिए बैंकों के चक्कर काटता था। इसके बाद मैंने अलग-अलग फील्ड में 9 बिजनेस शुरू किए। हर बिजनेस में असफलता मिली, लेकिन मैंने हार नहीं मानी।’

पत्नी किरण के साथ अनिल अग्रवाल। अनिल अपनी कामयाबी के लिए पत्नी को क्रेडिट देते हैं।

पत्नी किरण के साथ अनिल अग्रवाल। अनिल अपनी कामयाबी के लिए पत्नी को क्रेडिट देते हैं।

1976 में शुरू की वेदांता रिसोर्सेज

इसके बाद 1976 में अनिल ने एक नई कंपनी शुरू की और नाम रखा वेदांता रिसोर्सेज। शुरुआत में ही इस बिजनेस में उन्हें फायदा होने लगा। इस प्रॉफिट का उन्होंने दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करने में इस्तेमाल किया।

1993 में उन्होंने औरंगाबाद में एल्युमिनियम शीट्स और फॉइल्स बनाने का प्लांट लगाया। इसके साथ ही यह भारत की पहली कॉपर रिफाइनरी प्राइवेट कंपनी बन गई।

सरकार के एक फैसले ने अनिल अग्रवाल को भारत का ‘मेटल किंग’ बना दिया

2001 में भारत सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी का ऑफर दिया। तब वेदांता रिसोर्सेज ने भारत एल्युमिनियम कंपनी में 51% शेयर खरीद लिए। यह सौदा 551.50 करोड़ रुपए में हुआ।

अगले ही साल वेदांता ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में 65% हिस्सेदारी खरीद ली। इस तरह वेदांता रिसोर्सेज दो पब्लिक सेक्टर कंपनियों में आधे से ज्यादा शेयर की हिस्सेदार बन गई। कहा जाता है कि जब इन दोनों कंपनियों में वेदांता ने हिस्सेदारी खरीदी तब इनकी हालत अच्छी नहीं थी।

दोनों ही माइनिंग कंपनियां थीं। वेदांता का भी इसी सेक्टर में बिजनेस था। ऐसे में, अनिल अग्रवाल के इस फैसले से वेदांता को खूब फायदा हुआ। यहीं से मेटल प्रोडक्शन सेक्टर में अनिल अग्रवाल स्थापित हो गए। उन्हें भारत का ‘मेटल मैन’ कहा जाने लगा।

पहली भारतीय फर्म जो लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई

2001 में वेदांता की सिस्टर कंपनी स्टरलाइड इंडस्ट्रीज, ब्रोकर हर्षद मेहता के साथ शेयर प्राइज के साथ छेड़छाड़ करने के मामले में फंस गई। इसमें BPL और विडियोकॉन जैसी कंपनियां भी शामिल थीं।

शेयर बाजार में नियम-कानूनों को देखने वाली संस्था सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI ने तब स्टरलाइट इंडस्ट्रीज को कैपिटल मार्केट में बैन कर दिया।

2003 में अनिल अग्रवाल लंदन चले गए। यहां कंपनी को नए नाम वेदांता रिसोर्सेज नाम से खड़ा किया। इसी साल उन्होंने वेदांता रिसोर्सेज को लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट किया।

यह पहली बार था जब कोई भारतीय कंपनी लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुई थी। इसके बाद दूसरी और भी भारतीय कंपनियां लंदन स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हुईं। अनिल अग्रवाल को ऑफरिंग से करीब 7 हजार करोड़ रुपए का फायदा भी हुआ।

अब जानिए अनिल अग्रवाल की फैमिली को

अनिल अग्रवाल अपनी सफलता का श्रेय अपनी पत्नी किरण अग्रवाल को देते हैं। उन्होंने न केवल पारिवारिक मोर्चे पर सहयोग दिया, बल्कि वेदांता समूह की सामाजिक कामों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है।

अनिल अग्रवाल के दो बच्चे थे जिसमें बेटे अग्निवेश अग्रवाल ने 49 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। बेटी प्रिया अग्रवाल है।

अग्निवेश अग्रवाल वेदांता ग्रुप की इकाई तलवंडी साबो पावर लिमिटेड में बोर्ड सदस्य थे। वहीं, प्रिया अग्रवाल वेदांता के बोर्ड में शामिल हैं। साथ ही वे हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं।

अनिल अग्रवाल के इकलौते बेटे थे अग्निवेश

अग्निवेश का जन्म 3 जून 1976 को पटना में हुआ था। एक मध्यमवर्गीय बिहारी परिवार से आने वाले अग्निवेश ने जीवन में खेल, संगीत और नेतृत्व के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।

उन्होंने मेयो कॉलेज, अजमेर से पढ़ाई की, इसके बाद फुजैराह गोल्ड की स्थापना की और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। अपने पेशेवर योगदान के साथ-साथ वे सरल, संवेदनशील और मानवीय स्वभाव के लिए जाने जाते थे।

पूजा बांगुर से अग्निवेश की शादी हुई थी

अग्निवेश की शादी पूजा बांगुर से हुई थी। पूजा बांगुर श्री सीमेंट के प्रबंध निदेशक हरि मोहन बंगुर की बेटी हैं। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दो कारोबारी घराने के बच्चों की ये शादी उस जमाने की सबसे महंगी शादियों में शुमार हुई थी।

पूजा ने अग्निवेश अग्रवाल से गोवा के फोर्ट अगुआडा रिसॉर्ट के एक निजी समुद्र तट पर शादी की थी। दोनों की शादी में मुंबई और कोलकाता से जेट एयरवेज के चार्टर्ड विमान से 600 से अधिक मेहमान आए थे।

अग्निवेश अग्रवाल का करियर

अग्निवेश ने वेदांता समूह और उससे जुड़ी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। वे हिंदुस्तान जिंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे और 2019 में उन्होंने यह पद छोड़ दिया था। इसके अलावा, उन्होंने वेदांता द्वारा समर्थित कंपनी तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) में निदेशक मंडल के अध्यक्ष के रूप में काम किया।

साथ ही यूएई में स्थित एक बहुमूल्य धातु शोधन कंपनी, फुजैराह गोल्ड एफजेडसी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक की भी जिम्मेदारी निभाई थी। इसके अलावा वे ट्विन स्टार इंटरनेशनल लिमिटेड और स्टेरलाइट डिस्प्ले टेक्नोलॉजीज सहित समूह की अन्य सहायक कंपनियों में निदेशक पद संभाले।

2013 में बैंकर आकर्ष से हुई बहन प्रिया की शादी

अग्निवेश की बहन प्रिया अग्रवाल हेब्बर की शादी 2013 से बैंकर आकर्ष हेब्बर से हुई थी। उनकी एक बेटी माही है। उन्होंने ब्रिटेन के वारविक विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान और व्यवसाय प्रबंधन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। प्रिया वेदांता लिमिटेड में ईएसजी, निवेशक संबंध, कॉर्पोरेट संचार, मानव संसाधन, डिजिटल और सामाजिक प्रभाव विभागों का संचालन करती हैं।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कोरबा

चित्रा टॉकीज प्रांगण में बिखरेंगे रंग, गोपाल मोदी के संग होली का उमंग

Published

on

रंगों के पावन पर्व पर होली की भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने जिलेवासियों को दी शुभकामनाएं

कोरबा। रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी द्वारा 4 मार्च 2026, बुधवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम चित्रा टॉकीज प्रांगण, कोरबा में प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होगा।इस आयोजन का उद्देश्य रंगों के इस पावन पर्व पर समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द, भाईचारे और एकता का संदेश देना है। समारोह में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं शहरवासी शामिल होंगे। इस होली मिलन समारोह में उपस्थितजन एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देंगे तथा आपसी समरसता का संदेश प्रसारित करेंगे।

भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने दी होली की शुभकामनाएं

रंगों के पावन पर्व होली के इस खास अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने जिलेवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमें पुराने मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कह कि रंगों का यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।

Continue Reading

कोरबा

होली खेलें पर जरा संभलकर, त्वचा और बालों का रखें खास ध्यान- त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. जय

Published

on

कोरबा। होली रंगों का त्योहार है। इसे बड़े ही उत्साह और हर्ष के साथ मनाया जाता है। पहले पारंपरिक होली फूलों, सूखे गुलाल, और पानी के साथ मनाई जाती थी, लेकिन अब सिंथेटिक रंगों ने इसकी जगह ले ली है। जिसका दुष्प्रभाव न केवल हमारी त्वचा तथा बाल, आंखों में भी पड़ता हैं यह हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। होली की मस्ती के साथ-साथ उत्सव के दौरान अपनी त्वचा और बालों की देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस होली में कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह एनकेएच के त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जय बावने देतें हैं।
डॉ. जय बताते हैं कि होली से एक दिन पहले अपनी त्वचा को ढेर सारे मॉइस्चराइजर से हाइड्रेट करें। अच्छी तरह से हाइड्रेटेड त्वचा नाजुक नहीं होती है जो आसानी से क्षतिग्रस्त नहीं होगी। होली के दिन अपने बालों में नारियल का तेल, शरीर पर बेबी ऑयल और होंठों पर लिप बाम लगाएं एवं अपनी त्वचा को सुरक्षित रखें। तेल लगाने के बाद सनस्क्रीन लगाना न भूलें। कपड़े पूरी बाजू के पहनें ताकि त्वचा को नुकसान कम से कम हो। अपने नाखूनों की सुरक्षा के लिए नेल पॉलिश लगाएं। होली के दिन भी खूब पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें।
होली के बाद त्वचा और बालों की देखभाल के टिप्स देते हुए डॉ. जय बतातें हैं कि एक बार जब रंग थोड़ा फीका हो जाए, तो त्वचा को हाइड्रेट और मॉइस्चराइज करने के लिए मेडिकल फेशियल करवाना चाहिए। यह आपको आकर्षक लुक वापस पाने में मदद करेगा। अगर आपको लगता है कि आपकी त्वचा हल्की फट रही है, तो एलोवेरा जेल या लैक्टोकैलेमाइन लोशन लगाएं, लेकिन अगर दाने बने रहते हैं, तो बिना किसी देरी के त्वचा विशेषज्ञ से मिलें। बालों को धोने से पहले सप्ताह में एक बार प्राकृतिक हेयर मास्क का उपयोग करें। डॉ. जय सुझाव देते हैं कि होली खेलने में अधिक पानी, फूलों की पंखुड़ियों और ऑर्गेनिक रंग का उपयोग करना बेहतर है। डॉ. जय बावने त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट विशेषज्ञ एडीसी लैब निहारिका और न्यू कोरबा हॉस्पिटल में नियमित रूप से उपलब्ध रहते है।

Continue Reading

कोरबा

ई-रिक्शा ने बाइक सवार दंपति को मारी टक्कर:महिला के सिर में गंभीर चोट, कोरबा में हादसे के बाद चालक मौके से भागा

Published

on

कोरबा। कोरबा जिले के बालको थाना क्षेत्र अंतर्गत नेहरू नगर दुर्गा चौक के पास सोमवार को शाम करीब 7 बजे एक तेज रफ्तार ई-रिक्शा की टक्कर से बाइक सवार महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। इस हादसे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, निरमला राजपूत अपने पति मोहन सिंह के साथ बाइक से घर लौट रही थीं। नेहरू नगर दुर्गा चौक के पास पीछे से आ रहे एक ई-रिक्शा चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी।

इस दौरान ई-रिक्शा एक राहगीर मां और बेटी को भी चपेट में लेने से बाल-बाल बचा। टक्कर इतनी भीषण थी कि महिला सड़क पर गिर पड़ीं और उनके सिर में गंभीर आंतरिक चोटें आई हैं। घटना के तुरंत बाद ई-रिक्शा चालक मौके से फरार हो गया।

स्थानीय लोगों की मदद से घायल महिला को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। स्थानीय लोगों ने ई-रिक्शा चालक की लापरवाही को हादसे का कारण बताया है। उन्होंने तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने वाले चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677