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यूक्रेन पर रूस का सबसे बड़ा हवाई प्रहार: सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों ने मचाई तबाही, 16 की मौत, 80 से ज्यादा घायल

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मास्को/कीव, एजेंसी। रूस ने यूक्रेन के नागरिक क्षेत्रों पर कई घंटे तक सैकड़ों ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। इस हमले में कम से कम 16 लोग मारे गए और 80 से अधिक लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। लगभग दो सप्ताह में यूक्रेन को निशाना बनाकर किया गया रूस का यह सबसे बड़ा हवाई हमला था। अधिकारियों ने बताया कि रूस ने लगभग 700 ड्रोन और कई बैलिस्टिक एवं क्रूज मिसाइलें दागीं, जिनका मुख्य निशाना आम नागरिक थे। रूस ने चार साल से अधिक समय पहले पड़ोसी देश पर आक्रमण किया था और तब से रूसी सेना लगभग हर दिन नागरिक क्षेत्रों पर हमले कर रही है। नियमित हमलों के बीच-बीच में बड़े पैमाने पर हमले भी होते रहते हैं। 

संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि इन हमलों में 15,000 से अधिक यूक्रेनी नागरिक मारे गए हैं। ताजा बमबारी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की की इस सप्ताह जर्मनी, नॉर्वे और इटली की 48 घंटे की यात्रा के बाद हुई है। यात्रा के दौरान जेलेंस्की ने रूसी मिसाइलों को रोकने में सक्षम और अधिक वायु रक्षा प्रणालियों की तत्काल मांग की थी। यूक्रेन को डर है कि ईरान युद्ध के कारण उन उन्नत अमेरिका-निर्मित प्रणालियों के भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं, जिनकी उसे आवश्यकता है। 

साथ ही उसने रूसी तेल पर अमेरिकी अस्थायी छूट का विरोध किया है। यूक्रेन का कहना है कि इससे रूस के युद्ध प्रयासों को वित्तीय मदद मिल रही है। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”एक और रात ने यह साबित कर दिया है कि रूस किसी भी तरह की वैश्विक नीतियों में ढील या प्रतिबंधों में राहत का हकदार नहीं है।” उन्होंने यूक्रेन की हवाई रक्षा को समर्थन देने के लिए इस सप्ताह हुए नए समझौतों के लिए जर्मनी, नॉर्वे और इटली को धन्यवाद दिया। 

उन्होंने कहा कि अधिकारी अतिरिक्त आपूर्ति के लिए नीदरलैंड के साथ भी काम कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कुछ साझेदार देशों ने सैन्य सहायता के अपने वादों को पूरा नहीं किया है। जेलेंस्की ने कहा, ”मैंने वायु सेना के कमांडर को उन साझेदारों से संपर्क करने का निर्देश दिया है जिन्होंने पहले ‘पैट्रियट’ और अन्य प्रणालियों के लिए मिसाइलें प्रदान करने की प्रतिबद्धता जताई थी।” यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने बृहस्पतिवार को ‘एक्स’ पर कहा, ”इस तरह के हमलों को सामान्य नहीं माना जा सकता। ये युद्ध अपराध हैं जिन्हें रोका जाना चाहिए और इनके दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”

सिबिहा ने बताया कि कीव में कम से कम चार लोग मारे गए, जिनमें 12 वर्षीय बच्चा भी शामिल है, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं। दक्षिणी बंदरगाह शहर ओडेसा में नौ लोग मारे गए और 23 अन्य घायल हो गए जबकि मध्य नीप्रो क्षेत्र में तीन लोग मारे गए और लगभग 36 व्यक्ति घायल हो गए और दक्षिण में जापोरिजिया में एक व्यक्ति की मौत हो गई। यूक्रेन की वायु सेना ने कहा कि हवाई सुरक्षा बलों ने 703 लक्ष्यों में से 667 को मार गिराया या निष्क्रिय कर दिया, जिनमें 636 शाहेद-किस्म के ड्रोन और अन्य ड्रोन शामिल थे। वायु सेना ने बताया कि 20 स्ट्राइक ड्रोन और 12 मिसाइलों ने 26 स्थानों को निशाना बनाया।

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फ्रांस में बेकाबू जश्न: लूटपाट-हिंसा से दहला पेरिस, एफिल टावर के पास भड़की आग ने मचाई दहशत

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पेरिस, एजेंसी। यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट UEFA Champions League का खिताब जीतने के बाद फ्रांसीसी क्लब पेरिस सेंट-जर्मेन (Paris Saint-Germain (PSG) के समर्थकों का जश्न राजधानी Paris में कई जगह हिंसा और उपद्रव में बदल गया। देर रात हजारों प्रशंसक सड़कों पर उतर आए, लेकिन कुछ इलाकों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और आगजनी, तोड़फोड़ तथा पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं सामने आईं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चैंपियंस लीग फाइनल में PSG की जीत के बाद करीब 20 हजार समर्थक शहर के प्रमुख इलाकों, खासकर Arc de Triomphe और Champs-Élysées के आसपास जमा हो गए। लोग फ्लेयर जलाकर, पटाखे छोड़कर और नारे लगाकर जीत का जश्न मना रहे थे। सुबह 3 बजे के बाद भी आगजनी, लूटपाट, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़पें जारी रहीं। कई इलाकों में हालात तनावपूर्ण रहे और सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया।

जश्न के दौरान कुछ उपद्रवी समूहों ने दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को निशाना बनाया। कई वाहनों में आग लगा दी गई और एक पुलिस स्टेशन में घुसने की कोशिश भी की गई। पुलिस ने हालात काबू करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसके बाद कई जगह झड़पें हुईं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, Eiffel Tower के आसपास भी आगजनी की घटनाएं दर्ज की गईं। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार आग सीधे एफिल टावर में नहीं लगी, बल्कि उसके आसपास के क्षेत्रों में उपद्रवियों द्वारा आग लगाने की घटनाएं हुईं।

अधिकारियों ने बताया कि हालात बिगड़ने के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। रात 10 बजे तक सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका था। झड़पों के दौरान कम से कम एक पुलिसकर्मी घायल हुआ। पेरिस की मुख्य रिंग रोड पर भी भारी जाम लग गया और कई इलाकों में यातायात प्रभावित रहा।पिछले वर्ष भी PSG की जीत के बाद हुए जश्न में हिंसा हुई थी, जिसमें दो लोगों की मौत तक हो गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार पूरे फ्रांस में लगभग 22,000 और अकेले पेरिस में 8,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

इसके बावजूद कुछ स्थानों पर उपद्रवी तत्वों ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया। PSG की ऐतिहासिक जीत फ्रांस के लिए गर्व का क्षण थी, लेकिन जश्न के दौरान हुई हिंसा और आगजनी ने इस उपलब्धि की चमक को फीका कर दिया। प्रशासन अब नुकसान का आकलन कर रहा है और उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है।

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जापान का चीन को मंच से करारा जवाब, “परमाणु हथियार तुम्हारे पासौर सैन्यवादी हम कैसे?”

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टोक्यो/बीजिंग, एजेंसी। एशिया के सबसे बड़े रक्षा सम्मेलन  शांग्री-ला डायलॉग * में जापान और चीन के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया। जापान के रक्षा मंत्री Shinjiro Koizumi ने बिना नाम लिए चीन पर तीखा निशाना साधते हुए कहा कि जिस देश के पास बड़ी संख्या में परमाणु हथियार और रणनीतिक बॉम्बर विमान हैं, वही जापान को “नया सैन्यवाद” (New Militarism) का प्रतीक बता रहा है। कोइजुमी ने कहा,   “एक ऐसा देश जिसके पास विशाल परमाणु शस्त्रागार और लंबी दूरी के रणनीतिक बॉम्बर हैं, वह जापान को सैन्यवादी कहता है, जबकि जापान के पास इनमें से कुछ भी नहीं है। क्या यह अजीब नहीं है?” हालांकि उन्होंने चीन का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान को सीधे तौर पर बीजिंग की आलोचना माना गया।

पिछले कुछ वर्षों से चीन लगातार जापान पर रक्षा खर्च बढ़ाने और सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने को लेकर “नए सैन्यवाद” की राह पर चलने का आरोप लगाता रहा है। लेकिन जापानी रक्षा मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि टोक्यो अपनी रक्षा रणनीति पूरी पारदर्शिता के साथ विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि चीन अपनी सैन्य शक्ति और गतिविधियों का तेजी से विस्तार कर रहा है, लेकिन उसकी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं है, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता पैदा हो रही है। कोइजुमी ने स्पष्ट किया कि जापान भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अपनी सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बना रहा है। इसमें 

  •  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
  •  अनमैन्ड सैन्य प्रणालियां
  •   साइबर सुरक्षा
  •   अंतरिक्ष सुरक्षा (Space Security)

जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया जा रहा है।
 
जापान और चीन के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण ताइवान भी है। जापान लंबे समय से कहता रहा है कि ताइवान जलडमरूमध्य में किसी भी संघर्ष का असर उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ेगा। पिछले वर्ष जापानी नेतृत्व ने संकेत दिया था कि यदि चीन ताइवान पर सैन्य कार्रवाई करता है तो जापान अपनी सुरक्षा नीति के तहत प्रतिक्रिया पर विचार कर सकता है। इसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध और तनावपूर्ण हो गए। इस वर्ष शांग्री-ला डायलॉग में चीन ने अपेक्षाकृत छोटा प्रतिनिधिमंडल भेजा और लगातार दूसरे साल उसके रक्षा मंत्री Dong Jun सम्मेलन में शामिल नहीं हुए। इस पर कोइजुमी ने कहा कि वह चीन के रक्षा मंत्री से मुलाकात नहीं कर पाने से निराश हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर संवाद जारी रहना चाहिए।

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TCS को बड़ा झटका, कनाडा के सबसे बड़े बैंक ने छीना बरसों पुराना कॉन्ट्रैक्ट

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मुंबई, एजेंसी। भारत की दिग्गज आईटी कंपनी टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज (TCS) को कनाडा से बड़ा झटका लगा है। कनाडा के सबसे बड़े बैंक रॉयल बैंक ऑफ कनाडा (RBC) ने टीसीएस के साथ अपना बरसों पुराना कॉन्ट्रैक्ट आंशिक रूप से खत्म कर दिया है। बैंक ने यह काम अब एक्सेंचर (Accenture) को सौंप दिया है। 

कर्मचारियों का रीबैजिंग

इस फैसले का असर सीधे उन करीब 150 कर्मचारियों पर पड़ेगा, जो इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। इन कर्मचारियों को अब “रीबैजिंग” प्रक्रिया के तहत एक्सेंचर में ट्रांसफर किया जाएगा यानी वे वही काम जारी रखेंगे लेकिन अब टीसीएस की बजाय एक्सेंचर के कर्मचारी कहलाएंगे।

20 साल पुराना रिश्ता कमजोर पड़ा

टीसीएस और रॉयल बैंक ऑफ कनाडा की साझेदारी साल 2007 में शुरू हुई थी। उस समय टीसीएस को बैंक के कोर बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सिस्टम्स को संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी। बाद में टीसीएस ने बैंक के कई अलग-अलग सिस्टम्स को एकीकृत कर आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया।

साल 2020 में टीसीएस ने दावा किया था कि उसने RBC के रिसर्च प्लेटफॉर्म को क्लाउड और एआई तकनीक से अपग्रेड किया है, जिससे ग्राहकों को तेज और बेहतर सेवाएं मिल सकें।

आखिर क्यों बदला बैंक का फैसला?

सूत्रों के मुताबिक, दुनिया भर के बड़े बैंक अब एआई और ऑटोमेशन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। वे अपनी मुख्य टेक्नोलॉजी और ऑपरेशन्स पर खुद ज्यादा नियंत्रण रखना चाहते हैं, ताकि लागत कम हो और काम तेजी से हो सके। इसी रणनीतिक बदलाव के तहत RBC ने अपने पुराने आईटी कॉन्ट्रैक्ट्स की समीक्षा की और कुछ काम टीसीएस से हटाकर एक्सेंचर को दे दिया।

TCS के लिए क्यों अहम है यह मामला?

कनाडा और उत्तरी अमेरिका टीसीएस के लिए बेहद महत्वपूर्ण बाजार हैं। कंपनी की कुल कमाई का लगभग 48% हिस्सा उत्तरी अमेरिका से आता है। ऐसे में इतने पुराने और बड़े बैंकिंग क्लाइंट के साथ कॉन्ट्रैक्ट में बदलाव को आईटी सेक्टर में बड़ा संकेत माना जा रहा है।

हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक TCS, RBC और Accenture की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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