कोरबा
ग्राम पंचायत ढोंगदरहा में आयोजित हुआ समाधान शिविर
158 आवेंदनो का मौके पर हुआ निराकरण, विभागीय योजनाओं से आमजनों को किया गया लाभांवित
कोरबा। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने तथा आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से प्रदेश में सुशासन तिहार मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में कोरबा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत ढोंगदरहा के शाला भवन परिसर में समाधान शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर में ढोंगदरहा, भैंसमा, सकदुकला, चीतापाली, करमंदी, बगबुडा, चाकामर, करूमौहा, कुरुडीह, गोढ़ी, बेंदरकोना एवं पंडरीपानी सहित कुल 12 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणजन बड़ी संख्या में शामिल हुए।

कार्यक्रम में जनपद सदस्य किशन कोशले, ग्राम पंचायत ढोंगदरहा की सरपंच श्रीमती अमिला बाई कंवर, विभिन्न पंचायतों के सरपंच, पंचगण, जनपद सदस्य, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि, विधायक प्रतिनिधि सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे। षिविर का शुभारंभ भारत माता एवं छत्तीसगढ़ महतारी की छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत कोरबा खगेश निर्मलकर ने राज्य शासन की महत्वाकांक्षी पहल “सुशासन तिहार 2026” की अवधारणा “संवाद से समाधान तक” पर प्रकाश डालते हुए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी ग्रामीणों को दी। साथ ही विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भी विभागीय योजनाओं एवं हितग्राही मूलक कार्यक्रमों की जानकारी प्रदान कर ग्रामीणों को जागरूक किया।

शिविर के दौरान “जनजातीय गरिमा उत्सव 2026” के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु वृक्षारोपण एवं जनजागरूकता रैली का आयोजन किया गया, जिसने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया।

समाधान शिविर में प्राप्त आवेदनों का संबंधित विभागों द्वारा त्वरित निराकरण किया गया। कार्यक्रम के दौरान पात्र हितग्राहियों को राशन कार्ड, पेंशन स्वीकृति, ऋण पुस्तिका, बिहान समूह की महिलाओं को लखपति दीदी सम्मान पत्र, स्वास्थ्य विभाग द्वारा नवदम्पति नई पहल किट, कृषि विभाग द्वारा पेट्रोल चलित पावर स्प्रेयर एवं किसान क्रेडिट कार्ड, तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को नव निर्मित आवास की चाबी एवं प्रशस्ति पत्र वितरित किए गए। शिविर में विभिन्न विभागों से संबंधित मांग एवं शिकायतों के कुल 620 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 158 आवेदनों का मौके पर ही निराकरण कर आमजन को त्वरित राहत प्रदान की गई। शेष आवेदनों का परीक्षण कर शीघ्र निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा। सुशासन तिहार शिविर को लेकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह एवं विश्वास देखने को मिला। शिविर में शासन और जनता के बीच सीधे संवाद एवं त्वरित समाधान की दिशा में एक प्रभावी पहल के रूप में अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज कराई।

कोरबा
कोरबा में मिली लाश का खुलासा:पुलिस हत्या मान रही थी, फोरेंसिक जांच में आत्महत्या निकली, मानसिक रूप से परेशान था मृतक
कोरबा। कोरबा के सीएसईबी चौकी क्षेत्र स्थित कोहड़िया में 10 मई को सड़क किनारे मिली खून से सनी लाश के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस जिस मामले की जांच हत्या मानकर कर रही थी, वह पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के बाद आत्महत्या निकला।

बसंत पटेल (37) की रक्तरंजित लाश सड़क किनारे झाड़ियों में मिली थी। घटनास्थल पर खून के धब्बे और शव घसीटने जैसे निशान मिलने से हत्या की आशंका जताई गई थी।

लाश मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची थी
टूटी बीयर बोतल से खुद पर किया हमला
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने फोरेंसिक और डॉग स्क्वायड टीम को मौके पर बुलाया था। घटनास्थल से एक टूटी हुई बीयर की बोतल भी बरामद हुई थी।
सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि पीएम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच में हत्या के कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। जांच में सामने आया कि मृतक ने टूटी बीयर बोतल के धारदार कांच से खुद पर हमला किया था।
डॉक्टरों और फोरेंसिक टीम ने चोटों की जांच के बाद पुष्टि की कि सभी घाव स्वयं पहुंचाए गए थे।

आवश्यक कार्रवाई करते हुए पुलिसकर्मी
मानसिक रूप से परेशान था मृतक
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि बसंत पटेल मानसिक रूप से अस्वस्थ थे और उनका इलाज चल रहा था। घटना के बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच की गई, लेकिन किसी संदिग्ध व्यक्ति की मौजूदगी नहीं मिली। इससे आत्महत्या की आशंका और मजबूत हुई।
फैक्ट्री कर्मचारी था मृतक
बसंत पटेल मूल रूप से मस्तूरी के सोनसरी गांव के निवासी थे। पिछले तीन वर्षों से वे सर्वमंगला बरमपुर में किराए के मकान में रह रहे थे और इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक फैक्ट्री में काम करते थे।
9 मई की सुबह वे काम पर जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन रात तक वापस नहीं लौटे। अगले दिन 10 मई की सुबह उनकी लाश कोहड़िया इलाके में मिली थी।
मृतक शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे हैं। बताया जा रहा है कि घटना से दो दिन पहले ही वे अपने छोटे भाई की शादी में शामिल होकर गांव से कोरबा लौटे थे।
कोरबा
हिरबाश छत्तीसगढ़ पुरुष बास्केटबॉल टीम में कोच
कोरबा। जिले के हिरबाश साहू को छत्तीसगढ़ पुरुष बास्केटबॉल टीम का नया कोच नियुक्त किया है। वे आगामी 76वीं जूनियर राष्ट्रीय बास्केटबॉल चैंपियनशिप में टीम का नेतृत्व और मार्गदर्शन करेंगे। यह प्रतियोगिता पुडुचेरी में 22 मई से 29 मई तक होगी। इस नेशनल स्पर्धा में हिस्सा लेने कोच हिरबाश अपनी टीम के साथ पुडुचेरी के लिए रवाना हो गए हैं।

लंबे समय से हिरबाश बास्केटबॉल खेल और खिलाड़ियों के प्रशिक्षण से जुड़े हुए हैं और उनके मार्गदर्शन में कई खिलाड़ियों ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उनकी इस नियुक्ति से कोरबा समेत पूरे प्रदेश के खेल प्रेमियों में खुशी और उत्साह का माहौल है।
कोरबा
तथ्यात्मक रिपोर्टिंग से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव
कोरबा। एमसीसीआर ट्रस्ट व यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से क्षेत्रीय संवाद और उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन गुरुवार को किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य सिकल सेल रोग, बाल मधुमेह, जन्मजात हृदय रोग और मातृ व शिशु स्वास्थ्य जैसे विषयों पर मीडिया की भूमिका को और अधिक प्रभावी व संवेदनशील बनाना था।

कार्यक्रम में संवाद व प्रशिक्षण सत्रों के दौरान डॉ. गजेंद्र सिंह ने बच्चों में बढ़ते गैर-संचारी रोगों की चुनौती, उनकी जल्द पहचान, समय पर उपचार व उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी साझा की। साथ ही समुदाय आधारित स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों व जनसहभागिता की आवश्यकता पर भी विशेष बल दिया। विशेषज्ञों ने कहा मीडिया केवल सूचना प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवहार परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। तथ्यात्मक, संवेदनशील व जनहितकारी रिपोर्टिंग के माध्यम से समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है और लोगों को समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित किया जा सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण व दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी पहुंचाने में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग से सिकल सेल के जिला सलाहकार अरविंद भारती, यूनिसेफ की स्वास्थ्य विभाग से डॉ. गजेन्द्र सिंह व उनकी टीम, एमसीसीआर ट्रस्ट से डॉ. डीश्याम कुमार आदि उपस्थित रहे।
सामुदायिक सहभागिता पर जोर सिकल सेल रोग की समय पर जांच व नियमित उपचार, बच्चों में टाइप-1 मधुमेह के शुरुआती लक्षणों की पहचान, जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित बच्चों के जल्द रेफरल व उपचार और मातृ व शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतर निगरानी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अतिरिक्त पूर्ण टीकाकरण, पोषण, एनीमिया नियंत्रण, सामुदायिक सहयोग व बहु-विभागीय समन्वय को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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