कोरबा
झमाझम बारिश से दूर हुई किसानों की चिंता, समय पर खाद-बीज ने बढ़ाया अन्नदाताओं का विश्वास
मानसून की मेहरबानी और शासन की तैयारी से खेती को मिली नई रफ्तार, खेतों में लौटी रौनक
कोरबा। जून और जुलाई के शुरुआती दिनों में मानसून की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। आसमान में बादलों की आवाजाही तो थी, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूने पड़े थे। खरीफ फसलों की बुआई, धान की रोपाई और बेहतर उत्पादन को लेकर किसान चिंतित थे। हर दिन आसमान की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखते अन्नदाता अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे थे। आखिरकार पिछले कुछ दिनों से हुई झमाझम बारिश ने किसानों की चिंता को खुशी में बदल दिया। तपती धूप से तपी धरती पर जैसे ही वर्षा की बूंदें बरसीं, केवल मिट्टी ही नहीं महकी, बल्कि किसानों के मन में भी नई उम्मीद और आत्मविश्वास के अंकुर फूट पड़े।

मानसून की यह दस्तक केवल मौसम का परिवर्तन नहीं, बल्कि किसानों के जीवन में नई ऊर्जा, नई आशा और नई शुरुआत का संदेश लेकर आई है। दूर-दूर तक फैले खेतों में अब पानी लबालब दिखाई दे रहा है। गांवों में फिर से चहल-पहल लौट आई है। खेतों में ट्रैक्टरों की गूंज, कृषि यंत्रों की आवाज, धान की रोपाई में जुटे किसान परिवार और प्रकृति का नव श्रृंगार ग्रामीण जीवन की सजीव तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। कहीं खेतों की जुताई अंतिम चरण में है तो कहीं किसान पूरे उत्साह के साथ धान की रोपाई में जुट गए हैं। वर्षा की हर बूंद मानो किसानों की मेहनत को नई शक्ति प्रदान कर रही है। यही वह समय है, जब धरती और अन्नदाता का अटूट रिश्ता सबसे अधिक सजीव दिखाई देता है। किसान पूरे विश्वास के साथ खेतों में उतरता है, क्योंकि उसे पता है कि आज की मेहनत ही आने वाले कल की समृद्धि की नींव बनेगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन ने खरीफ सीजन की तैयारियां समय रहते पूरी कर किसानों की खेती को मजबूत आधार प्रदान किया है। कृषि विभाग द्वारा मानसून से पहले ही गुणवत्तायुक्त बीज एवं उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर दी गई थी। इसका लाभ अब किसानों को सीधे तौर पर मिल रहा है। जैसे ही वर्षा ने रफ्तार पकड़ी, किसान बिना किसी विलंब के खेती के कार्यों में जुट गए। समय पर कृषि आदानों की उपलब्धता के कारण बुआई और रोपाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कोरबा जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को अनुदानित दरों पर खाद एवं बीज सहजता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। किसानों को न तो बाजार में भटकना पड़ रहा है और न ही आवश्यक उर्वरकों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। समय पर उपलब्ध कृषि आदानों और अनुकूल वर्षा ने किसानों के उत्साह को नई उड़ान दी है।
इसका उदाहरण करतला स्थित आदिवासी सेवा सहकारी समिति में देखने को मिला। ग्राम कछार निवासी कृषक घनश्याम राठिया, जो लगभग साढ़े छह एकड़ भूमि पर खेती करते हैं, ने समिति से 12 बोरी यूरिया, 6 बोरी डीएपी तथा 4 बोरी सुपर फास्फेट प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि उन्हें न लाइन में लगना पड़ा और न ही किसी प्रकार का इंतजार करना पड़ा। समिति में सभी व्यवस्थाएं सुचारु हैं, जिससे किसानों को समय पर खाद-बीज उपलब्ध हो रहा है। शासन द्वारा रियायती दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक मिलने से खेती की लागत कम हुई है और छोटे एवं मध्यम किसानों को बड़ी राहत मिली है।
श्री राठिया ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर खाद-बीज मिलने और अच्छी बारिश होने से इस वर्ष खेती की शुरुआत बेहद अच्छी हुई है। अब पूरे परिवार के साथ धान की रोपाई का कार्य तेजी से चल रहा है और उन्हें इस वर्ष अच्छी पैदावार की पूरी उम्मीद है।
छत्तीसगढ़ की धरती पर बरसती यह वर्षा केवल खेतों को ही नहीं सींच रही, बल्कि किसानों के सपनों, उनकी मेहनत और समृद्ध भविष्य की आशाओं को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है। प्रकृति की अनुकंपा और शासन की दूरदर्शी व्यवस्था का यह प्रभावी समन्वय खेती-किसानी को नई गति दे रहा है। समय पर उपलब्ध खाद-बीज, अनुकूल मौसम और किसानों के उत्साह ने यह विश्वास मजबूत किया है कि इस खरीफ सीजन में अन्नदाता आत्मविश्वास के साथ समृद्धि की ओर आगे बढ़ रहे हैं।
कोरबा
205.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज
कोरबा। कोरबा जिले में एक जून से 06 जुलाई तक कुल 205.6 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई।
अधीक्षक भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में जिले की तहसील कोरबा में 183.1 मिलीमीटर, अजगरबहार 147.7, भैंसमा, 220.9, करतला 137.3, बरपाली 207.8, कटघोरा 207.2, दीपका 271.6, दर्री 199.1, पाली 274.2, हरदीबाजार 212, पोंड़ी-उपरोड़ा 239.4, और पसान तहसील में 113.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
कोरबा
समसामयिक सलाह, अच्छी वर्षा का लाभ उठाकर खरीफ फसलों के कृषि कार्य समय पर पूर्ण करें
कोरबा। कृषि विज्ञान केंद्र, कोरबा ने जिले के किसानों से अपील की है कि हाल के दिनों में हो रही अच्छी वर्षा का अधिकतम लाभ उठाते हुए खरीफ मौसम से जुड़े सभी कृषि कार्य समय पर पूर्ण करें। जिन किसानों की धान की नर्सरी तैयार हो चुकी है, वे खेत में पर्याप्त नमी का लाभ लेते हुए शीघ्र रोपाई करें। धान की रोपाई कतार पद्धति से करने, 20-21 दिन की पौध का उपयोग करने तथा अनुशंसित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है, ताकि पौधों की संख्या संतुलित रहे, खरपतवार नियंत्रण आसान हो और उत्पादन में वृद्धि हो। जिन किसानों ने अभी तक धान की बुवाई नहीं की है, वे वर्तमान मौसम को देखते हुए मिट्टी में अनुकृल नमी होने पर लेही विधि से बुवाई करें। प्रमाणित अथवा आधार श्रेणी के बीजों का एजोस्पाइरिलम एवं पीएसबी कल्चर से बीजोपचार करने की भी सलाह दी गई है। साथ ही, अनुशंसित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग तथा समय पर नाइट्रोजन का छिड़काव करने पर विशेष जोर दिया गया है।
धान एवं मक्का की फसलों में अंकुरण पूर्व तथा अंकुरण पश्चात खरपतवारनाशी का उपयोग करने की सलाह दी गई है। वहीं, मक्का की फसल में आवश्यकता अनुसार निराई-गुड़ाई एवं मिट्टी चढ़ाने का कार्य भी समय पर करें।
वर्तमान मौसम को ध्यान मे रखते हुए 10‘- 15 दिन पश्चात् दलहनी फसलों जैसे अरहर, उड़द एवं मूंग की शीघ्र/कम अवघि की उन्नतशील किस्में तथा उच्चहन भूमि में तिलहनी फसल विशेषकर तिल एवं मूंगफली की अनुशंसित बीज दर, निश्चित कतार दूरी एवं बीजोपचार के साथ बुवाई करने की सलाह दी गई है। किसानों से आग्रह है कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरको का संतुलित उपयोग करें।
खरीफ मौसम में लौकी, कद्दू, करेला, तोरई, भिंडी, बरबटी, मिर्च, बैंगन सहित अन्य मौसमी सब्जियों की समय पर बुवाई करने तथा तैयार नर्सरी वाली मिर्च, बैंगन एवं फूलगोभी की रोपाई शुरू करने की अपील की गई है। अदरक, हल्दी, भिंडी एवं बरबटी की फसलों में समय-समय पर निराई-गुड़ाई तथा अधिक वर्षा की स्थिति में जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने की सलाह भी दी गई है।
वर्तमान समय को आम, अमरूद, नींबू, कटहल, सहजन एवं केले सहित अन्य फलदार पौधों के रोपण के लिए भी उपयुक्त बताया गया है। पौधरोपण के समय अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद एवं अनुशंसित उर्वरकों का उपयोग करने तथा पौधों की नियमित देखभाल करने की सलाह दी गई है।
वर्षा जल एक प्राकृतिक संसाधन है और इसके संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है जिसके लिए किसान अपने खेत की मेड़ों को मजबूत रखे, खेत तालाब, डबरी, मेड़बंदी एवं अन्य जल संचयन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का अधिकतम संरक्षण करें, संरक्षित जल का उपयोग वर्षा के अंतराल के दौरान सिंचाई के लिए किया जा सकता है। साथ ही खेत में नमी बनाए रखने के लिए उचित जल प्रबंधन, एवं मल्चिंग अपनाने की सलाह दी गई है।
कोरबा
खनन प्रभावित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए सुनहरा अवसर, सीपेट स्याहीमुड़ी में डिप्लोमा पाठ्यक्रमों हेतु आवेदन आमंत्रित
कोरबा। जिला प्रशासन द्वारा जिले के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से सीपेट स्याहीमुड़ी, कोरबा में संचालित डिप्लोमा इन प्लास्टिक्स टेक्नोलॉजी एवं डिप्लोमा इन प्लास्टिक्स मोल्ड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। योजना के अंतर्गत कोरबा जिले के प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष खनन प्रभावित क्षेत्रों के निवासी 10 मेधावी विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। चयनित विद्यार्थियों के लिए डिप्लोमा पाठ्यक्रम की संपूर्ण अवधि का शिक्षण शुल्क तथा हॉस्टल एवं मेस शुल्क जिला प्रशासन द्वारा वहन किया जाएगा।
इच्छुक अभ्यर्थी आवश्यक दस्तावेजों सहित 20 जुलाई 2026 को सायं 5ः00 बजे तक लाईवलीहुड कॉलेज, आईटीआई रामपुर परिसर, रोजगार कार्यालय के पीछे, कोरबा में उपस्थित होकर आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
प्रवेश हेतु सीटों की संख्या सीमित है। निर्धारित संख्या से अधिक आवेदन प्राप्त होने की स्थिति में विद्यार्थियों का चयन मेरिट सूची एवं कोरबा जिले के लिए निर्धारित आरक्षण रोस्टर के अनुसार किया जाएगा। पाठ्यक्रम, न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता तथा आरक्षण रोस्टर के अनुसार रिक्त सीटों का विस्तृत विवरण आवेदन स्थल पर उपलब्ध रहेगा।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन आवेदकों के माता या पिता किसी भी प्रकार की शासकीय सेवा में कार्यरत हैं, वे छात्रवृत्ति के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसे आवेदकों को आवेदन के साथ इस आशय का प्रमाण-पत्र संलग्न करना अनिवार्य होगा।
अधिक जानकारी के लिए इच्छुक अभ्यर्थी अरुणेन्द्र कुमार मिश्रा, प्राचार्य, लाईवलीहुड कॉलेज से मोबाइल नंबर 9589583878 पर संपर्क कर सकते हैं।
आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 सायं 5ः00 बजे निर्धारित की गई है।
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