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ट्रंप के एक बयान के बाद अचानक भरभराकर गिरा शेयर बाजार, पढ़ें भारी गिरावट के 5 मुख्य कारण
मुंबई, एजेंसी। भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव निवेशकों की चिंता का कारण बने। इसके चलते बाजार में जमकर बिकवाली हुई और प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 2 फीसदी से अधिक गिरकर बंद हुए। कारोबार की शुरुआत से ही बाजार पर दबाव बना हुआ था, लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में बिकवाली और तेज हो गई। निवेशकों ने जोखिम वाले शेयरों से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजार में गिरावट और बढ़ गई।

ट्रंप के बयान से बढ़ी बाजार की चिंता
बाजार में गिरावट का एक बड़ा कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान भी रहा, जिसमें उन्होंने ईरान के साथ हुए अंतरिम शांति समझौते के खत्म होने की बात कही। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में दोबारा तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो गई। निवेशकों को डर है कि अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे तेल की कीमतों में और तेजी आने की संभावना है, जिसका असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं और शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।
महंगे तेल का बाजार पर दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए चिंता का विषय है। तेल महंगा होने से कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और महंगाई पर भी दबाव आ सकता है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और उन्होंने बाजार में बिकवाली बढ़ा दी।
दोपहर 2:18 बजे (IST) तक सेंसेक्स 1,601 अंक गिरकर 76,580 पर आ गया, जबकि निफ्टी50 में 472 अंकों की गिरावट हुई और यह अहम 24,000 के स्तर से नीचे चला गया। बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों की लगभग 4 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खत्म हो गई, जिससे BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन 476 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया।

सेंसेक्स की सभी कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ ट्रेड कर रहे थे; इनमें हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंटरग्लोब एविएशन, मारुति सुजुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और भारती एयरटेल के शेयरों में 2-4% की गिरावट देखी गई। दलाल स्ट्रीट पर भारी बिकवाली के बीच, बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX 26% बढ़कर 14.67 पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दिखाता है। व्यापक बाजार पर भी दबाव देखा गया, जिसमें निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2% तक की गिरावट आई।
Share Market गिरावट के 5 मुख्य कारण
1) ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ सीज़फायर खत्म हो गया है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई। ट्रंप ने आज कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता “खत्म” हो गया है। उन्होंने ईरानी नेताओं को “बीमार लोग” कहा। यह बात खाड़ी क्षेत्र में नए हमलों के बाद कही गई, जिनसे दोनों देशों के बीच नाजुक सीज़फायर के टूटने का खतरा पैदा हो गया है। यह घटनाक्रम अमेरिका और ईरान के बीच हमलों के आदान-प्रदान के बाद हुआ। वाशिंगटन ने ईरान पर हवाई हमले किए और ईरानी कच्चे तेल की बिक्री पर फिर से प्रतिबंध लगा दिए। तनाव बढ़ने से मध्य पूर्व में स्थिरता और ग्लोबल ऑयल सप्लाई में नई रुकावटों की आशंका फिर से बढ़ गई है।
CENTCOM ने X पर एक पोस्ट में कहा, “US सेंट्रल कमांड की सेनाओं ने ईरान के खिलाफ कई जोरदार हमले शुरू कर दिए हैं। ये हमले अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में निर्दोष नागरिकों वाले कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाने और उन पर हमला करने की भारी कीमत वसूलने के लिए किए जा रहे हैं।” US सेंट्रल कमांड के अनुसार, ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तीन कमर्शियल जहाजों पर ईरान के हमलों के जवाब में किए गए थे।
2) तेल की कीमतें बढ़ीं
मिडिल ईस्ट तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। बुधवार को Brent Crude लगभग 5% बढ़कर करीब 78 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि WTI Crude भी 74 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। निवेशकों को चिंता है कि अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हालात खराब होते हैं तो वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यह रास्ता दुनिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल चिंता का कारण बनता है, क्योंकि इससे महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
3) ग्लोबल बाजारों से कमजोर संकेत
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने के बीच ग्लोबल बाजारों में भारी बिकवाली का असर दलाल स्ट्रीट पर भी दिखा। ट्रंप के बयानों के बाद यूरोपीय बाजारों में गिरावट आई; UK का FTSE 100, फ्रांस का CAC 40 और जर्मनी का DAX 2% तक गिर गए। एशिया में, जापान का निक्केई 1.5% गिरा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 6% लुढ़क गया क्योंकि चिप-आधारित बिकवाली तेज हो गई। इस बीच, रात भर वॉल स्ट्रीट में भारी गिरावट के बाद, डॉव जोन्स फ्यूचर्स में लगभग 1% की गिरावट आई, जिससे संकेत मिलता है कि दिन में बाद में अमेरिकी बाजारों की शुरुआत भी कमजोर हो सकती है।
4) बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने भी शेयर बाजारों पर दबाव बनाया। 10 साल की US Treasury Yield बढ़कर करीब 4.197% हो गई, जबकि 30 साल की बॉन्ड यील्ड 5.068% के चली गई। आमतौर पर जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक जोखिम वाले एसेट जैसे शेयरों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर बढ़ने लगते हैं। इसका असर इक्विटी मार्केट पर देखने को मिला।
5) रुपया कमज़ोर हुआ
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.50 के स्तर से नीचे गिरकर कमज़ोर हो गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर के मज़बूत होने का असर घरेलू मुद्रा पर पड़ा, जिससे यह पिछले क्लोज़िंग भाव से 0.6% गिर गया।
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ट्रंप के एक ऐलान के बाद सोने-चांदी में आई जबरदस्त गिरावट, बाजार में मची हलचल
मुंबई, एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने US-ईरान के सीजफायर को लेकर बड़ा बयान दिया है। जिसके बाद आज सोने- चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई। ट्रंप ने US-ईरान को खत्म करने का ऐलान किया। जिसके बाद वैश्विक कमोडिटी बाजार में अचानक हलचल बढ़ गई, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ भारत के घरेलू वायदा बाजार पर भी दिखाई दिया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी में गिरावट
COMEX में दोपहर करीब 2:30 बजे तक सोने के भाव में लगभग 2 फीसदी की गिरावट के बाद यह करीब 4,075 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी की कीमत करीब 3.5 फीसदी टूटकर 60 डॉलर प्रति औंस से नीचे पहुंच गई।
MCX पर सोना चांदी
इसका असर घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भी पड़ा। अगस्त डिलीवरी वाला सोना 2,291 रुपये टूटकर 1,43,101 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी के वायदा भाव में 7,355 रुपये की गिरावट दर्ज की गई। जिसके बाद चांदी 2,23,502 रुपये प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर आ गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक घटनाक्रम और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिला, जिससे सोना-चांदी में तेज गिरावट आई।

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा एक्शन: 24 घंटे की पुलिस रिमांड पर 3 आरोपी, 40 दिनों में 70 बार हाथ साफ करने का सनसनीखेज खुलासा
अयोध्या, एजेंसी। अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले में गिरफ्तार 3 आरोपियों को एक स्थानीय अदालत के आदेश पर बुधवार को 24 घंटे की पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि मामले की जांच कर रहे अयोध्या के पुलिस क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने सुबह करीब 7 बजे जिला जेल से अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया। विशेष अदालत (भ्रष्टाचार रोधी) के आदेश के अनुसार रिमांड की यह अवधि बुधवार सुबह 7 बजे शुरू हुई। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए नए सुबूतों के बारे में आरोपियों से पूछताछ की जाएगी और पुलिस उन जगहों पर तलाशी भी ले सकती है जिनकी आरोपियों ने निशानदेही की है ताकि चोरी की गई नकदी और अन्य सामान बरामद किया जा सके।

अधिकारियों के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने रिमांड की मांग इसलिए की थी ताकि मामले में गिरफ्तार अन्य लोगों से पूछताछ के दौरान इकट्ठा की गई सामग्री और सबूतों के आधार पर इन तीनों आरोपियों से पूछताछ की जा सके। मामले की जांच के लिए गठित विशेष टीम (SIT) द्वारा इस मामले में सबसे पहले मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को पुलिस रिमांड पर लिया गया था। अयोध्या के राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में एसआईटी की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती तफ्तीश के अनुसार, जांचकर्ताओं ने 40 दिनों की अवधि में चोरी की लगभग 70 संदिग्ध घटनाओं की पहचान की है और वे आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ मंदिर में दान की रकम की गिनती की व्यवस्था में कथित प्रक्रियागत और सुरक्षा सम्बन्धी खामियों की भी जांच कर रहे हैं।

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NEET के बाद अब UGC- NET को लेकर राहुल गांधी बोले- मोदी सरकार से कोई कार्यवाही की उम्मीद नहीं
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बुधवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि नीट-यूजी के बाद अब इस परीक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं, लेकिन मोदी सरकार सो रही है, क्योंकि लाखों छात्रों की वर्षों की मेहनत उसके लिए कोई मायने नहीं रखती।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक खबर साझा करते हुए दावा किया कि हरियाणा में यूजीसी-नेट परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्र का पीडीएफ प्रसारित कर दिया गया जो केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के पास उपलब्ध होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पीडीएफ के लगभग 90 प्रश्न समाजशास्त्र के वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते हैं तथा यही प्रश्नपत्र बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में दो लाख 25 हजार रुपये में बेचा जा रहा था। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि इसी नेटवर्क ने सीएसआईआर-नेट, हरियाणा अध्यापक पात्रता परीक्षा (एचटीईटी) और एडीए जैसी आगामी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का भी दावा किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नीट और नेट परीक्षाओं में बार-बार कथित घोटाले सामने आने के बावजूद मोदी सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है क्योंकि लाखों छात्रों की रात-रात जागकर की गई वर्षों की मेहनत उसके लिए कोई मायने नहीं रखती। राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से किसी जवाबदेही या कार्रवाई की उम्मीद करना बेकार है क्योंकि न तो जांच होगी और न ही छात्रों को न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि बदलाव का एकमात्र रास्ता सामूहिक आवाज़ है, देश भर के ‘छात्रों की गूंज’ है, जो भारत में शिक्षा क्रांति लाकर रहेगी।

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