छत्तीसगढ़
रायपुर : तेन्दूपत्ता संग्राहकों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध – वन मंत्री केदार कश्यप
621 समितियों के 7.14 लाख से अधिक संग्राहकों को मिलेगा 162.32 करोड़ रुपए का प्रोत्साहन पारिश्रमिक
11.15 लाख संग्राहकों को 734.25 करोड़ रुपए का संग्रहण पारिश्रमिक पहले ही मिल चुका है
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने 7.14 लाख से अधिक तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ की प्रोत्साहन पारिश्रमिक (बोनस) राशि का वितरण किया है। राज्य में वर्तमान में तेन्दूपत्ता संग्रहण की दर को 4,000 रुपए से बढ़ाकर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है, जिससे संग्राहक परिवारों को सीधा आर्थिक संबल मिल रहा है। तेन्दूपत्ता का संग्रहण दर 5,500 रुपए प्रति मानक बोरा होने से संग्राहक परिवारों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार तेन्दूपत्ता संग्राहकों, वनवासियों और आदिवासी परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगल से जुड़े प्रत्येक श्रमिक को उसके श्रम का उचित सम्मान मिले और पारिश्रमिक समय पर सीधे उसके बैंक खाते में पहुंचे।

वर्ष 2023 के प्रोत्साहन पारिश्रमिक का वितरण शुरू
वन मंत्री केदार कश्यप ने बताया कि विगत 3 जुलाई को सहकारिता सप्ताह एवं अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा वर्ष 2023 के तेन्दूपत्ता संग्रहण के प्रोत्साहन पारिश्रमिक वितरण का शुभारंभ किया गया। इसके तहत प्रदेश की 621 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समितियों से जुड़े 7,14,446 तेन्दूपत्ता संग्राहकों को 162.32 करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। भुगतान की प्रक्रिया तेजी से जारी है और शीघ्र पूरी कर ली जाएगी।
संग्रहण पारिश्रमिक का समय पर ऑनलाइन भुगतान
वन मंत्री ने बताया कि सरकार ने संग्रहण सत्र 2026 में भी तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है। प्रदेश के लगभग 11.15 लाख संग्राहकों को 734.25 करोड़ रुपए की संग्रहण पारिश्रमिक राशि ऑनलाइन माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है। इससे लाखों वनवासी और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।
पारदर्शी और तकनीक आधारित भुगतान व्यवस्था
केदार कश्यप ने कहा कि तेन्दूपत्ता प्रदेश के लाखों वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इसलिए राज्य सरकार संग्रहण से लेकर भुगतान तक पूरी व्यवस्था को पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बना रही है, ताकि संग्राहकों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
वनवासियों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सर्वाेच्च प्राथमिकता है। तेन्दूपत्ता संग्राहकों को समय पर पारिश्रमिक और प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराना इसी सोच का परिणाम है। आने वाले समय में भी सरकार वनवासियों के हितों की रक्षा, उनकी आय में वृद्धि तथा वन आधारित आजीविका को और अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

छत्तीसगढ़
रायपुर : उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज मंत्रालय में राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकार-वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने पत्रकार-वार्ता में कैबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी।


रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए –
1. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी द्वारा केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के विद्युत उपक्रमों (CPSUs) से खरीदी जा रही बिजली के भुगतान की सुरक्षा के लिए वर्तमान त्रिपक्षीय अनुबंध (Tripartite Agreement) के स्थान पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप डायरेक्ट डेबिट मैंडेट (Direct Debit Mandate-DDM) व्यवस्था लागू किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

इस निर्णय से एनटीपीसी सहित अन्य सीपीएसयू से विद्युत आपूर्ति की निरंतरता सुनिश्चित होगी तथा भुगतान सुरक्षा की व्यवस्था आरबीआई के वर्तमान प्रावधानों के अनुरूप हो सकेगी। राज्य शासन पर इससे कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा, क्योंकि वितरण कंपनी द्वारा भुगतान की व्यवस्था पूर्ववत रहेगी तथा आवश्यक होने पर पहले लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की व्यवस्था प्रभावी रहेगी।
2. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ पुलिस विशेष कार्यपालिक बल (बस्तर फाइटर्स), फाइटर आरक्षक सेवा (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम, 2026 में महत्वपूर्ण संशोधन को स्वीकृति दी गई है।
3. मंत्रिपरिषद् द्वारा छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस संशोधन में भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के विनियमन प्रकोष्ठ की अनुशंसाओं के अनुरूप निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक, गुणवत्तापूर्ण और समकालीन बनाया गया है।
इसके तहत निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विन्यास निधि के स्थान पर रक्षित निधि का प्रावधान लागू करने से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जा सकेंगे। इसमें आधारभूत अधोसंरचना, पुस्तकालय एवं अन्य सुविधाओं को यूजीसी एवं सक्षम नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। इस संशोधन से राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा।
4. मंत्रिपरिषद् ने छत्तीसगढ़ मूल्य संवर्धित कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन के माध्यम से छत्तीसगढ़ वाणिज्यिक कर अधिकरण को समाप्त करने के साथ ही उससे संबंधित प्रावधानों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।
जीएसटी लागू होने के बाद वैट संबंधी द्वितीय अपीलों के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है और राज्य में जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण (GSTAT) की स्थापना भी हो चुकी है। ऐसे में पृथक वाणिज्यिक कर अधिकरण की आवश्यकता नहीं रह गई है। इस संशोधन के बाद अधिकरण में लंबित प्रकरणों का स्थानांतरण राजस्व मंडल को किया जाएगा, जिससे अपीलों के निराकरण की प्रक्रिया सुव्यवस्थित एवं अधिक प्रभावी हो सकेगी।
5. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इस संशोधन का उद्देश्य जीएसटी कानून को सरल बनाना, अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं को आसान बनाना तथा करदाताओं, विशेषकर निर्यातकों और इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर वाले उद्योगों के लिए रिफंड प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाना है। इससे कर प्रशासन अधिक प्रभावी होगा, करदाताओं को सुविधा मिलेगी साथ ही राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
6. मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी है। इस संशोधन का उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ावा देना, उद्योगों के लिए अधिक अनुकूल वातावरण तैयार करना तथा निवेशकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस संशोधन विधेयक के प्रारूप को तैयार करने में अन्य अग्रणी राज्यों की औद्योगिक नीतियों का भी अध्ययन किया गया है। इससे निवेश प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
7. मंत्रिपरिषद् की बैठक में छत्तीसगढ़ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (विनिमय-मुक्ति एवं सुविधा) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में व्यापार और उद्योग स्थापित करने की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, डिजिटल एवं समयबद्ध बनाना है। इस तरह का विधेयक लाने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा।
इसके अंतर्गत डीम्ड परमिशन (Deemed Permission), स्व-प्रमाणीकरण (Self-certification), तृतीय-पक्ष सत्यापन (Third-party Verification), जोखिम-आधारित निरीक्षण (Risk-based Inspection) तथा दोहरे लाइसेंसिंग दायित्वों को समाप्त करने जैसे प्रावधान किए गए हैं। इससे निवेशकों के लिए अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाएं कम होंगी, कारोबार करने में सुगमता बढ़ेगी तथा राज्य में निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।
8. मंत्रिपरिषद् ने नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) द्वारा आबंटित भूखंडों एवं निर्मित परिसरों पर देय ब्याज एवं अधिभार में राहत प्रदान करने हेतु वन टाइम सेटलमेंट (OTS) योजना-2026 को मंजूरी दी है।
इस योजना से पात्र आबंटितियों को निर्धारित शर्तों के तहत बकाया देयों के नियमितीकरण, परियोजनाओं को निर्धारित समयावधि में पूरा करने में मदद मिलेगी, जो विकास करने के इच्छुक है उनको अवसर मिलेगा और जो इच्छुक नहीं है, वे समय पर आबंटित भूमि को सरेंडर कर सकेंगे। इस निर्णय से मुकदमेबाजी में कमी आएगी, भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा तथा नवा रायपुर में निवेश एवं विकास गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
9. मंत्रिपरिषद् ने जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024 को छत्तीसगढ़ राज्य में अंगीकार करने के लिए विधानसभा में संकल्प प्रस्तुत किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
भारत सरकार द्वारा लाए गए इस संशोधन का उद्देश्य पर्यावरणीय कानूनों के अनुपालन को अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसके तहत छोटे उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से हटाकर उन पर आर्थिक दंड का प्रावधान तथा दंड निर्धारण एवं अपील की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है। इस निर्णय से राज्य में पर्यावरणीय नियमन को सरल बनाने, अनुपालन को प्रोत्साहित करने तथा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के साथ प्रभावी पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
10. मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण अधिनियम, 2011 (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य खाली मकानों को किराये पर देने को बढ़ावा देना और किरायेदारी से जुड़े विवादों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। इस संशोधन में भवन स्वामी और किरायेदार के अधिकार व दायित्व स्पष्ट किए गए है, साथ ही संपत्ति प्रबंधक, किराया प्राप्ति, अधिकरण के अध्यक्ष की पदावधि और न्यायालय शुल्क से जुड़े प्रावधान भी शामिल किए गए है। यह संशोधन भारत सरकार के आदर्श किरायेदारी अधिनियम, 2021 के अनुरूप है।
11. मंत्रिपरिषद् द्वारा राजनांदगांव में 2000 सीट क्षमता वाले आधुनिक ऑडिटोरियम के निर्माण के लिए आवश्यक शासकीय भूमि के आबंटन का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

छत्तीसगढ़
रायपुर : एस.डी.जी. 2.0 और ‘बस्तर अंजोर’ से विकसित छत्तीसगढ़ के विजन को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री ने किया छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क का विमोचन, बस्तर के समग्र एवं परिणामोन्मुख विकास के लिए ‘बस्तर अंजोर’ पहल का शुभारंभ
राज्य स्तर पर 343 और जिला स्तर पर 99 संकेतकों के माध्यम से होगी विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मंत्रालय महानदी भवन में मंत्रिपरिषद के सदस्यों की उपस्थिति में राज्य नीति आयोग द्वारा तैयार छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क का विमोचन किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. राज्य एवं जिला संकेतक फ्रेमवर्क 2.0 तथा मेटाडेटा हैंडबुक का भी विमोचन किया गया। साथ ही बस्तर संभाग के समावेशी, अभिसरण आधारित और मापनीय विकास के लिए तैयार की गई अभिनव पहल ‘बस्तर अंजोर’ की भी शुरुआत की गई।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, सटीक डेटा और परिणाम आधारित मॉनिटरिंग अत्यंत आवश्यक है। एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क शासन को साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय तथा योजनाओं की नियमित निगरानी के लिए एक सशक्त आधार प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल ‘विकसित छत्तीसगढ़ @2047’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल विकास योजनाएं संचालित करना नहीं, बल्कि उनके वास्तविक प्रभाव को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। एस.डी.जी. 2.0 के माध्यम से विकास की प्रगति को अधिक पारदर्शी, मापनीय और जवाबदेह बनाया जा सकेगा।
नए एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क के अंतर्गत राज्य स्तर पर संकेतकों की संख्या 275 से बढ़ाकर 343 तथा जिला स्तर पर 82 से बढ़ाकर 99 कर दी गई है। इससे विकास कार्यों की अधिक व्यापक, सटीक और वैज्ञानिक निगरानी संभव होगी। मेटाडेटा हैंडबुक में प्रत्येक संकेतक की गणना पद्धति एवं रिपोर्टिंग प्रणाली को मानकीकृत किया गया है, जिससे पूरे राज्य में डेटा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी।
इस अवसर पर राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने ‘बस्तर अंजोर’ की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह अभिसरण (कन्वर्जेंस) आधारित विकास मॉडल है, जिसे बस्तर संभाग को देश का सर्वाधिक विकसित जनजातीय क्षेत्र बनाने के संकल्प को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
उन्होंने बताया कि ‘बस्तर अंजोर’ के 3+4 मॉडल के अंतर्गत जिला स्तर की तीन प्रमुख पहल – नियद नेल्लानार 2.0, बस्तर मुन्ने और स्वस्थ बस्तर – का अभिसरण चार प्रमुख राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय विकास फ्रेमवर्क – एस.डी.जी. 2030, विकसित छत्तीसगढ़ @2047, आकांक्षी जिला एवं विकासखंड कार्यक्रम से किया गया है। इसका उद्देश्य अतिरिक्त संसाधनों के बिना बेहतर समन्वय के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और अधोसंरचना जैसे क्षेत्रों में ठोस एवं मापनीय परिणाम प्राप्त करना है।
‘बस्तर अंजोर’ अंत्योदय से सर्वोदय की भावना पर आधारित एक दूरदर्शी पहल है, जो बस्तर को समावेशी, सतत एवं परिणामोन्मुख विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, मंत्रिपरिषद के सदस्य, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित थे।

कोरबा
भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव के खिलाफ सिरकीखुर्द की महिला उपसरपंच ने खोला मोर्चा, कलेक्टर से की न्याय की गुहार
प्रधान पाठकों पर सरकारी भर्ती छिपाने, निर्वाचित महिला प्रतिनिधि का अपमान करने और मध्याह्न भोजन में जातिवाद फैलाने का गंभीर आरोप
कोरबा/दीपका/सिरकीखुर्द। विकासखंड पाली के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिरकीखुर्द में शासकीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाने और सामाजिक समरसता को तार-तार करने का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत सिरकीखुर्द की महिला उपसरपंच एवं स्थाई शिक्षा समिति की अध्यक्ष कमलेश्वरी दिव्या ने स्कूल के प्रधान पाठकों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जिला कलेक्टर से कड़ी कार्रवाई की मांग की है ।

उपसरपंच ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन के निर्देशों को ठेंगा दिखाकर गरीब युवाओं को रोजगार से वंचित किया गया और स्कूलों को जातिगत भेदभाव का अखाड़ा बना दिया गया है ।
प्रमुख आरोप, जिन पर उपसरपंच ने उठाए तीखे सवाल
भर्ती में पारदर्शिता का अभाव (गरीब युवाओं से धोखा)
जिला प्रशासन द्वारा DMF मद से शासकीय कन्या आश्रम और मा.पू.मा.शा. गांधीनगर सिरकीखुर्द में मानदेय भृत्य भर्ती के निर्देश दिए गए थे, आरोप है कि दोनों स्कूलों के प्रधान पाठकों ने इस सूचना को पूरी तरह छिपा कर रखा, न तो मुनादी कराई गई न ही सूचना पटल पर जानकारी दी गई, जिससे गाँव के 8वीं पास गरीब मजदूर युवाओं को फॉर्म भरने का मौका ही नहीं मिला ।
मध्याह्न भोजन में शर्मनाक जातिगत भेदभाव
बैठक के दौरान यह घिनौना सच सामने आया कि पूर्व माध्यमिक शाला सिरकीखुर्द में मध्याह्न भोजन बनाने वाली SC (अनुसूचित जाति) वर्ग की महिला को अन्य वर्ग की महिलाओं द्वारा जातिगत मानसिकता के कारण काम से हटा दिया गया। प्रधान पाठक ने भी इस पर कोई निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की, जो उनकी जातिगत मानसिकता को दर्शाता है ।
चुनी हुई जनप्रतिनिधि (महिला) का घोर अपमान
30 जून 2026 को बुलाई गई स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) की बैठक को नियमों के ताक पर रखकर गैर-कानूनी तरीके से संचालित किया गया। बैठक में उपसरपंच कमलेश्वरी दिव्या के चयन प्रक्रिया और उनके परिवार पर भद्दी व अशोभनीय टिप्पणियां की गईं, जो एक निर्वाचित महिला और संपूर्ण समाज का अपमान है ।
लिखित साक्ष्य और कॉल रिकॉर्डिंग जिला प्रशासन को सुपुर्द
उपसरपंच कमलेश्वरी दिव्या ने बताया कि उनके पास संकुल प्रभारी और प्रधान पाठकों की मनमानी लापरवाही और जातिगत भेदभाव को स्वीकार करने वाली कॉल रिकॉर्डिंग वीडियो और ठोस गवाह मौजूद हैं, जिसे उन्होंने कलेक्टर को सौंप दिया है ।
कलेक्टर से की गई प्रमुख मांगें
नियमों की अवहेलना करने वाले और जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाले दोषी प्रधान पाठकों को तत्काल निलंबित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए ।
DMF मद से हो रही भृत्य भर्ती की वर्तमान प्रक्रिया को निरस्त कर पुनः पारदर्शिता के साथ तारीख बढ़ाकर आवेदन मंगाए जाएं ताकि हर गरीब पात्र युवा को मौका मिले ।
स्कूलों और मध्याह्न भोजन समूहों में OBC, SC ST और GENERAL सभी समुदायों की महिलाओं की बराबर भागीदारी सुनिश्चित की जाए ।
स्कूल प्रबंधन समितियों (SMC) का पुनर्गठन कर सामाजिक समरसता का माहौल बनाया जाए ।
उपसरपंच व अध्यक्ष स्थाई शिक्षा समिति ग्राम के कमलेश्वरी दिव्या ने सौंपे गए ज्ञापन में बताया कि एक अनुसूचित जाति समाज से आती हूँ और गाँव की चुनी हुई प्रतिनिधि हूँ जब हमारे साथ और स्कूल के गरीब बच्चों के हक के साथ ऐसा खिलवाड़ होगा, तो मैं चुप नहीं बैठूंगी। मुझे जिला प्रशासन और कलेक्टर पर पूरा भरोसा है, कि वे 250-300 बच्चों के भविष्य और गरीब युवाओं के हित में शीघ्र न्याय करेंगेमें इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि ग्राम की चुनी हुई उप-सरपंच के नाते ग्राम के समग्रा विकास के लिए सही कार्य करने को लेकर ग्राम में विचार व प्रस्ताव की बात रखती हूं, तो मेरे प्रस्ताव का अवेहलना कुछ कथाकथित लोगों के द्वारा की जाती है ।

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