कोरबा
बालको के तीन दिवसीय सुरक्षा महाकुंभ से सुरक्षित कार्यशैली को मिला बढ़ावा
बालकोनगर। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) में तीन दिवसीय सुरक्षा महाकुंभ कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस आयोजन ने संगठन के भीतर सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रतिबद्धता को चिह्नित किया है। तीन दिवसीय कार्यशाला में 3000 से अधिक कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में मनाने का काम किया। ऐसे आयोजनों से संगठन के भीतर सुरक्षा-प्रथम संस्कृति को बढ़ावा मिलता है। बालको अपने कर्मचारियों, व्यावसायिक साझेदारों और आस-पास के समुदायों को सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूक कर रहा है। सुरक्षा महाकुंभ में शॉप फ्लोर, सुरक्षा और संगठन के विभिन्न अन्य विभागों के कर्मचारियों और व्यावसायिक साझेदारों को शामिल किया गया। आयोजन में चेतना कार्यक्रम सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक था जो पांच मूलभूत सुरक्षा युक्तियों पर केंद्रित है। कार्यक्रम में विभिन्न सुरक्षा दिशानिर्देशों पर प्रशिक्षण प्रदान किया गया। उपस्थित प्रतिभागियों को कंपनी सिद्धांतों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की प्रतिज्ञा दिलाकर प्रोत्साहित किया। इस कार्यशाला ने सभी के लिए सुरक्षित आवाजाही, कार्यों और अनुभवों को सुनिश्चित करते हुए संयंत्र परिसर के भीतर एक सुरक्षित वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम में सिक्योरिटी और सेफ्टी के 35 समर्पित व्यक्तियों के उत्कृष्ट योगदान का भी सम्मान किया गया। जिन्हें सुरक्षा नायक के रूप में मान्यता दी गई थी। इन व्यक्तियों को अपने-अपने विभागों के भीतर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने, दूसरों कर्मचारियों को कार्यस्थल में सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए पहचाना गया। सुरक्षा महाकुंभ के महत्व पर बात करते हुए बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि बालको मेंकर्मचारियों की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता में से एक है जो हमारी कार्य संस्कृति का हिस्सा है। सुरक्षा प्रशिक्षण से लेकर अत्याधुनिक डिजिटल समाधानों तक हम अपने कार्यों, लोगों के व्यवहार और परिचालन क्षेत्र के सभी पहलुओं में सुरक्षा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए समर्पित हैं। सुरक्षा महाकुंभ कार्यक्रम हमारी अटूट प्रतिबद्धता का एक प्रमाण है जो सकारात्मक परिवर्तन की सुविधा प्रदान करते हुए सभी के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर सुरक्षा-प्रथम मानसिकता विकसित करता है। बालको संयंत्र परिसर के साथ-साथ चोटिया कोयला खदान में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए समान कार्यक्रम आयोजित करके सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बढ़ावा दिया। कार्यक्रम में लगभग 100 से अधिक कर्मचारियों और व्यावसायिक भागीदारों ने भाग लिया। इस आयोजन के दौरान उपस्थित लोगों को सुरक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया गया और कोयला खनन और प्रबंधन में उनकी भूमिकाओं से संबंधित आवश्यक सुरक्षा दिशानिर्देशों पर प्रशिक्षण दिया किया गया। कंपनी अपने कर्मचारियों और समुदाय के सदस्यों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए सुरक्षा-केंद्रित कार्यक्रम आयोजित करके हर साल राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह का आयोजन करती हभी मनाती है। बालको सुरक्षित ड्राइविंग पाठ्यक्रम, अग्नि सुरक्षा सत्र और सड़क सुरक्षा जागरूकता के साथ-साथ रेट्रो-रिफ्लेक्टिव सुरक्षा साइनबोर्ड की स्थापना सहित कई सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यशालाओं से कर्मचारियों सहित स्थानीय समुदायों में सुरक्षा जागरूक को बढ़ावा मिला है। मजबूत सुरक्षा संस्कृति का निर्माण करने के लिए कंपनी कई अत्याधुनिक तकनीकों को शामिल किया है। जैसे- ऑगमेंटेड एंड वर्चुअल रिएलिटी आधारित प्रशिक्षण केंद्र, वीडियो एनालिटिक्स, सस्टेनेबेलिटी मोबाइल ऐप और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम जैसे डिजिटलीकरण के माध्यम से कर्मचारियों को सुरक्षा संस्कृति से जोड़ा गया है। सुरक्षा क्षेत्र में बालको अत्याधुनिक सेंट्रलाइज्ड सिक्योरिटी ऑपरेशंस सेंटर की मदद से यातायात एवं सड़क सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला सहित विभिन्न सुरक्षा कार्यों में बेहतर निर्णय लेने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस और डेटा अंतर्दृष्टि का लाभ उठा रहा है। रियल टाइम डेटा की निगरानी, कोयला यार्ड में हॉट स्पॉट डिटेक्शन सिस्टम जैसी परियोजनाओं सहित एंड-टू-एंड डिजिटल डैशबोर्ड की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए थर्मल निरीक्षण का उपयोग करना शामिल है। शॉप फ्लोर में भारी वाहनों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए एलईडी लोगो प्रोजेक्टर का प्रयोग किया जाता है। कार्यस्थल पर सुरक्षा मानदंडों के उत्कृष्ट योगदान के लिए बालको को उल्लेखनीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। अपने सुरक्षा संकल्प कुटुंब परियोजना के लिए 5वीं सीआईआई राष्ट्रीय सुरक्षा अभ्यास प्रतियोगिता में प्रतिष्ठित प्लेटिनम पुरस्कार और ग्लोबल रोड सेफ्टी अवार्ड प्राप्त किया।

कोरबा
धीरेंद्र शास्त्री बोले-जब तक जिएंगे, हिंदुओं को कटने-बंटने-मिटने नहीं देंगे:मुस्लिम परिवार समेत 583 लोगों की घर वापसी, पंडाल में झूपने लगे महिलाएं-पुरुष
कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा में 583 लोगों की ‘घर वापसी’ हुई। इनमें एक मुस्लिम परिवार भी शामिल है, जिन्होंने सनातन धर्म अपनाया है। वहीं, दरबार में महिलाएं और पुरुष झूमते नजर आए।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण कराने वालों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि, जब तक जिएंगे, हिंदुओं को न कटने देंगे, न बंटने देंगे और न मिटने देंगे। उन्होंने यह भी बताया कि लालच में आकर जिन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर दूसरा मजहब अपनाया था, उनमें से सैकड़ों लोग अब ‘घर वापसी’ कर रहे हैं।

धीरेंद्र शास्त्री बोले-जब तक जिएंगे, हिंदुओं को कटने-बंटने-मिटने नहीं देंगे।

मुस्लिम परिवार समेत 583 लोगों की घर वापसी।

दावा है कि दरबार में भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों का इलाज किया गया।
कथा के चौथे दिन लगा दिव्य दरबार
दरअसल, कोरबा के ढपढप में 5 दिवसीय हनुमंत कथा का आयोजन किया गया है। आज चौथे दिन पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दिव्य दरबार में जनसैलाब उमड़ पड़ा। चौथे दिन 2 लाख से ज्यादा लोग पहुंचे थे।
दावा है कि दरबार में भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों का विशेष इलाज किया गया। पर्चा लिखकर लोगों की समस्याओं का समाधान किया। पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मंत्रोच्चार शुरू करते ही, दरबार में मौजूद कई महिला-पुरुष असामान्य व्यवहार करने लगे। कुछ लोग जमीन पर लोटते और झूमते हुए दिखाई दिए।
जरूरतमंदों को दो रुपए – धीरेंद्र शास्त्री
दरबार के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक गरीब बुजुर्ग की मदद के लिए यजमानों और जनप्रतिनिधियों से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि, लोग नाचने वाली स्त्रियों पर तो पैसे लुटाते हैं, लेकिन जरूरतमंदों की मदद के लिए भी आगे आना चाहिए।

मंत्रोच्चार शुरू करते ही, दरबार में मौजूद कई महिला-पुरुष असामान्य व्यवहार करने लगे।
धीरेंद्र शास्त्री ने बुजुर्ग की आर्थिक मदद की
बुजुर्ग ने धीरेंद्र शास्त्री को बताया कि, वो पाली मुनगाडीह का रहने वाला है। अपने घर से पैदल सुबह निकला था। इस दरबार में शामिल हो गया। उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जिस पर धीरेंद्र शास्त्री ने तत्काल 50 हजार दिए।
वहीं, सामने बैठे वीआईपी लोगों को आर्थिक मदद करने को कहा। जिसके बाद कुल 1 लाख 20 हजार रुपए बुजुर्ग को दिए गए। इसके बाद उन्होंने अपने टीम के वाहन से सुरक्षित घर तक छोड़ने को कहा।
धीरेंद्र शास्त्री बोले- हालेलुया वालों की ठठरी मारी जाएगी
इससे पहले कोरबा में ही बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण पर कहा था कि, यहां आसपास हालेलुया वाले भी रहते हैं, उनकी भी ठठरी मारी जाएगी। अब यह खेल नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि जो लोग राह भटक गए हैं, उनकी घर वापसी कराई जाएगी। इसके अलावा उन्होंने खुद को छत्तीसगढ़ का भांचा बताया।

कोरबा
श्री सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर, आर.पी. नगर फेज-2 में हनुमान जन्मोत्सव पर विविध धार्मिक आयोजन
कोरबा। श्री सिद्धेश्वर हनुमान मंदिर, आर.पी. नगर फेज-2 में भगवान श्री हनुमान के पावन जन्मोत्सव के अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

मंदिर समिति द्वारा दी जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल को दोपहर 2:00 बजे से अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ किया जाएगा, जो निरंतर चलता रहेगा।

2 अप्रैल को प्रातः 9:00 बजे से 12:00 बजे तक विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया जाएगा। इसके पश्चात दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे तक हवन कार्यक्रम संपन्न होगा। हवन के उपरांत दोपहर 1:30 बजे से श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया है।

मंदिर समिति ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करें एवं कार्यक्रम को सफल बनाएं।

कोरबा
एसईसीएल मुख्यालय के 4 कर्मियों को सेवानिवृत्ति पर भावभीनी विदाई दी गयी
बिलासपुर/कोरबा। 31.03.2026 को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों को 30 . 03.2026 को निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, निदेशक (वित्त) डी सुनील कुमार, निदेशक तकनीकी (योजना/परियोजना) रमेश चन्द्र महापात्र एवं विभिन्न विभागाध्यक्षों, श्रम संघ प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में मुख्यालय बिलासपुर स्थित सीएमडी कक्ष में शाल, श्रीफल, पुष्पहार से सम्मानित कर समस्त भुगतान का चेक प्रदान कर भावभीनी विदाई दी गयी।

सेवानिवृत्त होने वालों में सी.डी.एन सिंह महाप्रबंधक (वित्त) वित्त विभाग, जी श्यामला राव महाप्रबंधक (मा.सं) कल्याण विभाग, राम विनय कुमार, महाप्रबंधक (उत्खनन) उत्खनन विभाग, राज, सुरक्षा उप निरीक्षक- सुरक्षा विभाग शामिल रहे।
शीर्ष प्रबंधन ने अपने उद्बोधनों में कहा कि सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारी अपनी कार्यकुशलता और समर्पण से एसईसीएल को सफलता की नई ऊँचाइयों तक लेकर गए हैं। उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। प्रबंधन ने सभी के उज्ज्वल भविष्य और सुखद पारिवारिक जीवन की कामना की।
सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी कम्पनी के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि एसईसीएल में कार्य करना गौरव का विषय रहा। उन्होंने कहा कि यहाँ के अधिकारी और कर्मचारी कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करते हैं और किसी भी जिम्मेदारी को पूर्ण निष्ठा से निभाते हैं।
कार्यक्रम का चालन एवं सेवानिवृत्त कर्मियों का परिचय प्रबंधक (राजभाषा) श्रीमती सविता निर्मलकर ने सफलतापूर्वक किया।

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