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शपथ ग्रहण से पहले मोदी संभावित कैबिनेट से मिले:100 दिन के रोडमैप पर चर्चा की, पेंडिंग योजनाओं को पूरा करने का निर्देश दिया

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नई दिल्ली , एजेंसी। नरेंद्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण के पहले पीएम आवास पर रविवार को सुबह 11.30 बजे मंत्रिमंडल के संभावित मंत्रियों से मुलाकात की। इस दौरान अपनी सरकार के विजन को साझा किया और शुरुआती 100 दिन के रोडमैप पर चर्चा की।

मोदी ने कहा कि इस रोडमैप को लागू करना है और पेंडिंग योजनाओं को भी पूरा करना है। उन्होंने कहा कि जो आपको विभाग मिलेगा, उसके कामों का आप जल्द से जल्द पूरा करें। अपने टारगेट की चिंता करें।

पीएम की चर्चा में 63 नेता पहुंचे
पीएम ने अपने आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर संभावित मंत्रियों के साथ हाई-टी का आयोजन किया। इनमें राजनाथ सिंह, अमित शाह, नितिन गडकरी, मनोहर लाल खट्टर, सर्बानंद सोनोवाल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, धर्मेंद्र प्रधान, डॉ. एस जयशंकर, जयंत चौधरी, किरण रिजिजू, अनुप्रिया पटेल, रवनीत सिंह बिट्टू, जितिन प्रसाद, पंकज चौधरी, राजीव (ललन) सिंह, संजय सेठ, शोभा करंदलाजे, गिरिराज सिंह, रामदास अठावले, नित्यानंद राय, बीएल वर्मा, अन्नपूर्णा देवी, अर्जुन राम मेघवाल, पीयूष गोयल, राव इंद्रजीत सिंह, अजय टम्टा, जीतन राम मांझी, चिराग पासवान, निर्मला सीतारमण, जी किशन रेड्डी, बंदी संजय आदि शामिल हैं। इस दौरान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी मौजूद रहे।

खट्‌टर बोले- मोदी सिर्फ उन्हीं को बुलाते हैं, जिन्हें कैबिनेट में रखना चाहते हैं
बैठक खत्म होने के बाद हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और करनाल से सांसद मनोहर लाल खट्‌टर ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी की परंपरा है कि वे चाय पर चर्चा के लिए अपने आवास पर लोगों को बुलाते हैं। वे सिर्फ उन्हीं को निमंत्रण देते हैं, जिन्हें वे कैबिनेट में रखना चाहते हैं। कुछ औपचारिकताएं थीं, जो मैंने पूरी कर ली हैं। उन्होंने हम सभी को अगले 24 घंटे तक दिल्ली में रहने को कहा है। हरियाणा से मेरे अलावा राव इंद्रजीत सिंह और कृष्ण पाल गुर्जर भी मौजूद थे।

सबसे पहले जानते हैं, क्या है मोदी का 100 दिन वाला एक्शन प्लान…

10 साल ट्रेलर देखा, पिक्चर अभी बाकी है…
23 फरवरी 2024 को दिल्ली में PM मोदी ने मंत्रियों से कहा था कि अगले 5 साल का रोडमैप और 100 दिनों का एक्शन प्लान बनाएं। अफसर आचार संहिता के दौरान इस पर होमवर्क करते रहे। 5 अप्रैल को राजस्थान के चूरू में एक चुनावी रैली में खुद मोदी ने कहा, ’10 साल में हमने जो काम किया वो ट्रेलर था, पूरी पिक्चर अभी आनी बाकी है।’

दैनिक भास्कर ने BJP में अपने सूत्रों से इस प्लान की डीटेल हासिल की। इसके मुताबिक इन मुद्दों पर 100 दिनों में एक्शन लेने की तैयारी थी…

1. वन नेशन-वन इलेक्शन
2. यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)
3. मुस्लिम आरक्षण खत्म करना
4. प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट में बदलाव
5. दिल्ली मास्टर प्लान
6. वक्फ बोर्ड खत्म करना
7. महिला आरक्षण
8. 70 साल के बुजुर्गों के लिए मुफ्त इलाज
9. पेपर-लीक नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कानून
10. CAA का कम्प्लीट इम्प्लिमेंटेशन
11. यूनियन बजट
12. न्यू एजुकेशन पॉलिसी
13. जनगणना (2026 में परिसीमन होना है)
14. लखपति दीदी की संख्या 3 करोड़ तक ले जाना
15. PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
16. किसानों के लिए ऑयल सीड्स और पल्सेज पर ध्यान
17. भारत को तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना
18. रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म पर ध्यान देना
19. स्केल, स्कोप, स्पीड, स्किल के एजेंडे पर काम करना

अब डीटेल में जानिए, क्या है मोदी का 100 दिन वाला प्लान
‘चुनाव से एक महीने पहले मैंने 5 साल का प्लान बनवाया और उसमे से 100 दिन का प्लान निकालने को कहा। इस पर प्रायोरिटी के हिसाब से काम होगा। प्लान में मैंने 25 दिन और जोड़ दिए हैं। देशभर के युवा रोडमैप पर सुझाव दे रहे हैं। मैंने तय किया है कि 100 दिनों के अलावा 25 दिन युवाओं के सुझाव पर अमल के होंगे।’

20 मई को दिए एक इंटरव्यू में PM मोदी ने ये बात कही थी। लोकसभा चुनाव से पहले ही मोदी ने साफ कर दिया था कि वे नई सरकार के अगले 100 दिनों के प्लान पर काम कर रहे हैं। 100 दिन के एजेंडे में एग्रीकल्चर, फाइनेंस, डिफेंस में जरूरी सुधार और जल्द पूरे किए जाने वाले प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। सरकार के टॉप एजेंडे में शामिल सुधारों में सेना में थिएटर कमांड तैयार करना भी है।

नतीजों में भाजपा को बहुमत न मिलने से 100 दिनों के रोडमैप पर असर संभव
भाजपा इन चुनावों में 400 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रही थी। 100 दिन का एक्शन प्लान भी इसी उम्मीद पर बनाया गया था कि भाजपा को बहुमत मिलेगा। वहीं, नतीजों में भाजपा 400 सीटें तो दूर, बहुमत (272) के आंकड़े से भी दूर रह गई।

NDA को बहुमत तो मिला, लेकिन साथ मिले गठबंधन के दो मजबूत साथी TDP और JDU। इनके बिना फिलहाल बहुमत नहीं है और इन्हें इस 100 दिन के प्लान में से कई चीजें मंजूर नहीं हैं।

नीतीश कुमार और चंद्रबाबू नायडू कई बार यूनिफॉर्म सिविल कोड, CAA-NRC, प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को खत्म करने, मुस्लिम रिजर्वेशन और वन नेशन-वन इलेक्शन पर विरोध दर्ज कराते रहे हैं। हालांकि, भाजपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी, गठबंधन धर्म का पालन करेगी, लेकिन किसी की भी गैर-जरूरी मांगों के आगे नहीं झुकेगी।

वहीं, भाजपा ने प्लान-B पर भी काम शुरू कर दिया है और छोटे दलों समेत इंडिपेंडेंट कैंडिडेट्स से बात की जा रही है।

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सेंसेक्स 1470 अंक गिरकर 74,564 पर बंद:निफ्टी में 488 अंकों की गिरावट; मेटल, ऑटो और बैंकिंग शेयर्स सबसे ज्यादा टूटे

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मुंबई,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के बीच शेयर बाजार में आज यानी शुक्रवार 13 मार्च को लगातार तीसरे दिन गिरावट रही। सेंसेक्स 1470 अंक (1.93%) की गिरावट के साथ 74,564 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 488 अंक (2.06%) की गिरावट रही, ये 23,151 पर आ गया है। आज मेटल, ऑटो और बैंकिंग शेयर्स में सबसे ज्यादा गिरावट रही।

सेंसेक्सस के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट और केवल 2 में तेजी रही।

सेंसेक्सस के 30 शेयरों में से 28 में गिरावट और केवल 2 में तेजी रही।

बाजार गिरने की 3 मुख्य वजहें

  1. अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध से सप्लाई चेन बिगड़ गई है।
  2. कच्चे तेल के दाम बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल और महंगाई बढ़ेगी।
  3. अमेरिका और एशियाई बाजारों में गिरावट का असर भारत पर।

एशियाई बाजार अपडेट

  • साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 1.72% गिरकर 5,487 पर बंद हुआ।
  • जापान का निक्केई इंडेक्स 1.16% गिरकर 53,819 पर बंद हुआ।
  • हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स 0.98% की गिरावट के साथ 25,465 पर बंद हुआ।
  • चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.82% नीचे 4,095 के स्तर पर बंद हुआ।

अमेरिकी बाजार में 12 मार्च को गिरावट रही

  • डाउ जोन्स 739 अंक (1.56%) गिरकर 46,677 के स्तर पर बंद हुआ।
  • टेक बेस्ड इंडेक्स नैस्डैक कंपोजिट 1.78% गिरकर 22,311 पर बंद हुआ।
  • S&P 500 इंडेक्स 103 अंक (1.52%) गिरकर 6,672 पर बंद हुआ।

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार ट्रेड कर रहा

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आज तेजी है। ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। इससे पहले 9 मार्च को ब्रेंट क्रूड 120 डॉलर पर पहुंच गया था।

कल सेंसेक्स 829 अंक गिरकर बंद हुआ था

शेयर बाजार में में यानी 12 मार्च को लगातार दूसरे गिरावट रही थी। सेंसेक्स 829 अंक की गिरावट के साथ 76,034 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी 228 अंक की गिरावट रही।

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10g सोना ₹1,904 गिरकर ₹1.58 लाख का हुआ:1kg चांदी ₹7,813 सस्ती होकर ₹2.60 लाख पर आई, ईरान जंग का असर

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नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से चांदी-सोने में आज 13 मार्च को गिरावट रही। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,904 रुपए गिरकर 1.58 लाख रुपए पर आ गया है। इससे पहले 12 मार्च को सोना 1,60 लाख रुपए प्रति 10g था।

वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 7,813 रुपए घटकर 2.60 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले गुरुवार को इसकी कीमत 2.68 लाख रुपए किलो थी।

  • ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं।
  • खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है।
  • लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं।
  • पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।

ऑल टाइम हाई से 1.25 लाख रुपए गिरी चांदी

इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2026 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 17,722 रुपए सस्ता हो चुका है।

वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 44 दिन में चांदी 1,25,445 लाख रुपए सस्ती हो गई है।

कीमतें गिरने की 3 बड़ी वजहें

  • ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम: अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों ने फेडरल रिजर्व की ओर ब्याज दरों में जल्द कटौती की संभावना कम कर दी है। माना जा रहा है कि मार्च की मीटिंग में दरें नहीं घटेंगी।
  • कैश पर बढ़ा भरोसा: अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग से मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशक सोने के बजाय नकद हाथ में रखना पसंद कर रहे हैं। इससे सोने की मांग पर असर पड़ा है।
  • महंगा तेल और शेयर बाजार की गिरावट: मिडिल ईस्ट जंग की वजह से तेल की कीमतें भी बढ़ रही हैं, जिससे दुनियाभर के शेयर बाजारों में बिकवाली हो रही है। इसका असर कमोडिटी मार्केट पर भी हो रहा है।

एक्सपर्ट व्यू- अभी सोने-चांदी में निवेश से बचें

कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक लोग शेयर बाजार में हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए सोने-चांदी में मुनाफा वसूली कर रहे हैं। इससे सोने-चांदी के दामों में गिरावट है।

अजय केडिया अनुसार आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। इसके चलते सोना 1.50 लाख और चांदी 2.50 लाख रुपए तक आ सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए।

ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान

1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।

2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।

असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके

मैग्नेट टेस्ट: असली सिल्वर चुंबक से नहीं चिपकती। अगर चिपक जाए तो फेक है।

आइस टेस्ट: सिल्वर पर बर्फ रखें। असली सिल्वर पर बर्फ बहुत तेजी से पिघलेगी।

स्मेल टेस्ट: असली सिल्वर में गंध नहीं होती। फेक में कॉपर जैसी गंध आ सकती है।

क्लॉथ टेस्ट: चांदी को सफेद कपड़े से रगड़ें। अगर काला निशान आए तो असली है।

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लखनऊ में राहुल बोले- मोदी साइकोलॉजिकली खत्म:अमेरिका के आगे नरेंदर ने सरेंडर कर दिया, वह अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं

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लखनऊ,एजेंसी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे। उन्होंने दलित वोटर्स को रिझाने के लिए जहां डॉक्टर आंबेडकर और कांशीराम की सराहना की, वहीं भारत-अमेरिका डील, पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा पर जमकर निशाना साधा।

राहुल ने कहा, केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी का नाम एपस्टीन फाइल में है। उनकी बेटी की कंपनी में जॉर्ज सोरोस की फंडिंग है। नरेंद्र मोदी साइकोलॉजिकली खत्म हो गए हैं। नरेंद्र मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे, वे अमेरिका का काम कर रहे हैं। जब मैं यह बात संसद में बोलने जा रहा था तो नरेंद्र मोदी जी भाग कर निकल गए।

नरेंद्र मोदी ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी से समझौता कर दिया है। क्योंकि अब अमेरिका तय कर रहा है कि हम तेल कहां से लेंगे? एनर्जी सेक्टर के हालात अभी और खराब होंगे।

नेहरू जिंदा होते तो कांशीराम यूपी के CM होते

राहुल ने कहा, कांशीरामजी समाज में बराबरी की बात करते थे। कांग्रेस अपना काम पूरी तरह से नहीं कर सकी। यही कारण है कि कांशीरामजी सफल हुए। अगर कांग्रेस ठीक तरह से काम करती तो कांशीरामजी कभी सफल न होते।

उन्होंने कहा,

अगर जवाहर लाल नेहरू जी जिंदा होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। लेकिन आज भाजपा ने समाज को 15 और 85 बांट दिया गया है। फायदा सिर्फ 15% वालों को मिल रहा है। 50% को अलग-अलग कर दिया गया।

राहुल ने यह भी कहा,

नरेंद्र मोदी संविधान की विचाराधारा नहीं मानते: संविधान में जितने भी दलित महापुरुष हुए, उनकी आवाज इसमें है। सावरकरजी, नाथूराम गोडसे की आवाज इस संविधान में नहीं है। नरेंद्र मोदीजी कुछ भी कह लें, इस संविधान की विचारधारा को नहीं मानते हैं।

सारा माल अमेरिका का आएगा: मोदी ने कहा कि 9 लाख करोड़ का माल अमेरिका से खरीदेंगे। मैं पूछना चाहता हूं, हमारे बिजनेस क्या करेंगे। कपास, सोया, फल, बादाम, अखरोट अब अमेरिका के किसान यहां बेचेंगे। अमेरिका में बड़े- बड़े खेत हैं। सारा माल उनका आ जाएगा, सब खत्म कर देंगे।

यूपी में कांग्रेस को मर मिटने वाले 100 लोग चाहिए: अब हमारे पास बड़ा मौका है। हिंदुस्तान की राजनीति बदलें। कांग्रेस को सिर्फ यूपी में 100 लोग ऐसे मिल जाएं जो कह दें कि मर जाएंगे, पीछे नहीं हटेंगे। हमारे लक्ष्य को नहीं छोड़ेंगे। काम हो जाएगा हमारा।

कार्यकर्ताओं को नसीहत- राहुल गांधी जिंदाबाद करने से फायदा नहीं है

राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नसीहत भी दी। दरअसल, राहुल जब बोलने के लिए उठे तो कार्यकर्ता राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। तब उन्होंने ने कहा, राहुल गांधी जिंदाबाद करने से कोई फायदा नहीं है। इससे कुछ होता नहीं है। होता कैसे है? जो मन बना लेता है कि ये जो हो रहा है, उसे मैं एक्सेप्ट नहीं करने वाला हूं।

लखनऊ एयरपोर्ट से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान आने के लिए राहुल गांधी सफेद रंग की कार में बैठे।

लखनऊ एयरपोर्ट से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान आने के लिए राहुल गांधी सफेद रंग की कार में बैठे।

एयरपोर्ट पर अजय राय और पार्टी के सभी बड़े लीडर राहुल गांधी को रिसीव करने पहुंचे थे।

एयरपोर्ट पर अजय राय और पार्टी के सभी बड़े लीडर राहुल गांधी को रिसीव करने पहुंचे थे।

कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठाएगी कांग्रेस

कांग्रेस ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का प्रस्ताव पास किया है। तय हुआ है कि राहुल गांधी के माध्यम से संसद में यह मांग उठाई जाएगी।

यह पहली बार था, जब राहुल गांधी कांशीराम जयंती से 2 दिन पहले कोई बड़ा इवेंट लखनऊ में करने आए थे। कार्यक्रम में करीब 4 हजार लोग शामिल हुए। दलित वोटर्स की सियासत में कांग्रेस का यह बड़ा कदम माना जा रहा है।

यूपी में कांग्रेस-सपा का गठबंधन

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन था, तब यूपी में NDA की सीटों की संख्या 36 पर सिमट गई थी। महागठबंधन 43 सीटों पर जीतने में कामयाब रहा। महागठबंधन इसी सफलता को 2027 के विधानसभा चुनाव में भी दोहराना चाहता है।

सपा भी कांशीराम जयंती को PDA दिवस के रूप में मनाने का ऐलान कर चुकी है। 15 मार्च को यूपी के 75 जिलों में पार्टी के जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम होंगे।

यूपी में कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां

कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं। दलित राजनीति में बसपा का प्रभाव अब भी बरकरार है, खासकर जाटव समुदाय में उसका भावनात्‍मक जुड़ाव मजबूत है। दूसरी ओर, भाजपा ने भी पिछले 10 बरसों में दलित वर्गों के बीच संगठन मजबूत किया है और सरकारी योजनाओं के जरिये समर्थन बढ़ाया है, इसलिए कांग्रेस के लिए इस वोट बैंक में बड़ी जगह बनाना आसान नहीं है।

बसपा-भाजपा के दबाव में, इसका दूसरी पार्टियों को फायदा

वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं- मौजूदा समय में बसपा सबसे कमजोर हालत में है। लोकसभा में उसका कोई भी सदस्य नहीं। यूपी के विधानसभा में मात्र एक विधायक है। राज्यसभा में भी दिसंबर के बाद उसके जीरो होने का आसार हैं।

सपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को लगता है कि कमजोर बसपा का वो विकल्प बन सकती हैं। दोनों पार्टियां बसपा को भले ही कमजोर कहने से बचती हैं, लेकिन मायावती पर भाजपा के दबाव में काम करने के आरोप लगाकर इसी कमजोरी को उजागर करने की कोशिश करती हैं।

क्या बसपा वाकई कमजोर है?

हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं- ऐसा नहीं है। मायावती भले ही खुद बहुत ज्यादा नहीं निकलती हों, लेकिन उनका संगठन जमीनी स्तर पर सक्रिय है। पार्टी के कोऑर्डिनेटर खामोशी से संगठन का काम कर रहे हैं। 9 अक्टूबर, 2025 को लखनऊ में कांशीराम की पुण्यतिथि पर उमड़ी लाखों की भीड़ इसकी बानगी भी है। बसपा का कोर वोटर फिर तेजी से जुड़ रहा।

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