कोरबा
अदानी के संरक्षक एवं राजस्थान सरकार के पोषक की तरह काम कर रही है भाजपा सरकार : डॉ महंत
आगामी 18 वर्ष तक कोयला भंडारण फिर नये खदान के नाम पर 8 – लाख पेड़ो की बली क्यों.?
कोरबा। छत्तीसगढ़ विधानसभा नेता प्रतिपक्ष डॉ.चरणदास महंत ने भाजपा विष्णुदेव सरकार पर कोल खनन को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि, छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार अदानी के संरक्षक एवं राजस्थान सरकार के पोषक की तरह काम कर रही है। नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत ने कहा कि, विधानसभा में पारित प्रस्ताव का उल्लंघन करके हसदेव अरण्य क्षेत्र में परसा एवं केते एक्सटेंशन नाम की नई कोयला खदानें खोलने का काम पुलिस संरक्षण में कराया जा रहा है।राजस्थान की कोयले की पूरी आवश्यकता पहले से चालू खदान, पी.ई.के.बी. से पूरी हो रही। नए खदान की जरूरत नहीं है, 2022 में कांग्रेस सरकार ने केंद्र को पत्र लिख कर परसा कोल ब्लॉक का आवंटन रद्द करने की मांग की थी कांग्रेस सरकार के रहते 16 जुलाई 2023 को सुप्रीम कोर्ट में भी शपथ पत्र दाखिल कर परसा या केते एक्सटेंशन या किसी अन्य खदान की आवश्यकता को गलत बताया था।
नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत का कहना है कि, आदिवासी होते हुए भी वे आदिवासी क्षेत्रों को उजाड़ने और हसदेव अरण्य क्षेत्र जैसे महत्वपूर्ण जंगल को काटने की अनुमति दे रहे हैं, जबकि राजस्थान की सारी कोयला आवश्यकता पहले से चालू खदान से पूरी हो रही है और नए खदान की कम से कम 18 साल कोई आवश्यकता नहीं है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम को हसदेव अरण्य क्षेत्र में चार कोल ब्लॉक आवंटित है।परसा ईस्ट और केते बासन खदान को मिलाकर जो खदान बनाई गई है पीईकेबी इसकी उत्पादन क्षमता 21 मिलियन टन की जा चुकी है। पिछले साल ही वहां 18 मिलियन टन कोयला का उत्पादन हुआ। राजस्थान के कुल 4340 मेगावाट के पावर प्लांट हसदेव अरण्य कोल फील्ड के कोल ब्लॉक पर आश्रित है। वर्तमान में इनकी वार्षिक कोयला आवश्यकता लगभग 18 मिलियन टन है। यह आंकड़ा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण और पावर प्लांट के प्लांट लोड फैक्टर के आधार पर निकाला गया है। स्पष्ट रूप से यह पूरी आवश्यकता चालू खदान पी.ई.के.बी. से पूरी हो रही है और वर्तमान में इस खदान में 300 मिलियन टन से अधिक कोयला है अर्थात 18 साल का कोयला मौजूद है। ऐसे में एक नई खदान परसा जिसकी भूमि से विस्थापित होने वाले लोगों ने रायपुर तक पदयात्रा की थी उसे खोलना आदिवासियों को उजाड़ना और लगभग दो लाख पेड़ों को काटना सर्वथा अनुचित है।
उपरोक्त कारणों से परसा कोल ब्लॉक में खनन को प्रारंभ करना केवल और केवल अदानी के हितों को लाभ पहुंचाने के लिए हो रहा है। राजस्थान को इसकी कोई आवश्यकता नहीं और छत्तीसगढ़ को इसका भारी नुकसान होगा। अदानी की संरक्षक विष्णुदेव साय सरकार ने दो कदम और आगे बढ़ाते हुए पी.ई.के.बी. कोल ब्लॉक तथा परसा कोल ब्लॉक के अतिरिक्त 1760 हेक्टेयर के एक तीसरे कोल ब्लॉक केते एक्सटेंशन के लिए भी 02 अगस्त 2024 को पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु जनसुनवाई करवा चुकी है। कांग्रेस सरकार ने अपने कार्यकाल में केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए जनसुनवाई नहीं होने दिया था। केते एक्सटेंशन 1760 हेक्टेयर में से 99 प्रतिशत क्षेत्र घना जंगल है, यह पूरा का पूरा क्षेत्र हसदेव बांगो का जल ग्रहण क्षेत्र है और इसमें 8 लाख से अधिक पेड़ है। ऐसे महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र को नष्ट करके कोयले का उत्पादन करना पूरी तरह से गलत है। पूरे देश में ऐसे सैकड़ों कोल ब्लॉक मौजूद है जहां बिना घना जंगल काटे प्रचुर मात्रा में कोयला उपलब्ध है।
कोरबा
कोरबा में जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा:डीबीएल कंपनी के गेट पर धरना-प्रदर्शन, मरम्मत के आश्वासन के बाद खत्म आंदोलन
कोरबा। कोरबा में कुदमुरा-स्यांग और बरपाली-दादरपारा मार्ग की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने बुधवार को डीबीएल कंपनी के गेट पर प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज, कोरबा के जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो के नेतृत्व में यह धरना और गेट जाम आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से सफल रहा।

इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा, महिलाएं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सुबह से ही जिल्गा और दादरपारा के पास स्थित डीबीएल के प्लांट/यार्ड के मुख्य गेट पर ग्रामीण इकट्ठा हो गए थे। उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर सड़क मरम्मत और धूल-कीचड़ से निजात दिलाने की मांग करते हुए नारेबाजी की।

कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में कुदमुरा से स्यांग रोड और बरपाली से दादरपारा मार्ग की तत्काल मरम्मत शामिल थी। इसके अलावा, धूल और कीचड़ की समस्या से राहत, भारी वाहनों का नियंत्रित संचालन और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।
ग्रामीणों का कहना था कि डीबीएल कंपनी के भारी वाहनों के लगातार आवागमन से ये दोनों मार्ग पूरी तरह जर्जर हो गए हैं, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को रोजाना परेशानी हो रही है।

मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद, आंदोलन को सफल मानते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।
जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जा चुका था
आंदोलन के दौरान, जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो ने ग्रामीणों की समस्याओं को कंपनी प्रबंधन के सामने गंभीरता से रखा। आंदोलन से पहले जिला प्रशासन को भी इस संबंध में ज्ञापन सौंपा जा चुका था। इसके बाद कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।
चर्चा के दौरान, कंपनी प्रबंधन ने ग्रामीणों की समस्याओं को स्वीकार किया और सड़क मरम्मत तथा आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र शुरू करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त, आमजन को हो रही परेशानियों को कम करने के लिए नियमित पानी छिड़काव, सड़क समतलीकरण और सुरक्षा संबंधी आवश्यक उपाय करने पर भी सहमति बनी।
मांगे पूरी होने पर आंदोलन खत्म किया
ग्रामीणों ने बताया कि यह आंदोलन पूरी तरह से जनहित और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर किया गया था। कंपनी प्रबंधन द्वारा सकारात्मक पहल और मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद, आंदोलन को सफल मानते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।
छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो ने आंदोलन में शामिल सभी ग्रामवासियों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
कोरबा
केमिकल से पकाए फलों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई:कोरबा में 10 किलो आम और 4 दर्जन केले फेंके, नमूने लैब भेजे गए
कोरबा। कोरबा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बुधवार को फल दुकानों पर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान सड़े-गले और रसायन से पकाए गए फल मिलने पर 10 किलो आम और 4 दर्जन केले मौके पर ही नष्ट कर दिए गए। यह कार्रवाई आयुक्त खाद्य सुरक्षा दीपक अग्रवाल के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई।

विभाग की टीम ने राजा फ्रूट सेंटर, राजेश फ्रूट सेंटर, शारदा फ्रूट सेंटर और सर्वमंगला फ्रूट सेंटर सहित कुल 11 संस्थानों की जांच की। कई दुकानों में फलों को पकाने के लिए प्रतिबंधित कार्बाइड के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। अधिकारियों ने फलों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।

फलों की जांच के लिए विशेष अभियान शुरू
खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि यह विशेष अभियान 27 मई से 29 मई 2026 तक पूरे छत्तीसगढ़ में चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को गुणवत्तापूर्ण फलों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
गर्मी के मौसम में आम, केला और तरबूज जैसे फलों की मांग बढ़ जाती है। इसका फायदा उठाकर कुछ व्यापारी फलों को रसायन से पकाकर बेचते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

रसायन से पके फल बेचने वालों को सख्त चेतावनी
कार्रवाई के दौरान दुकानदारों को सख्त हिदायत दी गई कि वे केवल प्राकृतिक तरीके से पके फल ही बेचें। उन्हें फलों पर रंग या वैक्स का इस्तेमाल न करने और कोल्ड स्टोरेज व दुकानों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया। बिना लाइसेंस के कारोबार करने वाले विक्रेताओं को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
विभाग ने आम जनता से अपील की है कि फल खरीदते समय सावधानी बरतें। अस्वाभाविक रूप से चमकदार, एक जैसे रंग वाले या संदिग्ध फल न खरीदें। किसी भी दुकान पर गड़बड़ी दिखने पर टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी, सैंपलिंग असिस्टेंट और नगर निगम का अमला शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि अभियान अगले दो दिनों तक शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की मंडियों और थोक बाजारों में भी जारी रहेगा।
जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी दुकानदारों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कोरबा
सुशासन तिहार 2026-गांव-गांव पहुंच रही राहत और विश्वास की नई किरण
कृषक नंद किशोर राजवाड़े को मिली डिजिटल किसान किताब, शासन की पहल से मिली बड़ी सुविधा
कोरबा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में सुशासन तिहार 2026 आमजनों की समस्याओं एवं मांगों के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रहा है। इस पहल के जरिए लोगों को घर बैठे सुविधाओं का लाभ मिल रहा है, साथ ही शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी सहज रूप से प्राप्त हो रही है। सुशासन तिहार न केवल शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत कर रहा है, बल्कि लोगों के जीवन में नई उम्मीद और खुशियाँ भी ला रहा है।

इसी क्रम में कोरबा जिले के ग्राम कनकी निवासी कृषक नंद किशोर राजवाड़े की समस्या का भी त्वरित समाधान किया गया। लंबे समय से खेती-किसानी से जुड़े श्री राजवाड़े के पास लगभग ढाई से तीन एकड़ कृषि भूमि है, जहां वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं। खेती के साथ-साथ शासकीय योजनाओं एवं कृषि संबंधी प्रक्रियाओं में बढ़ती डिजिटल व्यवस्था के कारण उन्हें डिजिटल किसान किताब की आवश्यकता महसूस हो रही थी। डिजिटल किसान किताब नहीं होने से उन्हें कई जरूरी कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था तथा वे विभिन्न योजनाओं एवं सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे थे।
सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत ग्राम में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया। शिविर में पहुंचकर उन्होंने अपनी समस्या जिला प्रशासन के अधिकारियों के समक्ष रखी और डिजिटल किसान किताब नहीं होने से हो रही परेशानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों द्वारा उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराई गई और उन्हें त्वरित रूप से डिजिटल किसान किताब उपलब्ध कराई गई।
डिजिटल किसान किताब प्राप्त होने पर श्री राजवाड़े ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें कृषि संबंधी दस्तावेजों एवं योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रहा है। गांव में ही शिविर लगने से आमजन को सीधे लाभ मिल रहा है और समस्याओं का त्वरित समाधान हो रहा है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन कोरबा के प्रति आभार व्यक्त किया।
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