कोरबा
भगवत गीता में छुपा हुआ है जीवन का हर गुर – पंडित विजय शंकर मेहता
कोरबा। पितृमोक्षार्थ गयाश्राद्ध अंतर्गत मातनहेलिया परिवार द्वारा जश्न रिसोर्ट में आयोजित 8 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिन पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि भगवत गीता वह ग्रंथ है, जिसमें जीवन का गुर छुपा हुआ है। भगवत कथा सुनने से न पाप धुलता है और न ही पूण्य मिलता है, हमारा आज सुधरता है। पाप-पूण्य तो कर्म पर अधारित होते हैं। हम जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही पाप और पूण्य मिलेगा। उन्होंने प्रथम दिन भागवत गीता का जीवन में महत्व प्रहसन पर जीवन प्रबंधन के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि भगवत कथा सुनने से पहले प्रत्येक श्रोता को इन 5 बातों को करना आवश्यक है। भरोसा से कथा सुनें, कथा सुनने की ललक हो, शिकायत चित्त को विराम दीजिए, मौन रहें एवं संकल्प लें। भागवत कथा सुनने से जीवन में बदलाव दिखना चाहिए, यही कथा की सार्थकता है।


सच्चिदानंद रूपाय विश्वोत्पत्यादिहेतवे तापत्रय विनाशाय श्री कृष्णाय वयं नम: अर्थात भगवान श्रीकृष्ण जो सच्चिदानंद हैं, वे सत्य, चेतना एवं आनंद स्वरूप हैं, हम नमन करते हैं। ये वही भगवान हैं, जो तीन प्रकार के तापों आध्यात्मिक, आधिदैविक, आधिभौतिक का नाश करने में सक्षम हैं। पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि यह गीता का प्रथम श्लोक है और रोजाना इस मंत्र का जाप करने से चिंताएं और परेशानियां कम होती है और यह मंत्र प्राकृतिक आपदाओं से भी रक्षा करता है।
जीवन में धर्म नहीं तो दिखावे का कोई मतलब नहीं
भगवत कथा के प्रथम दिन पंडित विजय शंकर मेहता ने उपस्थित श्रोतागणों को भगवत महात्म्य का वर्णन किया और कहा कि जीवन धर्म के बिना अधूरा है। उन्होंने कहा यदि जीवन धर्म से नहीं जुड़ा, तो दिखावे का कोई मतलब नहीं। भागवत का अर्थ है-भक्ति, ज्ञान, वैराग्य एवं त्याग। गीता ग्रंथों का सार है और जीवन का व्यवहार भी। उन्होंने कहा कि आज परिश्रम का विशेष महत्व है। सामाजिक जीवन में पारदर्शिता जरूरी है। पारिवारिक जीवन में प्रेम, करूणा, दया और संवेदना जरूरी है। निजी जीवन में पवित्रता जरूरी है। दाम्पत्य जीवन में सम्य और संतुष्टि जरूरी है।
अशांति के कारण
पंडित विजय शंकर मेहता ने कहा कि मनुष्य के जीवन में अशांति के कई कारण हैं। सम्पत्ति, संबंध, स्वास्थ्य एवं संतान अशांति के कारण हैं। सम्पत्ति, संबंध (पारिवारिक रिश्ता), स्वास्थ्य की चुनौति से आप बाहर निकल जाएंगे, लेकिन संतान की अशांति के कारणों से आप निकल नहीं पाएंगे। संतान प्राप्ति और संतान सुख प्राप्ति अलग-अलग हैं। आप ऐसा संस्कार डालें कि संतान सुख प्राप्त हो। ये सब कारण अशांति के नगण्य हैं, आप स्वयं सबसे बड़े अशांति के कारण हैं और इसके लिए आप स्वयं को बदलें। भगवत गीता का अध्ययन और श्रवण जीवन में बदलाव लाने का दूसरा नाम है। आज की कथा सुनने जश्न रिसोर्ट में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे।
कल का प्रहसन
पंडित विजय शंकर मेहता कथा के दूसरे दिन 25 अगस्त को कपिल गीता, शिव-सती चरित्र एवं भरत चरित्र पर संगीतमय व्याख्यान देंगे।
मातनहेलिया परिवार का सादर निमंत्रण
आयोजक परिवार ने कथा में कोरबावासियों को सादर आमंत्रित किया है और हृदय से विनम्र अपील की है कि प्रथम बार पंडित विजय शंकर मेहता का सानिध्य प्राप्त हुआ है, उनकी दिव्य वाणी से तथ्यपरक जीवन विज्ञान के एक-एक शब्द में जीवन के गुर छिपे हुए हैं। उनके एक-एक शब्द में जीवन में बदलाव लाने की क्षमता दिखाई देता है। गीता के माध्यम से जीवन में सार्थक बदलाव लाना ही जीवन प्रबंधन गुरू पंडित विजय शंकर मेहता का लक्ष्य है।

कोरबा
अमित जोगी का ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन संपन्न:बालको में मजदूरों के लिए प्रदर्शन, प्रबंधन ने मानी तीन मांगें
कोरबा। कोरबा में जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी का ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन कुछ ही घंटों में संपन्न हो गया। यह आंदोलन बालको में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों के लिए किया गया था। अमित जोगी ने दावा किया कि यह सफल रहा, क्योंकि प्रबंधन ने उनकी तीन प्रमुख मांगें मान ली हैं।
बालको परसाभाटा स्थित गेट के सामने अमित जोगी ने एक टेंट लगाकर प्रदर्शन शुरू किया। उन्होंने वहां मौजूद मजदूरों की समस्याओं को उठाया और उनके साथ गेट की ओर बढ़ने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस बल ने उन्हें रोका, जिससे कुछ देर तक हल्की धक्का-मुक्की चलती रही।

अमित जोगी ने कहा, ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन सफल
मीडिया से बात करते हुए अमित जोगी ने बताया कि उन्होंने अपने पिता अजीत जोगी द्वारा 2004 में बालको में किए गए आंदोलन की तर्ज पर ही मजदूरों के हक में यह संघर्ष किया है।
जोगी ने पुष्टि की कि उनका ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन सफल रहा है। उन्होंने बताया कि बालको प्रबंधन ने उनकी तीन मांगों को स्वीकार कर लिया है।

आंदोलन में शामिल होने से मजदूरों को रोका गया
अमित जोगी ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल होने से मजदूरों को रोका गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रबंधन ने आदेश जारी किए थे कि जो भी इस आंदोलन में शामिल होगा, उसे काम और सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा। जोगी ने कहा कि ऐसी स्थिति में वह खुद बालको की यूनिफॉर्म पहनकर आंदोलन करेंगे।
कोरबा
नम: सामूहिक विवाह:पं.धीरेंद्र शास्त्री के सानिध्य में 108 दिव्यांग व निर्धन कन्याएं बंधेंगी परिणय सूत्र में
01 अप्रैल को ढपढप (बांकीमोंगरा) में होगा आयोजन
108 कन्याओं के नए जीवन में प्रवेश कराने हमें मिल रहा अवसर, यह सौभाग्य की बात-सर्वमंगला मंदिर प्रबंधक एव व्यवथापक
कोरबा। माँ सर्वमंगला देवी मंदिर परिसर दुरपा कोरबा में 2024 में नम: सामूहिक विवाह के सफल आयोजन के बाद इस वर्ष नम: सामूहिक विवाह को बड़ा विस्तार दिया जा रहा है। 01 अप्रैल 2026 को ढपढप (बांकीमोंगरा) में विश्व विख्यात कथा वाचक एवं बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री के सानिध्य में एवं अपना आश्रम सेवा समिति के आयोजकत्व में यह पुण्य कर्म सम्पन्न होगा। इस पुण्यधरा पर 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह होगा और वे नवदाम्पत्य जीवन में प्रवेश करेंगी।
नम: सामूहिक विवाह के प्रभारी, माँ सर्वमंगला देवी मंदिर के प्रबंधक/ व्यवस्थापक ने बताया कि अब तक 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं का पंजीयन हो चुका है। यह हमारा सौभाग्य है कि ईश्वरीय कृपा से यह पुण्यकर्म इस बार ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) में सम्पन्न होगा और नवदम्पत्तियों को शुभ आशीर्वाद देने के लिए विश्व प्रसिद्ध कथा वाचक एवं सनातन धर्म के प्रचारक पंडित धीरेंद्र शास्त्री (पीठाधीश्वर-बागेश्वर धाम) सहित कई लब्ध प्रतिष्ठित एवं विद्वान आचार्यों के साथ प्रदेश के कई राजनीतिक प्रतिभाएं, समाजसेवक अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
ज्ञातव्य हो कि अपना आश्रम सेवा समिति द्वारा ग्राम ढपढप में 27 मार्च से 01 अप्रैल तक श्री हनुमंत कथा का दिव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें अपना सानिध्य प्रदान करने बागेश्वर धाम से पंडित धीरेंद्र शास्त्री पधार रहे हैं। 06 दिवसीय इस दिव्य आयोजन के अंतिम दिन 01 अप्रैल को नम: सामूहिक विवाह का आयोजन होगा, जिसमें 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याएं अपने मन पसंद जीवन साथियों के साथ नव दाम्पत्य जीवन प्रारंभ करेंगी। यह हमारा सौभाग्य है कि इस बार नम: सामूहिक विवाह का विस्तार हो रहा है और 108 कन्याओं का सामूहिक विवाह हो रहा है। पंजीयन अभी जारी है और कन्याओं की संख्या बढ़ सकती है।
कोरबा
ढपढप (बांकीमोंगरा) में 108 दिव्यांग व निर्धन कन्याओं का होगा सामूहिक विवाह, पं. धीरेंद्र शास्त्री के सानिध्य में 01 अप्रैल को भव्य आयोजन
27 मार्च को निकलेगी भव्य कलश यात्रा, 28 मार्च से शुरू होगी श्री हनुमंत कथा, अंतिम दिन 108 कन्याएं बंधेंगी परिणय सूत्र में
कोरबा। कोरबा जिले में धार्मिक आस्था और सामाजिक सेवा का अनूठा संगम देखने को मिलने वाला है। इस वर्ष “नम: सामूहिक विवाह” का आयोजन बड़े और भव्य स्वरूप में किया जा रहा है। 01 अप्रैल 2026 को बांकीमोंगरा क्षेत्र के ग्राम ढपढप में 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं का सामूहिक विवाह विश्व विख्यात कथा वाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के सानिध्य में संपन्न होगा। इस पुण्य आयोजन का आयोजकत्व अपना आश्रम सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है।
मां सर्वमंगला देवी मंदिर परिसर दुरपा कोरबा में वर्ष 2024 में आयोजित नम: सामूहिक विवाह की सफलता के बाद इस बार आयोजन को और व्यापक रूप दिया गया है। इस आयोजन के माध्यम से समाज के जरूरतमंद परिवारों की बेटियों को सम्मानपूर्वक विवाह के बंधन में बांधकर उन्हें नए जीवन की शुरुआत करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
27 मार्च को निकलेगी भव्य कलश यात्रा
धार्मिक आयोजन की शुरुआत 27 मार्च 2026 को भव्य कलश यात्रा के साथ होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं और धर्मप्रेमी शामिल होंगे। कलश यात्रा के माध्यम से पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण का संचार होगा और आयोजन का शुभारंभ किया जाएगा।
28 मार्च से शुरू होगी श्री हनुमंत कथा
कलश यात्रा के अगले दिन 28 मार्च से 01 अप्रैल 2026 तक छह दिवसीय श्री हनुमंत कथा का दिव्य आयोजन किया जाएगा। इस कथा में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर एवं विश्व प्रसिद्ध कथा वाचक पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपना सानिध्य प्रदान करेंगे। कथा के दौरान देशभर से श्रद्धालुओं के बड़ी संख्या में पहुंचने की संभावना है।
01 अप्रैल को होगा 108 कन्याओं का सामूहिक विवाह
कथा के अंतिम दिन 01 अप्रैल को नम: सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याएं अपने मनपसंद जीवन साथियों के साथ परिणय सूत्र में बंधकर नव दाम्पत्य जीवन की शुरुआत करेंगी। इस भव्य समारोह में संत-महात्माओं, विद्वान आचार्यों के साथ प्रदेश के कई जनप्रतिनिधि और राजनीतिक हस्तियां भी शामिल होकर नवदंपत्तियों को आशीर्वाद देंगी।
108 कन्याओं का पंजीयन, संख्या और बढ़ने की संभावना
नम: सामूहिक विवाह के प्रभारी एवं मां सर्वमंगला देवी मंदिर के प्रबंधक/व्यवस्थापक ने बताया कि अब तक 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं का पंजीयन हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है कि ईश्वरीय कृपा से इतने बड़े पुण्य कार्य का आयोजन ग्राम ढपढप (बांकीमोंगरा) में हो रहा है।
उन्होंने बताया कि पंजीयन की प्रक्रिया अभी भी जारी है, इसलिए कन्याओं की संख्या बढ़ने की संभावना भी बनी हुई है। समाज के सहयोग और श्रद्धालुओं के समर्थन से यह आयोजन सेवा, समर्पण और सनातन संस्कृति के प्रचार का एक बड़ा माध्यम बनेगा।
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