छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में 12वीं तक स्टूडेंट्स को फ्री बुक्स
बृजमोहन ने अफसरों को दिए निर्देश
युवाओं को मुफ्त कोचिंग, मैनपाट में बनेगी मॉल रोड
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में 9वीं क्लास के सभी बच्चों को सरकार साइकिल देने जा रही है। वहीं 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राओं को फ्री बुक्स और युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निशुल्क कोचिंग मिलेगी। वहीं राजिम कुंभ मेला भव्य रूप में होगा और पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाएगा। महानदी भवन मंत्रालय शिक्षा और धार्मिक, पर्यटन, संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने बुधवार देर रात तक करीब 6 घंटे तक अफसरों की बैठक ली। उन्होंने अपने विभाग के अफसरों से जानकारी ली और आइडिया पर डिस्कशन किया। कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स भी शुरू करने की बात कही गई है।
भव्य तरीके से होगा राजिम कुंभ मेला
राजिम मंदिर के चारों ओर परिक्रमा पथ बनाने की बात कही है। मंत्री बृजमोहन ने अधिकारियों को राज्य के मेला महोत्सव को बढ़ावा देने के निर्देश भी जारी किए हैं, ताकि उन्हें पर्यटन की तर्ज पर बढ़ावा मिल सके। उन्होंने पर्यटन के प्रचार-प्रसार और विकास को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।
सीजी शिमला-मनाली का मजा इन जगहों पर
मैनपाट जैसे हिल स्टेशन वाले शहरों में शिमला, मनाली के तर्ज पर मॉल रोड बनेगी। सरगुजा के रामगढ़ और चैतुरगढ़ जैसे स्थानों का विकास हिल स्टेशन के रूप में होगा। राज्य के सभी पर्यटन स्थलों और मेले, महोत्सवों के विकास पर विशेष फोकस।
सिरपुर वल्र्ड हैरिटेज साइट में होगा शामिल
रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए प्रदेश में पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर व्यवसाय को बढ़ावा दिया जाएगा। सिरपुर को वल्र्ड हैरिटेज साइट में शामिल कराने का प्रयास करेंगे। राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन में राज्य की छवि को बेहतर बनाने के लिए ‘छत्तीसगढ़ राज्य मार्केटिंग सेल’ की स्थापना होगी। ?
लोगों को अयोध्या ले जाने की तैयारी
भाजपा के घोषणा पत्र में शामिल ‘प्रदेशवासियों को श्री रामलला दर्शन’ को लेकर अधिकारियों को निश्चित कार्ययोजना बनाने के लिए कहा गया है। इसे लेकर आईआरसीटीसी और बस ट्रांसपोट्र्स, होटल मैनेजमेंट सहित राम वन गमन परिपथ योजना पर आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया में कोताही बर्दाश्त नहीं
बृजमोहन अग्रवाल ने स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों से कहा कि छत्तीसगढ़ में बेहतर शिक्षा प्रदान करना हमारा मकसद है। विभागों की भर्ती एवं नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शीं बनाएं। किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि, दोषी पाए जाने पर कठोर कार्यवाही होगी। पिछली भर्ती में बचे हुए चयनित अभ्यर्थियों की काउंसलिंग की प्रक्रिया जल्द शुरू करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सभी स्टूडेंट्स के लिए साइकिल
9वीं कक्षा में सभी वर्ग के विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिल देने की योजना शुरू होने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि उच्च गुणवत्ता के साइकिल निशुल्क वितरित की जाए। स्कूलों में एयर-पम्प की व्यवस्था भी की जाएगी।
12वीं तक के हर स्टूडेंट को मिलेगी बुक्स
विद्यार्थियों को निशुल्क शिक्षा के साथ-साथ निशुल्क पाठ्य पुस्तक भी दी जाएंगी। 12वीं तक के बच्चों को ये सुविधा मिलेगी। मंत्री बृजमोहन ने कहा कि स्कूल के निर्माण और मरम्मत कार्यों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता न हो। सभी निर्माण कार्य समय-सीमा में पूरे हों। बैठक में मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना के तहत अनुसूचित जाति जनजाति के मेधावी छात्रों नियमित कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में मेरिट स्थान पर प्रोत्साहन राशि 15 हजार रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने का निर्णय भी लिया गया।
यूथ को मिलेगी फ्री कोचिंग
अब राज्य में सीए, सीएस, बैंकिंग, रेलवे के साथ-साथ सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्ता पूर्ण नि:शुल्क कोचिंग की व्यवस्था होगी। सैनिक स्कूल को बढ़ावा देंगे, जिससे शिक्षा एवं रोजगार में विस्तार हो सके। शिक्षा मंत्री अग्रवाल ने अधिकारियों को ये भी निर्देश दिया कि नई नियुक्तियों में ध्यान दें। शिक्षकों की पोस्टिंग मेरिट के आधार पर आस-पास के जिले में ही हो, जिससे वे पूरी दक्षता के साथ काम करें।
उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मिले ये निर्देश
राज्य के पूर्व स्थापित 100 कॉलेजों में अंग्रेजी माध्यम के सेक्शन खोलने की कार्ययोजना बनाने के दिए गए निर्देश उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी फाइलें अपने पास 7 दिन से अधिक नही रोक सकेंगे वरना कार्रवाई होगी। रिक्त पदों के लिए भी 7 दिनों के भीतर भर्ती नियम बनाने और विभागों को जल्द सेटअप रिवीजन करने के निर्देश। विश्वविद्यालयों के ग्रेडिंग सुधारने, रिक्त पदों को भरने, कॉमर्स और विज्ञान संकाय को बढ़ावा देने की योजना बनेगी। महाविद्यालयों में बीएससी पाठ्यक्रम में कृषि विज्ञान को सम्मिलित करने की तैयारी के निर्देश दिए। कॉलेजों में सामान्य शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक, नैतिक व आध्यात्मिक शिक्षा को भी बढ़ावा देने पर जोर । अधिकारियों को निर्देश दिए कि सीएसआर के तहत कॉलेजों के लिए फंड जुटाएं और बेहतर व्यवस्था देने का प्रयास करें। धन के अभाव में जो विद्यार्थी कॉलेज नहीं आ पाते हैं उन्हें सरकार बस का किराया या पास उपलब्ध कराएगी, अफसर इसकी स्कीम बनाएंगे।
ये अफसर देर रात तक बैठक में रहे
समीक्षा बैठक में अपर मुख्य सचिव रेणु पिल्ले, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी, पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व सचिव पी. अंबलगन, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के सचिव एवं संचालक राजेश सिंह राणा, लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक सुनील जैन, समग्र शिक्षा प्रबंध संचालक इफ्फत आरा, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव वी.के. गोयल, एवं उच्च शिक्षा आयुक्त शारदा वर्मा, राज्य पर्यटन प्रबंध संचालक जितेन्द्र शुक्ला मौजूद थे।
छत्तीसगढ़
रायपुर : विशेष लेख : मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम
’कम समय में घने जंगल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई दिशा’
- धनंजय राठौर , संयुक्त संचालक
- अशोक कुमार चंद्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी तकनीक एक बेहद प्रभावी और लोकप्रिय विधि बन गई है। जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक केवल 2-3 वर्षों में बंजर भूमि को घने, आत्मनिर्भर सूक्ष्म वनों में बदल देती है। पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में यह विधि 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।
छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। राज्य में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा इस तकनीक के जरिए शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा रही है। मियावकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में लगाया जाता है, जिससे मात्र 3 से 5 वर्षों में घना जंगल तैयार हो जाता है।

’राज्य में तेजी से बढ़ रहा सघन वनीकरण’
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 से मियावकी पद्धति के तहत लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है। वर्ष 2022 में कोटा मण्डल में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार पौधे तथा 0.3 हेक्टेयर में 7 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2023 में कोटा के भिल्मी क्षेत्र में 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधों का रोपण किया गया। वहीं गेवरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में कोटा के उच्चभट्टी क्षेत्र में 3.2 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इसके अलावा रायगढ़ मण्डल के तिलईपाली और छाल क्षेत्रों में कुल 3.75 हेक्टेयर भूमि पर 37 हजार 500 पौधों का सफल रोपण किया गया।
’वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जारी’
वर्तमान में राज्य के कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य तेजी से जारी है। बारनवापारा मण्डल में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत 6 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। कोरबा और रायगढ़ क्षेत्रों में साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के सहयोग से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। वहीं विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत महानदीकोलफील्ड लिमिटेड द्वारा 1.9 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अरपा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरित क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।
’पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बहुआयामी लाभ’
विशेषज्ञों के अनुसार मियावकी वन सामान्य जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह तकनीक वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, भू-जल स्तर सुधारने और मिट्टी संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन वनों की शुरुआती वर्षों में देखभाल की जाती है, जिसके बाद ये जंगल स्वतः विकसित होने लगते हैं। इससे रखरखाव की लागत कम होती है और लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ मिलता है।
’बंजर डंप क्षेत्र से हरित जंगल बनने की ओर गेवरा की प्रेरक पहल’
छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र के 12.45 हेक्टेयर डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।
’जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां तैयार हो रहा जंगल’
कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है और ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष तथा अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पौधों का उगना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक पद्धति और सतत प्रयासों से इस बंजर भूमि को अब हरियाली में बदला जा रहा है।
’वैज्ञानिक तरीके से किया गया पौधारोपण’
डंप क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग किया गया। जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए तथा 3 से 4 फीट ऊंचाई वाले स्वस्थ पौधों का रोपण किया गया। इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए भी उपयुक्त आवास बन सकेगा।
निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता
शुरुआती 2-3 वर्षों की देखभाल के बाद, यह वन पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाता है और इसे किसी उर्वरक या पानी की आवश्यकता नहीं होती है। रोपण के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, खाद, निंदाई-गुड़ाई, घास कटाई और सुरक्षा का कार्य लगातार किया जा रहा है। मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2025 से 2029 तक पांच वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड गेवरा को सौंपा जाएगा।
’हरित भविष्य की ओर मजबूत पहल’
कम जगह में घने जंगल बनाकर शहरों में प्रदूषण (धूल और ध्वनि) को कम करने में सहायक होते हैं। ये वन पारंपरिक वनों की तुलना में 30 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। गेवरा की यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर प्रयासों से बंजर और पत्थरीली भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र सघन हरित वन और जैव विविधता से भरपूर मानव निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।
कोरबा
उद्यमिता विकास प्रशिक्षण हेतु 12 आवेदकों का चयन
कोरबा। रायपुर में आयोजित होने वाले उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 23 अप्रैल 2026 तक इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं सारणीकरण किया गया, जिसके आधार पर कुल 12 आवेदकों का चयन किया गया है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 मई 2026 से प्रारम्भ होना सुनिश्चित है।चयनित आवेदकों की सूची इस प्रकार है-विकास कुमार, कौशलेंद्र सिंह, योगिता धाकड़े, विष्णु सिंह राठिया, आशुतोष मार्वल, अजय डहरिया, गौरव अग्रवाल, अमित कुमार चैहान, स्वप्निल पाटिल, राजकुमारी, वीरेंद्र कुमार तरुण, वंशिका सिंह सेंगर।
प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित आगे की जानकारी चयनित अभ्यर्थियों को समय-समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।
कोरबा
सुरक्षित भविष्य कि ओर एक कदम – अपनी बेटी को दें सुरक्षा का उपहार
कोरबा। बेटियों के उज्जवल भविष्य और स्वस्थ जीवन में कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। यह टीका विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुँह का कैंसर) से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने जिले के सभी पात्र बालिकाओं, अभिभावकों एवं नागरिकों से अपील किया है कि वे पात्र बालिकाओं (जिन किशोरियों ने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो, लेकिन 15 वर्ष का जन्मदिन न मनाया हो ) का एचपीवी का टीकाकरण करावं। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित और डॉक्टर द्वारा प्रमाणित है। एचपीवी टीका राष्ट्रीय टीकाकरण के अंतर्गत मेडिकल कालेज संबद्ध जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
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