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फिर आया हिंडनबर्ग जैसा भूत, इस बार वेदांता हुआ शिकार, शेयर हुआ धड़ाम
मुंबई, एजेंसी। हिंडनबर्ग जैसा भूत फिर वापस आ गया है। इस बार अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता इसका निशाना बन गई। एक रिपोर्ट ने वेदांता के वित्तीय मॉडल और कर्ज के ढांचे पर सवाल उठाए, जिसके बाद निवेशकों में अफरा-तफरी मच गई और शेयर बाजार में वेदांता के शेयर धड़ाम हो गए।
बी.एस.ई. में वेदांता के शेयर इंट्राडे में 7.7 प्रतिशत गिरकर 421 रुपए पर पहुंच गए, वहीं हिंदुस्तान जिंक के शेयर भी 4.8 प्रतिशत टूटकर 415.30 रुपए पर पहुंच गए। इन दोनों कंपनियों के शेयर में इस गिरावट के पीछे अमरीका की एक शॉर्ट सेलर कंपनी की रिपोर्ट बताई जा रही है।
दरअसल हाल ही में अमरीका की शॉर्ट-सेलर कंपनी वायसराय रिसर्च की एक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें उसने वेदांता ग्रुप की वित्तीय व्यवस्था पर सवाल उठाए और इसकी पेरैंट कंपनी वेदांता रिसोर्स की तुलना एक पोंजी स्कीम से कर दी।
क्या कहा रिपोर्ट में?
वायसराय ने कहा कि पूरे ग्रुप की संरचना वित्तीय रूप से अस्थिर है, संचालन में भी दिक्कत है और इसके कर्जदाताओं के लिए यह एक बड़ा लेकिन कम आंका गया जोखिम है। रिपोर्ट में वेदांता रिसोर्स को ‘एक परजीवी होल्डिंग कंपनी’ बताया गया है, जिसका खुद का कोई बड़ा कारोबार नहीं है और यह पूरी तरह वेदांता लिमिटेड से निकाले गए पैसों के सहारे चल रही है।
कंपनी पर आरोप है कि वेदांता रिसोर्स अपनी कर्ज की जरूरतों को पूरा करने के लिए वेदांता लिमिटेड से लगातार पैसा निकाल रही है, जिससे ऑप्रेटिंग कंपनी को बार-बार उधार लेना पड़ रहा है। इससे वेदांता लिमिटेड की असली कीमत घट रही है, जो खुद वेदांता रिसोर्स के कर्जदाताओं के लिए गारंटी है।
रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले तीन सालों में वेदांता लिमिटेड का 5.6 बिलियन डॉलर का फ्री कैश फ्लो घाटा हुआ है, जिसका इस्तेमाल वेदांता रिसोर्स की डिविडैंड मांगों को पूरा करने में हुआ और ये डिविडैंड असली मुनाफे से नहीं, बल्कि नए कर्ज, कैश रिजर्व को घटाकर और तेज वर्किंग कैपिटल से दिए गए। यह पूरी रणनीति पोंजी स्कीम जैसी लगती है। वायसराय ने कहा, “और फिलहाल, वेदांता लिमिटेड के शेयरधारक इसमें फंस गए हैं।”
झूठे आंकड़े और छिपे खर्चे
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि कंपनी ने अपनी संपत्तियों के मूल्य को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया और अरबों डॉलर के खर्चों को बैलेंस शीट से छिपा लिया। एक उदाहरण में कहा गया कि वेदांता रिसोर्स ने वित्त वर्ष 2025 में 4.9 बिलियन डॉलर के कुल कर्ज पर 835 मिलियन डॉलर का ब्याज खर्च दिखाया, जिससे इसका इफैक्टिव इंटरस्ट रेट 15.8 प्रतिशत बनता है, जबकि कंपनी अपने ज्यादातर बॉन्ड्स और लोन पर 911 प्रतिशत की दर दिखाती है।
वायसराय ने कहा, “हम सिर्फ तीन ऐसे हालात देख सकते हैं जिनमें कंपनी का ब्याज खर्च सही माना जाए और ये तीनों ही गंभीर वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं।”
हिंदुस्तान जिंक पर ये हैं आरोप
यहां तक कि हिंदुस्तान जिंक, जो वेदांता की सबसे अच्छी कंपनी मानी जाती है, उसे भी इस रिपोर्ट में नहीं बख्शा गया। वायसराय रिसर्च का कहना है कि वेदांता ने सरकार के साथ हुए शेयरधारक समझौते का उल्लंघन किया है। समझौते के अनुसार वेदांता को एक स्मेल्टर (धातु गलाने का प्लांट) बनाना था, जो उसने नहीं बनाया। इससे सरकार को यह अधिकार मिल गया है कि वह हिंदुस्तान जिंक के शेयर वापस खरीद ले या उन्हें बेच दे। इससे वेदांता को 10.66 बिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता है।
हिंदुस्तान जिंक पर यह भी आरोप है कि उसने 3 साल में 1,562 करोड़ रुपए की ब्रांड फीस चुकाई है, जबकि वह उस ब्रांड का इस्तेमाल नहीं करती। वायसराय रिसर्च ने इसे माइनोरिटी शेयरधारकों के साथ सरासर अन्याय बताया है।
रिपोर्ट में यह चेतावनी दी गई है कि वेदांता ग्रुप ताश के पत्तों का घर है, जो अस्थिर कर्ज, लूटी गई संपत्ति और झूठे खातों पर बना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी का प्रस्तावित डिमर्जर सिर्फ समूह के दिवालियापन को कई कमजोर कंपनियों में फैला देगा और हर कंपनी पर कर्ज का बोझ होगा।
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बुनियादी उद्योगों का उत्पादन मार्च में 0.4% घटा, पांच माह की पहली गिरावट
नई दिल्ली,एजेंसी। कोयला, कच्चे तेल, उर्वरक और बिजली के उत्पादन में गिरावट के कारण मार्च में आठ बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। पांच माह में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन पहली बार घटा है। फरवरी, 2026 में, आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 2.8 प्रतिशत बढ़ा था।
वित्त वर्ष 2025-26 में बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 4.5 प्रतिशत बढ़ा था।

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बिंदी-तिलक विवाद में Lenskart को झटका, डूबे 4500 करोड़!
मुंबई, एजेंसी। देश की बड़ी आईवियर कंपनी में से एक Lenskart को बिंदी, तिलक से जुड़ा विवाद काफी महंगा पड़ गया। सोमवार को कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट आई है, जिससे इसकी मार्केट वैल्यूएशन में करीब 4,500 करोड़ रुपए की कमी आ गई।
विवाद की वजह कंपनी की एक पुरानी इंटरनल ग्रूमिंग पॉलिसी बनी, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस पॉलिसी में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद ऑनलाइन विरोध तेज हो गया और कंपनी के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी।

शेयर में गिरावट
BSE पर कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 5% तक गिरकर 508.70 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और यह 533.70 रुपए के आसपास बंद हुआ।
गिरावट के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन घटकर लगभग 88,331 करोड़ रुपए रह गई, जो पहले करीब 92,872 करोड़ रुपए थी यानी एक ही सत्र में करीब 4,540 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बाद में आंशिक सुधार के साथ वैल्यूएशन में कुछ बढ़त भी दर्ज की गई।
कंपनि ने दी थी सफाई
इस विवाद पर कंपनी के फाउंडर Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और मौजूदा पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में किसी भी धार्मिक पहनावे या प्रतीकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और इस गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी।
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बंगाल की पहचान बचाने की लड़ाई है यह विधानसभा चुनाव, PM मोदी का बड़ा दावा
झाड़ग्राम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को राज्य की पहचान बचाने की लड़ाई बताते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर मूल निवासियों के बजाय ‘घुसपैठियों’ के पक्ष में राजनीति करने का आरोप रविवार को लगाया। मोदी ने आदिवासी बहुल झाड़ग्राम जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ”घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की सरकार’ बनाना चाहती है और मतदाताओं से इसे सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ”यह चुनाव इस भूमि की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए है। यह बंगाल की पहचान को बचाने के लिए है। आज बंगाल को अपनी पहचान खोने का डर है।” उन्होंने आरोप लगाया, “तृणमूल जिस रास्ते पर चल रही है वह बहुत खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस ‘घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की और सरकार बनाना चाहती है। एक ऐसी सरकार जो बंगाल की जनता के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करने के बजाय केवल घुसपैठियों के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करेगी।”
मोदी ने दावा किया कि ऐसी सरकार के लिए सबसे बड़ी बाधा पश्चिम बंगाल के आम लोग होंगे। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस की घुसपैठियों वाली सरकार के लिए, अगर कोई शत्रु है, तो वे यहीं बैठे भाई-बहन होंगे, जो घुसपैठियों के शत्रु होंगे।” प्रधानमंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष राज्य के सभी समुदायों और क्षेत्रों में फैल गया है। उन्होंने कहा, “इसलिए, बंगाल के हर समुदाय, हर वर्ग, हर क्षेत्र ने इस बार ठान लिया है और तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया है।”
मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने और भ्रष्टाचार व जबरन वसूली की व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, “अगर किसी को घर बनाना है, तो उसे तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट पर निर्भर रहना पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और विधायक आपकी समस्याओं की परवाह नहीं करते। वे अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।”
प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस नेता राज्य के कई हिस्सों में आदिवासियों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन पर तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने कब्जा कर लिया है।” पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। झाड़ग्राम में 23 अप्रैल को मतदान होगा।
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