देश
मोदी बोले-बिरसा मुंडा के घर जाने वाला मैं पहला PM:6 दशक तक राज करने वाली कांग्रेस ने आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़ा था
सूरत,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को गुजरात पहुंचे। उन्होंने कहा- मैं देश का पहला पीएम हूं, जो भगवान बिरसा मुंडा के घर गया था। उनके परिवार के लोगों के साथ मेरा मिलना जारी है। उन्होंने आगे कहा कि देश में 6 दशक तक राज करने वाली कांग्रेस ने आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़ा था। यहां कुपोषण, स्वास्थ, सुरक्षा, शिक्षा का अभाव रहा।
पीएम ने इससे पहले सूरत में बन रहे मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का जायजा लिया। इसके बाद नर्मदा जिले के डेडियापाडा पहुंचे और देवमोगरा मंदिर में पंडोरी माता की पूजा की।
पंडोरी माता को गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान के आदिवासी समुदाय अपनी कुलदेवी मानते हैं। पीएम ने डेडियापाडा में 4 किमी लंबा रोड शो भी किया। इस दौरान आदिवासी समुदाय के हजारों लोग सड़क किनारे नजर आए। इसके बाद उन्होंने 9700 करोड़ के कई प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और उद्घाटन किया।
मोदी ने देवमोगरा मंदिर में पूजा की

पीएम ने पंडोरी माता की आरती की।

पीएम ने पंडोरी माता को पीले वस्त्र चढ़ाए।

प्रधानमंत्री ने पंडोरी माता को श्रृंगार सामग्री चढ़ाई।
डेडियापाडा में पीएम मोदी के रोड शो की तस्वीरें…

पीएम ने 4 किमी लंबा शो किया।

रोड शो के दोनों तरफ आदिवासी नृत्य करते रहे।
सूरत में बिहार के लोगों से मुलाकात करेंगे
प्रधानमंत्री दिल्ली जाने से पहले सूरत एयरपोर्ट पर बिहार के लोगों से मुलाकात करेंगे। बिहारी समुदाय के लोग उनका स्वागत करेंगे। एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल और हर्ष सांघवी भी मौजूद रहेंगे और प्रधानमंत्री का अभिवादन करेंगे। अनुमान है कि बिहार से जुड़े करीब 10 से 15 हजार लोग इस स्वागत कार्यक्रम में शामिल होंगे।
मोदी बोले- NDA ने हमेशा आदिवासी समाज के लोगों ने शीर्ष पदों पर बिठाया
मोदी बोले- NDA ने हमेशा आदिवासी समाज के लोगों ने शीर्ष पदों पर बिठाया है। छत्तीसगढ़ के सीएम राज्य का कायाकल्प कर रहे हैं। उड़ीसा सीएम जनजातीय समाज के हमारे माझी जी उड़ीसा का विकास कर रहे हैं।
हमने कई राज्यों में आदिवासी सीएम दिए। भाजपा ने कई राज्यों में आदिवासी को जगह दी। मंगूभाई पटेल एमपी के राज्यपाल हैं। सोनोवाल जी शिपिंग मिनिस्ट्री संभाल रहे हैं।
मोदी ने बच्चे से कहा- आपको चिट्ठी लिखूंगा
भीड़ में मौजूद बच्ची की लाई पेंटिंग एसपीजी जवानों से लेने का कहा..साथ ही बच्चे से कहा- मैं आपको चिट्ठी लिखूंगा।
मोदी बोले- गुजरात के आदिवासियों की पेंटिंग, कलाकृति खास
मोदी ने कहा- भाजपा ने वन उपज पर एमएसपी बढ़ाई, श्री अन्न, मोटे अनाज को हम बढ़ावा दे रहे हैं। हमने गुजरात वन बंधु योजना शुरू की। जब इसे शुरू किया था तो महिनों तक अलग-अलग आदिवासी समाज के लोग मेरा अभिवादन करने आते थे।
अब इसे जनजातीय योजनाओं के तौर पर और विस्तृत और बड़ा किया जा रहा है। जनजातीय इलाकों में हॉस्पिटल, डिस्पेंसरी, क्लिनिक खोले जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्थानीय भाषा को अहमियत दी जा रहे है। बच्चे अब स्थानीय भाषा में पढ़ सकेंगे। गुजरात के आदिवासियों की पेंटिंग, कलाकृति खास है।
मोदी बोले- मैं देश का पहला पीएम हूं, जो भगवान बिरसा मुंडा के घर गया था
मोदी ने कहा- दुनिया में तिरंगे की शान बढ़ाने में आदिवासी बेटी-बेटों का योगदान है। अब हर बड़ी प्रतियोगिता में आदिवासी खिलाड़ी निकल रहे हैं। भारत की महिला क्रिकेट टीम में हमारी जनजातीय बेटी ने भूमिका निभाई। जनजातीय इलाकों में स्पोर्ट्स फेसिलिटी बढ़ाई जा रही है।
भाजपा- वंचित को वरियता के नियम पर काम करती है। केंद्र की कई योजनाओं को आदिवासी वर्गों के पास जाकर लॉन्च करते हैं। आयुष्मान योजना झारखंड के आदिवासी इलाके में लॉन्च की गई थी। मैं देश का पहला पीएम हूं, जो भगवान बिरसा मुंडा के घर गया था। उनके परिवार के लोगों के साथ मेरा मिलना जारी है।
पहले जहां साइंस स्कूल नहीं था, आज वहां 10 हजार से ज्यादा स्कूल
मैं बच्चों को समझाता था शिक्षा ही प्रगति का रास्ता था। आज गुजरात के आदिवासी पट्टे में पहले जहां साइंस स्कूल नहीं था, आज वहां 10 हजार से ज्यादा स्कूल हैं। 2 दर्जन साइंस कॉलेज , आर्ट्स, कॉमर्स कॉलेज बने हैं।
गुजरात में 2 ट्राइवल यूनिवर्सिटी भाजपा ने बनवाई। 20 साल पहले जो स्टूडेंट्स जो मुझसे मिले आज उनमें कई डॉक्टर, इंजीनियर हैं।
मोदी ने कहा- भाजपा सरकार ने मंत्रालय बनाए, कांग्रेस ने भुला दिए
पीएम ने कहा, आदिवासी कल्याण भाजपा की प्राथमिकता है। हमने ये परेशानी खत्म करने का फैसला लिया है। 1947 में देश आजाद हुआ, लेकिन इनकी स्थिति नहीं सुधरी थी। आदिवासी समाज का नाम भगवान राम से भी जुड़ा है। लेकिन कांग्रेस ने इनके विकास के लिए कुछ नहीं किया। पहली बार जब अटल बिहारी पीएम बने, भाजपा की सरकार बनी, तब आदिवासियों के लिए मिनिस्ट्री बनाई गई। कांग्रेस ने इन मंत्रालय को भुला दिया।
पीएम ने कहा, कांग्रेस ने आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़ा
पीएम मोदी ने कहा,’आज श्री गोविंद गुरु के नाम से जनजातीय भाषा संवर्धन केंद्र की स्थापना की गई है। यहां भील, बसावा, गरासिया, कोंकिणी जैसी जनजातीय भाषा की बोलियों और गीतों को यहां संरक्षित किया जाएगा। देश में 6 दशक तक राज करने वाली कांग्रेस ने आदिवासियों को उनके हाल पर छोड़ा था। यहां कुपोषण, स्वास्थ, सुरक्षा, शिक्षा का अभाव रहा। आदिवासी क्षेत्रों में कनेक्टिवटी नहीं रही, यहीं उनकी पहचान बन गई थी।
पीएम ने कहा- स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज का योगदान
पीएम मोदी ने कहा, ‘स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी समाज के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। आजादी के बाद ये काम होना चाहिए था। लेकिन कुछ ही परिवारों को आजादी का क्रेडिट देने में इन लोगों को भुलाया गया।’ उन्होंने कहा, ‘पहले बिरसा मुंडा को याद नहीं किया जाता था। हमने तय कि हमारी अगली पीढ़ी को पता चले कि बिरसा मुंडा ने हमारे लिए क्या किया है। इसलिए हमने देश में कई ट्राइबल म्यूजियम बनाए जा रहे हैं। मैं छत्तीसगढ़ गया था वहां मैंने शहीद वीर नारायण सिंह म्यूजियम का शिलान्यास किया।’
पीएम ने कहा- आदिवासी समाज ने देश का मान बढ़ाया
पीएम ने कहा, ‘मैं तो बनारस का सांसद हूं,वो संत कबीर की धरती है। उनका मेरे जीवन में अलग स्थान है। यहां एक लाख परिवारों को पक्के घर दिए गए। एकलव्य मॉडल स्कूलों का शिलान्यास किया गया। ऐसा कई सारी कल्याण योजनाओं के लिए जनजातीय परिवारों को बहुत बधाई।’
उन्होंने कहा, ‘2021 में भगवान बिरसा मुंडा जयंती को हमने जनजातीय गौरव बनाने की पेशकश की थी। ये हमारे भारत की चेतना का अभिन्न हिस्सा रहा है। देश के स्वाभिमान, सम्मान, स्वराज की बात आने पर जनजातीय समाज सबसे आगे खड़ा मिला। आदिवासी समाज से निकले नायिका-नायिकाओं ने देश का मान बढ़ाया। मोदी ने गुजरात, असम, एमपी, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ के आदिवासी लीडर्स के नाम गिनाए।’
देश
नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।
खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”
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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”
बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।
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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत
कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे।
ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।
इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।
तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया।
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