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छत्तीसगढ़

नड्डा करेंगे नेताओं की मॉनिटरिंग, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस:सांसद-विधायकों को मिले 5 अहम मंत्र, भ्रष्टाचार से दूर रहें, जनता से जुड़े रहें, कांग्रेस ने बताया नौटंकी

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रायपुर,एजेंसी। अंबिकापुर में चल रहे भारतीय जनता पार्टी का प्रशिक्षण शिविर खत्म हो चुका है। मैनपाट में 3 दिनों तक जनता के चुने हुए नेता इस प्रशिक्षण शिविर में शामिल रहे। शिविर में सरकार के सभी मंत्री, सांसद और विधायकों ने संगठन के बड़े नेताओं की बातों को सुना।

राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, शिव प्रकाश, विनोद तावड़े और वी सतीश जैसे नेताओं की क्लास इन छत्तीसगढ़ के जनप्रतिनिधियों ने अटेंड की। शिविर में नेताओं को खास नसीहत दी गई। एक व्यवहार ठीक रखे दूसरा भ्रष्टाचार से दूर रहे। जेपी नड्डा खुद इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।

मैनपाट में कुछ विधायक वीडियो बनवाते और तस्वीर भी खिंचवाते दिखे, इस पर कांग्रेस ने तंज कसा है। इस पूरे प्रशिक्षण शिविर को लेकर कांग्रेस ने राजनीतिक बयान बाजी भी की।

आखिर तीन दिनों तक पूरी सरकार मैनपाट में क्यों रही ? और क्या कुछ सीखा ? इसका क्या असर होगा पढ़िए इस रिपोर्ट में:-

इस तरह किसी क्लास के स्टूडेंट की तरह सभी नेताओं ने तीन दिन तक ट्रेनिंग ली।

इस तरह किसी क्लास के स्टूडेंट की तरह सभी नेताओं ने तीन दिन तक ट्रेनिंग ली।

तो नेताओं को यहां क्या सिखाया और समझाया गया

संगठन के नेताओं का फोकस इस बात पर था कि नेता ज्यादा से ज्यादा जनता से जुड़ें। जनता के बीच उनका व्यवहार ऐसा हो कि लोग भारतीय जनता पार्टी से कनेक्ट रहें। भ्रष्टाचार की वजह से सरकार और पार्टी दोनों की छवि बिगड़ती है। इसे लेकर भी बेहद ध्यान से व्यवहार करने के निर्देश सांसद विधायकों को मिले हैं।

यह भी बताया गया कि विपक्ष को जनता से जुड़े मुद्दों पर आक्रामक तरीके से घेरना होगा। इसके लिए अधिक से अधिक सोशल मीडिया का उपयोग करने की सलाह मिली है।

केंद्र सरकार की योजनाओं का प्रदेश में अधिक से अधिक फायदा मिले इसकी भी जिम्मेदारी दी गई है। नेताओं को यह भी नसीहत दी गई है कि अच्छा काम नहीं किया तो जिम्मेदारी से हटा दिए जाएंगे, कार्रवाई भी होगी।

प्रशिक्षण का उद्घाटन जेपी नड्‌डा ने किया था।

प्रशिक्षण का उद्घाटन जेपी नड्‌डा ने किया था।

सिर्फ सांसद-विधायकों की ट्रेनिंग इस वजह से

इस प्रशिक्षण शिविर में सिर्फ सांसदों और विधायकों को बुलाने का महत्वपूर्ण मकसद था। दरअसल भाजपा सरकार की छवि का मेकओवर चाहती है।

संगठन के बड़े नेताओं से सांसद और विधायकों का इंटरेक्शन करवाया गया। कामकाज को लेकर नसीहतें दी गईं। इसके पीछे का उद्देश्य सरकार के कामकाज को और बेहतर करना था।

सभी सांसदों विधायकों तीन दिन इस अंदाज में रहे।

सभी सांसदों विधायकों तीन दिन इस अंदाज में रहे।

‘घपले घोटाले की शिकायत ना आए’

अलग-अलग सेशन में बार-बार बड़े नेता इस बात को दोहराते हुए नजर आए कि सरकार और पार्टी की छवि जनता के बीच बेहतर बने। छत्तीसगढ़ सरकार काम करती हुई सरकार दिखाई दे, विपक्ष को किसी बात का मुद्दा बनाने का अवसर न मिले, सरकार का एक्शन प्रभावी ढंग से जनता के बीच जाए।

पार्टी को घपले घोटाले में अपने नेता न फंसे इसकी चिंता है, जेपी नड्‌डा ने साफ शब्दों में कहा है कि ऐसी शिकायतें न आने पाएं।

शिवराज सिंह चौहान भी प्रशिक्षण शिविर में आए थे।

शिवराज सिंह चौहान भी प्रशिक्षण शिविर में आए थे।

इस प्रशिक्षण के ये बड़े असर होंगे

  • संगठन और सरकार का कोऑर्डिनेशन- सरकार और संगठन के नेताओं के बीच सामंजस्य बढ़ाने पर जोर दिया गया है। पार्टी के अभियान, आइडियोलॉजी पर काम करने कहा गया है। सरकार के फैसलों को लोग पार्टी से जोड़कर भी देखते हैं, इसलिए ये अहम है।
  • मॉनिटरिंग होगी- नेताओं को इस प्रशिक्षण शिविर से ये बताने का प्रयास किया गया है कि आप जो कर रहे हैं उसकी मॉनिटरिंग हो रही है। इससे नेताओं की जवाबदेही तय होगी।
  • जनता से कनेक्ट- बार बार सभी बड़े नेता लोगों के बीच रहकर काम करने की बात पर फोकस करते दिखे। ये भी कहा गया कि लोगों से व्यवहार अच्छा रखें। ऐसा करने से जनता सरकार और पार्टी से जुड़ाव महसूस कर सकेगी।
  • योजनाओं पर फोकस- केंद्र और राज्य सरकार के पास ऐसी योजनाएं हैं जिससे लोगों को आर्थिक फायदा मिल रहा है। इसके प्रचार पर जोर दिया जाएगा और अधिक लोगों को इन योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
  • चुनावी तैयारी शुरू- इस प्रशिक्षण शिविर के बाद अब भाजपा 2028 में होने वाले विधानसभा चुनावों के हिसाब से प्लानिंग शुरू करने जा रही है। कई तरह के अभियान लॉन्च होंगे, जिनका सीधा असर चुनावी नतीजों पर होगा।
  • एक्टिव दिखेगी सरकार- सरकार अब एक्टिव दिखेगी, कंस्ट्रक्शन के काम, लोगों को योजनाओं के सामान देने की बात हो, या किसी मुद्दे पर फैसला लेना हो इस प्रशिक्षण शिविर के बाद इसके बेहतर होने की स्थिति बनेगी।
  • विपक्ष पर होंगे आक्रामक- सरकार विधानसभा में कांग्रेस पर आक्रामक दिखेगी, सदन के बाहर भी चाहे सोशल मीडिया हो या कोई कार्यक्रम कांग्रेस जैसे विपक्षी दलों को फैक्ट के साथ घेरने की सलाह दी गई है।
तीन दिनों तक नेता योग ध्यान भी करते रहे।

तीन दिनों तक नेता योग ध्यान भी करते रहे।

नड्‌डा के बताए 5 मंत्र

  • समाज, संगठन और सरकार के प्रति जागरूक हो। तैयारी अगले चुनाव की रखिए, आपके काम और व्यवहार का प्रभाव जनता पर होता है।
  • भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक संगठन नहीं, बल्कि विचार, मूल्य और सेवा का एक समर्पित आंदोलन है। जनता को इससे जोड़ना है।
  • सरकार में मौजूद सांसद-विधायकों को संगठन के साथ अधिक तालमेल बैठाकर जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।
  • बूथ स्तर पर पार्टी की उपस्थिति हो केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम आपका है। विपक्ष के दुष्प्रचार का तथ्यपूर्ण जवाब देने की रणनीति हमें अपनानी है।
  • ये प्रशिक्षण केवल औपचारिकता नहीं है, यह नेतृत्व को तैयार करने, संगठन को सशक्त बनाने और कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने का माध्यम है।
  • देश और प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की डबल इंजन वाली सरकार के विकास कार्यों और इनिशिएटिव को छत्तीसगढ़ के गांव–गांव, घर–घर पहुंचाना है।
CM, डिप्टी CM सभी ने बड़े नेताओं के लेक्चर सेशन को ज्वाइन किया।

CM, डिप्टी CM सभी ने बड़े नेताओं के लेक्चर सेशन को ज्वाइन किया।

CM बोले ये सुशासन के लिए कारगर

प्रशिक्षण शिविर पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- 12 सत्र में यह प्रशिक्षण वर्ग चला और समाप्त हुआ। इसमें अलग-अलग विषयों पर संगठन के नेताओं ने अपने व्याख्यान दिए और उपस्थित सभी सांसद विधायकों को मार्गदर्शन मिला।

हम जो जनप्रतिनिधि हैं जनता के सुख दुख में हम साथ खड़े हैं उनका विकास हो, छत्तीसगढ़ का विकास करने के लिए और अपने-अपने क्षेत्र में विकास करने के लिए यह प्रशिक्षण वर्ग बहुत ही कारगर सिद्ध होगा।

उन्होंने कहा पार्टी में मंडल इकाई से लेकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी तक नियमित प्रशिक्षण की परंपरा है, जिससे कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को न केवल संगठन की रीति-नीति, कार्यक्रम और कार्ययोजना की जानकारी मिलती है, बल्कि समसामयिक विषयों पर भी गहन मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

यह प्रशिक्षण हमें अपनी कार्यशैली को और अधिक प्रभावी, समन्वित और जनसेवी बनाने में सहायता करेगा।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इस ट्रेनिंग के बाद संगठन के बीच अच्छे काम होंगे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि इस ट्रेनिंग के बाद संगठन के बीच अच्छे काम होंगे।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बोले ये ऐतिहासिक रहा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने बताया कि सांसदों-विधायकों को पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने समापन सत्र में संबोधित किया।

प्रशिक्षण वर्ग में कुल 12 सत्र हुए जिनमें राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े, वी. सतीश, प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री अरुण साव व विजय शर्मा शामिल रहे। भाजपा के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन का 3 दिन प्रशिक्षण वर्ग में मार्गदर्शन रहा।

देव ने कहा- सांसदों-विधायकों ने एक साथ तीन दिन एक स्थान पर रहकर भाजपा की रीति-नीति की बारीकियों को समझा है। यह बताता है कि भाजपा में एक परिवार का भाव इसी तरह प्रगाढ़ होता है। छत्तीसगढ़ की जो ताकत है, जो क्षमता है, उसके माध्यम से विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण, यहां के जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन की दृष्टि से यह प्रशिक्षण वर्ग ऐतिहासिक रहा है।

कांग्रेस की पोस्ट।

कांग्रेस की पोस्ट।

अमित शाह नहीं आए तो दाल में कुछ काला

प्रशिक्षण शिविर में देश के गृहमंत्री अमित शाह काे भी आना था। मगर ठीक एक दिन पहले खबर आई कि वो नहीं आएंगे। दूसरे कार्यक्रमों की व्यस्तता की वजह से शाह के न आने की बात सामने आई। मगर इस बीच दिल्ली में प्रदेश के राज्यपाल रमेन डेका की शाह से मुलाकात हुई।

इस तस्वीर को सोशल मीडिया पर कांग्रेस ने पोस्ट किया और लिखा- दाल में कुछ काला नहीं पूरी दाल काली है, राज्यपाल मान. रमन डेका जी लगातार जिलों का दौरा कर रहे हैं जोकि सरकार की विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

नई दिल्ली में उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और आज अमित शाह का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम जो कि मैनपाट में आयोजित भाजपा की प्रशिक्षण शिविर में शामिल होना था, उसे रद्द कर दिया। आखिर राज्यपाल ने ऐसा क्या फीडबैक दिया, जिसके चलते गृहमंत्री ने छत्तीसगढ़ भाजपा का निमंत्रण ठुकरा दिया?

कांग्रेस ने विधायकों के फोटोशूट पर उठाए सवाल।

कांग्रेस ने विधायकों के फोटोशूट पर उठाए सवाल।

कांग्रेस ने पूरे कार्यक्रम सवाल उठाए इसे सिर्फ पिकनिक बताया।

कांग्रेस ने पूरे कार्यक्रम सवाल उठाए इसे सिर्फ पिकनिक बताया।

कांग्रेस ने पूछा- भ्रष्ट मंत्रियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

भाजपा के प्रशिक्षण शिविर को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में मंत्री और विधायकों को ठेकेदारों और भ्रष्ट लोगों से दूर रहने की जो हिदायत दी है वह सिर्फ राजनीतिक नौटंकी है भाजपा सरकार से त्रस्त जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है।

बैज ने कहा- जब नड्डा को पता है कि उनके मंत्री और विधायक ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं, कमीशन और भ्रष्टाचार की काली कमाई में भाजपा के मंत्री विधायकों की हिस्सेदारी है।

ऐसे में वह भ्रष्ट मंत्री और विधायकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करते हैं? भाजपा की सरकार बनने के बाद भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है, कोई भी काम बिना लेनदेन के होता नहीं है। इन्हें अब तक पद से क्यों नहीं हटाया गया?

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छत्तीसगढ़

कांग्रेस नेताओं की संतों से मुलाकात और बयानबाजी:सत्ता में रहते धीरेंद्र शास्त्री को भगवान बताया, फिर BJP का एंजेट, रामभद्राचार्य को जगद्गुरु मानने से इनकार

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के चिरमिरी में रामकथा का भव्य मंच सजा था। हजारों की भीड़ मौजूद थी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य कथा सुना रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अचानक कहा, ‘कोई मेरे जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा, तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा।’

उनका यह बयान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें महंत ने कहा था, ‘मैं रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानता, वे BJP के प्रचारक हैं।’ चरणदास महंत के इस बयान के बाद धर्म और राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है।

भाजपा ने इसे सनातन का अपमान बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह बयान राजनीतिक संदर्भ में दिया गया था।

रामभद्राचार्य बोले- ‘कोई मेरे जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा, तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा।’

रामभद्राचार्य बोले- ‘कोई मेरे जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा, तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा।’

संतों से मुलाकात और बयानबाजी के कई किस्से

छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है, जब किसी बाबा, कथावाचक या संत को लेकर राजनीतिक टकराव सामने आया हो। पिछले कुछ सालों में धार्मिक मंच और राजनीतिक बयान कई बार आमने-सामने दिखाई दिए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री को बताया था BJP एजेंट

साल 2025 में भिलाई में आयोजित बागेश्वर बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के दौरान बड़ा विवाद सामने आया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से कहा था कि “अगर हिंदू समाज को जोड़ना अंधविश्वास है, तो ऐसे लोग देश छोड़ दें।”

वहीं, भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा था कि “जब धीरेंद्र शास्त्री पैदा भी नहीं हुए थे, तब से मैं हनुमान चालीसा पढ़ रहा हूं।” उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को BJP का एजेंट तक बता दिया था। इसके बाद BJP ने कांग्रेस पर हिंदू विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया था।

विकास उपाध्याय ने धीरेंद्र शास्त्री को भगवान का स्वरूप बताया था।

विकास उपाध्याय ने धीरेंद्र शास्त्री को भगवान का स्वरूप बताया था।

धीरेंद्र शास्त्री को बताया था भगवान का स्वरूप

इससे पहले साल 2023 में रायपुर में आयोजित बागेश्वर धाम सरकार के दरबार में विकास उपाध्याय आयोजन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। वह मंच पर मौजूद रहे थे और खुले मंच से धीरेंद्र शास्त्री को भगवान स्वरूप कहा था।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था- हिंदू समाज को जोड़ना अंधविश्वास है, तो ऐसे लोगों को देश छोड़ देना चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था- हिंदू समाज को जोड़ना अंधविश्वास है, तो ऐसे लोगों को देश छोड़ देना चाहिए।

संतों के मंच पर भी दिखते रहे कांग्रेस के बड़े चेहरे

कांग्रेस और संत समाज के रिश्ते हमेशा टकराव वाले नहीं रहे हैं। साल 2022 में मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेश बघेल रायपुर में आयोजित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में पहुंचे थे। उन्होंने मंच साझा किया और आशीर्वाद भी लिया था। इस दौरान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे।

सीएम बनने के बाद भूपेश बघेल रितेश्वर महाराज से मिलने भी पहुंचे थे। उस समय रितेश्वर महाराज ने शराबबंदी और गरीबों के हित में काम करने को लेकर उन्हें सलाह दी थी। भूपेश बघेल ने सार्वजनिक रूप से उनका सम्मान भी किया था। हालांकि बाद के सालों में कथावाचकों और धार्मिक मंचों को लेकर कांग्रेस नेताओं के सुर बदलते नजर आए।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कथा वाचक प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लिया था।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कथा वाचक प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लिया था।

महंत बोले- मैं रामभद्राचार्य को जगतगुरु नहीं मानता

दरअसल, 25 मई 2026 को नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और सांसद ज्योत्सना महंत मनेंद्रगढ़ पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत के दौरान चरणदास महंत ने कहा कि रामभद्राचार्य धर्म के नाम पर राजनीति करने आए हैं और वे भाजपा के प्रचारक हैं। मैं उनको न जगतगुरु मानता हूं और न गांव का गुरु मानता हूं।

इसी मुद्दे पर कोरबा सांसद ज्योत्स्ना महंत ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए। मैं काम को ही धर्म मानती हूं। मेरे लिए जनता की सेवा सबसे महत्वपूर्ण है। मैं उनसे मिल चुकी हूं, उनकी कथा भी सुन चुकी हूं, लेकिन जनप्रतिनिधियों को सेवा भाव में रहना चाहिए।

संतों को लेकर महंत के बयान पर भाजपा का पलटवार

वहीं, भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता और सांसद संतोष पांडेय ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत का ‘सनातन विरोधी’ और ‘मानसिक दिवालियापन’ से भरा बयान बताया है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति और गांधी परिवार की गुलामी में अंधे होकर कांग्रेस नेता महंत अपनी मर्यादा खो चुके हैं।

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र जगद्गुरु रामभद्राचार्य और धीरेंद्र शास्त्री समेत देश के प्रतिष्ठित संतों को ‘फर्जी’ कहना और उन्हें ‘बाबा’ कहकर संबोधित करना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। छत्तीसगढ़ की धर्मप्राण जनता संतों का यह अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

राहुल गांधी और सनातन विरोधी नेताओं से तुलना

संतोष पांडेय ने कहा कि चरणदास महंत अब कांग्रेस आलाकमान की नजरों में नंबर वन बनने की होड़ में शामिल हो गए हैं। राहुल गांधी, उदयनिधि स्टालिन और ममता बनर्जी जैसे नेताओं के नक्शे-कदम पर चलते हुए महंत भी ‘सनातन उन्मूलन’ वाली मानसिकता का हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के आकाओं को खुश करने के लिए महंत छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर संतों का अपमान कर रहे हैं।

‘कण-कण में भगवान’ वाले बयान पर तंज

सांसद संतोष पांडेय ने चरणदास महंत के ‘कण-कण में भगवान’ वाले बयान पर कहा कि जिन कांग्रेस नेताओं को भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते समय और रामलला मंदिर के आमंत्रण को ठुकराते समय शर्म तक नहीं आई, आज वही नेता राजनीतिक लाभ के लिए छद्म ज्ञान बांट रहे हैं।

उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस नेताओं के कण-कण में भगवान हैं, तो उन्हें सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने वाले संतों और कथावाचकों से इतनी आपत्ति क्यों है? क्या संतों का अपमान करना और सनातन संस्कृति को नीचा दिखाना ही कांग्रेस का असली एजेंडा है?

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कोरबा

कोरबा में जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा:डीबीएल कंपनी के गेट पर धरना-प्रदर्शन, मरम्मत के आश्वासन के बाद खत्म आंदोलन

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कोरबा। कोरबा में कुदमुरा-स्यांग और बरपाली-दादरपारा मार्ग की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने बुधवार को डीबीएल कंपनी के गेट पर प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज, कोरबा के जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो के नेतृत्व में यह धरना और गेट जाम आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से सफल रहा।

इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा, महिलाएं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सुबह से ही जिल्गा और दादरपारा के पास स्थित डीबीएल के प्लांट/यार्ड के मुख्य गेट पर ग्रामीण इकट्ठा हो गए थे। उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर सड़क मरम्मत और धूल-कीचड़ से निजात दिलाने की मांग करते हुए नारेबाजी की।

कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में कुदमुरा से स्यांग रोड और बरपाली से दादरपारा मार्ग की तत्काल मरम्मत शामिल थी। इसके अलावा, धूल और कीचड़ की समस्या से राहत, भारी वाहनों का नियंत्रित संचालन और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।

ग्रामीणों का कहना था कि डीबीएल कंपनी के भारी वाहनों के लगातार आवागमन से ये दोनों मार्ग पूरी तरह जर्जर हो गए हैं, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को रोजाना परेशानी हो रही है।

मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद, आंदोलन को सफल मानते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।

मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद, आंदोलन को सफल मानते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।

जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जा चुका था

आंदोलन के दौरान, जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो ने ग्रामीणों की समस्याओं को कंपनी प्रबंधन के सामने गंभीरता से रखा। आंदोलन से पहले जिला प्रशासन को भी इस संबंध में ज्ञापन सौंपा जा चुका था। इसके बाद कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

चर्चा के दौरान, कंपनी प्रबंधन ने ग्रामीणों की समस्याओं को स्वीकार किया और सड़क मरम्मत तथा आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र शुरू करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त, आमजन को हो रही परेशानियों को कम करने के लिए नियमित पानी छिड़काव, सड़क समतलीकरण और सुरक्षा संबंधी आवश्यक उपाय करने पर भी सहमति बनी।

मांगे पूरी होने पर आंदोलन खत्म किया

ग्रामीणों ने बताया कि यह आंदोलन पूरी तरह से जनहित और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर किया गया था। कंपनी प्रबंधन द्वारा सकारात्मक पहल और मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद, आंदोलन को सफल मानते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो ने आंदोलन में शामिल सभी ग्रामवासियों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

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कोरबा

केमिकल से पकाए फलों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई:कोरबा में 10 किलो आम और 4 दर्जन केले फेंके, नमूने लैब भेजे गए

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कोरबा। कोरबा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बुधवार को फल दुकानों पर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान सड़े-गले और रसायन से पकाए गए फल मिलने पर 10 किलो आम और 4 दर्जन केले मौके पर ही नष्ट कर दिए गए। यह कार्रवाई आयुक्त खाद्य सुरक्षा दीपक अग्रवाल के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई।

विभाग की टीम ने राजा फ्रूट सेंटर, राजेश फ्रूट सेंटर, शारदा फ्रूट सेंटर और सर्वमंगला फ्रूट सेंटर सहित कुल 11 संस्थानों की जांच की। कई दुकानों में फलों को पकाने के लिए प्रतिबंधित कार्बाइड के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। अधिकारियों ने फलों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।

फलों की जांच के लिए विशेष अभियान शुरू

खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि यह विशेष अभियान 27 मई से 29 मई 2026 तक पूरे छत्तीसगढ़ में चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को गुणवत्तापूर्ण फलों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

गर्मी के मौसम में आम, केला और तरबूज जैसे फलों की मांग बढ़ जाती है। इसका फायदा उठाकर कुछ व्यापारी फलों को रसायन से पकाकर बेचते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

रसायन से पके फल बेचने वालों को सख्त चेतावनी

कार्रवाई के दौरान दुकानदारों को सख्त हिदायत दी गई कि वे केवल प्राकृतिक तरीके से पके फल ही बेचें। उन्हें फलों पर रंग या वैक्स का इस्तेमाल न करने और कोल्ड स्टोरेज व दुकानों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया। बिना लाइसेंस के कारोबार करने वाले विक्रेताओं को नोटिस भी जारी किए गए हैं।

विभाग ने आम जनता से अपील की है कि फल खरीदते समय सावधानी बरतें। अस्वाभाविक रूप से चमकदार, एक जैसे रंग वाले या संदिग्ध फल न खरीदें। किसी भी दुकान पर गड़बड़ी दिखने पर टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी, सैंपलिंग असिस्टेंट और नगर निगम का अमला शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि अभियान अगले दो दिनों तक शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की मंडियों और थोक बाजारों में भी जारी रहेगा।

जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी दुकानदारों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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