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ट्रम्प फिर पलटे, कहा- भारत-PAK न्यूक्लियर वॉर मैंने रुकवाई:मुझे इसका क्रेडिट नहीं मिला; 7 दिन में 6 बार सीजफायर पर बयान दिए

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वॉशिंगटन,एजेंसी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर दावा किया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रोकने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव इतना बढ़ गया था कि वे परमाणु जंग के बहुत करीब पहुंच गए थे।

ट्रम्प ने शुक्रवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ये बातें कही। उन्होंने कहा कि हालात बहुत गंभीर हो गए थे। अगला कदम क्या होता, आप जानते हैं… ‘N वर्ड’। यानी न्यूक्लियर वॉर।

विदेश नीति की सफलताओं पर ट्रम्प ने कहा कि भारत-पाकिस्तान जंग को रोकना उनकी सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। हालांकि उन्हें इसका क्रेडिट नहीं मिला।

ट्रम्प बोले- शांति के लिए बिजनेस का इस्तेमाल कर रहा

ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों को जंग रोकने के बदले उनके साथ ट्रेड करने का प्रस्ताव रखा था। अब मैं बिजनेस का इस्तेमाल हिसाब चुकता करने और शांति स्थापित करने के लिए कर रहा हूं।

ट्रम्प के भारत-पाक सीजफायर पर 5 पुराने दावे

पहला: 10 मई- सीजफायर पर पहला बयान, जंग रोकने का दावा किया

भारत और पाकिस्तान सीजफायर के लिए राजी हो गए हैं। मैं दोनों देशों को कॉमनसेंस, समझदारी से भरा फैसला लेने के लिए बधाई देता हूं।

दूसरा: 11 मई- कश्मीर मुद्दे पर हल निकालने की कोशिश करूंगा

मुझे भारत और पाकिस्तान की मजबूत लीडरशिप पर बहुत गर्व है, जिन्होंने ताकत, समझदारी और हिम्मत दिखाकर यह फैसला लिया कि अब मौजूदा तनाव को रोकने का समय है। यह तनाव लाखों लोगों की मौत और तबाही का कारण बन सकता था।

तीसरा: 12 मई- मैंने भारत-PAK के बीच परमाणु जंग रोकी

मैंने परमाणु जंग रोक दी है। अमेरिका ने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में मदद की है। मुझे यकीन है कि यह सीजफायर स्थायी होगा। दोनों देशों के पास बहुत सारे परमाणु हथियार हैं, इससे एक भीषण परमाणु जंग छिड़ सकती थी।

चौथा: 13 मई- सीजफायर के लिए बिजनेस का इस्तेमाल किया

दोनों देशों के बीच सीजफायर में मध्यस्थता के लिए मैंने काफी हद तक बिजनेस का इस्तेमाल किया। मेरा सबसे बड़ा सपना शांति स्थापित करने का है। मैं विभाजन नहीं, एकता चाहता हूं।

पांचवां: 15 मई- सीजफायर नहीं कराया, सिर्फ मदद की

मैंने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता नहीं कराई, लेकिन मैंने मदद की है। मैं ये नहीं कहता कि ये मैंने किया, लेकिन ये पक्का है कि पिछले हफ्ते भारत-पाकिस्तान के बीच जो हुआ, मैंने उसे सेटल करने में मदद की।

डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 मई को दोहा में अल उदीद एयरबेस पर अमेरिकी सैनिकों को संबोधित करते हुए माना था कि उन्होंने सीजफायर नहीं कराया, इसके लिए मदद की।

डोनाल्ड ट्रम्प ने 15 मई को दोहा में अल उदीद एयरबेस पर अमेरिकी सैनिकों को संबोधित करते हुए माना था कि उन्होंने सीजफायर नहीं कराया, इसके लिए मदद की।

ट्रम्प फिर बोले- भारत टैरिफ में 100% कटौती करेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज पर ही शुक्रवार को दावा किया कि भारत, अमेरिकी चीजों पर 100 प्रतिशत टैरिफ में कटौती करने को तैयार है। ट्रम्प ने कहा- भारत और अमेरिका के बीच एक ट्रेड डील होने वाली है। वे इसमें कोई जल्दबाजी नहीं करने जा रहे हैं।

ट्रम्प ने कहा- अमेरिका के साथ 150 देश डील करना चाहते हैं, साउथ कोरिया भी डील करना चाहता है। हम सबके साथ तो डील नहीं कर सकते।

ट्रम्प ने ट्रेड डील के लिए लिमिट तय करने की भी बात कही। ट्रम्प ने फिर से भारत को दुनिया के सबसे ज्यादा टैरिफ लेने वाले देशों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत में व्यापार करना लगभग असंभव है, लेकिन भारत, अमेरिका के लिए टैरिफ हटाने को तैयार है।

इससे पहले ट्रम्प ने 14 मई को भी ऐसा ही दावा किया था। ट्रम्प ने कहा था-

भारत ने अमेरिका को ट्रेड में जीरो टैरिफ डील की पेशकश की है। भारत हमसे ट्रेड में कोई चार्ज नहीं लेने को तैयार है।

इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता चल रही है। ये जटिल क्रिया है। जब तक सब कुछ तय नहीं हो जाता, तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता।

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Indian Currency: RBI के फैसलों से रुपए ने भरी उड़ान, डॉलर के मुकाबले जोरदार उछला

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मुंबई, एजेंसी। रुपया शुक्रवार को 81 पैसे के उछाल के साथ 94.93 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के विदेशी पूंजी प्रवाह को समर्थन देने और विदेशी मुद्रा प्रवाह मजबूत करने के लिए कदम उठाने के बाद घरेलू मुद्रा को समर्थन मिला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 95.72 प्रति डॉलर पर खुला। कारोबार के दौरान 94.89 के उच्च स्तर तक पहुंचा और अंततः 94.93 (अस्थायी) पर बंद हुआ जो पिछले बंद स्तर से 81 पैसे की मजबूती है। रुपया बृहस्पतिवार को दो पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.74 पर बंद हुआ था। 

चालू वित्त वर्ष की दूसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से नीतिगत दर रेपो को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने और तटस्थ रुख बनाए रखने का निर्णय लिया है। कोटक सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख (जिंस एवं मुद्रा) अनिंद्य बनर्जी ने कहा, ”रेपो दर को तटस्थ रुख के साथ 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने और चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत करने से आरबीआई ने स्पष्ट कर दिया है कि दर नीति का उपयोग महंगाई नियंत्रण के लिए होगा और रुपए की रक्षा पूंजी खाते के माध्यम से की जाएगी।” 

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 99.22 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 116.67 अंक टूटकर 74,243.34 अंक पर जबकि निफ्टी 49.85 अंक फिसलकर 23,366.70 अंक पर बंद हुआ। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 94.75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बृहस्पतिवार को शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने 4,447.06 करोड़ रुपए के शेयर बेचे। 

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Indian Economy के लिए अच्छी खबर, GDP ग्रोथ उम्मीदों से बेहतर

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत अच्छी खबर आई है। देश की आर्थिक विकास दर यानी जीडीपी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ रही है। भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जो 2024-25 के आंकड़े 7.1 प्रतिशत के मुकाबले अधिक है। यह जानकारी शुक्रवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों में दी गई।

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

मंत्रालय ने कहा कि स्थिर कीमतों पर जीडीपी का आकार वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 323.12 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के पहले संशोधित अनुमान 299.89 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। वहीं, मौजूदा कीमतों पर जीडीपी का आकार 2025-26 में 346.36 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो 2024-25 के 318.07 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले 8.9 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।

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Polymer Currency:​​​​​​​ देश में जल्द दिखेंगे प्लास्टिक के नोट, RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा का पॉलीमर करेंसी पर दिया ये बड़ा बयान

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मुंबई, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गर्वनर संजय मल्होत्रा ने पॉलीमर करेंसी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। संजय ने कहा केंद्रीय बैंक भारत में कागजी नोटों की जगह पॉलीमर (प्लास्टिक) के करेंसी नोट पेश करने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इसी के साथ उन्होंने यह भी साफ किया है कि यह योजना अभी अपने शुरुआती चरण में है। 

2012 में भी किया गया था ट्रायल

जानकारी के लिए बता दें कि देश में साल 2012 में 5 शहरों जयपुर, कोच्चि, शिमला, मैसूर और भुवनेश्वर में 10 रुपये के प्लास्टिक नोटों का एक पायलट प्रोजेक्ट (टेस्ट) शुरू किया था। उस समय पर ATM और नोट गिनने वाली मशीनों में तकनीकी दिक्कतें आने के कारण इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया जा सका था।

क्या होती है पॉलीमर करेंसी?

 पारंपरिक कागजी नोट कपास से तैयार किए जाते हैं, जबकि पॉलीमर नोट एक पतले और लचीले प्लास्टिक सबस्ट्रेट से बनते हैं। इसे BOPP (Bi-axially Oriented Polypropylene) कहा जाता है। इन्हें कागजी नोट की तरह आसानी से मोड़ा जा सकता है और जेब में रखा जा सकता है।

पॉलीमर करेंसी की खासियत

आरबीआई का इस तकनीक की ओर झुकाव होने के पीछे कई मुख्य कारण हैं:

  • कागजी नोटों के कंपेरिजन में ये ज्यादा देर तक चलते हैं।  
  • यह नोट साफ- सुथरे होते हैं यानि की इन पर नमी, पानी या गंदगी का कोई असर नहीं होता, जिससे ये साफ-सुथरे बने रहते हैं।
  • लंबी उम्र के कारण इन्हें बार-बार छापने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे सरकार और आरबीआई का छपाई खर्च कम होता है।

दुनिया के कई देशों में है इसका चलन

भारत से पहले ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, कनाडा, सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और रोमानिया में ये प्लास्टिक मुद्रा सफलतापूर्वक चल रही है।   

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