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छत्तीसगढ़

ऑपरेशन सिंदूर अभिनंदन प्रस्ताव पर विधानसभा में चर्चा:सीएम ने कहा- भारत वैश्विक संकट में मूक दर्शक नहीं, संकट-निवारक राष्ट्र

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रायपुर,एजेंसी। विधानसभा में मंगलवार को सरकार की तरफ से सेना की वीरता और साहस के साथ ही प्रधानमंत्री की रणनीतिक दक्षता के प्रदर्शन पर अभिनंदन प्रस्ताव पेश किया गया। संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया। चर्चा की शुरुआत भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने की। लेकिन कांग्रेस ने चंद्राकर के वक्तव्य पर नाराजगी जाहिर करते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया।

मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कुशल रणनीति और नेतृत्व क्षमता को पूरे देश ने देखा है। यह केवल एक मिशन नहीं था, बल्कि भारत की ताकत, संकल्प और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का जीवंत प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस ऑपरेशन के केंद्र में समन्वय और निर्णय क्षमता की धुरी रही रहे। प्रधानमंत्री की सक्रिय भागीदारी, व्यक्तिगत निगरानी और स्पष्ट निर्देशों के कारण ही मिशन समयबद्ध, सुरक्षित और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

ऑपरेशन ने सिद्ध कर दिया कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी सीमा तक जाकर, त्वरित, निर्णायक और प्रभावी कार्यवाही करने में सक्षम है। हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व का दृष्टिकोण स्पष्ट है, हर भारतीय का जीवन बहुमूल्य है, चाहे वह देश में हो या विदेश में।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत केवल अपने नागरिकों की ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता की रक्षा के लिए भी कर्तव्यनिष्ठ है। भारत ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वह वैश्विक संकटों में मूक दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय संकट-निवारक राष्ट्र है।

सदन में प्रस्ताव पारित, विपक्ष​ ने किया बहिष्कार, महंत बोले- हम लोगों को बार-बार उकसाया जा रहा है

कांग्रेस विधायक लहरिया बोले- ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश की हो रही बदनामी

विपक्ष की ओर से लगातार चर्चा का विरोध किया गया। कांग्रेस के विधायक दिलीप लहरिया ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद देश की बदनामी हो रही है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारतीय सेना ने पाकिस्तान को ध्वस्त करने की जो बात कही थी, यह ऐतिहासिक कदम है।

हम भारतीय सेना की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हैं। मगर यहां पर एक ऐसा सिपाही बैठा हुआ है, जो हम लोगों को बार-बार उत्तेजित कर रहा है। हमको उल्टे-सीधे दिखाना चाहते हैं। इसलिए हम इस चर्चा का बहिष्कार करते हैं।

सदन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता विपक्ष के अनुसार नहीं बोलूंगा:अजय

इससे पहले अजय चंद्राकर ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा साबित करने जा रहा है कि राष्ट्रीय विषयों से भी छत्तीसगढ़ का सरोकार है। इस बीच उन्होंने देश में पूर्ववर्ती सरकारों के समय में हुई लड़ा‍इयों और देश के तत्कालीन नेतृत्व द्वारा उठाए गए कदमों का भी उल्लेख किया। चंद्राकर ने कहा कि सदन में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। विपक्ष की पसंद के आधार पर नहीं बोलूंगा। चर्चा में किरण देव, धर्मजीत सिंह, धरमलाल कौशिक और अमर अग्रवाल ने हिस्सा लिया।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : मुख्यमंत्री साय ने हाटकेश्वर जयंती पर प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाटकेश्वर जयंती के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा है कि हाटकेश्वर जयंती आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक पर्व है, जो हमें धर्म, संस्कृति और लोक परंपराओं से जोड़ता है। यह दिवस समाज में सद्भाव, समरसता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

उन्होंने भगवान हाटकेश्वर से प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए कहा कि यह पर्व सभी के जीवन में शांति और प्रगति  लेकर आए।

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कोरबा

राज्यपाल रमेन डेका 1 अप्रैल को रहेंगे कोरबा जिले प्रवास पर

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सामूहिक विवाह हनुमंत कथा में होंगे शामिल

कोरबा। राज्यपाल रमेन डेका कल 1 अप्रैल को कोरबा जिले के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार श्री डेका रायपुर लोकभवन से सवेरे 7.30 बजे सड़क मार्ग द्वारा मुंगेली जिले के चंदखुरी विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे। ततपश्चात राज्यपाल सुबह 9 बजे कोरबा जिले के कटघोरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ढपढप बांकीमोंगरा के लिए रवाना होंगे। यहां वे प्रातः 11 बजे आयोजित “दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं 108 दिव्यांग एवं निर्धन कन्याओं के सामूहिक विवाह” कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम के पश्चात राज्यपाल श्री डेका दोपहर 12:30 बजे रतनपुर (बिलासपुर) स्थित विश्राम गृह के लिए प्रस्थान करेंगे।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : नाचा के जनक दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया नमन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोककला परंपरा के संवाहक और ‘नाचा’ के जनक माने जाने वाले स्वर्गीय दाऊ दुलार सिंह मंदराजी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि दाऊ मंदराजी ने ‘नाचा’ जैसी लोकविधा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे जन-जन तक पहुँचाकर सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम बनाया। उन्होंने गांवों के लोक कलाकारों को संगठित कर ‘नाचा’ को नई पहचान और गरिमा प्रदान की। उनके प्रयासों से यह लोककला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रही, बल्कि समाज में जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी मंच बनी।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी ने अपने समर्पण और साधना से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को जीवंत बनाए रखा और उसके संरक्षण के लिए जीवनपर्यंत कार्य किया। उनका योगदान प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा लोक कला और शिल्प के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘दाऊ दुलार सिंह मंदराजी सम्मान’ प्रदान किया जाता है, जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

उन्होंने कहा कि दाऊ मंदराजी का व्यक्तित्व और कृतित्व आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और लोकसंस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।

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