पीएम मोदी ने लिखा- यह विध्वंस नहीं, हमारे स्वाभिमान की गाथा, मिटाने वाले खत्म हो जाते हैं
नई दिल्ली/अहमदाबाद,एजेंसी। पीएम मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन में बने पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर पर एक लेख लिखा है। यह ब्लॉग पोस्ट सोमनाथ पर 1026 में हुए पहले आक्रमण के हजार साल पूरे होने पर है। पीएम ने इसे सोमनाथ स्वाभिमान पर्व नाम दिया है।
गौरतलब है कि विदेशी आक्रमणकारी गजनी के महमूद गजनवी ने जनवरी 1026 में सोमनाथ पर आक्रमण कर उसे ध्वस्त कर दिया था।
पीएम मोदी का लेख….
सोमनाथ… ये शब्द सुनते ही हमारे मन और हृदय में गर्व और आस्था की भावना भर जाती है। भारत के पश्चिमी तट पर गुजरात में, प्रभास पाटन नाम की जगह पर स्थित सोमनाथ, भारत की आत्मा का शाश्वत प्रस्तुतिकरण है।
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम में भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख है। ज्योतिर्लिंगों का वर्णन इस पंक्ति से शुरू होता है…सौराष्ट्रे सोमनाथं च…यानी ज्योतिर्लिंगों में सबसे पहले सोमनाथ का उल्लेख आता है।
अर्थात्, सोमनाथ शिवलिंग के दर्शन से व्यक्ति अपने सभी पापों से मुक्त हो जाता है। मन में जो भी पुण्य कामनाएं होती हैं, वो पूरी होती हैं और मृत्यु के बाद आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होती है।
दुर्भाग्यवश, यही सोमनाथ मंदिर, जो करोड़ों लोगों की श्रद्धा और प्रार्थनाओं का केंद्र था, विदेशी आक्रमणकारियों का निशाना बना, जिनका उद्देश्य विध्वंस था। जनवरी 1026 में गजनी के महमूद ने इस मंदिर पर बड़ा आक्रमण कर उसे ध्वस्त कर दिया था।
यह आक्रमण आस्था और सभ्यता के एक महान प्रतीक को नष्ट करने के उद्देश्य से किया गया एक हिंसक और बर्बर प्रयास था। फिर भी एक हजार साल बाद आज भी यह मंदिर पूरे गौरव के साथ खड़ा है।
साल 1026 के बाद समय-समय पर इस मंदिर को पुन:निर्मित करने के प्रयास जारी रहे। मंदिर का वर्तमान स्वरूप 1951 में आकार ले सका।
संयोग से 2026 का यही वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का भी वर्ष है। 11 मई 1951 को इस मंदिर का पुनर्निर्माण सम्पन्न हुआ था।
पीएम ने लिखा- समुद्री व्यापारी सोमनाथ के वैभव की कथाएं दूर-दूर ले गए
सोमनाथ मंदिर का आध्यात्मिक महत्व बहुत ज्यादा था। ये एक ऐसे समाज की प्रेरणा था जिसकी आर्थिक क्षमता भी बहुत सशक्त थी। हमारे समुद्री व्यापारी और नाविक इसके वैभव की कथाएं दूर-दूर तक ले जाते थे। सोमनाथ पर हमले और फिर गुलामी के लंबे कालखंड के बावजूद आज मैं पूरे विश्वास के साथ और गर्व से ये कहना चाहता हूं कि सोमनाथ की गाथा विध्वंस की कहानी नहीं है।
ये पिछले 1000 साल से चली आ रही भारत माता की करोड़ों संतानों के स्वाभिमान की गाथा है, ये हम भारत के लोगों की अटूट आस्था की गाथा है। हर बार जब मंदिर पर आक्रमण हुआ, तब हमारे पास ऐसे महान पुरुष और महिलाएं भी थीं जिन्होंने उसकी रक्षा के लिए खड़े होकर सर्वोच्च बलिदान दिया। और हर बार, पीढ़ी दर पीढ़ी, हमारी महान सभ्यता के लोगों ने खुद को संभाला, मंदिर को फिर से खड़ा किया और उसे पुनः जीवंत किया।
महमूद गजनवी लूटकर चला गया, लेकिन सोमनाथ के प्रति हमारी भावना को हमसे छीन नहीं सका। आज 2026 में भी सोमनाथ मंदिर दुनिया को संदेश दे रहा है कि मिटाने की मानसिकता रखने वाले खत्म हो जाते हैं, जबकि सोमनाथ मंदिर आज हमारे विश्वास का मजबूत आधार बनकर खड़ा है।
देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी महान विभूति ने ये सुनिश्चित करने का पुण्य प्रयास किया कि श्रद्धालु सोमनाथ में पूजा कर सकें। 1890 के दशक में स्वामी विवेकानंद भी सोमनाथ आए थे। 1897 में चेन्नई में दिए गए एक व्याख्यान के दौरान उन्होंने कहा, “दक्षिण भारत के प्राचीन मंदिर और गुजरात के सोमनाथ जैसे मंदिर आपको ज्ञान के अनगिनत पाठ सिखाएंगे।’
इन मंदिरों पर सैकड़ों आक्रमणों के निशान हैं, और सैकड़ों बार इनका पुनर्जागरण हुआ है। ये बार-बार नष्ट किए गए और हर बार अपने ही खंडहरों से फिर खड़े हुए। यही राष्ट्रीय मन है, यही राष्ट्रीय जीवन धारा है। इसको छोड़ देने का मतलब है, मृत्यु। इससे अलग हो जाने पर विनाश ही होगा।
आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का पवित्र दायित्व सरदार वल्लभभाई पटेल के सक्षम हाथों में आया। 1947 में दिवाली के समय उनकी सोमनाथ यात्रा हुई। उस यात्रा के अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया, उसी समय उन्होंने घोषणा की कि यहीं सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण होगा। अंततः 11 मई 1951 को सोमनाथ में भव्य मंदिर के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
पीएम मोदी बोले- नेहरू नहीं चाहते थे राष्ट्रपति सोमनाथ जाएं
उस अवसर पर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद उपस्थित थे। महान सरदार साहब इस ऐतिहासिक दिन को देखने के लिए जीवित नहीं थे, लेकिन उनका सपना राष्ट्र के सामने साकार होकर भव्य रूप में उपस्थित था। तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू इस घटना से अधिक उत्साहित नहीं थे। वो नहीं चाहते थे कि माननीय राष्ट्रपति और मंत्री इस समारोह का हिस्सा बनें। उन्होंने कहा कि इस घटना से भारत की छवि खराब होगी। लेकिन राजेंद्र बाबू अडिग रहे, और फिर जो हुआ, उसने एक नया इतिहास रच दिया।
सोमनाथ मंदिर का कोई भी उल्लेख के.एम. मुंशी जी के योगदानों को याद किए बिना अधूरा है। उन्होंने उस समय सरदार पटेल का प्रभावी रूप से समर्थन किया था। सोमनाथ पर उनका कार्य, विशेष रूप से उनकी पुस्तक ‘सोमनाथ, द श्राइन इटरनल’, अवश्य पढ़ी जानी चाहिए।
जैसा कि मुंशी जी की पुस्तक के शीर्षक से स्पष्ट होता है, हम एक ऐसी सभ्यता हैं जो आत्मा और विचारों की अमरता में अटूट विश्वास रखती है। हम विश्वास करते हैं- नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः। सोमनाथ का भौतिक ढांचा नष्ट हो गया, लेकिन उसकी चेतना अमर रही।
अलग-अलग समय में सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी, अलाउद्दीन खिलजी, जफर खान, महमूद बेगड़ा और औरंगजेब ने हमला किया था। कुल आक्रमणों की संख्या 17 थी।
सदियों पहले जैन परंपरा के आदरणीय मुनि कलिकाल सर्वज्ञ हेमचंद्राचार्य यहां आए थे और कहा जाता है कि प्रार्थना के बाद उन्होंने कहा- “भवबीजाङ्कुरजनना रागाद्याः क्षयमुपगता यस्य।’ अर्थात्, उस परम तत्व को नमन जिसमें सांसारिक बंधनों के बीज नष्ट हो चुके हैं। जिसमें राग और सभी विकार शांत हो गए हैं।
अगर हजार साल पहले खंडित हुआ सोमनाथ मंदिर पूरे वैभव के साथ फिर से खड़ा हो सकता है, तो हम हजार साल पहले का समृद्ध भारत भी बना सकते हैं।
आइए, इसी प्रेरणा के साथ हम आगे बढ़ते हैं। एक विकसित भारत के निर्माण के लिए। एक ऐसा भारत, जिसका सभ्यतागत ज्ञान हमें विश्व कल्याण के लिए प्रयास करते रहने की प्रेरणा देता है।
नोएडा, एजेंसी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने नोएडा के मजिस्ट्रेट को फटकार लगाई। बुधवार को CJI सूर्यकांत ने कहा, ‘जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्र विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द कर दी हैं। विरोध प्रदर्शनों को लेकर किसी भी छात्र के खिलाफ भविष्य में जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगाई है। ऐसे में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने छात्र को नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की? कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता।’
दरअसल, 4 सितंबर को नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट आर के सिसोदिया ने दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) प्रदर्शन में शामिल छात्र अक्षत त्रिपाठी के खिलाफ नोटिस जारी किया था। इसमें 5 लाख रुपए का बॉन्ड और इतनी ही रकम के दो जमानतदार पेश करने को कहा गया था। इसके बाद छात्र ने मंगलवार को वीडियो जारी कर कहा था- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मुझे विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है।
बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट विश्वजीत भट्टाचार्य ने मौखिक रूप से CJI की अध्यक्षता वाली बेंच को यह बात बताई। उन्होंने बताया कि एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने एक छात्र को नोटिस जारी कर पूछा कि शांति बनाए रखने के लिए 5 लाख रुपए का पर्सनल बॉन्ड क्यों न भरवाया जाए। बाद में नोटिस वापस ले लिया गया।
यह वह नोटिस है, जिसे नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय ने छात्र को जारी किया था।
सुप्रीम कोर्ट बोला- जिला मजिस्ट्रेट से जवाब मांगेंगे
वकील भट्टाचार्य ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- यह भारत के छात्रों के साथ एक प्रयोग किया जा रहा है। इसका असर पूरे देश पर पड़ेगा। पहले अवमानना की गई और फिर उसे वापस लिया गया। इस अवमानना को इस तरह सुधारा नहीं जा सकता।
यह कोर्ट की गरिमा की अवमानना है। नोएडा और यूपी के अधिकारी छात्रों के मन में डर का माहौल नहीं बना सकते हैं। इस पर CJI सूर्यकांत ने भरोसा दिलाते हुए कहा- हम जिला मजिस्ट्रेट से इस पर जवाब मांगेंगे।
तस्वीर छात्र अक्षत त्रिपाठी की है। मंगलवार को उन्होंने वीडियो जारी करके कहा था- मैं छात्र हूं। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है
4 सितंबर को नोटिस दिया, अगले दिन रद्द कर दिया
छात्र अक्षत त्रिपाठी प्रयागराज के झूंसी के रहने वाले हैं। वह गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) से BA-LLB कर रहे हैं। अक्षत त्रिपाठी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ( SFI) की उत्तर प्रदेश स्टेट कमेटी के सदस्य भी हैं। 4 सितंबर 2026 को उनके खिलाफ नोएडा कमिश्नरेट के थर्ड एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 130 के तहत नोटिस जारी किया गया।
कोर्ट ने नोटिस में कहा गया था- यह मानने के पर्याप्त आधार हैं कि त्रिपाठी विश्वविद्यालय के छात्रों को CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे। वह छात्रों के बीच सरकार विरोधी और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे थे। ऐसी गतिविधियों से तनाव पैदा हो सकता है। सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अक्षत त्रिपाठी से पूछा गया था कि क्यों न उन्हें 6 महीने तक शांति बनाए रखने के लिए पाबंद किया जाए। इसके लिए उनसे 5 लाख रुपए का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानतदार पेश करने को कहा जाए। मामले में सुनवाई के लिए 5 सितंबर की तारीख तय की गई थी।
ACP रवि शंकर ने बताया-
जांच के दौरान अक्षत त्रिपाठी का नाम सामने आया था। पता चला था कि वह जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट में शामिल होने गया था। पुलिस ने वॉट्सऐप के जरिए छात्र को नोटिस भेजा था। 5 सितंबर को नोटिस कैंसिल कर दिया गया। छानबीन में पता चला कि छात्र उस दौरान वहां मौजूद नहीं था।
ACP ने बताया कि इससे पहले नवंबर में छात्र ने आत्महत्या करने की बात कहते हुए वीडियो बनाया था, जो वायरल हो गया था। वीडियो वायरल होने के बाद वह गायब हो गया था, जिसके बाद पुलिस ने उसे तलाशा था।
छात्र ने वीडियो जारी करके कहा- क्या सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना जुर्म
छात्र ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया। इसमें कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद CJP प्रदर्शन में शामिल होने के लिए धमकाया जा रहा है। क्या लोकतंत्र में सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलना या पेपर लीक जैसे मुद्दों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना अपराध है? इसी मामले में ग्रेटर नोएडा मजिस्ट्रेट की तरफ से मुझे नोटिस मिला है। इसमें 5 लाख रुपए का निजी बॉन्ड देने को कहा गया है। मैं छात्र हूं और मेरी कोई व्यक्तिगत आय नहीं है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि की शर्त मेरे लिए कैसे व्यावहारिक है?
नोटिस में आरोप है कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन में शामिल होकर मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को सरकार के खिलाफ भड़काया। सवाल है कि सरकार की नीति की आलोचना करना, सरकार से सवाल पूछना या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना भड़काना कैसे हो गया? मुझ पर लगाए गए आरोपों का आधार और प्रमाण क्या है?
मैं 3 महीने से विश्वविद्यालय गया ही नहीं हूं। 20 जुलाई के प्रदर्शन से करीब डेढ़ महीने पहले ही अपने घर इलाहाबाद आ चुका था। ऐसे में मैंने विश्वविद्यालय के छात्रों को भड़काया कैसे? मैं इस कार्रवाई की निंदा करता हूं और निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं।
9 दिन पहले SC जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की सभी FIR रद्द की थीं
सुप्रीम कोर्ट ने 9 दिन पहले कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़ी सभी FIR को रद्द कर दिया। यह आदेश देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज मामलों पर लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया था कि जिन प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड है, उन पर केस चलता रहेगा। ये FIR 20 से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद दर्ज की गई थीं।
रायबरेली, एजेंसी। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रायबरेली में बुधवार को बैठक में कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय को अपने मोबाइल पर टूटी सड़कें दिखाईं। राहुल ने डिस्ट्रिक्ट डेवलपमेंट कोऑर्डिनेटिंग कमेटी (दिशा) की मीटिंग में जर्जर सड़कों और गड्ढों की तस्वीरें दिखाकर PWD अधिकारियों और डीएम से पूछा कि सड़कों की हालत ऐसी क्यों है?
राहुल ने कहा कि जब सरकार फंड दे रही है तो काम क्यों नहीं हो रहा है? आप लोग क्या कर रहे हैं? इस मीटिंग में ऊंचाहार से BJP विधायक मनोज पांडेय, एमएलसी और राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह भी मौजूद थे।
कलेक्ट्रेट में करीब ढाई घंटे बैठक से पहले राहुल ने सुबह जनता दरबार लगाया, जहां महिला कांग्रेस नेता ने उन्हें राखी बांधी। राहुल ने यहां सपा नेताओं ने भी मुलाकात की।
कार्यक्रमों के बाद राहुल लखनऊ रवाना हो गए, जहां से वे दिल्ली जाएंगे। 2024 में सांसद बनने के बाद राहुल का यह 8वां रायबरेली दौरा था। इससे पहले वे 19-20 मई को दो दिवसीय दौरे पर आए थे।
राहुल मंगलवार दोपहर दिल्ली से एयर इंडिया की फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे थे। पहली बार में विमान लैंड नहीं कर पाया था। 25 मिनट हवा में चक्कर लगाने के बाद दूसरे प्रयास में विमान ने लैंडिंग की थी।
रायबरेली में सर्राफा कारोबारी के घर बैठक के दौरान राहुल ने बच्ची से हाथ मिलाया। महिलाओं ने उन्हें बुके दिया।
रायबरेली में राहुल गांधी के जनता दरबार के दौरान भुएमऊ गेस्ट हाउस पर लोगों की भारी भीड़ उमड़ी।
रायबरेली में राहुल गांधी ने 3 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें बारात घर, ट्रांसफॉर्मर और सड़कें शामिल हैं।
सपा विधायकों ने प्रदर्शन किया, पोस्टर लहराए
रायबरेली में सपा विधायक राहुल लोधी, श्याम सुंदर भारती ने दिशा की मीटिंग के दौरान हॉल के बाहर प्रदर्शन किया। हालांकि, राहुल के पहुंचने से पहले पुलिस ने उनसे पोस्टर और बैनर छीन लिए।
पोस्टर पर लिखा था- स्कूल बंद, फर्जी मुकदमे लिखे जा रहे, जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं। जिले में आम लोगों की समस्याएं जस की तस हैं, तो ऐसे में दिशा की बैठक का क्या औचित्य है?
रायबरेली में हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी और बछरावां से सपा विधायक श्याम सुंदर भारती ने पोस्टर-बैनर लेकर दिशा बैठक हॉल के बाहर प्रदर्शन किया।
सांसद-जनप्रतिनिधि अफसरों से सरकारी योजनाओं को लेकर सवाल करते हैं। जनता को योजनाओं का फायदा मिल रहा है या नहीं, काम में देरी को लेकर जवाब मांगते हैं।
‘दिशा’ (DISHA) बैठक की अध्यक्षता क्षेत्र के सांसद करते हैं। इसमें जिले के सभी विधायक, डीएम, एसपी और सभी सरकारी विभागों के बड़े अफसर एक साथ बैठते हैं।
राहुल ने मंत्री के सामने दिखाए खराब सड़कों के वीडियो
दिशा बैठक के दौरान अपने मोबाइल में राहुल गांधी ने रायबरेली की सड़कों के गड्ढे दिखाए। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे भी वीडियो देखते रहे। राहुल गांधी ने PWD विभाग के अधिकारियों और डीएम से इन सड़कों की बदहाली को लेकर सवाल पूछा। राहुल ने पूछा कि जिले की सड़कें इतनी खराब क्यों हैं? जब सरकार फंड दे रही है तो सड़कों पर काम क्यों नहीं हो रहा है। पूरे जिले के मुख्स मार्ग और ग्रामीण लिंक रोड बहुत खराब हैं। इसे लेकर क्या कर रहे हैं?
नागोया/नई दिल्ली, एजेंसी। एशियन गेम्स की शुरुआत से 10 दिन पहले जापान के नागोया में बाढ़ आ गई। स्थिति यह बनी की एशियन गेम्स में भाग लेने आए 400 खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया।
बाढ़ में नागोया शहर की सड़कें और घर डूब गए। मेयर इचिरो हिरोसावा ने दावा किया कि एशियन गेम्स के लिए कोई चिंता की बात नहीं है। टूर्नामेंट का आयोजन तय समय पर होगा।
नागोया में 19 सितंबर को एशियन गेम्स की ओपनिंग सेरेमनी होनी है।
नागोया बाढ़ की तस्वीरें…
बाढ़ के पानी में सड़कें डूब गई हैं।
बाढ़ में फंसी गाड़ी को धक्का मारते लोग।
नागोया में बाढ़ के पानी में गाडियों के टायर डूब गए।
3500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली
बस और मेट्रो सेवाएं कुछ समय के लिए प्रभावित रहीं। करीब 3,500 लोगों ने इमरजेंसी शेल्टर में शरण ली। नागोया और इची में एशियन गेम्स 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक होने हैं।
रिपोर्ट- वेन्यू में कुछ जगह छतों से पानी टपक रहा
जापानी मीडिया में शहर की सड़कों और मेट्रो स्टेशनों में भरे पानी की तस्वीरें दिखाई गईं। न्यूज एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, वेन्यू की कुछ जगहों पर छतों से पानी टपकने की घटनाएं भी हुईं। हालांकि मेयर हिरोसावा ने कहा कि एशियन गेम्स के दर्जनों वेन्यू को गंभीर नुकसान नहीं हुआ है।
भारत गेम्स में 768 सदस्यीय दल भेज रहा
खेल मंत्रालय ने जापान के आइची और नागोया में होने वाले 20वें एशियन गेम्स के लिए 503 खिलाड़ी और 255 सपोर्ट स्टाफ भेजने की जानकारी दी है। सपोर्ट स्टाफ में कोच, मैनेजर, फिजियो और मेडिकल टीम आदि शामिल है।
36 खेलों में उतरेगा भारत: पहले 35 खेलों के 492 एथलीटों को मंजूरी दी गई थी, लेकिन 4 सर्फर्स सहित नए नाम जुड़ने से अब भारत 36 खेलों में हिस्सा लेगा।
एथलेटिक्स दल में सबसे बड़ी बढ़ोतरी: एथलेटिक्स टीम के खिलाड़ियों की संख्या 73 से बढ़ाकर 79 कर दी गई है। एथलेटिक्स और क्रिकेट को सबसे ज्यादा सपोर्ट स्टाफ दिया गया है।
दल के प्रमुख अधिकारी: दल प्रमुख के रूप में सहदेव यादव और मुख्य मेडिकल अधिकारी के रूप में डॉ. दिनशॉ पार्डीवाला भारतीय दल का नेतृत्व करेंगे।
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम 19 सितंबर को रवाना होगी
डिफेंडिंग चैंपियन भारत एशियन गेम्स के लिए टीम घोषित कर चुका है। श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली टीम में युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी भी शामिल हैं। भारतीय टीम 19 सितंबर को सानो के लिए रवाना होगी। इसगे अगले दिन टीम प्रैक्टिस सेशन में हिस्सा लेगी।
महिला क्रिकेट टीम पहले पहुंचेगी
हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला क्रिकेट टीम दुबई में एशिया कप खेलने के बाद 13 सितंबर को भारत लौटेगी और 14 सितंबर को नागोया के लिए रवाना होगी।
महिला टीम एशियन गेम्स में सीधे क्वार्टर फाइनल से अभियान शुरू करेगी। उसका पहला मुकाबला 18 सितंबर को होगा। महिलाओं का यह टूर्नामेंट 22 सितंबर तक चलेगा।
गेम्स में ठहरने की व्यवस्थाओं पर भी विवाद था
इससे पहले खबर आई थी कि BCCI और PCB गेम्स के आयोजकों से नाराज है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि खिलाड़ियों को स्टेडियम से 20 किमी दूर छोटे होटल कमरों में ठहराया गया है, जहां बैग खोलने तक की जगह नहीं है। वहीं ड्रेसिंग रूम पक्के मकान की जगह टेंट में बने हैं और वॉशरूम 500 मीटर दूर है।
इसपर JCA के CEO नाओकी एलेक्स मियाजी ने कहा था- ‘हमने क्रिकेट टीम को होटल का विकल्प दिया है। जबकि कई अन्य खेलों के खिलाड़ियों के लिए क्रूज शिप या कंटेनर होटल जैसी सीमित सुविधाएं हैं।’
प्लेयर एरिया में टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध रहेगी। मैदान पर बने ड्रेसिंग रूम भले ही अस्थाई हों, लेकिन इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि खिलाड़ियों और अधिकारियों को पूरा आराम मिले।
पिच और आउटफील्ड कम समय में सीमित संसाधनों के बीच तैयार की गई है। यह एशियन गेम्स के इतिहास में क्रिकेट की सबसे बेहतरीन प्लेइंग सरफेस होगी। श्रीलंकाई क्यूरेटर्स की मदद से यहां टर्फ और हाइब्रिड पिच तैयार की जा रही है।