मैनपाट में 1.6° पारा, ओस की बूंदें जमकर बर्फ बनीं, 17 जिलों में शीतलहर चलेगी
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। अधिकांश जिलों में रात का तापमान सामान्य से नीचे चला गया है। प्रदेश में मैनपाट सबसे ठंडा बना हुआ है, यहां न्यूनतम तापमान 1.6 डिग्री पहुंच गया है। यहां ओंस की बूंदें जमने लगी हैं।
अंबिकापुर में रात का पारा 3.8°C दर्ज किया गया, जो सामान्य से करीब 5 डिग्री कम है। मैदानी इलाकों में रायपुर सबसे ठंडा रहा, जहां रात का पारा 7°C तक गिर गया। दुर्ग में 7 डिग्री और पेंड्रा रोड में 7.2 डिग्री रहा।
इस बीच मौसम विभाग ने 17 जिलों में शीतलहर का यलो अलर्ट और 15 जिलों में घने कोहरे का अलर्ट जारी किया है। दोनों अलर्ट के साथ हेल्थ एडवाइजरी भी जारी की गई है। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में अधिकतम तापमान 29.6°C दुर्ग में दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान अंबिकापुर में 3.8°C रहा।
ठंड के कारण सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिलों में प्राइमरी स्कूल 10 जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं। 2 पालियों के स्कूल भी 9.30 बजे से लगेंगे।
सरगुजा में सुबह घना कोहरा छाया रहा। दिन में लाइट जलाकर वाहन चलाने पड़े।
सरगुजा में सुबह और शाम के वक्त अलाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
मैनपाट में पौधों में ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई थी।
सरगुजा संभाग में भी खुले मैदान में घास पर लगी ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गईं।
मैनपाट में सुबह ओस की बूंदें जमकर बर्फ बन गई।
सरगुजा के पाट से लेकर मैदानी इलाकों में भी जमकर पाले पड़े।
पेंड्रा के कई इलाकों में कोहरा छाए रहने से विजिबिलिटी भी कम हो गई है।
4 जिलों में प्राइमरी स्कूल बंद
सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड को देखते हुए चार जिलों में प्राइमरी स्कूल 10 जनवरी तक बंद कर दिए गए हैं। सरगुजा और बलरामपुर जिलों के बाद मंगलवार देर शाम कोरिया और सूरजपुर जिलों में भी प्राइमरी स्कूलों को 10 जनवरी तक बंद करने का आदेश जारी हो गया है। वहीं गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में भी प्राइमरी स्कूल 10 जनवरी तक बंद रहेंगे। हालांकि मिडिल, हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों का संचालन पूर्ववत जारी रहेगा।
ठंड के कारण दो पालियों में संचालित होने वाली कक्षाओं का समय बदल दिया गया है। अब दो पालियों में चलने वाले स्कूल सुबह 8.30 बजे के बजाय 9.30 बजे से 12.30 बजे तक संचालित होंगे। वहीं दूसरी पाली की कक्षाएं दोपहर 12.30 बजे से शाम 4.00 बजे तक लगेंगी। यह आदेश सभी शासकीय, अर्धशासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा।
अंबिकापुर में ठंड से दूसरी मौत
अंबिकापुर से लगे श्रीगढ़ में नए साल की रात एक बुजुर्ग की ठंड से मौत हो गई थी। उनका शव पैरावट में अकड़ा हुआ मिला। कम कपड़ों में खुले में सो जाने के कारण वह हाइपोथर्मिया की चपेट में आ गए।
अंबिकापुर में यह ठंड से मौत का दूसरा मामला है। इससे पहले, 11 दिसंबर की रात अंबिकापुर बस स्टैंड में खुले में सोए एक व्यक्ति की भी ठंड से मौत हो गई थी।
बच्चों पर पड़ रहा ठंड का असर
कड़ाके की ठंड का असर बच्चों की सेहत पर भी पड़ रहा है। बीते एक महीने में रायपुर के अंबेडकर समेत निजी अस्पतालों में हाइपोथर्मिया के 400 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों का शरीर वयस्कों की तुलना में जल्दी ठंडा होता है।
नवजातों की मांसपेशियां कम विकसित होती हैं, जिससे वे ठंड सहन नहीं कर पाते। वहीं, सीजेरियन डिलीवरी से जन्मे शिशुओं में हाइपोथर्मिया का खतरा और बढ़ जाता है।
NICU और SNCU तक पहुंच रहे मामले
डॉक्टरों के अनुसार, पर्याप्त सावधानी नहीं बरतने पर बच्चों को एनआईसीयू (NICU) और एसएनसीयू (SNCU) में भर्ती कर इलाज करना पड़ रहा है। नवजात का शरीर अचानक ठंडा पड़ जाना या तापमान सामान्य से कम हो जाना हाइपोथर्मिया का प्रमुख लक्षण है।
सरगुजा संभाग में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। 2 दिन पहले अंबिकापुर-बनारस मार्ग पर घना कोहरा था।
OPD में मरीजों की भीड़
ठंड के चलते अस्पतालों की ओपीडी में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। अंबेडकर अस्पताल में मेडिसिन, पीडियाट्रिक और चेस्ट विभाग में 600 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं। रोजाना 2000 से अधिक मरीजों का इलाज ओपीडी में किया जा रहा है।
GPM जिले में मध्यप्रदेश बॉर्डर से सटे धर्मपानी की पहाड़ी का नजारा।
पेंड्रा में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं।
क्या है हाइपोथर्मिया?
हाइपोथर्मिया एक लाइफ थ्रेटनिंग इमरजेंसी स्थिति है। इसमें शरीर का सामान्य तापमान 98.6 फॉरेनहाइट (37 डिग्री सेल्सियस) से नीचे चला जाता है। तापमान गिरने पर शरीर सामान्य रूप से काम नहीं कर पाता और धीरे-धीरे उसके अहम अंगों की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है।
पीडियाट्रिशियन डॉ. आकाश लालवानी के अनुसार, ठंड के मौसम में शरीर हवा या पानी के संपर्क में आकर तेजी से अपनी गर्मी खो देता है। शरीर की लगभग 90 फीसदी गर्मी त्वचा और सांस के जरिए बाहर निकलती है। ठंडी हवा या नमी के संपर्क में आने पर यह प्रक्रिया और तेज हो जाती है।
अगर कोई व्यक्ति ठंडे पानी में है, तो उसका शरीर हवा की तुलना में 25 गुना तेजी से अपनी गर्मी खोता है, जिससे हाइपोथर्मिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में समय पर इलाज न मिले तो यह जानलेवा साबित हो सकता है।
रायपुर में नगर निगम ने कई जगहों पर अलाव का इंतजाम किया
रायपुर में शीतलहर का असर बढ़ते ही नगर निगम ने आम लोगों को राहत देने के लिए शहर में अलाव जलाने की व्यवस्था शुरू कर दी है। निगम ने 12 से अधिक लोकेशन पर रातभर अलाव जलवाने के निर्देश दिए हैं, ताकि बेघर, राहगीरों और आम नागरिकों को ठंड से तुरंत राहत मिल सके।
रायपुर नगर निगम की मेयर मीनल चौबे और कमिश्नर विश्वदीप के निर्देशों के बाद सभी जोन कमिश्नरों और जोन हेल्थ अधिकारियों से रात में फील्ड में रहने और अलाव के इंतजाम की निगरानी करने को कहा गया है।
स्वास्थ्य विभाग ने भी जारी की एडवाइजरी
स्वास्थ्यविभाग ने भी एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि शीतलहर के दौरान, केवल आवश्यकता होने पर ही यात्रा करें और बाहर निकलते समय पूरी तरह गर्म कपड़े पहनें।
मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है।
वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े।
डॉक्टर बोले- सतर्क रहना जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह से तापमान बदल रहा है, बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि…
शाम के बाद घर और आसपास मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले कॉइल/लिक्विड का उपयोग करें।
स्लीपिंग नेट (Insecticide Treated Net – ITN) या लॉन्ग लास्टिंग मच्छरदानी (LLIN) का उपयोग रात में जरूर करें।
घर के दरवाजे-खिड़कियों पर जाली लगाएं ताकि मच्छर अंदर न आ सके
पानी जमा न होने दें
कूलर, गमले, पुराने टायर, बाल्टी, बर्तन आदि में पानी जमा न रहने दें।
सप्ताह में कम से कम एक बार इन्हें साफ और सूखा करें।
नाली व ड्रेनेज सिस्टम खुला और साफ रखें।
शरीर को ढककर रखें
खासकर शाम के समय पूरी बांह के कपड़े और फुल पैंट पहनें।
बच्चों को भी हल्के लेकिन ढकने वाले कपड़े पहनाएं।
समय पर जांच और इलाज कराएं
यदि बुखार, ठंड लगना, पसीना आना, सिरदर्द या शरीर दर्द जैसे लक्षण हों, तो तुरंत ब्लड टेस्ट कराएं।
मलेरिया फैलने का आधार
तापमान 33-39°C (दिन में)
तापमान 14-19°C (रात में)
ऐसा तापमान मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों के लिए अनुकूल होता है। छत्तीसगढ़ में तापमान अभी इसी तरह का हो रखा है। यानी छत्तीसगढ़ में मलेरिया फैलने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। अगले आठ दिनों में मलेरिया संक्रमण का खतरा बढ़ा हुआ माना जा रहा है, खासकर ग्रामीण/जंगल क्षेत्रों में।
2 तरह के मलेरिया का खतरा
प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम (गंभीर प्रकार का मलेरिया)
प्लास्मोडियम विवैक्स (सामान्य लेकिन बार-बार लौटने वाला मलेरिया) छत्तीसगढ़ में 11 नवंबर तक प्लास्मोडियम विवैक्स के बढ़ने का ही खतरा ज्यादा है। ऐसे में अपने आस-पास के इलाके में पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी का उपयोग करें। फुल स्लीव के कपड़े पहनें। बुखार और सिरदर्द हो तो तुरंत जांच कराएं।
इन राज्यों में भी जोखिम
पूर्वोत्तर के ज्यादातर राज्य (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम आदि)
गुजरात, बिहार, झारखंड, ओडिशा, नागालैंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक
उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, और छत्तीसगढ़ के कुछ जिले
प्रशासन को गुमराह करने और SDM नोटिस के विरोध में एकजुट हुआ पूरा गांव, स्कूली बच्चे भी हक की लड़ाई में उतरे
8 सूत्रीय मांगों पर लिखित समझौते से मुकरने का आरोप, कटघोरा विधायक और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचने की अपील
कोरबा/कटघोरा। एसईसीएल कोरबा प्रबंधन और आउटसोर्सिंग टीएमसी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा की गई वादाखिलाफी और आदिवासियों के अधिकारों के हनन के विरोध में ग्राम भेजीनारा और लालपुर के ग्रामीणों ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व में तय हुई 8 सूत्रीय लिखित सहमति से मुकरने और स्थानीय प्रशासन को गलत जानकारी देकर ग्रामीणों को एसडीएम अनुविभागीय अधिकारी कटघोरा के माध्यम से नोटिस दिलवाए जाने से आक्रोशित ग्रामीणों ने भारी बारिश के बावजूद विवादित स्थल पर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, इस आंदोलन में अपने भविष्य और अधिकारों की रक्षा के लिए स्कूली बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है ।
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि 70% से अधिक आदिवासी आबादी वाले इन गांवों की जमीन 1987 में सिंघाली खदान के लिए अधिग्रहित की गई थी, उस वक्त रोजगार के नाम पर किसानों से भू-राजस्व पर्चियां ले ली गईं, जो आज तक नहीं लौटाई गईं। पर्ची न होने के कारण गांव के आदिवासी बच्चों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है, जिससे वे उच्च शिक्षा और सरकारी योजनाओं से वंचित हो रहे हैं ।
ग्रामीणों की 8 सूत्रीय प्रमुख मांगें
रोजगार व मुआवजा विवरण
सिंघाली खदान में 275 ग्रामीणों को दिए गए रोजगार और मुआवजे की संपूर्ण लिखित जानकारी एसईसीएल कोरबा प्रबंधन तत्काल जारी करे । मुख्य मार्ग की बहाली
लालपुर और भेजीनारा को जोड़ने वाले पुराने मुख्य मार्ग को बाधित करने के बजाय सुव्यवस्थित किया जाए । तालाब पाटने की जांच
निस्तारी के लिए उपयोग किए जा रहे सार्वजनिक तालाब को किसकी अनुशंसा से पाटा गया इसकी आधिकारिक जानकारी दी जाए । पेयजल व्यवस्था
ग्राम लालपुर एवं भेजीनारा में स्थायी शुद्ध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए । वैकल्पिक रोजगार
स्थानीय भू-विस्थापितों को टी.एम.सी. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में प्राथमिकता के आधार पर वैकल्पिक रोजगार दिया जाए । अवैध कब्जे पर कार्रवाई
खसरा नंबर 217/16क, 217/16ख, और 217/16ग की निजी जमीनों पर टीएमसी कंपनी द्वारा जबरन कब्जा कर बनाए गए रास्ते के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए । मुक्तिधाम ध्वस्तीकरण पर मामला दर्ज
पूर्वजों के पवित्र मुक्तिधाम को जबरन ध्वस्त कर जन-भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली कंपनी पर तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई हो । भू-राजस्व पर्ची की वापसी
1987 से रोकी गई किसानों की मूल-पर्चियां तत्काल वापस की जाएं और अर्जित भूमि का रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाए ताकि बच्चों के जाति प्रमाण पत्र बन सकें ।
समाचार लिखे जाने तक विवादित स्थल पर शासन या प्रशासन का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा था ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी और कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय विधायक स्वयं मौके पर आकर जमीनी हकीकत का मुआयना करें और समस्याओं का न्यायसंगत निराकरण निकालें जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं आंदोलन जारी रहेगा ।
फसल विविधीकरण, उर्वरक दुकानों की जांच, प्राकृतिक खेती और किसान उत्पादक संगठनों की प्रगति पर विशेष जोर कोरबा, 24 अगस्त 2026। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में कृषि, पशुधन चिकित्सा, मत्स्य, उद्यानिकी एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने तथा योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने फसल क्षेत्राच्छादन एवं फसल विविधीकरण की समीक्षा करते हुए किसानों को अधिक लाभदायक एवं उपयुक्त फसलों के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए। उन्होंने रागी के फसल क्षेत्र में 25 प्रतिशत वृद्धि तथा रामतिल के क्षेत्र को दोगुना करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने को कहा। साथ ही बीज मिनीकिट के अंतर्गत दलहन फसलों के बीज वितरण में वृद्धि करने के निर्देश दिए। जिले की सभी 198 उर्वरक दुकानों की होगी जांच
कलेक्टर श्री दुदावत ने जिले की सभी 198 उर्वरक दुकानों की जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने शासकीय एवं निजी उर्वरक दुकानों की ब्लॉकवार सूची तैयार कर प्रत्येक दुकान से नमूना लेकर उसकी जांच सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि नमूना संकलन एवं जांच की प्रक्रिया में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने विगत वर्ष की तुलना में अऋणी किसानों के फसल बीमा में अधिक से अधिक प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को योजना की जानकारी देकर बीमा के लिए प्रोत्साहित करने को कहा। तीन वर्षों में सभी किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड देने का लक्ष्य कलेक्टर ने स्वायल हेल्थ कार्ड की समीक्षा करते हुए निर्धारित क्षमताओं के अनुरूप मिट्टी की जांच कराने तथा प्रत्येक वर्ष लगभग 25 हजार किसानों का लक्ष्य निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने आगामी तीन वर्षों में जिले के सभी किसानों को स्वायल हेल्थ कार्ड उपलब्ध कराने के लिए कार्ययोजना बनाकर कार्य करने को कहा। उन्होंने वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारियों एवं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों को किसानों से सतत समन्वय स्थापित कर बारिश समाप्त होने के बाद निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप उपलब्धि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
प्राकृतिक खेती और एफपीओ विस्तार पर विशेष जोर कलेक्टर ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन की समीक्षा करते हुए क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) से शत-प्रतिशत कार्य लेने के निर्देश दिए। उन्होंने मैदानी अमले के प्रशिक्षण, किसानों से निरंतर संपर्क तथा जैविक प्रमाणीकरण की प्रक्रिया सितंबर माह तक पूर्ण कराने को कहा। उन्होंने परंपरागत कृषि विकास योजना, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन एवं खाद्य तेल मिशन की भी समीक्षा की। किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) में किसानों की सदस्यता बढ़ाने के लिए सभी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारियों को सितंबर माह तक विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि क्षेत्र में 1200 तथा उद्यानिकी क्षेत्र में 400 एफपीओ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषक चौपाल आयोजित कर किसानों को एफपीओ से जोड़ने को कहा। कलेक्टर ने नलकूप खनन, जैविक खेती प्रशिक्षण एवं बीज उत्पादन के लिए किसानों के पंजीयन की जानकारी ली। उन्होंने कृषक उन्नति योजना से अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने, दलहन एवं तिलहन फसल प्रदर्शन के निर्धारित लक्ष्य हासिल करने तथा कोदो, कुटकी सहित अन्य फसलों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने 30 सितंबर तक किसानों का पंजीयन सुनिश्चित करने को कहा। एग्रीस्टैक के अंतर्गत वनपट्टाधारी किसानों के आधार नंबर, वनपट्टे में दर्ज नाम सहित अन्य आवश्यक जानकारी तहसील के माध्यम से प्रेषित करने के निर्देश दिए। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड निर्माण के निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया।
मत्स्य एवं पशुधन विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने मत्स्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए एक्वा पार्क, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत केज कल्चर को प्रोत्साहित करने, मत्स्य बीज वितरण, मत्स्य पालकों के प्रशिक्षण एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी देने के निर्देश दिए। उन्होंने मत्स्य पालकों के किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन बढ़ाने तथा जल क्षेत्र आवंटन में प्रगति लाने को कहा। पशुधन चिकित्सा विभाग की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कृत्रिम गर्भाधान के निर्धारित लक्ष्यों की पूर्ति के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाने, टीकाकरण अभियान पूर्ण करने तथा अधिक से अधिक शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने पशु उपचार, बधियाकरण, औषधि वितरण एवं राज्य पोषित व्यक्तिमूलक योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। मोबाइल वेटेरिनरी वैन में लक्ष्य से पीछे चल रहे कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए। रेशम उत्पादन और कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों की समीक्षा कलेक्टर ने रेशम विभाग की समीक्षा करते हुए जमीन धागाकरण के कार्य को बढ़ाने तथा इस कार्य से जुड़े लोगों को आवश्यक प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र की गतिविधियों की भी समीक्षा की और कृषि कार्यों में किसानों को तकनीकी सलाह एवं परामर्श उपलब्ध कराने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। बैठक में उप संचालक कृषि देवेन्द्र सिंह कंवर, रेशम अधिकारी बलभद्र सिंह भंडारी, पशुधन चिकित्सा विभाग से एस.एन.मिश्रा सहित मत्स्य पालन, कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी, संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा पदस्थापना आदेश जारी, 15 दिनों में ज्वाइनिंग के निर्देश
उच्चतम न्यायालय में स्थगन के निराकरण के दो दिनों के भीतर विभाग ने जारी किए नियुक्ति आदेश
बड़ी संख्या में युवा इंजीनियरों की नियुक्ति से जल जीवन मिशन एवं अन्य कार्यों में आएगी और गति – उप मुख्यमंत्री अरुण साव
रायपुर. 24 अगस्त 2026। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने 111 उप अभियंताओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए हैं। इनमें 101 सिविल अभियंता और 10 विद्युत/यांत्रिक अभियंता शामिल हैं। प्रमुख अभियंता कार्यालय द्वारा नियुक्ति के साथ ही सभी चयनित उप अभियंताओं की पदस्थापना के आदेश भी जारी किए गए हैं। चयनितों को नियुक्ति आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर पदस्थापना कार्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित होने कहा गया है। निर्धारित तिथि तक उपस्थित नहीं होने की स्थिति में नियुक्ति स्वयंमेव निरस्त मानी जाएगी।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में उप अभियंता (सिविल) के 118 पदों तथा उप अभियंता (विद्युत/यांत्रिकी) के 10 पदों पर भर्ती के लिए व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) द्वारा अप्रैल-2025 में लिखित परीक्षा ली गई थी। परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद जुलाई-2025 में विभाग द्वारा व्यापम की मेरिट सूची के अनुसार अभ्यार्थियों के दस्तावेज परीक्षण और पदस्थापना विकल्प के संबंध में कांउसलिंग के बाद उच्चतम न्यायालय में दायर स्थगन के कारण नियुक्ति प्रक्रिया विलंबित रही। उच्चतम न्यायालय द्वारा 20 अगस्त 2026 को याचिका के निराकरण के बाद उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव के निर्देश पर विभाग ने तत्काल 22 अगस्त को प्रथम चरण में अनुशंसित चयन सूची के अनुसार सिविल के 101 उप अभियंताओं तथा विद्युत/यांत्रिकी के 10 उप अभियंताओं के पदस्थापना आदेश जारी कर दिए हैं।
उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव ने एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नियुक्ति पर खुशी जताते हुए कहा कि युवा इंजीनियरों की विभाग में नियुक्ति से विभागीय कार्यों, विशेषकर जल जीवन मिशन के कार्यों में गति आएगी। उच्चतम न्यायालय से प्रकरण के निराकरण के तत्काल बाद हमने नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर पदस्थापना आदेश जारी किए हैं। इन युवा इंजीनियरों की ऊर्जा और तकनीकी दक्षता का लाभ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को मिलेगा।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने सभी चयनितों को पदस्थापना कार्यालय में उपस्थिति देते समय शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, स्थाई जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, सक्षम मेडिकल बोर्ड का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र एवं अन्य प्रमाण पत्रों की मूल प्रति अनिवार्यतः प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मूल तकनीकी शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र के साथ कक्षा दसवीं की अंकसूची जिसमें जन्मतिथि अंकित हो या मूल जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य है।