कोरबा
धान खरीदी केन्द्रों में कलेक्टर दुदावत का औचक निरीक्षण: तिलकेजा समिति प्रबंधक सस्पेंड, चिकनीपाली प्रबंधक को नोटिस
धान खरीदी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने कलेक्टर का औचक निरीक्षण
बिचौलियों पर रोक लगाने एवं पात्र किसानों का शत प्रतिशत धान खरीदी के दिए निर्देश
उपार्जन केंद्र में अनियमितता पर कलेक्टर का कड़ा रुख, तिलकेजा समिति प्रबन्धक निलंबित, चिकनीपाली प्रबंधक को नोटिस जारी
नमी व गुणवत्ता जांच के लिए धान की पलटी कराकर खरीदी करने किया निर्देशित
उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी कार्य शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों व गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही हो संचालित :- कलेक्टर दुदावत
वास्तविक किसानों के शत प्रतिशत धान क्रय करने हेतु किया निर्देशित
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के अंतर्गत समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था का जायजा लेते हुए कोरबा एवं करतला विकासखंड के विभिन्न उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण किया। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों में वास्तविक किसानों से धान की खरीदी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने समितियों को निर्देशित किया कि केंद्रों में आने वाले धान को अनिवार्य रूप से पलटी कराकर ढेरी लगाई जाए, नमी की जांच तथा पुराने एवं अमानक स्तर के धान की खरीदी पर पूर्णतः रोक लगाई जाए।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल, एसडीएम कोरबा सरोज महिलांगे, जिला खाद्य अधिकारी जी एस कंवर सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

कलेक्टर ने भैंसमा, तिलकेजा एवं चिकनीपाली उपार्जन केंद्रों में चल रही खरीदी प्रक्रिया का बारीकी से अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने समिति प्रबंधक एवं फड़ प्रभारियों से अब तक हुई खरीदी, पंजीकृत किसानों की संख्या, धान बेचने वाले किसानो की संख्या, जारी टोकन, धान उठाव एवं बारदाना उपलब्धता की विस्तृत जानकारी ली। साथ ही धान का नमी परीक्षण एवं वजन कराकर मौके पर भौतिक सत्यापन भी किया। उन्होंने निर्देशित किया कि पात्र किसानों को धान विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए, सभी अधिकारी इस बात का विशेष ध्यान रखें।
कलेक्टर ने समिति में आए किसानों से संवाद कर टोकन प्राप्ति की प्रक्रिया, केंद्रों में उपलब्ध सुविधाएं, खेती की स्थिति, उगाए गए धान की किस्म एवं पैदावार की जानकारी भी ली।

किसानों के हित में अनियमितताओं पर सख्ती
निरीक्षण के दौरान भैंसमा समिति में एक किसान के पास पुराना एवं अमानक स्तर का धान पाए जाने पर कलेक्टर द्वारा अमानक धान को जब्त करने के निर्देश दिए गए।
तिलकेजा उपार्जन केंद्र के निरीक्षण के दौरान खरीदी प्रक्रिया में गंभीर अव्यवस्थाएं पाए जाने पर कलेक्टर ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। कार्य में लापरवाही बरतने पर समिति प्रबंधक दुल्ली चंद धीवर को निलंबित करने के निर्देश दिए ।
कलेक्टर ने कहा कि धान खरीदी शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी की प्रक्रिया शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही संचालित की जाए, अन्यथा संबंधितों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

भौतिक सत्यापन के दौरान अवैध धान किया गया जब्त
तिलकेजा समिति में धान बेचने आए किसान युवराज सिंह के धान का प्रशासनिक टीम द्वारा निरीक्षण व भौतिक सत्यापन किया गया। जांच के दौरान किसान के पास से बिचौलिये से प्राप्त अवैध धान भी विक्रय हेतु पाया गया। उक्त धान को नियमों के अनुरूप टीम द्वारा मौके पर ही जब्त कर आवश्यक कार्रवाई की गई।
कलेक्टर ने सभी समितियों में वास्तविक किसानों से धान क्रय करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे बिचौलियों के धान बेचने में किसी प्रकार का सहयोग न करें। जिससे वास्तविक किसानों को धान विक्रय में किसी प्रकार की परेशानी ना हो।

चिकनीपाली समिति प्रबंधक को नोटिस जारी करने व खरीदी कार्य से पृथक रखने के निर्देश
चिकनीपाली उपार्जन केंद्र में कलेक्टर ने किसानों से चर्चा कर खरीदी व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने केंद्र में सीसीटीवी, सुरक्षा व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान बिना पलटी किए धान की खरीदी किए जाने पर समिति प्रबंधक अजय कुमार को नोटिस जारी करते हुए खरीदी कार्य से पृथक रखने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने कहा कि धान खरीदी प्रक्रिया में पारदर्शिता, गुणवत्ता और किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा किसी भी स्तर पर अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कोरबा
चेक बाउंस आरोपी को अस्पताल में वीआईपी ट्रीटमेंट:कोर्ट आदेश के बावजूद 6 दिन अलग कमरे में रहा, मोबाइल चलाते दिखा, जांच के आदेश
कोरबा। कोरबा के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चेक बाउंसिंग के आरोपी अपूर्व वासन को न्यायालय के आदेश के बावजूद छह दिनों तक जेल की जगह अस्पताल में ‘वीआईपी ट्रीटमेंट’ मिलता रहा। इस दौरान उसे एक अलग कमरा दिया गया और वह पुलिसकर्मी की मौजूदगी में मोबाइल फोन चलाते हुए कैमरे में कैद हो गया।
जानकारी के अनुसार, आरोपी अपूर्व वासन को 6 मार्च को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जबकि न्यायालय ने उसे चेक बाउंस मामले में सीधे जेल भेजने का निर्देश दिया था। नियमों के विपरीत, उसे सामान्य वार्ड या आईसीयू के बजाय एक अलग कमरा उपलब्ध कराया गया।


अस्पताल परिसर में घूमता-फिरता भी देखा गया आरोपी
आरोपी अस्पताल परिसर में घूमता-फिरता भी देखा गया और पुलिसकर्मी के सामने मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए उसका वीडियो मीडिया में सामने आया। घटनाक्रम उजागर होने के बाद अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में आरोपी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस संबंध में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. गोपाल कंवर ने पूरे मामले की जांच कराने की बात कही है।

वहीं, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले ने बताया कि आरोपी को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद जेल में दाखिल करा दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, इस दौरान आरोपी को न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी, लेकिन नियमों के तहत बिना जेल में आमद कराए जमानत की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकती थी। इसलिए उसे पहले जेल में दाखिल कराया गया ताकि औपचारिक प्रक्रिया पूरी हो सके।
कोरबा
प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की समस्याओं के समाधान हेतु पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर को लिखा पत्र
कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कोरबा नगर निगम क्षेत्र के हितग्राहियों को आ रही व्यावहारिक समस्याओं को लेकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ जनप्रतिनिधि जयसिंह अग्रवाल ने कलेक्टर कोरबा को पत्र लिखकर तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि योजना के क्रियान्वयन में आ रही प्रशासनिक एवं व्यावहारिक कठिनाइयों के कारण अनेक जरूरतमंद परिवार अनावश्यक रूप से परेशान हो रहे हैं।
अपने पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि कई ऐसे हितग्राही हैं जिनके पास पहले से कच्चा मकान या झोपड़ी बनी हुई है तथा उसी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास निर्माण के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। इसके बावजूद नगर निगम के कुछ अधिकारियों द्वारा यह शर्त रखी जा रही है कि पहले मौजूदा मकान को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए, तभी योजना का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था पूरी तरह अव्यावहारिक है, क्योंकि अनेक परिवारों में माता-पिता, उनके पुत्र और उनके परिवार एक ही परिसर में रहते हैं। यदि निर्माण से पहले ही मकान तोड़ दिया जाएगा तो परिवारों के सामने रहने की गंभीर समस्या खड़ी हो जाएगी। उन्होंने मांग की है कि ऐसे मामलों में हितग्राहियों को पुराने कच्चे मकान को तत्काल तोड़े बिना उपलब्ध भूमि पर प्रधानमंत्री आवास निर्माण की अनुमति दी जाए।
जयसिंह अग्रवाल ने यह भी बताया कि जिन हितग्राहियों के आवास स्वीकृत हो चुके हैं और जिन्होंने निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, उन्हें योजना की किश्तें समय पर नहीं मिल पा रही हैं। योजना की राशि चरणबद्ध तरीके से जारी होने के कारण किश्तों में हो रही देरी से कई आवासों का निर्माण अधूरा रह गया है और अनेक निर्माण कार्य धनराशि के अभाव में रुक गए हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि हितग्राहियों को योजना की राशि समय पर उपलब्ध कराई जाए, ताकि निर्माण कार्य बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।
उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान कोरबा क्षेत्र के वर्तमान विधायक एवं राज्य सरकार के मंत्री द्वारा यह सार्वजनिक घोषणा की गई थी कि कोई भी परिवार झुग्गी-झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर नहीं रहेगा और सभी वंचित परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाया जाएगा। ऐसे में यह आवश्यक है कि इस घोषणा के अनुरूप अधिक से अधिक परिवारों को योजना से जोड़ा जाए।
जयसिंह अग्रवाल ने यह भी स्मरण कराया कि उनके कार्यकाल में कोरबा क्षेत्र में लंबे समय से शासकीय भूमि पर निवास कर रहे लगभग 10 हजार से अधिक निम्न आय वर्ग के परिवारों को पट्टे वितरित किए गए थे, जिनके आधार पर ही उनको प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल रहा है। इसके बावजूद अभी भी अनेक परिवार ऐसे हैं जो विभिन्न कारणों से योजना के दायरे में नहीं आ पाए हैं और आवास के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने मांग की है कि ऐसे सभी वंचित परिवारों को चिन्हित कर उन्हें भी योजना में शामिल किया जाए।
उन्होंने जिला प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि इस महत्वपूर्ण विषय को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल सके और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ वास्तविक लोगों तक पहुंच सके।
कोरबा
सुदूर वनांचल लेमरू की मलेरिया मुक्त क्षेत्र की ओर प्रेरणादायक यात्रा
कोरबा। कोरबा ब्लॉक का सुदूर वनांचल और पूर्व में सुविधाविहीन रहा क्षेत्र लेमरू, जो जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, आज स्वास्थ्य जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की बदौलत मलेरिया मुक्त होने की दिशा में अग्रसर है। यह क्षेत्र पहले घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भारी मलेरिया प्रभावित माना जाता था, जहाँ हर वर्ष बरसात के मौसम में जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुँच के कारण बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से बीमार हो जाते थे। इस क्षेत्र में मलेरिया का भय इतना गहरा था कि बाहरी व्यक्ति यहाँ आने से कतराते थे और आने से पहले अनिवार्य रूप से मच्छरदानी या बचाव की दवाओं की व्यवस्था करते थे। यहाँ तक कि समाज में यह भ्रांति व्याप्त थी कि लेमरू के पानी में ही मलेरिया है, जिसके डर से लोग इस क्षेत्र में अपनी बेटियों का विवाह तक करने से डरते थे।
इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों के अभाव के बावजूद महामारी के समय शिविर लगाकर और लोगों को जागरूक कर इस बीमारी के आतंक को कम करने का प्रयास शुरू किया। स्वास्थ्य विभाग, मितानिनों और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों से लेमरू ने मलेरिया नियंत्रण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विभाग द्वारा एक प्रभावी रणनीति के तहत घर-घर सर्वे कर बुखार के संदिग्ध मरीजों की आरडी किट से तुरंत जाँच की गई और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से लोगों को मलेरिया के लक्षणों व बचाव के प्रति जागरूक किया गया। ग्रामीणों को घरों के आसपास जल-जमाव रोकने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया ताकि मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट किया जा सके।
अभियान के दौरान पूरे क्षेत्र में डीडीटी का छिड़काव सुनिश्चित किया गया और सभी घरों, हॉस्टलों तथा आश्रमों में मच्छरदानी वितरित कर उनके नियमित उपयोग की निगरानी की गई। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों ने शिविरों के माध्यम से स्थल पर ही क्लोरोक्वीन, पैरासिटामॉल और एसीटी किट का सेवन कराया। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का निरंतर भ्रमण, कर्मचारियों का मुख्यालय में निवास और अस्पताल का 24×7 संचालन इस सफलता के मुख्य आधार रहे। इन संयुक्त प्रयासों और ग्रामीणों द्वारा इस लड़ाई को एक जन-अभियान बनाने का परिणाम यह रहा कि आज लेमरू में मलेरिया के मामलों में भारी कमी आई है। लेमरू की यह सफलता सिद्ध करती है कि सामूहिक प्रयास से कठिन से कठिन चुनौती को भी जीता जा सकता है और यह अन्य वनांचल क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गया है।
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