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कोरोना से टूटा हौसला, स्वनिधि से मिला सहारा, फिर रोशन हुए घरों के चूल्हे
नगर निगम क्षेत्र में अब तक 9079 हितग्राहियों को किया गया है ऋण स्वीकृत
पी.एम. स्वनिधि योजना ने बदली जिंदगी, पथ विक्रेताओं की आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान
कोरबा। कोरोना महामारी की काली रात में जब पथ विक्रेताओं की आजीविका पूरी तरह बुझ चुकी थी, तब प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना उनके जीवन में एक आशा की किरण बनकर आई। महामारी के दौरान बंद पड़े छोटे-छोटे व्यवसायों को इस योजना ने न केवल नई ऊर्जा दी, बल्कि हजारों परिवारों को पुनः आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखाई। कोरबा जिले के जयकुमार देवांगन, सुषमा यादव, रामरूप पाण्डेय और सावित्री टंडन जैसे सैकड़ों पथ विक्रेताओं के लिए यह योजना एक नए जीवन की शुरुआत साबित हुई।
महामारी ने रेहड़ी, ठेला, फुटपाथ और पटरी पर छोटे कारोबार करने वाले लोगों की आजीविका पर सबसे गहरा असर डाला था। दिन भर की मेहनत के बाद जो थोड़ा बहुत कमाया जाता था, उसी से घर का चूल्हा जलता था। लेकिन लॉकडाउन ने जैसे उन चूल्हों की लौ ही बुझा दी। कारोबार बंद, आमदनी शून्य और पेट पालने के लाले, हालात इतने गंभीर थे कि इन परिवारों को अपने भविष्य का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था।
ऐसे कठिन समय में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर भारत सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना शुरू की। इसका उद्देश्य पथ विक्रेताओं को छोटे-छोटे ऋण उपलब्ध कराकर उनका टूटा हुआ आत्मविश्वास लौटाना और उन्हें अपने पैरों पर दोबारा खड़ा करना था। बिना किसी गारंटी के मिलने वाले 10 हजार, 20 हजार और 50 हजार रुपये तक के ऋण ने उन व्यवसायों में फिर से जान डाल दी, जो महामारी की मार से लगभग समाप्त हो चुके थे।
कोरबा नगर निगम क्षेत्र में इस योजना का प्रभाव अत्यंत सकारात्मक रूप से सामने आया है। जिला शहरी विकास अभिकरण के मिशन मैनेजर मनीष भोई के अनुसार 9079 हितग्राहियों को ऋण स्वीकृत किया जा चुका है, जिनमें से 8655 पथ विक्रेताओं को राशि का वितरण भी कर दिया गया है। इन लोगों ने अपने व्यवसायों को फिर से खड़ा किया और अब बिना किसी भय या असमंजस के अपने परिवारों की जरूरतें पूरी कर पा रहे हैं। उनके चेहरों पर लौटी मुस्कान इस योजना की सफलता को बयां करती है।

इन्हीं में से पोड़ीबहार वार्ड क्रमांक 32 के निवासी जयकुमार देवांगन मसाले बेचने का पारंपरिक काम करते थे। महामारी में उनका काम ठप हो गया, लेकिन स्वनिधि योजना से मिले 10 हजार रुपये ने उन्हें फिर से कारोबार शुरू करने की ताकत दी। तेजी से ऋण चुकाकर उन्होंने 20 हजार रुपये का दूसरा ऋण भी प्राप्त किया और अब 50 हजार रुपये के ऋण के लिए आवेदन कर चुके हैं। उनकी आर्थिक स्थिति में आया सुधार आज उनके परिवार के जीवन में नई खुशियों की वजह बना है।

इसी प्रकार बालको के पाड़ीमार भदरापारा वार्ड क्रमांक 40 की निवासी सुषमा यादव सिलाई का व्यवसाय चलाती थीं। लॉकडाउन ने उनके काम को पूरी तरह रोक दिया था। स्वनिधि योजना से मिले 10 हजार रुपये ने उन्हें आत्मनिर्भरता का नया द्वार दिखाया। आज वे पहले की तरह नियमित रूप से कार्य कर रही हैं और आर्थिक रूप से मजबूत हो चुकी हैं।

कांशीनगर वार्ड क्रमांक 22 के निवासी रामरूप पाण्डेय फल बेचने का काम करते थे। महामारी की मार उनके घर पर भी पड़ी, लेकिन 10 हजार रुपये का ऋण उन्हें वापस अपने व्यवसाय में सक्रिय कर गया। इसी प्रकार दर्री वार्ड क्रमांक 58 की निवासी सावित्री टंडन फोटो फ्रेमिंग का व्यवसाय चलाती थीं, जो महामारी में पूरी तरह बंद हो गया था। स्वनिधि योजना ने उनके काम को भी नया जीवन प्रदान किया और अब वे सुचारू रूप से अपना व्यवसाय संचालित कर रही हैं।
जयकुमार, सुषमा, रामरूप और सावित्री जैसे अनेक परिवार थे, जिनके घरों में रोजी-रोटी का चूल्हा सड़क किनारे सामान बेचकर ही जलता था। महामारी ने न केवल उनके व्यवसाय को रोका, बल्कि उनके विश्वास, उम्मीद और जीवन की दिशा को भी हिला दिया था। लेकिन स्वनिधि योजना उनके लिए नए सवेरे की तरह साबित हुई। आज ये परिवार न केवल आर्थिक रूप से संभल चुके हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की राह पर दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं, जो उन्हें एक बेहतर और स्थिर जीवन की ओर ले जा रही है।
प्र धानमंत्री स्वनिधि योजना कोरबा के पथ विक्रेताओं के लिए केवल एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और स्थायित्व का प्रतीक बन चुकी है। संकट काल में बुझ चुके चूल्हों में फिर से रोशनी लौटी है और जीवन की गाड़ी एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुकी है।
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
बांकी – एसईसीएल कॉलोनी में चरम पर अवैध बेजा कब्जा, रहवासियों ने सौंपा ज्ञापन, प्रबंध की नजर अनदेखी समझ से परे…देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकी मोंगरा :- नगर पालिका परिषद बांकी मोगरा के वॉर्ड क्रमांक 14 एसईसीएल कॉलोनी में इन दिनों अवैध कब्जा निर्माण जोरो पर है, किसी ने कॉलोनी के बिछे बची जगह में अपना मकान निर्माण करा लिया तो कही क्वाटर के सामने पक्का निर्माण कराकर अतिक्रमण किया गया है।
इसी विषय पर गंभीर होकर कॉलोनी के रहवासियों ने एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में कथित बेजा कब्जे को हटाने की मांग की है। ज्ञापन में संतराम साहू का नाम उल्लेखित करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण किया गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और भविष्य में इससे बड़ी बड़ी समस्याएं भी उत्पन्न होगी ।

• शिकायत के बाद भी प्रबंधन की नजर अनदेखी करना समझ से परे।
• आखिर क्यों नहीं की जाती कार्यवाही, क्या पर्दे के पीछे चलता है की और खेल।

स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, इस ज्ञापन में एसईसीएल प्रबंधन से मामले की जांच कर कार्रवाई करने तथा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई है साथ ही चेतावनी दी है कि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो हम आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रबंधन की होगी ।
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‘PM को बच्चों के भविष्य की नहीं, अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है’ : राहुल गांधी
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गड़बड़ी पर चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह पहले दिन से ही सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) और 'सीओईएमपीटी' को अनुबंध दिए जाने के मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि देश के युवाओं को सच जानने का अधिकार है। गांधी ने मीडिया की खबरों को साझा किया और लोगों से उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ने का आह्वान किया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ”सीबीएसई ने ओएसएम निविदाएं तीन बार आमंत्रित कीं। पहली बार एक भी बोली नहीं लगी। दूसरी बार कोई भी बोलीदाता पात्र नहीं पाया गया। और अंततः, तकनीकी मानकों को तब तक कमतर किया गया जब तक कि ‘सीओईएमपीटी’ उन्हें पार नहीं कर गई। स्कैनिंग रेजोल्यूशन कम कर दिया गया। रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता हटा दी गई। सीएमएमआई प्रमाणन स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियों के लिए जुर्माने के प्रावधान भी हटा दिये गए।” राहुल गांधी ने कहा, ”भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस ने भी तीसरे दौर के लिए अर्हता प्राप्त की थी। लेकिन टीसीएस दौड़ में हार गई और सीओईएमपीटी-एक ऐसी कंपनी जिसका रिकॉर्ड विफलताओं से भरा रहा है-वह जीत गई। और आज सीबीएसई के छात्र किस बात की शिकायत कर रहे हैं? खराब तरीके से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं, गायब पन्ने और एक खराब मूल्यांकन पोर्टल।”

गांधी ने कहा कि शिक्षकों ने सीबीएसई को चेतावनी दी थी कि ओएसएम प्रणाली को राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन से पहले कम से कम एक या दो साल की अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता है, फिर भी इसे जल्दबाजी में आगे बढ़ा दिया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा, ”तो मैं फिर से पूछता हूं – कौन चाहता था कि सीओईएमपीटी जीते? किसने धीरे-धीरे मानकों को इतना कम किया कि यह कंपनी इसे पार कर सके?” उन्होंने कहा, “प्रधान जी और सीबीएसई का कहना है कि ‘कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया’। यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या अनुबंध ईमानदारी से उस सर्वश्रेष्ठ कंपनी को दिया गया था जो काम को सही ढंग से कर सकती थी?”

गांधी ने कहा कि 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो केवल तब अर्हता प्राप्त कर सकी जब उसके लिए नियमों में ”ढील दी गई।” उन्होंने कहा, ”सवाल पूछने के कारण मुझ पर हमला करने वाले भाजपा मंत्रियों के लिए – मैंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। इसे (जांच को) सीबीएसई से लेकर सीओईएमपीटी को दिए गए हर अनुबंध तक विस्तारित करें। हमारे युवाओं को सच्चाई जानने का हक है।” गांधी ने कहा, “मोदी जी, सीबीएसई की गड़बड़ी पर आपकी चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ आपकी निष्क्रियता देश को बताती है कि आपको वास्तव में किसकी परवाह है – लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सरकार के अस्तित्व की।”

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि उनसे यह खुलासा हुआ है कि सीबीएसई ने इस साल की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली प्रदान करने वाले ठेकेदारों के लिए प्रस्तावों के वास्ते अपने अनुरोध में तकनीकी शर्तों को लगातार नरम किया। रमेश ने अन्य चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यूनतम ‘स्कैनिंग रेजोल्यूशन’ को 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया और अनिवार्य ‘कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन’ (सीएमएमआई) प्रमाणन को स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जुर्माना के प्रावधानों को इस तरह बदला गया कि उनका ध्यान त्रुटियों के बजाय गति पर केंद्रित हो गया। उन्होंने कहा कि साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं की ‘स्पाइन’ (बाइंडिंग) काटे बिना स्कैन करने की शर्त हटा दी गई और रोबोटिक स्कैनर के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया।

जयराम रमेश ने शेयर किया पोस्ट
रमेश ने अपने पोस्ट में कहा, “अंतिम ‘आरएफपी’ अगस्त 2025 में जारी किया गया था, जो सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं से केवल छह महीने पहले था। हम पहले से ही जानते हैं कि ओएसएम को लागू करने की जल्दबाजी में क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रायोगिक परियोजना आयोजित करने के सीबीएसई बोर्ड के समझदारी भरे सुझाव को नजरअंदाज कर दिया गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट रूप से, सीबीएसई की कार्रवाई में अनावश्यक जल्दबाजी तथा गुणवत्ता एवं छात्र-केंद्रित प्रावधानों को कमजोर करने की झलक मिलती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस वर्ष से ही ओएसएम को अपना लिया जाए। कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में प्रश्न किया, ”कई सवाल उठते हैं- ‘आरएफपी’ में तकनीकी शर्तों को क्यों कमजोर किया गया? क्या यह निविदा के लिए बोली लगाने वाले ठेकेदारों के कहने पर किया गया था? सीबीएसई ने उन प्रावधानों (उच्च स्कैनिंग रिज़ॉल्यूशन, गलत तरीके से स्कैन की गई प्रतियों के लिए जुर्माना आदि) को क्यों कमजोर किया जो त्रुटियों को कम कर सकते थे और छात्रों व मूल्यांकनकर्ताओं की सहायता कर सकते थे? किस तरह का दबाव था?”

रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रायोगिक परियोजना के जरिए गहन जांच किए बिना और तकनीकी बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता से समझौता करके ‘ओएसएम’ को अपनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाने के पीछे क्या कारण था। उन्होंने सवाल किया, “क्या सीओईएमपीटी की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी, जिसे अंततः सीबीएसई ने अनुबंध दिया? क्या सीबीएसई ने इस तथ्य पर विचार किया कि सीओईएमपीटी का नाम पहले ‘ग्लोबारेना’ था और वह विवादों में घिरी रही थी? क्या मोदी सरकार के राजनीतिक आकाओं की ओर से यह सुनिश्चित करने का दबाव था कि ठेका सीओईएमपीटी को ही मिले?”
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा, ”सीबीएसई को पाक साफ होना चाहिए और वेंडर के चयन, आरएफपी में किए गए संशोधनों, ओएसएम को अपनाने में दिखाई गई जल्दबाजी के कारणों और परीक्षाओं से पहले आयोजित बोर्ड बैठकों के विवरण से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। शायद मंत्री प्रधान कीचड़ उछालने और राजनीति करने के बजाय इन सवालों के जवाब दे सकते हैं।”
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
डेली मार्केट पहुंची तोडू दस्ता, जमकर हुआ हंगामा, दो हिस्सों में होगा नव निर्माण कार्य,,,,देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकीमोंगरा :– नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा द्वारा डेली मार्केट के नव निर्माण के लिए अब तक चार नोटिस दी जा चुकी थी, जिसमें डेली मार्केट के सौंदर्यीकरण और सुविधायुक्त चबूतरा और शेड निर्माण किया जाना है। पर लगातार सब्जी विक्रेताओं द्वारा वहां से न हटने को लेकर विरोध कर रहे थे जो प्रशासन से मार्केट निर्माण का लिखित में मांग कर रहे थे पर प्रशासन द्वारा मौखिक रूप से कहे जाने पर कोई भी संतुष्ट नहीं थे।
आज दिनांक 26/05 की दोपहर डेली मार्केट के सौंदर्यीकरण एवं व्यवस्थित विकास के लिए अतिक्रमण हटाने नगर पालिका परिषद प्रशासन दल बल और जेसीबी लेकर पहुंचे साथ में पालिका सीएमओ, और तहसीलदार के उपस्थिति में अपनी कार्रवाई शुरू की जहां सब्जी विक्रेताओं ने और स्थानीय व्यापारियों ने जमकर विरोध किया।

व्यापारियों और सब्जी व्यवसायियों का कहना था कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के दुकानों और ढांचों को हटाना उनके रोजगार पर असर डालेगा। विरोध बढ़ने पर प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला और सब्जी व्यवसायियों के मांग को मान कर उनको पहले 70 प्रतिशत जगह में निर्माण कार्य और बाद में 30 प्रतिशत जगह में निर्माण कार्य पर सहमति बनी और शुरू के 70 प्रतिशत निर्माण के लिए जगह में जेसीबी चलाई।

• लंबे समय के बाद प्रशासन और व्यवसायियों के बीच सहमति बनी।
• सब्जी विक्रेताओं ने पहले 70 और बाद में 30 प्रतिशत निर्माण पर सहमति दी।

आज की कार्यवाही के दौरान एक भावुक दृश्य देखने को मिला डेली मार्केट के कोने में भेजा कब्जा कर पिछले 25 वर्षो से एक बुजुर्ग महिला जानकी बाई केवट निवास करती थी और वही पर समोसा बेच अपना जीवन यापन करती थी, जो रोते रोते अपने दुख बयां करते हुए कहा कि मेरे इस घर को बिना नोटिस के प्रशासन ने तोड़ दिया, जबकि डेली मार्केट वालो को नोटिस दिया गया था साथ ही बहुत बड़ी और कड़वी सच्चाई कहती हुई कहा कि मेरे मकान के आस पास बड़े बड़े पक्के के अवैध निर्माण है जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, क्योंकि वो सब बड़े आदमी है।

बुजुर्ग महिला के इस बयान के बाद स्थानीय नागरिकों ने भी कहा कि यदि अतिक्रमण हटाया जा रहा है तो सभी पर निष्पक्षता से समान कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल बुजुर्ग महिला को प्रशासन द्वारा आश्वासन दिया गया है कि नव निर्माण के बाद उनको बाकी सभी किं तरह जगह दिया जाएगा।

इसी दौरान डेली मार्केट की कार्यवाही पूरी होने के बाद प्रशासन अपना जेसीबी लेकर पहुंची मेन चौक साड़ा कॉम्प्लेक्स की ओर जहां दुकानदारों द्वारा बोर्ड लगाकर जाम लगाने वाले के बोर्डों और खंभों को ध्वस्त किया गया वही कुछ व्यापारियों ने एक दिन का समय मांगा जीने प्रशासन द्वारा एक दिन का समय दिया गया।
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