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मोदी सबसे ज्यादा दिन सरकार प्रमुख रहने वाले राजनेता:CM-PM मिलाकर बतौर हेड ऑफ गवर्नमेंट 8931 दिन पूरे, पवन कुमार चामलिंग को पीछे छोड़ा

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नई दिल्ली,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत में सबसे लंबे समय तक सरकार के प्रमुख रहने वाले नेता बन गए हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर सरकार के प्रमुख के रूप में 8,931 दिन पूरे करने के साथ ही PM मोदी ने चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया है। उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग को पीछे छोड़ दिया है।

PM मोदी इससे पहले गुजरात के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री रह चुके हैं, और वे ऐसे प्रधानमंत्री भी हैं जिनके पास मुख्यमंत्री के तौर पर काम करने का सबसे लंबा अनुभव है।

गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री, पहली शपथ की तस्वीरें…

मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को शपथ ली थी।

मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार 7 अक्टूबर, 2001 को शपथ ली थी।

मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार 26 मई 2014 को शपथ ली थी।

मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार 26 मई 2014 को शपथ ली थी।

मोदी 4 बार गुजरात के मुख्यमंत्री, 3 बार प्रधानमंत्री बने

17 सितंबर को जन्मे नरेंद्र मोदी 6 साल की उम्र में ही कांग्रेस की ओर से महागुजरात आंदोलन का हिस्सा बने। फिर 8 साल की उम्र में RSS से जुड़ गए थे। 7 अक्टूबर 2001 को 51 साल की उम्र में बिना विधायक बने ही मोदी गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री बने। इसके बाद वे 2002 में, 2007 में और फिर 2012 में गुजरात के मुख्यमंत्री चुने गए।

अपने राजनीतिक सफर के 24 सालों में से पीएम मोदी 14 साल गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। पिछले 11 साल से वे देश के प्रधानमंत्री हैं। यह उनका तीसरा कार्यकाल है।

2025 में मोदी ने बतौर पीएम इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ा, लेकिन नेहरू से अब भी पीछे

नरेंद्र मोदी भारत के लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले दूसरे PM भी हैं। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 4077 दिनों (24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977) का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। 22 मार्च 2026 तक बतौर प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी 4318 पूरे कर चुके हैं।

हालांकि सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड जवाहरलाल नेहरू के नाम है। वे 15 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक यानी लगातार कुल 6126 दिन तक इस पद पर रहे। PM मोदी नेहरू के रिकॉर्ड से 1812 दिन पीछे हैं। रिकॉर्ड तोड़ने के लिए 2029 के बाद भी PM रहना पड़ेगा।

अब जानिए चामलिंग के बारे में…

भारत के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड सिक्किम के पूर्व CM पवन कुमार चामलिंग के नाम है। उनका कार्यकाल 12 दिसंबर 1994 से 26 मई 2019 तक रहा। यानी वे लगभग 24 साल 165 दिन CM रहे। उन्होंने CM ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ा था। ज्योति बसु 23 साल CM रहे थे। उन्होंने लगातार 5 बार चुनाव जीते और बिना ब्रेक इतने लंबे समय तक सत्ता में रहे।

चामलिंग ने मुख्यमंत्री रहते हुए सिक्किम को भारत का पहला 100% ऑर्गेनिक राज्य बनाया। राज्य में लंबे समय तक राजनीतिक स्थिरता बनाए रखी। शिक्षा, स्वास्थ्य और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए काम किया।

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उत्तराखंड में भारी बर्फबारी, 4 फीट मोटी बर्फ में ढका केदारनाथ धाम! ITBP के जवानों ने संभाला मोर्चा

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केदारनाथ,एजेंसी। लगातार हो रही भारी बर्फबारी ने केदारनाथ धाम को लगभग तीन से चार फीट मोटी बर्फ की चादर से ढक दिया है, जिससे पूरा कस्बा और आसपास के इलाके सफेद रंग में रंग गए हैं। केदारनाथ मंदिर समिति के अनुसार, विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ मंदिर और पूरी केदार घाटी बर्फ की एक चमकीली परत में लिपटी हुई है, जिससे एक सचमुच दिव्य और मनमोहक दृश्य बन गया है। 

शून्य से नीचे के तापमान और कठोर मौसम की स्थिति के बावजूद, उत्तराखंड पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान पूरी तरह से सतर्क हैं और इस क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए हुए हैं। मंदिर समिति ने कहा, “ऐसी विषम परिस्थितियों में भी, जवान मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित गश्त जारी रखे हुए हैं।”

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सुरक्षा बलों ने चल रही बर्फबारी के बीच एक मजबूत और अभेद्य सुरक्षा घेरा स्थापित किया है। साथ ही, सुरक्षाकर्मी बैरकों और रहने के स्थानों के आसपास जमा हुई बर्फ को खुद ही हटा रहे हैं, जो आत्मनिर्भरता और अनुशासन का प्रदर्शन है, ताकि उनके अभियान बिना किसी रुकावट के जारी रह सकें। 

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इस बीच, उत्तराखंड अपने पर्यटन क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास देख रहा है; सरकार आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के मिश्रण को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही अपनी वैश्विक अपील को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार भी कर रही है। तीर्थयात्राओं को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए, बड़े पैमाने पर रोपवे परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

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सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे लगभग 4,081 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनाया जाएगा। इसी तरह, राज्य सरकार की एक विज्ञप्ति के अनुसार, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे की योजना 2,730 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई है। एक बार पूरा हो जाने पर, इन परियोजनाओं से यात्रा के समय और शारीरिक थकान में काफी कमी आने की उम्मीद है। 

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कंपनी ने गर्भवती कर्मचारी को नहीं दिया वर्क फ्रॉम होम, अब भरना पड़ेगा 200 करोड़ का जुर्माना

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वाशिंगठन/मुंबई, एजेंसी। एक कंपनी को अपनी गर्भवती कर्मचारी के साथ लापरवाही बरतने के मामले में भारी कीमत चुकानी पड़ी है।अमेरिका में कोर्ट ने कंपनी को करीब 22.5 मिलियन डॉलर (लगभग 200 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यह मामला चेल्सी वॉल्श नाम की महिला से जुड़ा है, जो टोटल क्वालिटी लॉजिस्टिक्स (TQL) में काम करती थीं। चेल्सी की प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क थी और डॉक्टरों ने उन्हें ज्यादा आराम करने की सलाह दी थी। उन्होंने कंपनी से वर्क फ्रॉम होम की अनुमति मांगी, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि या तो वह ऑफिस आकर काम करें या बिना वेतन की छुट्टी लें।

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बिना वेतन छुट्टी लेने का मतलब था उनकी आय और हेल्थ इंश्योरेंस खत्म होना, इसलिए मजबूरी में उन्होंने ऑफिस जाकर काम जारी रखा। कुछ ही दिनों बाद उन्हें समय से पहले प्रसव पीड़ा हुई और उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ घंटों बाद ही बच्ची की मौत हो गई। यह प्रीमैच्योर डिलीवरी थी, जो तय समय से करीब 18 हफ्ते पहले हुई थी। इसके बाद चेल्सी ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया और उसे इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया। जूरी ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को दोषी माना और भारी जुर्माना लगाया। यह फैसला कर्मचारियों के अधिकारों, खासकर गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

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हवाई सफर होगा महंगा! 1 अप्रैल से बढ़ सकते हैं फ्लाइट टिकट के दाम

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मुंबई, एजेंसी। अगर आप गर्मियों की छुट्टियों में कहीं बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं तो अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने चेतावनी दी है कि 1 अप्रैल से विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई किराए पर पड़ेगा।

क्यों महंगा हो रहा है आपका सफर?

हवाई टिकटों के दाम बढ़ने के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:

1. विमानन ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतें:

किसी भी एयरलाइन को चलाने के कुल खर्च का लगभग 35% से 45% हिस्सा केवल ईंधन (ईंधन) पर खर्च होता है। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में चल रही भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं। चूंकि एटीएफ की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय होती हैं इसलिए 1 अप्रैल से नया रेट लागू होगा।

2. लंबे रूट और सुरक्षा का दबाव:

सुरक्षा कारणों से एयरलाइंस को कुछ हाई रिस्क हवाई क्षेत्रों से बचकर निकलना पड़ रहा है। रास्ता लंबा होने के कारण ईंधन की खपत बढ़ गई है जिससे एयरलाइंस का ऑपरेशनल खर्च काफी ऊपर चला गया है।

किस एयरलाइन ने कितना बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज?

बढ़ते खर्चों का बोझ एयरलाइंस ने अब यात्रियों पर डालना शुरू कर दिया है। प्रमुख एयरलाइंस ने टिकट पर फ्यूल सरचार्ज जोड़ दिया है:

एयरलाइनघरेलू रूट (सरचार्ज)इंटरनेशनल रूट (सरचार्ज)
एयर इंडिया / एक्सप्रेस₹399₹830 से ₹16,600 तक
इंडिगो (IndiGo)₹425 से ₹2,300 तकदूरी के आधार पर
अकासा एयर (Akasa)₹199 से ₹1,300 तकप्रति सेक्टर

सरकार की क्या है तैयारी?

मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि यह केवल एक मंत्रालय का मामला नहीं है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता यह है कि यात्रियों को अचानक किराए का झटका न लगे लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईंधन की कीमतें बढ़ने पर किराए में बढ़ोतरी को रोकना मुश्किल होगा।

यात्रियों के लिए सलाह

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप 1 अप्रैल के बाद यात्रा करने वाले हैं तो टिकटों की बुकिंग 31 मार्च से पहले ही कर लें। इससे आप नए वित्तीय वर्ष में होने वाली संभावित बढ़ोतरी से बच सकते हैं।

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