देश
सोने की कीमतों में लगातार गिरावट, अभी और सस्ता हो सकता है, एक्सपर्ट्स ने बताए नए दाम
मुंबई, एजेंसी। सोने की कीमतों में हाल ही में गिरावट देखने को मिली है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह और नीचे जाकर 10 ग्राम के लिए 1.27 लाख रुपये तक जा सकती है। मिडिल ईस्ट में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी डॉलर की मजबूती सोने पर दबाव डाल रहे हैं। निवेशक सावधानी बरतें, क्योंकि बढ़ती मुद्रास्फीति और ब्याज दरों की आशंकाओं से कीमतों में और गिरावट संभव है।
सोने की कीमतों में और गिरावट
पिछले कुछ दिनों में सोने की कीमतों में नरमी देखने को मिली है, जिससे निवेशकों के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। अनुमान है कि 10 ग्राम सोना करीब 1.27 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जबकि वर्तमान में इसकी कीमत लगभग 1,51,910 रुपये के आसपास बनी हुई है। इस हिसाब से कीमतों में करीब 25 हजार रुपये तक की और कमी संभव मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक परिस्थितियों का असर सोने की कीमतों पर साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने सोने पर दबाव बनाया है। शुरुआती दौर में भू-राजनीतिक तनाव के चलते सोना करीब 1.60 लाख रुपये तक पहुंच गया था, लेकिन बाद में इसमें गिरावट आई और यह एमसीएक्स पर लगभग 1,44,825 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि महंगाई बढ़ने की आशंका के चलते केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो निवेशक सोने की बजाय डॉलर आधारित निवेश को प्राथमिकता देंगे। इसका सीधा असर सोने की मांग और कीमत दोनों पर पड़ सकता है। डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना अपेक्षाकृत सस्ता हो जाता है। इसके अलावा, जब सोने की कीमतें 1.50 लाख रुपये के ऊपर जाती हैं, तो कई निवेशक मुनाफा कमाने के लिए अपनी होल्डिंग बेच देते हैं। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ती है और कीमतों पर दबाव आता है। भारत और चीन जैसे बड़े उपभोक्ता देशों में भी ऊंचे दामों के कारण मांग में कमी देखी जाती है, जो कीमतों को और नीचे ला सकती है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सोने का रुख कमजोर बना हुआ है। अनुमान है कि निकट भविष्य में इसकी कीमत 1.40 लाख से 1.47 लाख रुपये के बीच रह सकती है। हालांकि यदि दबाव बना रहा तो यह गिरकर 1.35 लाख और फिर 1.27 लाख रुपये तक भी पहुंच सकता है।
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उत्तराखंड में भारी बर्फबारी, 4 फीट मोटी बर्फ में ढका केदारनाथ धाम! ITBP के जवानों ने संभाला मोर्चा
केदारनाथ,एजेंसी। लगातार हो रही भारी बर्फबारी ने केदारनाथ धाम को लगभग तीन से चार फीट मोटी बर्फ की चादर से ढक दिया है, जिससे पूरा कस्बा और आसपास के इलाके सफेद रंग में रंग गए हैं। केदारनाथ मंदिर समिति के अनुसार, विश्व प्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ मंदिर और पूरी केदार घाटी बर्फ की एक चमकीली परत में लिपटी हुई है, जिससे एक सचमुच दिव्य और मनमोहक दृश्य बन गया है।

शून्य से नीचे के तापमान और कठोर मौसम की स्थिति के बावजूद, उत्तराखंड पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के जवान पूरी तरह से सतर्क हैं और इस क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए हुए हैं। मंदिर समिति ने कहा, “ऐसी विषम परिस्थितियों में भी, जवान मंदिर की पवित्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमित गश्त जारी रखे हुए हैं।”

सुरक्षा बलों ने चल रही बर्फबारी के बीच एक मजबूत और अभेद्य सुरक्षा घेरा स्थापित किया है। साथ ही, सुरक्षाकर्मी बैरकों और रहने के स्थानों के आसपास जमा हुई बर्फ को खुद ही हटा रहे हैं, जो आत्मनिर्भरता और अनुशासन का प्रदर्शन है, ताकि उनके अभियान बिना किसी रुकावट के जारी रह सकें।

इस बीच, उत्तराखंड अपने पर्यटन क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास देख रहा है; सरकार आध्यात्मिक और साहसिक पर्यटन के मिश्रण को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही अपनी वैश्विक अपील को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार भी कर रही है। तीर्थयात्राओं को अधिक सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए, बड़े पैमाने पर रोपवे परियोजनाएं शुरू की गई हैं।

सोनप्रयाग से केदारनाथ धाम तक 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे लगभग 4,081 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनाया जाएगा। इसी तरह, राज्य सरकार की एक विज्ञप्ति के अनुसार, गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक 12.4 किलोमीटर लंबे रोपवे की योजना 2,730 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई है। एक बार पूरा हो जाने पर, इन परियोजनाओं से यात्रा के समय और शारीरिक थकान में काफी कमी आने की उम्मीद है।
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कंपनी ने गर्भवती कर्मचारी को नहीं दिया वर्क फ्रॉम होम, अब भरना पड़ेगा 200 करोड़ का जुर्माना
वाशिंगठन/मुंबई, एजेंसी। एक कंपनी को अपनी गर्भवती कर्मचारी के साथ लापरवाही बरतने के मामले में भारी कीमत चुकानी पड़ी है।अमेरिका में कोर्ट ने कंपनी को करीब 22.5 मिलियन डॉलर (लगभग 200 करोड़ रुपये) का मुआवजा देने का आदेश दिया है।

यह मामला चेल्सी वॉल्श नाम की महिला से जुड़ा है, जो टोटल क्वालिटी लॉजिस्टिक्स (TQL) में काम करती थीं। चेल्सी की प्रेग्नेंसी हाई-रिस्क थी और डॉक्टरों ने उन्हें ज्यादा आराम करने की सलाह दी थी। उन्होंने कंपनी से वर्क फ्रॉम होम की अनुमति मांगी, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि या तो वह ऑफिस आकर काम करें या बिना वेतन की छुट्टी लें।

बिना वेतन छुट्टी लेने का मतलब था उनकी आय और हेल्थ इंश्योरेंस खत्म होना, इसलिए मजबूरी में उन्होंने ऑफिस जाकर काम जारी रखा। कुछ ही दिनों बाद उन्हें समय से पहले प्रसव पीड़ा हुई और उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन जन्म के कुछ घंटों बाद ही बच्ची की मौत हो गई। यह प्रीमैच्योर डिलीवरी थी, जो तय समय से करीब 18 हफ्ते पहले हुई थी। इसके बाद चेल्सी ने कंपनी के खिलाफ मुकदमा दायर किया और उसे इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया। जूरी ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को दोषी माना और भारी जुर्माना लगाया। यह फैसला कर्मचारियों के अधिकारों, खासकर गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
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हवाई सफर होगा महंगा! 1 अप्रैल से बढ़ सकते हैं फ्लाइट टिकट के दाम
मुंबई, एजेंसी। अगर आप गर्मियों की छुट्टियों में कहीं बाहर जाने का प्लान बना रहे हैं तो अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने चेतावनी दी है कि 1 अप्रैल से विमानन ईंधन (ATF) की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा असर हवाई किराए पर पड़ेगा।
क्यों महंगा हो रहा है आपका सफर?
हवाई टिकटों के दाम बढ़ने के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:
1. विमानन ईंधन (ATF) की बढ़ती कीमतें:
किसी भी एयरलाइन को चलाने के कुल खर्च का लगभग 35% से 45% हिस्सा केवल ईंधन (ईंधन) पर खर्च होता है। मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में चल रही भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं। चूंकि एटीएफ की कीमतें हर महीने की पहली तारीख को तय होती हैं इसलिए 1 अप्रैल से नया रेट लागू होगा।

2. लंबे रूट और सुरक्षा का दबाव:
सुरक्षा कारणों से एयरलाइंस को कुछ हाई रिस्क हवाई क्षेत्रों से बचकर निकलना पड़ रहा है। रास्ता लंबा होने के कारण ईंधन की खपत बढ़ गई है जिससे एयरलाइंस का ऑपरेशनल खर्च काफी ऊपर चला गया है।
किस एयरलाइन ने कितना बढ़ाया फ्यूल सरचार्ज?
बढ़ते खर्चों का बोझ एयरलाइंस ने अब यात्रियों पर डालना शुरू कर दिया है। प्रमुख एयरलाइंस ने टिकट पर फ्यूल सरचार्ज जोड़ दिया है:
| एयरलाइन | घरेलू रूट (सरचार्ज) | इंटरनेशनल रूट (सरचार्ज) |
| एयर इंडिया / एक्सप्रेस | ₹399 | ₹830 से ₹16,600 तक |
| इंडिगो (IndiGo) | ₹425 से ₹2,300 तक | दूरी के आधार पर |
| अकासा एयर (Akasa) | ₹199 से ₹1,300 तक | प्रति सेक्टर |
सरकार की क्या है तैयारी?
मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि यह केवल एक मंत्रालय का मामला नहीं है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और पेट्रोलियम मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं। सरकार की प्राथमिकता यह है कि यात्रियों को अचानक किराए का झटका न लगे लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईंधन की कीमतें बढ़ने पर किराए में बढ़ोतरी को रोकना मुश्किल होगा।
यात्रियों के लिए सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आप 1 अप्रैल के बाद यात्रा करने वाले हैं तो टिकटों की बुकिंग 31 मार्च से पहले ही कर लें। इससे आप नए वित्तीय वर्ष में होने वाली संभावित बढ़ोतरी से बच सकते हैं।
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