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सुप्रीम कोर्ट बोला-महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार:इससे इनकार करना भेदभाव था, जिनकी सर्विस खत्म हुई, उन्हें भी पेंशन मिलेगी
नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अफसरों को पूरी पेंशन देने का आदेश दिया। जिन मामलों में महिला अफसर परमानेंट कमीशन (PC) नहीं मिलने के कारण पहले ही सेवा छोड़ चुकी थीं, उन्हें एकमुश्त राहत देते हुए 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन और अन्य लाभ देने का फैसला सुनाया।
कोर्ट ने कहा- सशस्त्र बलों के भीतर मौजूद सिस्टमिक भेदभाद के कारण महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन से वंचित किया गया। महिलाओं को परमानेंट कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था।

पूरा मामला SSC के तहत नियुक्त महिला अफसरों की याचिकाओं से जुड़ा था, जिन्होंने PC देने की मांग की थी। SSC के तहत नियुक्त अफसर का कार्यकाल 10 साल का होता है, जिसे 4 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद योग्यता के आधार पर परमानेंट कमीशन दिया जाता है।
परमानेंट कमीशन नहीं मिलने पर उन्हें सेवा छोड़नी होती है। इसके खिलाफ महिला अफसरों ने पहले आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (AFT) का रुख किया था और PC से वंचित किए जाने को चुनौती दी थी। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कई याचिकाओं को एक साथ सुना।
महिला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट से 3 राहत…
- जिन SSC अफसरों को 2020–21 में नंबर 5 सेलेक्शन बोर्ड या AFT (ट्रिब्यूनल) के फैसले के आधार पर पहले ही स्थायी कमीशन (PC) मिल चुका है, उनका स्टेटस नहीं बदला जाएगा।
- जो महिला SSC अफसर (अपीलकर्ता) इस केस के दौरान सेवा से बाहर हो गईं, उन्हें मान लिया जाएगा कि उन्होंने 20 साल की जरूरी सेवा पूरी कर ली है। उन्हें पेंशन और उससे जुड़े सभी लाभ मिलेंगे, लेकिन पिछला वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा।
- वर्तमान में जो महिला अफसर सेवा में हैं, उन्हें 60% कटऑफ पूरा करने पर परमानेंट कमीशन मिलेगा। बशर्ते उन्हें जरूरी मंजूरी मिली हो।
यह आदेश उन महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (एजुकेशन कॉर्प्स) में हैं, क्योंकि उन्हें 2010 से ही स्थायी कमीशन के लिए विचार का मौका मिलता रहा है।
सीजेआई नेआर्मी, नेवी और एयर फोर्स के लिए कहा
आर्मी: क्या ACR यानी परफॉर्मेंस रिपोर्ट सही तरीके से बनी? हमने पाया है कि ACR इस सोच के साथ लिखे गए कि महिलाओं को आगे मौका नहीं मिलेगा। इससे महिला अफसरों की मेरिट पर असर पड़ा, पुरुष अधिकारियों से पीछे रहीं। महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग भी नहीं दी गई। यह उनके करियर के खिलाफ गया। आर्टिकल 142 के तहत ‘पूर्ण न्याय’ के लिए आदेश दे रहे हैं।
नेवी: ACR में यहां भी पूर्वाग्रह मिला। लेकिन ‘डायनेमिक वैकेंसी मॉडल’ सही और गैर-भेदभावपूर्ण है। अधिकारियों को मूल्यांकन का पूरा मापदंड नहीं बताया गया, यह बड़ी कमी।
एयर फोर्स: न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड जल्दबाजी में लागू किए गए। 2007 बैच को 2020-21 में आंका गया, यह प्रक्रिया ठीक नहीं। प्रक्रिया में खामियां होने के बावजूद कोर्ट ने पुनर्नियुक्ति का आदेश दिया।
कोर्ट के फैसले पर किसने क्या कहा…
सीनियर एडवोकेट वी. मोहना ने कहा कि सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने का मामले में यह बड़ा कदम है। सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कहा इस फैसले के लिए कोर्ट का धन्यवाद है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि कोर्ट के इस फैसले पर हम भी आभारी हैं।
23 साल पहले कोर्ट पहुंचा था यह मामला
23 साल पहले 2003 में इस मामले में महिला वकील बबीता पुनिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उनके बाद 9 महिला अफसरों ने 2009 तक हाईकोर्ट में इसी मुद्दे पर अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया और महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन देने का आदेश दिया।
हाईकोर्ट ने कहा था कि यह साफ किया जाता है कि जो महिला अफसर रिटायरमेंट की उम्र तक नहीं पहुंचीं हैं, उन सभी को स्थाई कमीशन दिया जाए। साथ ही उन्हें प्रमोशन जैसे लाभ भी दिए जाएं। हम महिलाओं पर कोई एहसान नहीं कर रहे, हम उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार दिला रहे हैं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
केंद्र ने नीति बनाई, लेकिन मार्च 2019 का क्लॉज जोड़ दिया
हाईकोर्ट के फैसले के 9 साल बाद सरकार ने फरवरी 2019 में सेना के 10 विभागों में महिला अफसरों को स्थाई कमीशन देने की नीति बनाई, लेकिन यह कह दिया कि मार्च 2019 के बाद से सर्विस में आने वाली महिला अफसरों को ही इसका फायदा मिलेगा।
इस तरह वे महिलाएं स्थाई कमीशन पाने से वंचित रह गईं, जिन्होंने इस मसले पर लंबे अरसे तक कानूनी लड़ाई लड़ी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी थी कि पुरुष सैनिक महिला अफसरों से आदेश लेने को तैयार नहीं होंगे।
सेनाओं में महिला अफसरों की अभी क्या स्थिति है
1. थलसेना : महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के दौरान आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डनेंस, एजुकेशन कोर, जज एडवोकेट जनरल, इंजीनियर, सिग्नल, इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक-मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में ही एंट्री पा सकती हैं। उन्हें कॉम्बैट सर्विसेस जैसे- इन्फैंट्री, आर्मर्ड, तोपखाने और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में काम करने का मौका नहीं दिया जाता। हालांकि, मेडिकल कोर और नर्सिंग सर्विसेस में ये नियम लागू नहीं होते। इनमें महिलाओं को परमानेंट कमीशन मिलता है। वे लेफ्टिनेंट जनरल पद तक भी पहुंची हैं।
2. वायुसेना और नौसेना : यहां महिला अफसरों को स्थाई कमीशन का विकल्प है। वायुसेना में महिलाएं कॉम्बैट रोल, जैसे- फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी में शामिल हो सकती हैं। शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत महिलाएं वायुसेना में ही हेलिकॉप्टर से लेकर फाइटर जेट तक उड़ा सकती हैं। नौसेना में भी महिलाएं लॉजिस्टिक्स, कानून, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पायलट और नेवल इंस्पेक्टर कैडर में सेवाएं दे सकती हैं।
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गिरावट के बाद शेयर बाजार ने दिखाई ताकत, सेंसेक्स 1000+ और निफ्टी 300+ अंक उछला
मुंबई, एजेंसी। बीते सत्र की भारी गिरावट से सहमे निवेशकों को आज सुबह राहत की सांस मिली, जब भारतीय शेयर बाजार ने खुलते ही दमदार वापसी का संकेत दिया। कारोबारी हफ्ते की शुरुआत उत्साह के साथ हुई और शुरुआती घंटों में ही बाजार ने मजबूती का रुख अपना लिया।
आज ट्रेडिंग की शुरुआत में BSE Sensex करीब 1000 अंकों से ज्यादा उछलकर 73,700 के पार पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी तेज बढ़त के साथ 22,800 के आसपास कारोबार करता दिखा। इस मजबूत शुरुआत ने साफ कर दिया कि बाजार ने पिछले दिन के दबाव को पीछे छोड़ते हुए नई ऊर्जा के साथ कदम रखा है।

सुबह से ही संकेत सकारात्मक थे, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी में तेजी ने पहले ही घरेलू बाजार के लिए मजबूत ओपनिंग का माहौल बना दिया था। जैसे ही बाजार खुला, खरीदारी का जोर दिखा और निवेशकों का भरोसा लौटता नजर आया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी के पीछे कई कारण हो सकते हैं- वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, निवेशकों द्वारा निचले स्तर पर खरीदारी (बायिंग ऑन डिप्स) और कुछ सेक्टरों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद। इसके अलावा, हाल की गिरावट के बाद बाजार का तकनीकी तौर पर उछाल लेना भी इस तेजी का एक अहम कारण माना जा रहा है।
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सोने-चांदी के दाम में फिर भारी गिरावट, महानगरों में 24K, 22K और 18K गोल्ड के नए रेट
मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते बारूदी तनाव और कूटनीतिक दांव-पेंच ने कमोडिटी बाजार को हिलाकर रख दिया है। मंगलवार की सुबह सोने और चांदी के निवेशकों के लिए किसी झटके से कम नहीं रही, जब मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इन कीमती धातुओं की कीमतों में भारी सेंधमारी देखने को मिली। कल तक आसमान छू रहे भाव आज अचानक जमीन की तरफ कदम बढ़ाते दिखे।

बाजार का ताजा हाल: MCX पर मची खलबली
मंगलवार सुबह 11:05 बजे के करीब सोने के वायदा बाजार में जबरदस्त हलचल रही। अप्रैल की डिलीवरी वाला सोना करीब -1.66% फीसदी टूटकर 1,36,945 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से -2,315.00 रुपये कम है। लेकिन असली गिरावट चांदी में दिखी, जिसने निवेशकों को ज्यादा हैरान किया। चांदी के मई अनुबंध की कीमतों में -4.25% प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई, जिससे यह -9,569.00 रुपये फिसलकर 2,15,765 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करने लगी।
देश के प्रमुख शहरों में आज सोने की कीमतों में मामूली फर्क देखने को मिला है। शुद्धता के आधार पर 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के रेट अलग-अलग शहरों में थोड़ा बदलते नजर आए।
Delhi में 24 कैरेट सोना रू.14,050 प्रति ग्राम, 22 कैरेट रू.12,880 और 18 कैरेट रू.10,541 प्रति ग्राम पर रहा।
Mumbai में 24 कैरेट सोने का भाव रू.14,035, 22 कैरेट रू.12,865 और 18 कैरेट रू.10,526 प्रति ग्राम दर्ज किया गया।
Kolkata में भी कीमतें मुंबई के समान रहीं, जहां 24 कैरेट रू.14,035, 22 कैरेट रू.12,865 और 18 कैरेट रू.10,526 प्रति ग्राम पर कारोबार हुआ।
Chennai में सोने के दाम सबसे ज्यादा रहे। यहां 24 कैरेट सोना रू.14,182, 22 कैरेट रू.13,000 और 18 कैरेट रू.10,820 प्रति ग्राम रहा।
Bengaluru में 24 कैरेट सोना रू.14,035, 22 कैरेट रू.12,865 और 18 कैरेट रू.10,526 प्रति ग्राम दर्ज किया गया।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘ट्रंप कार्ड’ और युद्ध का असर
वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें 4,300 डॉलर प्रति औंस के करीब संघर्ष कर रही हैं। इसकी बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जुबानी और जमीनी जंग है। तेहरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें बातचीत की बात कही गई थी। ईरान ने इसे बाजार को गुमराह करने की साजिश बताते हुए अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, वहीं इजरायल के तेवर भी नरम नहीं पड़ रहे।
रोचक बात यह है कि सोमवार को जब ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला टालने और बातचीत का संकेत दिया था, तब कीमतें उछली थीं। लेकिन अब अनिश्चितता और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंकाओं ने महंगाई का डर बढ़ा दिया है। मार्च के महीने में सोना अपने शिखर से करीब 25 प्रतिशत नीचे आ चुका है, क्योंकि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें अब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की ओर इशारा कर रही हैं।
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ट्रंप के बयान से Stock Market में आई बहार, सेंसेक्स 1600 अंक चढ़ा
मुंबई, एजेंसी। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में सोमवार की भारी गिरावट के बाद शानदार रिकवरी देखने को मिली। दोपहर 1 बजे तक सेंसेक्स 1,617.99 अंक (2.23%) उछलकर 74,314.38 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 496.80 अंक (2.21%) बढ़कर 23,009.45 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

बाजार में इस तेजी के पीछे वैश्विक संकेतों का बड़ा योगदान रहा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत का दावा करने और तनाव कम होने के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और इंडिया VIX में गिरावट ने भी बाजार को सपोर्ट दिया।
मुद्रा बाजार में भी राहत दिखी, जहां रुपया 34 पैसे मजबूत होकर 93.63 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि सोमवार को यह 93.97 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि, इस बीच गोल्डमैन सैक्स ने भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 6.5% से घटाकर 5.9% कर दिया है, जो आगे बाजार की दिशा पर असर डाल सकता है।
बाजार में तेजी के मुख्य कारण:
- वैल्यू बायिंग
- मजबूत ग्लोबल संकेत
- इंडिया VIX में गिरावट
- भू-राजनीतिक तनाव में कमी
- कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
कुल मिलाकर, मंगलवार को बाजार में निवेशकों का सेंटीमेंट सकारात्मक नजर आया और प्रमुख सूचकांक दिन के उच्च स्तर के करीब कारोबार करते दिखे।07
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