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सोने-चांदी के दाम में फिर भारी गिरावट, महानगरों में 24K, 22K और 18K गोल्ड के नए रेट

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मुंबई, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते बारूदी तनाव और कूटनीतिक दांव-पेंच ने कमोडिटी बाजार को हिलाकर रख दिया है। मंगलवार की सुबह सोने और चांदी के निवेशकों के लिए किसी झटके से कम नहीं रही, जब मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इन कीमती धातुओं की कीमतों में भारी सेंधमारी देखने को मिली। कल तक आसमान छू रहे भाव आज अचानक जमीन की तरफ कदम बढ़ाते दिखे।

बाजार का ताजा हाल: MCX पर मची खलबली
मंगलवार सुबह 11:05 बजे के करीब सोने के वायदा बाजार में जबरदस्त हलचल रही। अप्रैल की डिलीवरी वाला सोना करीब -1.66% फीसदी टूटकर 1,36,945 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया, जो पिछले बंद भाव से -2,315.00 रुपये कम है। लेकिन असली गिरावट चांदी में दिखी, जिसने निवेशकों को ज्यादा हैरान किया। चांदी के मई अनुबंध की कीमतों में -4.25% प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई, जिससे यह -9,569.00 रुपये फिसलकर 2,15,765 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करने लगी।

 देश के प्रमुख शहरों में आज सोने की कीमतों में मामूली फर्क देखने को मिला है। शुद्धता के आधार पर 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने के रेट अलग-अलग शहरों में थोड़ा बदलते नजर आए।

Delhi में 24 कैरेट सोना रू.14,050 प्रति ग्राम, 22 कैरेट रू.12,880 और 18 कैरेट रू.10,541 प्रति ग्राम पर रहा।

Mumbai में 24 कैरेट सोने का भाव रू.14,035, 22 कैरेट रू.12,865 और 18 कैरेट रू.10,526 प्रति ग्राम दर्ज किया गया।

Kolkata में भी कीमतें मुंबई के समान रहीं, जहां 24 कैरेट रू.14,035, 22 कैरेट रू.12,865 और 18 कैरेट रू.10,526 प्रति ग्राम पर कारोबार हुआ।

Chennai में सोने के दाम सबसे ज्यादा रहे। यहां 24 कैरेट सोना रू.14,182, 22 कैरेट रू.13,000 और 18 कैरेट रू.10,820 प्रति ग्राम रहा।

Bengaluru में 24 कैरेट सोना रू.14,035, 22 कैरेट रू.12,865 और 18 कैरेट रू.10,526 प्रति ग्राम दर्ज किया गया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘ट्रंप कार्ड’ और युद्ध का असर
वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतें 4,300 डॉलर प्रति औंस के करीब संघर्ष कर रही हैं। इसकी बड़ी वजह ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जुबानी और जमीनी जंग है। तेहरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें बातचीत की बात कही गई थी। ईरान ने इसे बाजार को गुमराह करने की साजिश बताते हुए अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर दिए हैं, वहीं इजरायल के तेवर भी नरम नहीं पड़ रहे।

रोचक बात यह है कि सोमवार को जब ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला टालने और बातचीत का संकेत दिया था, तब कीमतें उछली थीं। लेकिन अब अनिश्चितता और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंकाओं ने महंगाई का डर बढ़ा दिया है। मार्च के महीने में सोना अपने शिखर से करीब 25 प्रतिशत नीचे आ चुका है, क्योंकि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें अब ब्याज दरों में बढ़ोतरी की ओर इशारा कर रही हैं। 

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गिरावट के बाद शेयर बाजार ने दिखाई ताकत, सेंसेक्स 1000+ और निफ्टी 300+ अंक उछला

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मुंबई, एजेंसी। बीते सत्र की भारी गिरावट से सहमे निवेशकों को आज सुबह राहत की सांस मिली, जब भारतीय शेयर बाजार ने खुलते ही दमदार वापसी का संकेत दिया। कारोबारी हफ्ते की शुरुआत उत्साह के साथ हुई और शुरुआती घंटों में ही बाजार ने मजबूती का रुख अपना लिया।

आज ट्रेडिंग की शुरुआत में BSE Sensex करीब 1000 अंकों से ज्यादा उछलकर 73,700 के पार पहुंच गया, जबकि Nifty 50 भी तेज बढ़त के साथ 22,800 के आसपास कारोबार करता दिखा। इस मजबूत शुरुआत ने साफ कर दिया कि बाजार ने पिछले दिन के दबाव को पीछे छोड़ते हुए नई ऊर्जा के साथ कदम रखा है।

सुबह से ही संकेत सकारात्मक थे, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी में तेजी ने पहले ही घरेलू बाजार के लिए मजबूत ओपनिंग का माहौल बना दिया था। जैसे ही बाजार खुला, खरीदारी का जोर दिखा और निवेशकों का भरोसा लौटता नजर आया।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तेजी के पीछे कई कारण हो सकते हैं- वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत, निवेशकों द्वारा निचले स्तर पर खरीदारी (बायिंग ऑन डिप्स) और कुछ सेक्टरों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद। इसके अलावा, हाल की गिरावट के बाद बाजार का तकनीकी तौर पर उछाल लेना भी इस तेजी का एक अहम कारण माना जा रहा है।

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ट्रंप के बयान से Stock Market में आई बहार, सेंसेक्स 1600 अंक चढ़ा

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मुंबई, एजेंसी। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में सोमवार की भारी गिरावट के बाद शानदार रिकवरी देखने को मिली। दोपहर 1 बजे तक सेंसेक्स 1,617.99 अंक (2.23%) उछलकर 74,314.38 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 496.80 अंक (2.21%) बढ़कर 23,009.45 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

बाजार में इस तेजी के पीछे वैश्विक संकेतों का बड़ा योगदान रहा। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत का दावा करने और तनाव कम होने के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और इंडिया VIX में गिरावट ने भी बाजार को सपोर्ट दिया।

मुद्रा बाजार में भी राहत दिखी, जहां रुपया 34 पैसे मजबूत होकर 93.63 प्रति डॉलर पर खुला, जबकि सोमवार को यह 93.97 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ था। हालांकि, इस बीच गोल्डमैन सैक्स ने भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमान को 6.5% से घटाकर 5.9% कर दिया है, जो आगे बाजार की दिशा पर असर डाल सकता है।

बाजार में तेजी के मुख्य कारण:

  • वैल्यू बायिंग
  • मजबूत ग्लोबल संकेत
  • इंडिया VIX में गिरावट
  • भू-राजनीतिक तनाव में कमी
  • कच्चे तेल की कीमतों में नरमी

कुल मिलाकर, मंगलवार को बाजार में निवेशकों का सेंटीमेंट सकारात्मक नजर आया और प्रमुख सूचकांक दिन के उच्च स्तर के करीब कारोबार करते दिखे।07

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8th Pay Commission: 50,000 रुपए से कम सैलरी वालों की लगने वाली है लॉटरी, मिलेगा लाखों का एरियर!

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नई दिल्ली,एजेंसी। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब चर्चा का विषय नहीं, बल्कि एक बड़ी उम्मीद बन चुका है। जैसे-जैसे समयसीमा नजदीक आ रही है, सरकारी गलियारों में सैलरी बढ़ोतरी और एरियर (Arrears) को लेकर हलचल तेज हो गई है। सबसे अधिक उत्साह उन कर्मचारियों में है जिनकी बेसिक सैलरी रू.50,000 से कम है, क्योंकि नए फिटमेंट फैक्टर के लागू होते ही उनकी झोली में लाखों का एरियर गिरने की संभावना है। 

फिटमेंट फैक्टर: वेतन वृद्धि की असली चाबी 

8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ‘फिटमेंट फैक्टर’ है। यही वह गुणांक (multiplier) है जो तय करता है कि कर्मचारी की बेसिक सैलरी में कितनी शुद्ध वृद्धि होगी। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत यह 2.57 है, लेकिन कर्मचारी संगठनों की मांग इसे और ऊपर ले जाने की है। 

कर्मचारी यूनियनों की मांग: FNPO और AIDEF जैसे संगठनों ने तर्क दिया है कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए फिटमेंट फैक्टर को 3.0 से 3.25 के बीच रखा जाना चाहिए। यूनियनों का प्रस्ताव है कि न्यूनतम वेतन तय करते समय परिवार के 3 सदस्यों के बजाय 5 सदस्यों के खर्च को मानक माना जाए। हालांकि सरकार ने अभी पत्तों नहीं खोले हैं, लेकिन माना जा रहा है कि अंतिम फैसले में अभी करीब एक साल का वक्त लग सकता है। 

एरियर का गणित: कब और कितना मिलेगा पैसा? 

चूंकि 7वें वेतन आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त हो रहा है। नियमानुसार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी। यदि आयोग के गठन और कार्यान्वयन में देरी होती है, तो कर्मचारियों को 1 जनवरी, 2026 से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक का पूरा एरियर दिया जाएगा। यदि यह देरी 20 महीने तक खिंचती है, तो एरियर की राशि एकमुश्त जैकपॉट साबित हो सकती है। 

लेवल-8 कर्मचारियों के लिए ‘लॉटरी’ जैसा मौका 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रू.50,000 से कम बेसिक सैलरी वाले (विशेषकर लेवल-8) कर्मचारियों को सबसे बड़ा वित्तीय लाभ मिल सकता है।

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