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शाह बोले- ममता चुनाव में विक्टिम कार्ड खेलती हैं:कभी पैर तुड़वाती, कभी सिर पर पट्टी बंधवाती, कांग्रेस तमिलनाडु में 28, DMK 164 सीटों पर लड़ेगी
नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम/गुवाहाटी/कोलकाता/चेन्नई,एजेंसी। गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को कोलकाता में ममता सरकार के खिलाफ आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी किया। शाह ने कहा, ‘इसमें TMC सरकार के 15 साल के काले कारनामों का जिक्र है, ये जनता की चार्जशीट है। बंगाल में अराजकता और बदहाली है। यहां की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है।’

उन्होंने कहा, ‘ममता दीदी ने हमेशा विक्टिम कार्ड की राजनीति की है। कभी पैर तुड़वा लेती हैं, कभी सिर पर पट्टी बंधवा लेती हैं, कभी बीमार हो जाती हैं और कभी चुनाव आयोग को गालियां देती हैं। लेकिन बंगाल के लोग अब ममता दीदी की विक्टिम कार्ड पॉलिटिक्स को अच्छी तरह समझ गए हैं।’
मार्च 2024 के लोकसभा चुनाव के पहले ममता के सिर में चोट में लगी थी, जबकि 2021 में विधानसभा चुनाव के पहले उनके पैर में चोट लगी थी। उधर, TMC ने भी भाजपा के खिलाफ आरोप पत्र जारी किया।

5 चुनावी राज्यों से जुड़े बड़े अपडेट्स
बंगाल के नादिया जिले में चुनाव ड्यूटी ट्रेनिंग में प्रोजेक्टर पर CM ममता से जुड़ा सरकारी विज्ञापन दिखाया गया। कुछ पोलिंग अधिकारियों ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई।
अमित शाह ने गुवाहाटी में रोड शो किया।
तमिलनाडु में DMK ने पार्टी कैंडिडेट्स की लिस्ट जारी की। इसके पहले पार्टी ने सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग फाइलन की।
ममता बनर्जी ने रानीगंज में रैली में कहा कि बंगाल को बर्बाद करने की कोशिश में भाजपा देश में सत्ता खो देगी।
असम के असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर सिर्फ एक समुदाय की पार्टी होने का आरोप लगाया। हिमंता ने कहा कि लगभग 99 प्रतिशत हिंदू कांग्रेस छोड़ना चाहते हैं।

असम में खड़गे रविवार को कांग्रेस का घोषणापत्र जारी करेंगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे रविवार को असम विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का घोषणापत्र जारी करेंगे। गुवाहाटी में शनिवार को AICC महासचिव जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह घोषणापत्र कई महीनों की मेहनत का नतीजा है, जिसके दौरान हमारे नेताओं और सदस्यों ने राज्य भर के लोगों से संपर्क साधा।
कांग्रेस सांसद जोतिमणि बोलीं-पार्टी के हितों से समझौता
तमिलनाडु के करूर से कांग्रेस सांसद एस जोतिमणि ने DMK के नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत पार्टी की सीट चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता के अभाव का आरोप लगाया है और दावा किया है कि पार्टी के हितों से पूरी तरह समझौता किया गया है। जोतिमणि ने 27 मार्च को सोशल मीडिया पर कहा सीटों का चयन विस्तृत चर्चा और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए, इस बारे में हमारी राय को प्रभारी लोगों ने खारिज कर दिया।
अभिषेक बनर्जी बोले- भाजपा दंगाइयों की पार्टी
TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने शनिवार को भाजपा को दंगाइयों की पार्टी बताया और उस पर राज्य में राम नवमी की रैलियों के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। बीरभूम जिले के लाभपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, अभिषेक ने कहा कि बंगाल के लोग पारंपरिक रूप से सभी त्योहारों को सौहार्दपूर्वक मनाते आए हैं।
TMC ने भाजपा के खिलाफ आरोपपत्र जारी किया
अमित शाह के ममता सरकार के खिलाफ चार्जशीट जारी करने के कुछ घंटों बाद TMC ने आरोपपत्र जारी किया। इसमें भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए। TMC की महुआ मोइत्रा ने मणिपुर में जातीय हिंसा पर अमित शाह से जवाब मांगा और कहा कि पूर्वोत्तर राज्य में पिछले तीन वर्षों से खून बहा रहा है। भाजपा बंगाल में अपने नफरत भरे असम-शैली के नजरबंदी शिविर मॉडल को लाने के लिए बंगाली और बांग्लादेशियों के बीच की लाइन को धुंधला करना चाहती है।
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Major Decision: कंपनियों को बड़ी राहत, भारत सरकार ने चीन से उपकरण खरीद पर दी ढील
मुंबई, एजेंसी। वैश्विक सप्लाई चेन में दबाव और घरेलू परियोजनाओं में देरी को देखते हुए भारत सरकार ने चीन से जरूरी औद्योगिक उपकरणों की खरीद पर आंशिक ढील देने का फैसला किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम के तहत कई सरकारी कंपनियों को सीमित दायरे में चीन से क्रिटिकल उपकरण आयात करने की अनुमति दी गई है।
इस फैसले का सबसे ज्यादा फायदा भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) जैसी कंपनियों को होगा। BHEL को चीन से 21 प्रकार के महत्वपूर्ण उपकरण खरीदने की मंजूरी मिली है, जबकि SAIL को भी अपने प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी कंपोनेंट्स आयात करने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा कुछ अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कोल गैसीफिकेशन से जुड़े उपकरण खरीदने की छूट दी गई है।

2020 में किए थे सख्त नियम लागू
दरअसल, वर्ष 2020 में सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद भारत ने चीन से आयात और निवेश पर सख्त नियम लागू कर दिए थे लेकिन हाल के महीनों में कई इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक परियोजनाओं में देरी और उपकरणों की कमी सामने आने के बाद सरकार ने इन नियमों में आंशिक ढील देने का निर्णय लिया है। नए आदेश के तहत अब सरकारी ठेकों में शामिल चीनी कंपनियों को पहले की तरह हर बार राजनीतिक और सुरक्षा मंजूरी के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम वैश्विक व्यापार में हो रहे बदलावों के बीच संतुलन बनाने की रणनीति का हिस्सा है। खासकर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने और सप्लाई चेन में बदलाव के चलते भारत अपने औद्योगिक हितों को ध्यान में रखते हुए लचीला रुख अपना रहा है।

सहयोग बढ़ाने के लिए उठाए गए अहम कदम
हाल के समय में दोनों देशों के बीच संबंधों में भी कुछ नरमी देखी गई है। नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच मुलाकात के बाद द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसके तहत डायरेक्ट फ्लाइट्स बहाल करने और बिजनेस वीजा प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। सरकार का यह कदम जहां एक ओर घरेलू परियोजनाओं को गति देने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर भारत-चीन आर्थिक संबंधों में संतुलन बनाने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।
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3 सरकारी बैंकों पर चला RBI का डंडा, लगाया भारी जुर्माना
मुंबई, एजेंसी। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग नियमों का पालन न करने पर चार संस्थाओं पर मौद्रिक जुर्माना लगाया है। इसमें तीन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक—यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया—के साथ-साथ फिनटेक कंपनी पाइन लैब्स शामिल है।
आरबीआई द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया पर 95.40 लाख रुपए, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर 63.60 लाख रुपए, बैंक ऑफ इंडिया पर 58.50 लाख रुपए और पाइन लैब्स पर 3.10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

बैंकों पर क्यों हुई कार्रवाई
केंद्रीय बैंक ने बताया कि यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ग्राहकों से जुड़े अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन के मामलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि वापस करने में विफल रहा। साथ ही, बैंक ने 24×7 शिकायत सुविधा उपलब्ध नहीं कराई और कुछ मामलों में सिस्टम आधारित प्रक्रियाओं में मैन्युअल हस्तक्षेप भी पाया गया।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया पर केवाईसी नियमों के उल्लंघन के चलते कार्रवाई की गई। बैंक समय पर ग्राहकों के केवाईसी रिकॉर्ड केंद्रीय रजिस्ट्री में अपलोड नहीं कर पाया और कुछ ग्राहकों के लिए एक से अधिक बेसिक सेविंग्स खाते खोले गए। वहीं, बैंक ऑफ इंडिया पर प्राथमिकता क्षेत्र के ऋण खातों में अतिरिक्त शुल्क वसूलने और कुछ सावधि जमा पर समय पर ब्याज भुगतान न करने के कारण जुर्माना लगाया गया है।
इसके अलावा, पाइन लैब्स को बिना पूर्ण केवाईसी प्रक्रिया पूरी किए प्रीपेड भुगतान उपकरण (PPI) जारी करने के लिए दंडित किया गया। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने और बैंकिंग व फिनटेक सिस्टम में पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से की गई है।

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iPhone यूजर्स को झटका! Apple ने हटाया बड़ा डिस्काउंट सपोर्ट
मुंबई, एजेंसी। भारत में स्मार्टफोन खरीदारों के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। Apple ने अपने लोकप्रिय iPhone मॉडल्स की कीमतों को अप्रत्यक्ष रूप से महंगा करने का फैसला लिया है। कंपनी ने रिटेलर्स और चैनल पार्टनर्स को मिलने वाला ‘डिमांड जेनरेशन (DG) सपोर्ट’ बंद करने का निर्णय लिया है, जिससे iPhone 16 और iPhone 15 जैसे मॉडल अब ग्राहकों के लिए करीब 5,000 रुपए तक महंगे पड़ सकते हैं।

क्या करता है DG सपोर्ट
DG सपोर्ट एक तरह का बैकएंड इंसेंटिव होता है, जिसकी मदद से रिटेलर्स बिना MRP बदले ग्राहकों को आकर्षक डिस्काउंट दे पाते थे। इस वजह से iPhone 15 और iPhone 16 जैसे मॉडल मिड-प्रीमियम सेगमेंट में काफी प्रतिस्पर्धी बने हुए थे लेकिन अब इस सपोर्ट के हटने के बाद रिटेलर्स पहले जितनी छूट नहीं दे पाएंगे, जिससे ग्राहकों को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
किन ग्राहकों पर पड़ेगा ज्यादा असर
इससे पहले कंपनी कैशबैक ऑफर्स में भी बड़ी कटौती कर चुकी है। जहां पहले ग्राहकों को 6,000 रुपए तक का कैशबैक मिलता था, उसे घटाकर 1,000 रुपए कर दिया गया है। लगातार कम हो रहे इन फायदों का सीधा असर खरीदारों की जेब पर पड़ने वाला है।
रिटेलर्स के अनुसार, यह बदलाव तुरंत प्रभाव से लागू हो सकता है और मौजूदा कीमतों पर खरीदारी करने का मौका सीमित समय के लिए ही बचा है। खासतौर पर उन ग्राहकों पर इसका ज्यादा असर पड़ेगा, जो पुराने iPhone मॉडल्स की कीमतों में गिरावट का इंतजार कर रहे थे।

कई एंड्रॉइड ब्रांड्स बढ़ा चुके हैं दाम
हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला नए iPhone 17 लाइनअप पर लागू नहीं होगा और केवल मौजूदा या पुराने मॉडल्स तक ही सीमित रहेगा। भारत में iPhone की मांग मजबूत बनी रहने की उम्मीद है, खासकर EMI विकल्पों के चलते, जो बढ़ी हुई कीमत के असर को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।
इसी बीच, Samsung, Xiaomi और Motorola जैसे कई एंड्रॉइड ब्रांड्स भी बढ़ती उत्पादन लागत के कारण अपने स्मार्टफोन्स की कीमतें पहले ही बढ़ा चुके हैं, जिससे पूरे बाजार में कीमतों का दबाव बना हुआ है।
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