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कोरबा

एनटीपीसी कोरबाः प्रदर्शन, स्थिरता और सामाजिक प्रभाव के साथ प्रगति को गति

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कोरबा। एनटीपीसी कोरबा, भारत के प्रमुख तापीय विद्युत स्टेशनों में से एक और एनटीपीसी का दूसरा सबसे पुराना संयंत्र, निरंतर अपनी मजबूती, विश्वसनीयता और उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। 2600 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ यह संयंत्र महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गोवा सहित कई राज्यों को विद्युत आपूर्ति कर देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अपनी स्थापना के बाद से एनटीपीसी कोरबा देश की ऊर्जा संरचना का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है, जो औ‌द्योगिक विकास को गति देने और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में लगातार योगदान दे रहा है।
एनटीपीसी कोरबा ने 30 मार्च 2026 को कोरबा प्रेस क्लब के सहयोग से एक प्रेस मीट का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में बिजनेस यूनिट हेड (BUH) कोरबा, किशोर चंद्र पात्र, महाप्रबंधक (O&M) सत्रुघ्न बेहरा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, एनटीपीसी कोरबा अस्पताल, डॉ. विनोद कोल्हटकर, शशि शेखर, अपर महाप्रबंधक (HR), मनोज कुमार रजक, अपर महाप्रबंधक (TS), आशीष कुमार वर्मा, अपर महाप्रबंधक (EMG & AU), रोनी जॉनसन, अपर महाप्रबंधक (EEMG), शैलेंद्र यादव, अपर महाप्रबंधक (P&S), अतुल पराशर, उप महाप्रबंधक (HR), शशांक छाज्जर, वरिष्ठ प्रबंधक (CSR), विनायक गर्ग, उप प्रबंधक (HR), बृजेश पाल, उप प्रबंधक (HR) तथा सुश्री उष्मा घोष, कार्यकारी (कॉरपोरेट कम्युनिकेशंस) उपस्थित रहे।

परिचालन उत्कृष्टता में बेंचमार्क
स्टेशन ने अपने उत्कृष्ट परिचालन प्रदर्शन के माध्यम से एक विशिष्ट पहचान बनाई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में एनटीपीसी कोरबा के प्रदर्शन की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  1. एनटीपीसी कोरबा ने प्लांट लोड फैक्टर (PLF) के मामले में लगातार एनटीपीसी के भीतर शीर्ष स्थान प्राप्त किया है, जो इसकी उच्च दक्षता और विश्वसनीय संचालन को दर्शाता है। लगातार छह वर्षों से, एनटीपीसी कोरबा ने एनटीपीसी के भीतर पीएलएफ में शीर्ष स्थान सुरक्षित किया है।
  2. 2000 मेगावाट से अधिक क्षमता वाले विद्युत केंद्रों के बीच, एनटीपीसी कोरबा ने भारत में प्लांट लोड फैक्टर (PLF) में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।
  3. न्यूनतम ऊर्जा शुल्क दर (ECR) पर बिजली उत्पादन करने में एनटीपीसी कोरबा सभी एनटीपीसी स्टेशनों में तीसरे स्थान पर है, जो इसकी मजबूत लागत दक्षता और बेहतर परिचालन प्रदर्शन को दर्शाता है।
  4. इसकी इकाइयों ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जिसमें यूनिट-7 द्वारा 455 दिनों का निरंतर संचालन और यूनिट-1 द्वारा 400 से अधिक दिनों का निरंतर संचालन शामिल है, जो उन्हें संगठन की सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली इकाइयों में शामिल करता है।
  5. पिछले वर्ष की तुलना में कुल ‘फोर्ड आउटेज’ (Forced Outages) में लगभग 50% की कमी आई है।
  6. परिचालन आय (Operational Earnings) के मामले में एनटीपीसी कोरबा सभी एनटीपीसी संयंत्रों में प्रथम स्थान पर है।
  7. स्थिरता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा
    पर्यावरणीय जिम्मेदारी एनटीपीसी कोरबा के संचालन के केंद्र में बनी हुई है। स्टेशन ने अपने कुल क्षेत्रफल के 33% से अधिक हिस्से में हरित आवरण विकसित किया है और 95% से अधिक की प्रभावशाली उत्तरजीविता दर के साथ 30 लाख से अधिक पेड़ लगाए हैं। एक ऐतिहासिक उपलब्धि ‘चरपारा ऐश डाइक’ का सफल सुधार (Reclamation) है, जहाँ 4 लाख से अधिक पेड़ लगाए गए हैं, जिससे यह एनटीपीसी के भीतर पहला सुधारा गया ऐश डाइक बन गया है। इस प्रयास को छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल से ‘रिक्लेमेशन सर्टिफिकेट’ प्राप्त हुआ है, जो पारिस्थितिक बहाली का एक आदर्श उदाहरण पेश करता है।
    एनटीपीसी कोरबा ने राख प्रबंधन (Ash Management) में भी अनुकरणीय प्रदर्शन किया है, वित्त वर्ष 2024-25 में 119% और फरवरी 2026 तक 110% राख का उपयोग हासिल किया है। स्टेशन हर साल 100% से अधिक राख उपयोग को बनाए रखने के लिए एक व्यापक योजना लागू करना जारी रखे हुए है, जो टिकाऊ अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
    भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उ‌द्घाटन किया गया फ्लाई ऐश लाइम जिप्सम (FALG) संयंत्र, औ‌द्योगिक उप-उत्पादों को टिकाऊ निर्माण सामग्री में बदलकर ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ के प्रति स्टेशन की प्रतिबद्धता को और उजागर करता है।
  8. सीएसआर के माध्यम से समुदायों का सशक्तिकरण
    विद्युत उत्पादन के अलावा, एनटीपीसी कोरबा ने अपनी नैगम सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहलों के माध्यम से आसपास के समुदायों के जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। इसकी मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों ने विभिन्न गाँवों में 25,000 से अधिक लाभार्थियों को सेवा प्रदान की है, जबकि लक्षित कार्यक्रम एनीमिया, मातृ स्वास्थ्य और बाल पोषण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का समाधान करते हैं। कौशल विकास की पहलों ने युवाओं को रोजगार सुरक्षित करने और स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम बनाया है। स्टेशन ने सड़कों, स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक भवनों सहित आवश्यक बुनियादी ढांचे के विकास में भी योगदान दिया है।
    खेल के क्षेत्र में, एनटीपीसी कोरबा ने सक्रिय रूप से स्थानीय प्रतिभाओं को निखारा है और एक मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में योगदान दिया है। इस क्षेत्र के कई एथलीटों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान हासिल की है, जिनमें किरण पिस्दा, हर्षित ठाकुर, श्रुति यादव और आकर्षी कश्यप जैसी उल्लेखनीय प्रतिभाएं शामिल हैं, जिन्होंने क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है।
    युवाओं के लिए रोजगार सृजन हेतु एनटीपीसी कोरबा ने अपने सीएसआर कार्यक्रम के तहत विभिन्न सकारात्मक कदम उठाए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से नियोजित व्यक्तियों का विवरण इस प्रकार है:
    सिपेट (CIPET) में आयोजित कौशल प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों के माध्यम से लगभग 110 व्यक्तियों को ‘इंजेक्शन मोल्डिंग मशीन ऑपरेटर’ और 50 व्यक्तियों को ‘सीएनसी (CNC) मशीन ऑपरेटर’ के रूप में प्लेसमेंट प्राप्त हुआ है।
    कोचिंग प्राप्त करने के पश्चात 14 युवाओं ने रक्षा क्षेत्र (आरक्षक, नगर सैनिक, अग्निवीर श्रेणी) में सरकारी नौकरियां प्राप्त की हैं।
    स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के माध्यम से 35 से अधिक महिलाएं स्वरोजगार अपनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।
    एनटीपीसी कोरबा अपने प्रमुख ‘गर्ल एम्पावरमेंट मिशन’ (GEM) के माध्यम से ग्रामीण बालिकाओं के जीवन को बदल रहा है। इस पहल से हाल ही में 36 गांवों के 41 स्कूलों की 576 छात्राओं को लाभ हुआ है। शिक्षा, स्वास्थ्य जागरुकता और जीवन-कौशल प्रशिक्षण प्रदान करके, इस कार्यक्रम का उ‌द्देश्य बालिकाओं में आत्मविश्वास जगाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
    पुरस्कार और सम्मान
    एनटीपीसी कोरबा की उत्कृष्टता और समर्पण को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। संयंत्र को ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय ऊर्जा दक्ष कोयला संयंत्र’ और ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय जल दक्ष इकाई’ जैसे पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा, ‘एक्सीलेंट पीएलएफ प्लांट ऑफ द ईयर’ सहित कई सम्मान और सुरक्षा के क्षेत्र में प्लेटिनम श्रेणी के पुरस्कार इसकी उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
    जैसे-जैसे भारत एक टिकाऊ ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ रहा है, एनटीपीसी कोरबा नवाचार, दक्षता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। देश का सर्वश्रेष्ठ पावर स्टेशन बनने के स्पष्ट विजन के साथ, स्टेशन विश्वसनीय और टिकाऊ बिजली प्रदान करते हुए हितधारकों की अपेक्षाओं से आगे बढ़ने पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखे हुए है। इसकी यात्रा न केवल एक पावर प्लांट के विकास को दर्शाती है, बल्कि राष्ट्र निर्माण, पर्यावरण देखभाल और सामुदायिक विकास के प्रति व्यापक प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
    एनटीपीसी कोरबा आज इस बात का ज्वलंत उदाहरण है कि कैसे परिचालन उत्कृष्टता, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक प्रतिबद्धता मिलकर समाज पर एक स्थायी प्रभाव पैदा कर सकते हैं।
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महंगाई के विरोध में कांग्रेस ने दर्री में निकाली शवयात्रा

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कोरबा। लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर 21 मई को दर्री क्षेत्र जमनीपाली में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल  के नेतृत्व में कांग्रेसजनों द्वारा केंद्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में वरिष्ठ कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता एवं आम नागरिक उपस्थित रहे।

पूर्व मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस (एलपीजी) तथा अन्य दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्रियों के दामों में जिस तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, उससे आम जनता का जीवन अत्यंत कठिन हो गया है। महंगाई ने मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है और लोगों के लिए गृहस्थी चलाना दुश्वार हो गया है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन व्यवस्था एवं आवश्यक वस्तुओं पर पड़ता है, जिसके कारण हर वस्तु महंगी होती जा रही है। रसोई गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों ने गृहिणियों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। वहीं खाद्य तेल, दाल, सब्जियां एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से आम नागरिक आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

जयसिंह अग्रवाल ने केंद्र एवं राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार केवल बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी महंगाई से त्रस्त है। उन्होंने मांग की है कि पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी की कीमतों में तत्काल कमी की जाए तथा आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दामों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। जमनीपाली पेट्रोल पंप के पास पिछले दो दिनों से डीजल के अभाव में दर्जनों ट्रक सड़क किनारे कतार से खड़े हैं ।

विरोध प्रदर्शन रैली में कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक तौर पर मंहगाई का अर्थी सजाकर शवयात्रा निकाला और मातमपुर्शी करते हुए ‘राम नाम सत्य है, मंहगाई जबरजस्त है’, महंगाई की मार, अब नहीं सहेंगे यार । जनता त्रस्तः भाजपा मस्त, जैसे नारे भी लगाये ।

इस आयोजन में प्रमुख रूप से जयसिंह अग्रवाल के साथ प्रदेश सचिव विकास सिंह, कोरबा जिला कांग्रेस अध्यक्ष (शहर) मुकेश कुमार राठौर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) मनोज चौहान, पूर्व जिलाध्यक्ष नत्थूलाल यादव, पूर्व सभापति धुरपाल सिंह कँवर, युवा कांग्रेस अध्यक्ष राकेश पंकज, बालको नगर ब्लाक अद्ध्यक्ष ए.डी.जोशी, राजेंद्र तिवारी, पालुराम साहू, बसंत चंद्रा, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष सुधीर जैन, पार्षद नारायण लाल कुर्रे, रवि सिंह चंदेल, मंडल अध्यक्ष रोपा तिर्की, इकबाल कुरैशी, पूर्व पार्षद सुरती कुलदीप, अविनाश बंजारे, वरिष्ठ कांग्रेसी राजेंद्र सिंह ठाकुर, रेखा त्रिपाठी, रतन यादव, संजय अग्रवाल, हरवेन्द्र सिंह, अनिल द्विवेदी, राम इकबाल, बिसाहु दास, देवीदयाल तिवारी, भरत साहु, राजकुमार श्रीवास, जाकिर खान, डॉ.डी आर नेताम, सीमा कुर्रे, छत्रपाल कुर्रे, संतोष ठाकुर, रमेश दास महंत, सिकंदर मेमन, शशि साहु, हीरा साहु, संतोष यादव, संगीता श्रीवास, पार्षद अयोध्या मस्तुल कंवर, परमानंद सिंह, प्रवीण कुमार, मधुसुदन दास सहित कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसजनों ने महंगाई के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र ही जनता को राहत नहीं दी, तो कांग्रेस पार्टी जनहित में आगे भी व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी।

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सिंघाली क्षेत्र में बिजली तार चोरी से ग्रामीण अंधेरे में, राजेश यादव ने तत्काल बिजली व्यवस्था बहाल करने की उठाई मांग

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ढेलवाडीह/कटघोरा। कटघोरा सब स्टेशन ढेलवाडीह से संचालित देवरी फीडर अंतर्गत ढेलवा डीह जंगल से जवाली-सिंघाली पुल तक लगभग 7 से 8 किलोमीटर क्षेत्र में अज्ञात चोरों द्वारा करीब 25 से 30 बिजली पोलों के तार काटकर चोरी कर लिए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना से जवाली, सिंघाली और देवरी क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और ग्रामीण अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार 14 मई को सिंघाली में सुशासन दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, लेकिन इसके अगले ही समय बिजली प्रवाहित खंभों से तार चोरी कर चोरों ने पुलिस और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने प्रशासन एवं बिजली विभाग से तत्काल क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनों की मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बाधित होने से आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने भी क्षेत्र में लगातार बढ़ रही बिजली चोरी की घटनाओं पर चिंता जताते हुए रात्रि गश्त बढ़ाने, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी करने तथा बिजली लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रशासन से की है।

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तेज धूप और थकान में भी हरा सोना से मिलती है राहत

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गाँव-गाँव इन दिनों तेंदूपत्ता संग्रहण का चल रहा सिलसिला

कोरबा। तेज़ दोपहरी की धूप हो या गाँव के तालाबों में कम होता पानी, गर्मी का मौसम अपने साथ कई चुनौतियाँ लेकर आता है। लेकिन कोरबा जिले के दूरस्थ गाँव लेमरू के परिवारों के लिए यही मौसम खुशियों की सौगात भी लेकर आया है। कारण है—तेंदूपत्ता के बढ़े हुए दाम, जिसने इस क्षेत्र के सैकड़ों संग्राहक परिवारों की उम्मीदों को नई उड़ान दी है।

गाँव की गलियों में दोपहर का सन्नाटा भले ही छाया रहता हो, पर जंगल की ओर जाने वाली पगडंडियों पर सुबह से शाम तक रौनक देखने को मिलती है। महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग तेंदूपत्ता संग्रहण में जुटे हुए हैं। जंगलों से पत्ते तोड़कर लाना, उन्हें गठरी में भरकर घर तक लाना और फिर घर की परछी में बैठकर 50-50 पत्तों के बंडल बनाना—इन सब कामों के बीच उनके चेहरों पर एक समान चमक दिखाई देती है। सभी के मन में यही खुशी है कि दाम बढ़ने से आमदनी भी बढ़ेगी और जितना अधिक संग्रहण होगा, उतनी ही आमदनी मिलेगी।

लेमरू गाँव के संतोष यादव और उनकी पत्नी दिव्या यादव हर सुबह सूरज निकलने से पहले लाम पहाड़ के जंगल की ओर निकल जाते हैं। दिव्या बताती हैं कि सुबह से दोपहर तक पत्ते तोड़ते हैं, फिर दोपहर के बाद खाना खाकर घर में बैठकर बंडल बनाना शुरू करते हैं। इस बार वे पिछले साल से कहीं अधिक पत्ता तोड़ रहे हैं, क्योंकि कीमत भी बढ़ी है और मेहनत का सीधा लाभ मिलने वाला है। संतोष परसा पेड़ की छाल से रस्सी बनाकर तेंदूपत्तों की गड्डी तैयार करते हैं।
दिव्या, जिन्हें महतारी वंदन योजना से प्रति माह 1000 रुपये की सहायता मिलती है, बताती हैं कि यह राशि उनके परिवार के लिए बेहद उपयोगी है। तेंदूपत्ता संग्रहण और योजना से मिली सहायता मिलकर अब उनके परिवार के लिए बेहतर भविष्य की राह खोल रहे हैं। वे खुशी से बताती हैं कि अब प्रति मानक बोरा की कीमत 5500 रुपये कर दी गई है, जिससे वे अपने घर के निर्माण का सपना पूरा करना चाहती हैं।
गाँव की ही सोना बाई और सुमित्रा बाई भी सुबह-सुबह जंगल जाती हैं। वे कहती हैं कि जितना ज्यादा पत्ता तोड़ेंगे, उतनी ही आय होगी। पहले कीमत 2500 रुपये थी, फिर 4000 हुई और अब 5500 रुपये होने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। तेंदूपत्ता संग्राहक कार्ड के माध्यम से बीमा और बच्चों को छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएँ भी मिल रही हैं, जो वन क्षेत्र के परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन चुकी हैं।
तेंदूपत्ता के बढ़े दामों ने संग्राहकों के चेहरों पर नई रोशनी ला दी है। संग्राहकों ने कीमत वृद्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। उन्हें भरोसा है कि बढ़ी हुई कीमतें उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल देंगी और उनकी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बनाएँगी।
गर्म हवाओं और सूखे खेतों के बीच भी लेमरू के इन परिवारों के चेहरों पर चिंता नहीं, बल्कि उम्मीद की हरियाली है। तेंदूपत्ता सिर्फ उनका रोज़गार नहीं है, बल्कि जीवन बदलने की एक मजबूत ताकत है। यह कहानी तेंदूपत्ते की नहीं, बल्कि उन परिवारों की है जिन्होंने मेहनत, आत्मविश्वास और बढ़ी हुई कीमतों के सहारे अपने जीवन में नई खुशियों की हरियाली उगाई है।

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