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बिहार- नालंदा के मंदिर में भगदड़, 9 की मौत:इनमें 8 महिलाएं, राष्ट्रपति की सुरक्षा में 2500 जवान, 25 हजार श्रद्धालुओं के लिए कोई नहीं

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नालंदा,एजेंसी। बिहार में नालंदा जिले में मंगलवार सुबह शीतला माता मंदिर में भगदड़ मच गई। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। 8 महिलाओं की भीड़ में दबने से मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक पुरुष ने अस्पताल में दम तोड़ा।

चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार को बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस मंदिर में पहुंचे थे। वहां मेला भी लगा था। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे।

दर्शन करने की जल्दी में धक्का-मुक्की मच गई। अफरातफरी के बीच कई लोग भीड़ में दब गए। बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। हादसे के बाद मंदिर और मेला को बंद करवा दिया है।

आज नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति शामिल हुईं। उनकी सुरक्षा में 8 जिलों के 2500 जवानों को लगाया गया था, जबकि मंदिर में जुटी 25 हजार की भीड़ के लिए एक भी पुलिस वाले की तैनाती नहीं थी।

हादसे के बाद पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया है। सीएम ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। दीपनगर थाने के SHO राजमणि को सस्पेंड कर दिया गया है।

सरकार ने मृतकों के आश्रितों को 6 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। वही केंद्र सरकार ने 2 लाख के मुआवजे की घोषणा की है।

हादसे के बाद की कुछ तस्वीरें…

हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।

हादसे के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।

ई-रिक्शा से घायल महिला को अस्पताल लाया गया।

ई-रिक्शा से घायल महिला को अस्पताल लाया गया।

हॉस्पिटल में घायल को सीपीआर देते डॉक्टर।

हॉस्पिटल में घायल को सीपीआर देते डॉक्टर।

पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर लोगों की भीड़ है।

पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर लोगों की भीड़ है।

हादसे से जुड़ी बड़ी बातें –

  • नालंदा पहुंचे DGP विनय कुमार ने कहा कि मंदिर परिसर में बहुत कमियां हैं। निश्चित तौर पर यहां पुलिस की टीम होनी चाहिए थी। SHO को संस्पेंड किया गया है।
  • चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार के चलते पटना और आसपास के इलाकों से भी दर्शन के लिए पहुंचे थे। इस वजह भीड़ बहुत बढ़ गई।
  • मंदिर परिसर छोटा था। भीड़ को कंट्रोल करने के इंतजाम नहीं थे। लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ लग गई।
  • लोग कतार में लगने की जगह आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इससे भगदड़ की स्थिति बन गई। कई लोग भीड़ के नीचे दब गए।
  • मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के बाद पुलिस और एंबुलेंस को पहुंचने में भी देर हुई।

दर्शन की जल्दबाजी में मची भगदड़

महिला भक्तों ने बताया कि चैत्र महीने का ये आखिरी मंगलवार है। यहां मेला लगा था। भीड़ ज्यादा हो गई। मंदिर का गर्भगृह भी छोटा है। लोग जल्दी-जल्दी दर्शन करने के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में थे। कोई लाइन में लगकर पूजा नहीं करना चाह रहा था।

दूसरे श्रद्धालु ने बताया, ‘सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया था। मंदिर के अंदर भारी भीड़ थी। पुलिस का जवान अंदर तैनात नहीं था। भीड़ को डायवर्ट करने या दो लाइनों में बांटने की कोई व्यवस्था नहीं थी। मंदिर के पुजारी ही जल्दी-जल्दी दर्शन कर निकलने को कह रहे थे। इस बीच एक महिला को चक्कर आ गया, जिससे वो वहीं गिर पड़ी। कुछ लोग उसे संभालने लगे, और भीड़ को पीछे करने की कोशिश की। इस दौरान भगदड़ मच गई।’

40 मिनट बाद पहुंची एंबुलेंस

मंदिर में मौजूद एक श्रद्धालु ने बताया, ‘भगदड़ के बाद कई महिलाएं बेहोश पड़ीं थीं। कुछ दर्द से चिल्ला रहीं थीं। लोगों ने पुलिस को खबर की। पहले 2-3 पुलिस वाले पहुंचे। उनके साथ मिलकर श्रद्धालुओं ने घायल महिलाओं को किनारे लिटाया। कई बार एंबुलेंस के लिए फोन किया गया। घटना के करीबब 40 मिनट बाद पहली एंबुलेंस पहुंची और पुलिस के कुछ अफसर भी आए। इसके बाद घायलों को अस्पताल भिजवाया गया। महिलाओं को उठाते समय ही लग रहा था कि उनमें से कुछ की मौत हो गई है।’

भगदड़ के बाद मंदिर के पास के तालाब में पूजा सामग्री की दुकानों के सामान गिरे पड़े हैं।

भगदड़ के बाद मंदिर के पास के तालाब में पूजा सामग्री की दुकानों के सामान गिरे पड़े हैं।

लापरवाही के तीन बड़़े कारण

1. मंदिर प्रबंधन ने व्यवस्था नहीं की

आज चैत्र का आखिरी मंगलवार है। मघड़ा शीतला मंदिर में इस दिन हर साल भीड़ होती है, मंदिर प्रबंधन को इस बात की जानकारी थी, इसके बाद भी भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए अलग से कोई इंतजाम नहीं किया गया था। भीड़ को कंट्रोल करने के लिए मंदिर परिसर में बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थी। सुबह 8 से 9 बजे के बीच भीड़ अव्यवस्थित हो गई।

2. चोर दरवाजे से दर्शन कराए जा रहे थे

बढ़ती भीड़ को कंट्रोल करने की बजाए मंदिर प्रबंधन और वहां मौजूद पुजारी फायदा उठा रहे थे। वे लोगों से पैसा लेकर पीछे के दरवाजे से माता का दर्शन कराने लगे। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं था, ये अपनी मनमानी कर रहे थे। इसके कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती चली गई।

3. 25 हजार की भीड़, पुलिस- प्रशासन की कोई व्यवस्था नहीं

मंदिर परिसर में न तो सुरक्षा का कोई इंतजाम था और न ही भीड़ को कंट्रोल करने के लिए किसी पुलिसकर्मी को तैनात किया गया था। मेले की पहले से जानकारी होने के बाद भी प्रशासन की तरफ से यहां किसी मजिस्ट्रेट को तैनात नहीं किया गया था। घटना स्थल से 30KM की दूरी पर राष्ट्रपति आने वाली थीं, वहां 8 जिले के ढाई हजार जवान तैनात किए गए थे।

राष्ट्रपति की सुरक्षा में 2500 जवान, नालंदा पहुंचने से डेढ़ घंटे पहले हादसा

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु आज नालंदा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल होने नालंदा पहुंचीं। राष्ट्रपति सुबह 11.20 से शाम 4.50 बजे तक नालंदा में रहेंगी।

उनके कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई है। नालंदा के अलावा जहानाबाद, गया, पटना समेत 8 से अधिक जिलों से ढाई हजार से अधिक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को लगाया गया है।

नालंदा के डीएम ने दंडाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल सर्विसेज को हाई अलर्ट पर रखा गया था। मुख्य कार्यक्रम स्थल पर डॉक्टरों और मेडिकल कर्मियों की तैनात की गई थी।

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दिल्ली में 6 मंजिला होटल में आग, 21 की मौत:इनमें बांग्लादेश-अफ्रीकी देशों के 17 नागरिक, बिना फायर NOC चल रहा था होटल

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नई दिल्ली, एजेंसी। दिल्ली के मालवीय नगर के फ्लरिश स्टे होटल में बुधवार को आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में 17 विदेशी नागरिक हैं। जो बांग्लादेश और अफ्रीकी देशों के हैं।

दिल्ली फायर सर्विस और स्थानीय लोगों के मुताबिक, मालवीय नगर में मौजूद इस होटल के रेस्टोरेंट में सुबह 8.50 बजे आग लगी। आग ऊपरी मंजिलों पर बने कमरों और बेसमेंट तक पहुंच गई।

चीफ फायर ऑफिसर अभिलाष मलिक ने कहा,

फायर टीम ने यहां से 37 लोगों को बाहर निकाला। बिल्डिंग की फायर NOC नहीं थी। होटल में 25 कमरे हैं।

वहीं, हादसे के वीडियो में कुछ लोग जान बचाने के लिए जलती हुई इमारत की तीसरी-चौथी मंजिल से कूदते नजर आ रहे हैं। इन्हें बचाने के लिए स्थानीय लोगों ने जमीन पर गद्दे भी बिछाए थे।

बेसमेंट से भी 6 से ज्यादा लोगों को निकाला गया। 40 लोगों का रेस्क्यू किया गया है। कई लोगों की हालत गंभीर है। आग लगने की वजह का अब तक पता नहीं चल पाया है। पिछले 6 महीनों में दिल्ली में आग की अलग-अलग घटनाओं में 66 लोगों की मौत हो चुकी है।

मालवीय नगर में बिल्डिंग में बुधवार सुबह 8.50 बजे आग लगी।

मालवीय नगर में बिल्डिंग में बुधवार सुबह 8.50 बजे आग लगी।

आग लगने के बाद जान बचाने के लिए बिल्डिंग की छत पर मौजूद एक व्यक्ति।

आग लगने के बाद जान बचाने के लिए बिल्डिंग की छत पर मौजूद एक व्यक्ति।

होटल के फ्रंट साइड में करीब 15- 20 फीट ऊंचाई से जान बचाने के लिए कूदते लोग।

होटल के फ्रंट साइड में करीब 15- 20 फीट ऊंचाई से जान बचाने के लिए कूदते लोग।

होटल की तीसरी मंजिल से नीचे कूदा एक व्यक्ति। उसे स्थानीय लोगों ने बचाया।

होटल की तीसरी मंजिल से नीचे कूदा एक व्यक्ति। उसे स्थानीय लोगों ने बचाया।

बिल्डिंग में आग लगने के बाद कई लोग जान बचाने के लिए तीसरी-चौथी मंजिल से नीचे कूदे।

बिल्डिंग में आग लगने के बाद कई लोग जान बचाने के लिए तीसरी-चौथी मंजिल से नीचे कूदे।

होटल की खिड़की पर मौजूद धुएं से घिरी विदेशी महिला। हादसे में मरने वालों में अधिकतर विदेशी नागरिक हैं।

होटल की खिड़की पर मौजूद धुएं से घिरी विदेशी महिला। हादसे में मरने वालों में अधिकतर विदेशी नागरिक हैं।

आग से घिरी बिल्डिंग से जान बचाने के लिए एक महिला दूसरी मंजिल से नीचे कूदी। लोगों ने उसे रेस्क्यू किया।

आग से घिरी बिल्डिंग से जान बचाने के लिए एक महिला दूसरी मंजिल से नीचे कूदी। लोगों ने उसे रेस्क्यू किया।

आग बिल्डिंग की पास वाली गली के हिस्से में लगी, इसके बाद पूरी बिल्डिंग में फैल गई।

आग बिल्डिंग की पास वाली गली के हिस्से में लगी, इसके बाद पूरी बिल्डिंग में फैल गई।

फायर ब्रिगेड ने बिल्डिंग में लगी आग बुझाई, इसके बाद होटल में फंसे लोगों को बाहर निकाला।

फायर ब्रिगेड ने बिल्डिंग में लगी आग बुझाई, इसके बाद होटल में फंसे लोगों को बाहर निकाला।

स्थानीय लोगों ने भी होटल से कई लोगों का रेस्क्यू किया। उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया।

स्थानीय लोगों ने भी होटल से कई लोगों का रेस्क्यू किया। उन्हें अस्पताल तक पहुंचाया।

होटल से रेस्क्यू की गई विदेशी महिला को कंधे पर उठाकर ले जाता एक व्यक्ति।

होटल से रेस्क्यू की गई विदेशी महिला को कंधे पर उठाकर ले जाता एक व्यक्ति।

फायर ब्रिगेड ने होटल की आग बुझाई, इसके बाद रेस्टोरेंट के बेसमेंट से 6 लोगों का रेस्क्यू किया है।

फायर ब्रिगेड ने होटल की आग बुझाई, इसके बाद रेस्टोरेंट के बेसमेंट से 6 लोगों का रेस्क्यू किया है।

रेस्क्यू किए गए लोगों को एंबुलेंस से पास के मैक्स, AIIMS और सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया।

रेस्क्यू किए गए लोगों को एंबुलेंस से पास के मैक्स, AIIMS और सफदरजंग अस्पताल पहुंचाया।

रेस्टोरेंट के बेसमेंट से रेस्क्यू किए गए लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

रेस्टोरेंट के बेसमेंट से रेस्क्यू किए गए लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

रेस्टोरेंट के बाहर मौजूद फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम।

रेस्टोरेंट के बाहर मौजूद फायर ब्रिगेड और पुलिस की टीम।

रेस्क्यू के दौरान दिल्ली पुलिस के 10 जवान भी घायल हुए हैं। उन्हें भी इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

रेस्क्यू के दौरान दिल्ली पुलिस के 10 जवान भी घायल हुए हैं। उन्हें भी इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

रेस्टोरेंट के ऊपर होटल था, आग 6 मंजिल तक पहुंची

आग 6 मंजिला इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर बने बी-एन-बी रेस्टोरेंट में लगी। कुछ देर बाद होटल में ऊपर की तरफ फैल गई। यह होटल दिल्ली के प्रेस एन्क्लेव रोड पर है। यहीं पर मैक्स हॉस्पिटल और AIIMS भी है। बताया जा रहा है कि इन अस्पतालों में इलाज कराने आने वालों के परिजन भी इस होटल में रुका करते थे।

मैक्स अस्पताल बोला- 18 लोगों की पहले ही मौत हो चुकी थी, AIIMS में 13 लोग भर्ती

मैक्स अस्पताल के अधिकारी के मुताबिक कुल 39 लोगों को यहां लाया गया था। इनमें से 18 की पहले ही मौत हो चुकी थी। 5 लोगों को हल्की चोटें थीं। उन्हें डिस्चार्ज किया गया है। 15 लोग आईसीयू में एडमिट हैं, इनमें से 8 वेंटिलेटर पर हैं। जिनकी हालत गंभीर है। एक व्यक्ति बहुत ज्यादा झुलस गया था, उसे सफदरजंग अस्पताल रैफर किया गया है।

वहीं, AIIMS में 13 लोगों का इलाज जारी है। इनमें 3 लोग वह हैं, जिन्होंने होटल के कमरों से जान बचाने के लिए छलांग लगाई थी। एक व्यक्ति पैर टूट गए हैं।

होटल में 6 रूम की परमिशन थी, लेकिन 25 कमरे थे

  • फ्लरिस स्टे गेस्टहाउस को बेड एंड ब्रेकफास्ट कॉन्सेप्ट के तहत लाइसेंस जारी किया गया था। इसके तहत 6 रूम की परमिशन थी, लेकिन 25 कमरे बने थे।
  • आग लगने के बाद होटल के रेस्टोरेंट के बेसमेंट में भी काफी लोग फंसे थे। इसमें अंदर जाने और बाहर निकलने का रास्ता एक ही था, जो बहुत संकरा था
  • होटल के पास फायर NoC नहीं थी। आने-जाने का भी एक ही रास्ता था।
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अमेरिका में गूंजी भारत की आजादी गाथा, न्यूयॉर्क सीनेट में 15 अगस्त को लेकर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित

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न्यूयॉर्क, एजेंसी। न्यूयॉर्क की सीनेट ने राज्य की गवर्नर कैथी होचुल से 15 अगस्त 2026 को राज्य में ‘भारत स्वतंत्रता दिवस’ घोषित करने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें सांसदों ने महात्मा गांधी की विरासत को याद किया और अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की। सीनेटर जेरेमी कूनी द्वारा प्रायोजित इस प्रस्ताव में कहा गया है कि न्यूयॉर्क राज्य की विधायिका की परंपरा रही है कि वह उन महत्वपूर्ण दिनों को मान्यता देती है, जो राज्य के नागरिकों की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े होते हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि ”भारत की स्वतंत्रता दुनिया भर के लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह नागरिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के साथ-साथ आत्मनिर्णय के लिए चले 90 वर्षों के संघर्ष के अंत का प्रतीक है।”

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कई राज्य सीनेटरों ने भारत की प्राचीन सभ्यता, लोकतांत्रिक परंपराओं, महात्मा गांधी के शांति संदेश और न्यूयॉर्क सहित पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बढ़ते योगदान की प्रशंसा की। कूनी ने कहा कि दुनिया भर में भारतीय अपने-अपने समुदायों पर स्थायी प्रभाव छोड़ रहे हैं और यह अवसर साझा इतिहास, संस्कृति और विरासत का जश्न मनाने तथा उस पर विचार करने का है। सीनेटर जॉन लियू ने कहा कि भारत का अस्तित्व हजारों वर्षों से है। उन्होंने कहा, ”भारत एक सभ्यता रहा है, एक राष्ट्र रहा है और वास्तव में हमारे देश से भी लंबे समय से लोकतंत्र का एक आदर्श मॉडल रहा है।”

सीनेटर टोबी ऐन स्टाविस्की ने दोनों देशों के बीच मित्रता की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों देशों में समानताएं, मतभेदों से कहीं अधिक हैं। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सीनेट के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि ”यह भारत और अमेरिका के बीच मित्रता, लोकतंत्र और साझा मूल्यों के मजबूत संबंधों को दर्शाता है।” दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ”भारत की विरासत से लेकर न्यूयॉर्क के दिल तक : लोकतंत्र और समुदाय के रिश्तों का उत्सव।” भारतीय दूतावास ने प्रस्ताव आधिकारिक रूप से पेश करने के लिए जेरेमी कूनी का धन्यवाद किया और भारत की समृद्ध विरासत तथा न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के अमूल्य योगदान को सम्मान देने के लिए सभी विधायकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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दिल्ली मालवीय नगर होटल अग्निकांड की गूंज विदेशों तक, ग्लोबल मीडिया ने उठाए गंभीर सवाल, छिड़ गई नई बहस

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नई दिल्ली, एजेंसी। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी हैं। ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, कतर और बांग्लादेश सहित कई देशों के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इस त्रासदी को प्रमुखता से कवर करते हुए भारत में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और भवन नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हादसे में मृतकों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की होने के कारण यह घटना वैश्विक मीडिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

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अल जज़ीरा की रिपोर्ट
 कतर के समाचार चैनल अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारत में आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि मालवीय नगर स्थित भवन के निचले हिस्से में रेस्तरां और ऊपर होटल संचालित हो रहा था। अल जज़ीरा ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि आग लगने के बाद पूरा भवन धुएं से भर गया और लोग अंदर फंस गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई इमारतों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के कारण ऐसी घटनाओं में भारी जनहानि होती है।

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BBC ने  लिखा
ब्रिटेन के BBC ने अपनी रिपोर्ट में  इलाज के लिए भारत आए विदेशी नागरिक भी बने हादसे का शिकार हैडलाइन दी और बताया कि मृतकों में कई विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो भारत में चिकित्सा उपचार के लिए आए थे। BBC के अनुसार, यह भवन एक गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां आसपास के निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीज और उनके परिजन ठहरते थे। रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद के बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि यह जांच की जा रही है कि भवन को गेस्ट हाउस के रूप में संचालित करने की वैध अनुमति थी या नहीं। BBC ने यह भी लिखा कि भारत में कई अग्निकांडों की जांच में खराब विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और भवनों के गलत उपयोग जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।

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स्पेन का एल पाइस
स्पेन के प्रमुख अखबार एल पाइस ने  सूचना मिलने में देरी और घनी आबादी को चुनौती बताया और लिखा कि दक्षिण दिल्ली के फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग की सूचना दमकल विभाग को देर से मिली। रिपोर्ट में कहा गया कि शुरुआती आशंका के अनुसार आग भवन के निचले हिस्से में चल रहे रेस्तरां से शुरू हुई हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एल पाइस ने दिल्ली की घनी आबादी, संकरी गलियों और पुराने भवनों में सुरक्षा मानकों की कमी को ऐसी घटनाओं के गंभीर होने का प्रमुख कारण बताया।

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जर्मनी का DW
जर्मन मीडिया संस्थान DW News ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भवन के बेसमेंट में रेस्तरां और ऊपर होटल संचालित हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक जांच में रेस्तरां से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आग के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है।DW ने यह भी उल्लेख किया कि मृतकों में कुछ विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो इलाज के लिए भारत आए थे।

ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन
ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन ने घटना के मानवीय पहलू को प्रमुखता से दिखाया। रिपोर्ट में कहा गया कि आग और धुएं के तेजी से फैलने के कारण ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से छलांग लगानी पड़ी। द सन ने स्थानीय लोगों की सराहना करते हुए लिखा कि उन्होंने सड़क पर गद्दे बिछाकर कई लोगों की जान बचाने में मदद की। रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का भी जिक्र किया गया, जिनमें इमारत से उठती लपटें और धुआं दिखाई दे रहा था।

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बांग्लादेश का डेली स्टार 
बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र डेली स्टार ने लिखा कि आग लगने के बाद कई घंटों तक बचाव अभियान चलाया गया और 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि मृतकों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो इलाज या अन्य कार्यों के सिलसिले में दिल्ली आए हुए थे।विश्व मीडिया की अधिकांश रिपोर्टों में एक समान चिंता उभरकर सामने आई है ग्नि सुरक्षा मानकों का पालन, भवनों का उपयोग और आपातकालीन निकासी व्यवस्था।दिल्ली पुलिस ने होटल मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि भवन में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

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