बिज़नस
अमेरिका में पेट्रोल की कीमत चार डॉलर प्रति गैलन के पार, 2022 के बाद सबसे अधिक
न्यूयॉर्क,एजेंसी। ईरान युद्ध के बीच वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 2022 के बाद पहली बार औसतन चार डॉलर प्रति गैलन से अधिक हो गई है। वाहन कंपनियों के संघ ‘एएए’ के अनुसार, नियमित पेट्रोल की राष्ट्रीय औसत कीमत अब 4.02 डॉलर प्रति गैलन हो गई है जो युद्ध शुरू होने से पहले की तुलना में एक डॉलर से अधिक है।

इससे पहले रूस के यूक्रेन पर हमला करने के दौरान करीब चार वर्ष पहले अमेरिका में पेट्रोल इतना महंगा हुआ था। यह कीमत राष्ट्रीय औसत है जिसका अर्थ है कि कुछ राज्यों में लोग काफी समय से चार डॉलर प्रति गैलन से अधिक का भुगतान कर रहे हैं। राज्यों के बीच कीमतें कर दरों में अंतर के कारण अलग-अलग होती है।
अमेरिका और इजराइन के 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और बढ़ोतरी हुई है। इस संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान उत्पन्न हुए हैं और पश्चिम एशिया के प्रमुख तेल उत्पादकों ने उत्पादन में कटौती भी की है जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ा है। एएए के अनुसार, डीजल अब औसतन 5.45 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन पर बिक रहा है, जो युद्ध शुरू होने से पहले लगभग 3.76 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन था। डीजल का इस्तेमाल कई मालढुलाई और डिलिवरी ट्रक में ईंधन के रूप में किया जाता है।

देश
देश में प्रति उपयोगकर्ता मासिक मोबाइल डेटा खपत 31GB से अधिक: रिपोर्ट
नई दिल्ली,एजेंसी। भारत में प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक मोबाइल डेटा की खपत वर्ष 2025 में 31जीबी के आंकड़े को पार कर गई है जबकि वर्ष 2024 में यह खपत 27.5 जीबी थी। एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनी नोकिया के वार्षिक मोबाइल ब्रॉडबैंड सूचकांक (एमबीइटी) के 13वें संस्करण में कहा गया है कि वर्ष 2025 में अखिल भारतीय स्तर पर 5जी नेटवर्क पर डेटा का कुल मासिक उपयोग एक साल पहले की तुलना में 70 प्रतिशत बढ़कर 12.9 एक्साबाइट (ईबी) तक पहुंच गया है। इसके साथ ही, देश के कुल मोबाइल ब्रॉडबैंड ट्रैफिक में 5जी की हिस्सेदारी अब लगभग 47 प्रतिशत हो गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रति उपयोगकर्ता औसत मासिक मोबाइल डेटा खपत में हुई यह वृद्धि पिछले पांच वर्षों में 18 प्रतिशत की वार्षिक औसत वृद्धि दर को दर्शाती है। यह बढ़ोत्तरी उन्नत मोबाइल ब्रॉडबैंड के तीव्र विस्तार और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित अनुप्रयोगों, उच्च गुणवत्ता वाले 4के वीडियो देखने और क्लाउड गेमिंग जैसी अधिक डेटा खपत वाली सेवाओं की बढ़ती मांग का परिणाम है। भारत में कुल डेटा उपयोग वर्ष 2025 में 27 एक्साबाइट प्रति माह को पार कर गया है। एक एक्साबाइट का मतलब एक अरब जीबी से थोड़ा अधिक होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5जी उपभोक्ता आधार वाला देश बन गया है।
साथ ही, 5जी डेटा खपत और ‘फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस’ उपयोगकर्ताओं की संख्या के मामले में भी भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) प्रौद्योगिकी की मदद से घरों या कार्यालयों में केबल के बगैर उच्च गति का इंटरनेट मुहैया कराया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल 5जी डेटा में एफडब्ल्यूए की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत को पार कर गई है और इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या में पिछले साल की तुलना में दोगुनी वृद्धि देखी गई है।
नोकिया इंडिया की नामित कंट्री मैनेजर विभा मेहरा ने कहा, “नेटवर्क उपयोग के नए तरीकों और स्मार्ट सेवाओं के अनुरूप बदलने के समय नोकिया दूरसंचार कंपनियों के साथ मिलकर एक ऐसा भविष्य-उन्मुख और उच्च प्रदर्शन वाला बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिसका विस्तार आसानी से किया जा सके।” इस रिपोर्ट के मुताबिक, महानगरों में 5जी का उपयोग सबसे अधिक है, जहां कुल मोबाइल डेटा खपत में 5जी की हिस्सेदारी 58 प्रतिशत है। पिछले साल सक्रिय 4जी उपकरणों की संख्या 89.2 करोड़ तक पहुंच गई, जिनमें से 38.3 करोड़ से अधिक उपकरण पहले से ही 5जी-सक्षम हैं।

देश
NBFC के वित्तपोषण के लिए वाणिज्यिक पत्र बना हुआ है प्रमुख जरिया: इंडिया रेटिंग्स
मुंबई, एजेंसी। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) वित्तपोषण के लिए मार्च महीने में वाणिज्यिक पत्र जारी करने के मामले में आगे रही हैं जबकि कंपनियों ने अल्पकालिक कर्ज लागत में वृद्धि के कारण सतर्कता बरती है। रेटिंग एजेंसी इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने एक रिपोर्ट में यह बात कही है। ‘कमर्शियल पेपर’ यानी वाणिज्यिक पत्र एक बिना गारंटी वाले, अल्पकालिक कर्ज जुटाने का साधन हैं। कंपनियां अल्पकालिक देनदारियों के वित्तपोषण के लिए इसके जरिये पैसा जुटाती हैं। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि उधार लेने के प्रतिरूप में यह अंतर बना रहेगा।

इसका कारण एनबीएफसी विशेष रूप से वित्त वर्ष के अंत में अपनी वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वाणिज्यिक पत्र बाजार का सक्रियता से उपयोग करना जारी रखेंगी जबकि कंपनियां उच्च वित्तपोषण लागत और पर्याप्त आंतरिक नकदी के कारण चयनात्मक रुख अपनाएंगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि आमतौर पर एनबीएफसी के लिए वित्तपोषण के लिहाज से मार्च का महीना महत्वपूर्ण समय होता है और प्रतिफल में वृद्धि के बावजूद उनकी मांग मजबूत बनी हुई है। इस रुख को दर्शाते हुए, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा जारी किए गए वाणिज्यिक पत्र (सीपी) मार्च, 2026 में बढ़कर 70,300 करोड़ रुपए का हो गया, जो फरवरी, 2026 में 45,500 करोड़ रुपए का था। इसके विपरीत, कंपनियों का वाणिज्यिक पत्र के जरिये वित्तपोषण जुटाने में इसी अवधि में भारी गिरावट आई और यह घटकर 26,600 करोड़ रुपए रहा जो एक महीने पहले 40,700 करोड़ रुपए था।
रेटिंग एजेंसी ने कहा, ”वर्तमान स्थिति से संकेत मिलता है कि एनबीएफसी तिमाही के अंत के दायित्वों को पूरा करने के लिए अल्पकालिक बाजारों का सहारा लेना जारी रखेंगी, जबकि लागत संबंधी चिंताओं और आंतरिक नकदी के कारण कंपनियां सतर्क रुख अपना सकती हैं।” इस बीच, बैंकों द्वारा जारी जमा प्रमाणपत्र (सीडी) आने वाले महीनों में अधिक संतुलित रहने की संभावना है। इसका कारण जमा की स्थिति स्थिर हो रही है और नए वित्त वर्ष की शुरुआत में कर्ज की मांग आमतौर पर हल्का रहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, 24 मार्च, 2026 तक, लगभग दो लाख करोड़ रुपए के जमा प्रमाणपत्र जारी किये गए थे। इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का हिस्सा 1.32 लाख करोड़ रुपए था, जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों ने 67,800 करोड़ रुपए के जमा प्रमाणपत्र जारी किये थे। मासिक आधार पर यह राशि लगभग अपरिवर्तित रही। इंडिया रेटिंग्स के अनुसार, जमा प्रमाणत्र जारी करने में आई यह नरमी बैंकों में अल्पकालिक वित्तपोषण दबाव में कुछ कमी का संकेत देती है और नकदी की स्थिति में अपेक्षित सुधार के साथ कर्ज लेने की गति में और कमी आने की संभावना है।

देश
Banking Sector: Central Bank of India को बड़ा झटका, मिला ₹296 करोड़ का टैक्स नोटिस
मुंबई, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने मंगलवार को कहा कि उसे वित्त वर्ष 2024-25 में कर के कम भुगतान को लेकर आयकर विभाग से 296.08 करोड़ रुपए का ‘कर मांग नोटिस’ मिला है। शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बैंक ने बताया कि आयकर विभाग की आकलन इकाई ने 28 मार्च, 2026 को एक आदेश जारी किया है। इस आदेश के तहत बैंक को कर देनदारी के रूप में 296.08 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिए कहा गया है।

बैंक ने स्पष्ट किया कि वह निर्धारित दिशानिर्देशों के भीतर उचित मंच (जैसे अपीलीय अधिकरण) पर इस आदेश को चुनौती देने की प्रक्रिया में है। बैंक का मानना है कि आयकर विभाग ने जिन खर्चों या दावों को अमान्य किया है, उनके खिलाफ उसके पास ठोस तथ्यात्मक और कानूनी आधार मौजूद हैं।
सेंट्रल बैंक ने उम्मीद जताई है कि पिछले आदेशों और कानूनी मिसालों को देखते हुए उसे इस मामले में राहत मिलेगी और पूरी कर मांग समाप्त हो जाएगी। बैंक ने यह भी कहा कि इस नोटिस का उसकी वित्तीय स्थिति, परिचालन या अन्य गतिविधियों पर कोई प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है।

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