कोरबा
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का दर्शन कर पाएंगे लोग
कोरबा। गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर के प्राचीन ज्योतिर्लिंग को कोरबा लाया जा रहा है। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार के साधकों द्वारा सोमनाथ ज्योतिर्लिंग का दिव्य दर्शन कोरबा समेत अन्य जिलों के लोग कर पाएंगे। बताया गया है कि यह ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला और अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह वेरावल के पास, अरब सागर के तट पर स्थित है।

जानकार बताते हैं कि यह 1000 साल पुराना ज्योतिर्लिंग है, जो सोमनाथ मंदिर में सबसे पहले स्थापित किया गया था। इसे 24 अप्रैल को शहर के घंटाघर स्थित ओपन थियेटर में दर्शनार्थ रखा जाएगा। इसकी तैयारी बैठक में पिछले दिनों हुई। उपस्थित साधकों ने दर्शन कार्यक्रम को भव्य बनाने की रूपरेखा तय कर अधिक से अधिक लोगों को दर्शन लाभ कराने का प्रयास कर रहे हैं। आर्ट ऑफ लिविंग के पदाधिकारियों की बैठक रविशंकर शुक्लनगर में आयोजित की गई थी। इस बैठक में सभी उपस्थित सदस्यों ने संकल्प लिया कि सोमनाथ ज्योतिर्लिंग दर्शन कार्यक्रम को भव्य और सफल बनाया जाएगा।
कोरबा
कोरबा में युवक बाइक समेत खुले नाले में गिरा:दलदल में फंसा रहा, स्थानीय लोगों ने रेस्क्यू कर निकाला, निगम पर आक्रोश
कोरबा। कोरबा में शुक्रवार रात डीएम रोड स्थित साईं पैलेस के पास एक खुले नाले में मुड़ापार निवासी बाइक सवार युवक ओम प्रकाश गिर गया। इस हादसे में युवक को चोटें आई हैं। घटना ने नगर पालिक निगम की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, ओम प्रकाश अपनी बाइक से डीएम रोड से गुजर रहे थे। साईं पैलेस के समीप अचानक संतुलन बिगड़ने से वे बाइक समेत खुले नाले में जा गिरे। नाला काफी गहरा और दलदल से भरा था, जिससे युवक बाइक सहित उसमें फंस गया और मदद के लिए चिल्लाने लगा। उनकी आवाज सुनकर राहगीर और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।

नाला लंबे समय से खुला पड़ा
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह नाला लंबे समय से खुला पड़ा है और इसकी नियमित सफाई भी नहीं हुई है। नाले की मौजूदा हालत देखकर यह स्पष्ट होता है कि सफाई के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है।
मोहल्ले वालों ने पहले रस्सी की सहायता से उसे बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन नाले की गहराई और कीचड़ के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इसके बाद लोगों ने एक सीढ़ी मंगवाई।
भारी मात्रा में कचरा और गाद से भरा नाला
जब सीढ़ी को नाले में डाला गया, तो उसका आधा हिस्सा दलदल में धंस गया, जिससे नाले में जमा कचरे और गाद की मात्रा का अंदाजा लगाया जा सकता है। काफी मशक्कत के बाद, सीढ़ी के सहारे युवक ओम प्रकाश को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में निगम प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि शहर में कई स्थानों पर नाले खुले पड़े हैं और उनकी नियमित सफाई नहीं होती।

कोरबा
कोरबा में गर्ल्स आईटीआई कॉलेज में 10 फीट का अजगर:टहलते हुए छात्राओं ने देखा, स्नेक कैचर ने रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ा
कोरबा। कोरबा के रामपुर स्थित गर्ल्स आईटीआई कॉलेज परिसर में बीती रात करीब 10 फीट लंबा अजगर देखा गया। कॉलेज स्टाफ और छात्राओं ने अजगर देखते ही रेस्क्यू टीम को सूचना दी।
सूचना मिलते ही RCRS (रेस्क्यू टीम) के सदस्य उमेश यादव और सौम्या पाण्डेय मौके पर पहुंचे। अजगर झाड़ियों के बीच छिपा हुआ था, जिससे उसे पकड़ना चुनौतीपूर्ण था। टीम ने सावधानीपूर्वक रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

अजगर को पकड़ने के बाद उसे जंगल में छोड़ा गया
कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू टीम ने अजगर को सुरक्षित पकड़ लिया। इस दौरान किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ। अजगर को पकड़ने के बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया। जानकारी के अनुसार, कुछ छात्राएं कॉलेज परिसर में टहल रही थीं, तभी उनकी नजर अचानक इस विशालकाय अजगर पर पड़ी। इसके बाद कॉलेज स्टाफ और छात्राओं में सतर्कता बढ़ गई।
रेस्क्यू टीम ने बताया कि गर्मी के मौसम में सांप अक्सर पानी और ठंडी जगह की तलाश में आबादी वाले इलाकों में आ जाते हैं। ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय तुरंत वन विभाग या स्नेक रेस्क्यू टीम को सूचना देनी चाहिए। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद कॉलेज परिसर में मौजूद लोगों ने राहत महसूस की और टीम के प्रयासों की सराहना की।

कोरबा
कोरबा के गेवरा में 15 दिन से नहीं मिला सिलेंडर:आर्थिक तंगी के कारण आपूर्ति ठप, उपभोक्ताओं ने किया हंगामा
कोरबा/गेवरा। कोरबा के गेवरा प्रोजेक्ट स्थित भारत गैस एजेंसी में रसोई गैस सिलेंडर की किल्लत को लेकर उपभोक्ताओं ने जमकर हंगामा किया। बुकिंग के 15 दिन बाद भी सिलेंडर न मिलने से नाराज सैकड़ों उपभोक्ताओं ने एजेंसी परिसर में नारेबाजी की और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

उपभोक्ताओं का आरोप है कि बुकिंग के बावजूद उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। पिछले 15 दिनों से सिलेंडर बुक होने के बाद भी न तो होम डिलीवरी हो रही है और न ही एजेंसी से सिलेंडर मिल पा रहा है।

गैस एजेंसी के सामने लोगों की बेतहाशा भीड़ है लोग परेशां हो रहे हैं।
स्टॉक या वितरण संबंधी कोई जानकारी नहीं
एजेंसी के सूचना पटल पर स्टॉक या वितरण संबंधी कोई जानकारी साझा नहीं की जा रही है। इससे उपभोक्ताओं को अपना काम छोड़कर प्रतिदिन एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उपभोक्ताओं ने मांग की है कि आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप और सूचना पटल पर प्रतिदिन सिलेंडर की उपलब्धता और वितरण की जानकारी स्पष्ट की जाए।
हंगामे के दौरान एजेंसी कर्मचारियों ने स्वीकार किया कि आर्थिक तंगी के कारण मुख्य डिपो में अग्रिम राशि जमा नहीं हो पा रही है। इस वजह से डिपो से पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर लोड नहीं हो पा रहे हैं, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर आ गया है।

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