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विदेश

हमारे ब्लॉकेड के पास कोई जहाज आता है, तो उन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाएगा: ट्रंप ने ईरान को फिर दी धमकी

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वाशिंगठन/तेहरान, एजेंसी। अमेरिकी सेना सोमवार को ईरान के सभी बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों से पोतों की आवाजाही राकने के मकसद से नाकेबंदी शुरू करने के लिए तैयार दिखी क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं। इसे लेकर डोनाल्ड ट्रंप अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ (Truth Social) पर पोस्ट कर ईरान को धमकी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान की नेवी समुद्र की गहराई में पड़ी है, पूरी तरह से खत्म हो चुकी है – 158 जहाज़। हमने उनके कुछ जहाज़ों को नहीं मारा है, जिन्हें वे “फ़ास्ट अटैक शिप” कहते हैं, क्योंकि हमने उन्हें ज़्यादा खतरा नहीं माना।
उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इनमें से कोई भी जहाज़ हमारे ब्लॉकेड के पास आता है, तो उन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाएगा, उसी किल सिस्टम का इस्तेमाल करके जो हम समुद्र में नावों पर ड्रग डीलरों के खिलाफ करते हैं। यह तेज और बेरहम है। P.S. समुद्र या समुद्र के रास्ते U.S. में आने वाले 98.2% ड्रग्स बंद हो गए हैं! 

ईरान के साथ शांति बातचीत फेल होने के बाद ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य ब्लॉकेड का ऑर्डर दिया। इस इलाके में U.S. के जहाजों के एक मैप में सोमवार सुबह तक कम से कम 17 जहाज तैनात दिखे। US सेंट्रल कमांड ने सोमवार को पहले नाविकों को एक नोटिस में ब्लॉकेड लगाने के प्लान की घोषणा की।

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देश

ट्रंप की हॉर्मुज़ नाकेबंदी पर ईरान का भारत को भरोसा-“आपके जहाज़ सुरक्षित निकालेंगे”, मोदी सरकार और जनता को कहा धन्यवाद

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारत में ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने कहा है कि भारत ईरान का एक भरोसेमंद और संवेदनशील साझेदार है। उन्होंने बताया कि मौजूदा तनावपूर्ण हालात के बावजूद ईरान भारतीय जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं और ईरान चाहता है कि भारतीय जहाज़ बिना किसी डर के सुरक्षित रूप से समुद्री रास्तों से गुजर सकें। उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत को अपने पांच सबसे करीबी मित्र देशों में शामिल किया है। ईरानी राजदूत ने भारतीय सरकार और जनता का धन्यवाद करते हुए कहा कि इस मुश्किल समय में भारत ने हर संभव मदद की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि लोगों के बीच भी मजबूत रिश्ते हैं, जो इस संकट में साफ दिखाई देते हैं।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जिसे Strait of Hormuz कहा जाता है, दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फतहाली ने कहा कि यह क्षेत्र ईरान के अधिकार में आता है। उन्होंने अमेरिका और इज़राइल पर आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान ही उन्होंने हमले किए, जिससे हालात और बिगड़ गए। इस बीच, राहत की बात यह रही कि भारतीय LPG टैंकर “Jag Vikram” सहित कुल 9 भारतीय जहाज़ इस खतरनाक इलाके से सुरक्षित बाहर निकल चुके हैं। केंद्रीय मंत्री Sarbananda Sonowal ने बताया कि 24 भारतीय क्रू मेंबर वाला यह जहाज़ सुरक्षित भारत की ओर बढ़ रहा है। लेकिन हालात अब और गंभीर हो गए हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की है कि अमेरिका हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में आने-जाने वाले जहाज़ों की नौसैनिक नाकेबंदी करेगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई जहाज़ ईरान को कोई शुल्क देकर गुजरता है, तो उसे रोका जाएगा और जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई भी की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तनाव पूरी दुनिया पर असर डाल सकता है, क्योंकि हॉर्मुज़ के रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। अगर यहां कोई बड़ा टकराव होता है, तो तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और वैश्विक व्यापार पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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बिज़नस

ट्रंप के एक्शन से हिला पाकिस्तान शेयर बाजार, 5000+ अंक लुढ़का KSE-100, निवेशकों में डर

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इस्लामाबाद, एजेंसी। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी के आदेश के बाद इसका सीधा असर पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज (PSX) पर देखने को मिला।

शेयर बाजार में भारी गिरावट, फिर आंशिक रिकवरी

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को कारोबार की शुरुआत में पाकिस्तान का बेंचमार्क KSE-100 इंडेक्स 5000 अंकों से ज्यादा टूट गया और सुबह करीब 9:50 बजे 161,638.07 के इंट्राडे निचले स्तर तक गिर गया। पिछला बंद स्तर 167,191.37 था। 

क्यों मचा बाजार में हड़कंप?

दरअसल, 21 घंटे चली मैराथन वार्ता के बाद भी सीजफायर पर सहमति नहीं बन सकी। ईरान द्वारा परमाणु कार्यक्रम जारी रखने के फैसले के बाद अमेरिका ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी का आदेश दिया। इससे Strait of Hormuz में सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे निवेशकों में घबराहट फैल गई।

इसका असर सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि एशियाई बाजारों जैसे हैंगसेंग और निक्केई पर भी देखने को मिला।

पाकिस्तान के लिए कितना अहम है होर्मुज?

पाकिस्तान अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 80-85% सऊदी अरब, कुवैत, यूएई और कतर जैसे खाड़ी देशों से आयात करता है। वहीं, लगभग 99% LNG सप्लाई भी इन्हीं देशों से आती है।

यदि नाकेबंदी लंबी चलती है, तो पाकिस्तान का पेट्रोलियम आयात बिल 3.5 बिलियन डॉलर से बढ़कर 5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

महंगाई और बिजली संकट का खतरा

अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से पाकिस्तान का सालाना आयात बिल 1.8 से 2 बिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है। इससे घरेलू महंगाई 15-17% तक पहुंचने की आशंका है।

तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने पर बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ेगा, जिससे पावर कट बढ़ सकते हैं और उद्योगों में कामकाज ठप पड़ने का खतरा है।

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विदेश

ईरान जंग में रूस की जबरदस्त एंट्री ! अमेरिका से मुकाबले की प्लानिंग, विदेश मंत्री लावरोव पहुंचे चीन

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बीजिंग/मास्को, एजेंसी। ईरान (Iran) और अमेरिका (United States) के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात के बीच अब Russia ने भी सक्रिय भूमिका निभाने के संकेत दिए हैं।  रूस के विदेश मंत्री Sergei Lavrov चीन पहुंच गए हैं, जहां वे China के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट और Strait of Hormuz पर अमेरिका की नाकेबंदी को लेकर रणनीति बनाई जाएगी। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergei Lavrov) मंगलवार को चीन (China) की राजधानी बीजिंग पहुंचेंगे। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका (United States) द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य ( Strait of Hormuz) पर नाकेबंदी की घोषणा के बाद वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट बढ़ गया है।

यह यात्रा चीन के विदेश मंत्री Wang Yi के निमंत्रण पर हो रही है। दोनों देशों के नेता पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट, खासकर Iran और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव पर चर्चा करेंगे। China और Russia के बीच पहले से ही मजबूत रणनीतिक संबंध हैं, जिन्हें उनके नेताओं Xi Jinping और Vladimir Putin “नो लिमिट्स पार्टनरशिप” बता चुके हैं। दोनों देश कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं। इस बैठक में खास तौर पर इस बात पर चर्चा होगी कि अमेरिका की नाकेबंदी का मुकाबला कैसे किया जाए और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति को कैसे सुरक्षित रखा जाए।

चीन लंबे समय से ईरान से तेल आयात करता रहा है, भले ही उस पर अमेरिकी प्रतिबंध लगे हों। ऐसे में होरमुज जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी का सीधा असर चीन की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, चीन रूस से भी बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करता है, जिससे दोनों देशों की ऊर्जा साझेदारी और मजबूत हो गई है।चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे में दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों, आर्थिक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे और एक संयुक्त रणनीति तैयार करने की कोशिश करेंगे। रूस और चीन की यह बैठक सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन के लिए अहम मानी जा रही है। होरमुज संकट और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर इन दोनों देशों की रणनीति आने वाले समय में दुनिया की दिशा तय कर सकती है।

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