विदेश
ईरान ने होर्मुज में मिसाइल दागते हुए वीडियो शेयर किया:कहा- पिक्चर अभी बाकी
चीन बोला- दुनिया जंगल के कानून से नहीं चलनी चाहिए
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी, एजेंसी। ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज स्ट्रेट में नाकाबंदी को लेकर तनाव बढ़ गया है। मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए एक वीडियो शेयर किया है।
इस वीडियो में ईरान होर्मुज में मौजूद जहाजों पर मिसाइल दाग रहा है और कैप्शन में लिखा है कि ‘अभी तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।’ इसके साथ ईरान ने अपनी मिसाइल बोट्स की ताकत भी दिखाई।

दरअसल अमेरिका ने कल होर्मुज स्ट्रेट में उन जहाजों की नाकाबंदी शुरू कर दी है जो ईरान को टोल दे रहे हैं। वहीं, ईरान का कहना है कि वो बिना टोल लिए जहाजों को यहां से गुजरने नहीं देगा।
वहीं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को लेकर कहा कि दुनिया को ‘जंगल के कानून’ (ताकतवर जो चाहे वो करे) वाले हालत में नहीं जाने देना चाहिए। नियम सब पर बराबर लागू होने चाहिए, न कि अपनी सुविधा के हिसाब से।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स
- 15 वॉरशिप तैनात- अमेरिका ने नाकाबंदी लागू करने के लिए 15 से ज्यादा युद्धपोत तैनात किए, जिनमें USS अब्राहम लिंकन और कई डिस्ट्रॉयर शामिल बताए गए हैं।
- चीन का 4 सूत्री प्रस्ताव- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडिल ईस्ट में शांति के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव देते हुए सभी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा का सम्मान जरूरी बताया।
- ईरान को अरबों का नुकसान- ईरान का दावा है कि अमेरिका और इजराइल के हमलों से उसे करीब 270 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
- फिर सीजफायर वार्ता संभव- अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर इस हफ्ते फिर बैठक हो सकती है, इस्लामाबाद और जेनेवा संभावित जगह मानी जा रही हैं।
- ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं- ईरान ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह बातचीत के बजाय अपनी शर्तें थोपना चाहता है और शुरुआत से ही भरोसे के लायक नहीं रहा है।

देश
Cannes में राजस्थान की बेटी ने रचा इतिहास, घूंघट ओढ़ रेड कार्पेट पर उतरीं Ruchi Gurjar…महिलाओं की आजादी के लिए उठाई आवाज
कान, एजेंसी। जहां एक तरफ बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियां लाखों-करोड़ों की ड्रेस पहनकर कान फिल्म फेस्टिवल में शिरकत कर रही हैं। वहीं इसी मंच पर राजस्थान की बेटी ने एक नया इतिहास रच दिया है। आपको बता दें कि अभिनेत्री रुचि गुज्जर ने मॉडर्न ड्रेस न पहनते हुए उन्होंने राजपूती पोशाक पहनकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। इतना ही नहीं घाघरा चोली पहनकर उन्होंने साथ में घुघंट भी किया है। रूचि गुज्जर का यह लुक पूरे सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है। इसी के साथ सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज के साथ रूचि के एक कैप्शन भी लिखा है। उन्होंने इस कैप्शन में बताया है कि लाइमलाइट लूटने के लिए उन्होंने घूघंट नहीं किया बल्कि इसके पीछे मकसद कुछ और ही था। तो चलिए देखते हैं रूचि गुज्जर की ट्रेंडिंग तस्वीर-


रूचि गुज्जर ने इंटरनेशनल मंच पर राजस्थान की परंपरा और संस्कृति की एक नई कहानी लिख दी है। यह पोशाक पहनकर वो हर जगह चर्चा का विषय बन चुकी हैं।

फोटोज के साथ उन्होंने लिखा है- ”मेरा घूंघट चुप्पी नहीं, विरोध है Freedom From Ghughat”

कान फेस्टिवल में पहुंचकर उन्होंने महिलाओं के लिए आवाज उठाई है। इसी के साथ उन्होंने कहा है कि हमें घूंघट से आजादी चाहिए, ये मेरी चुप्पी नहीं है।

अपने इस खास लुक के जरिए रुचि गुज्जर ने सिर्फ फैशन नहीं दिखाया, बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने घूंघट प्रथा के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए महिलाओं की स्वतंत्रता और पहचान की बात की।

आपको बता दें कि रूचि गुज्जर ने जो ये पोशाक पहनी है वो रूपा शर्मा द्वारा डिज़ाइन की गई है। गुलाबी रंग की इस लहंगा-चोली पर सिल्वर जरी वाली कढ़ाई की गई है।

इसी के साथ उन्होंने कोई सोने-चांदी के गहने नहीं बल्कि राजस्थानी गहने, चूड़ियां पहनी हैं। कान फेस्टिवल में उन्होंने घूघंट के साथ एंट्री की लेकिन बाद में इसे हटा दिया।
कैसे फेमस हुई Ruchi Gurjar ?
इसी के साथ आपको बता दें कि रूचि गुज्जर का पिछले साल वाला लुक भी काफी वायरल हुआ था। पिछली बार उन्होंने अपने गले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का हार पहना था। इसी नेकलेस के बाद उनकी लोकप्रियता पहले से ज्यादा बढ़ गई।
विदेश
ईरान की संसद में विवादित प्रस्तावः ट्रंप-नेतन्याहू की हत्या करने वाले को मिलेगा ₹500 करोड़ का ईनाम !
तेहरान, एजेंसी। ईरान (Iran) में इन दिनों एक बेहद विवादित प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद में ऐसा बिल लाने की तैयारी की जा रही है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हत्या करने वाले को लगभग 58 मिलियन डॉलर (रू.500 करोड़) का इनाम देने की बात कही गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह कदम फरवरी में तेहरान पर हुए हमलों के बाद सामने आया है। दावा किया गया कि उन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) मारे गए थे।

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी (Ebrahim Azizi) ने कथित तौर पर कहा कि संसद जल्द इस प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है। एक अन्य सांसद महमूद नबावियन( Mahmoud Nabavian) ने भी ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ “कार्रवाई” की बात कही। इसी बीच ईरान समर्थक कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर समूहों ने भी “Kill Trump” जैसे अभियान चलाने के दावे किए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशें भी जारी हैं। पाकिस्तान और खाड़ी देशों की मध्यस्थता से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इजराइल और अमेरिका पहले ही ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हालांकि अभी तक ईरानी सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। कई विश्लेषक इसे राजनीतिक दबाव और प्रचार रणनीति भी मान रहे हैं।
विदेश
यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने दिखाई परमाणु ताकत ! 64000 सैनिकों संग न्यूक्लियर ड्रिल की शुरू, 200 मिसाइल L व 13 पनडुब्बियां भी शामिल
मॉस्को, एजेंसी। रूस ने मंगलवार से तीन दिन का बड़ा परमाणु सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस दौरान बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल लॉन्च का अभ्यास भी किया जाएगा। इस अभ्यास में करीब 64 हजार सैनिक और 7,800 सैन्य उपकरण शामिल हैं। रूस का कहना है कि यह अभ्यास युद्ध जैसी स्थिति में परमाणु बलों की तैयारी जांचने के लिए किया जा रहा है।

रूस ने बताया कि ड्रिल में 200 से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर, 140 से ज्यादा विमान, 73 युद्धपोत और 13 पनडुब्बियां शामिल हैं। इनमें 8 रणनीतिक परमाणु पनडुब्बियां भी हैं। रूस की रॉकेट फोर्स, नॉर्दर्न फ्लीट, पैसिफिक फ्लीट और लंबी दूरी की एयर फोर्स इस अभ्यास में हिस्सा ले रही हैं। रूस ने यह भी कहा कि Belarus में तैनात सामरिक परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी इस दौरान दी जाएगी।
यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया पहले से रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व तनाव और नाटो के साथ बढ़ते टकराव जैसी स्थितियों से गुजर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि रूस का शक्ति प्रदर्शन भी है। माना जा रहा है कि Vladimir Putin पश्चिमी देशों और NATO को रूस की परमाणु ताकत का संदेश देना चाहते हैं। हालांकि रूस का कहना है कि यह एक नियमित सैन्य अभ्यास है।
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