छत्तीसगढ़
रायपुर : नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – रमेन डेका
पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री
9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधि


रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनती जा रही है। यह केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस‘ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्राप्त होती है।

राज्यपाल रमेन डेका ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन में उक्त बातें कही। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित अन्य संकायों में 7545 स्नातक और 1645 स्नातकोत्तर एवं 5 सुपर स्पेशयलिटी उपाधि प्रदान की गई तथा विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियांे को विभिन्न स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

राज्यपाल ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे राज्यपाल होने के नाते प्रदेश की जनता के हित के बारे में सोचते हैं, उसी प्रकार आपका दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप सभी ने मानवता की सेवा के उद्देश्य से इस क्षेत्र का चयन किया है। कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त यह डिग्री आपके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। जहां भी कार्य करें, मरीज के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और ऐसा कार्य करें जो देश, प्रदेश और समाज में मिसाल बने।
श्री डेका ने कहा कि वर्तमान समय में नेबरहुड डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन की परंपरा थी, जो मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को भलीभांति समझते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी मरीज के लिए गोल्डन ऑवर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता मरीज का जीवन बचा सकती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं। विज्ञान निरंतर आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशु, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रगति और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। श्री साय ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ अधोसंरचना विस्तार, साथ ही बस्तर में नक्सल उन्मूलन के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्याे का भी उल्लेख किया।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करना लोगों की सेवा का बड़ा अवसर और महती जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत जानकारी दी।
अध्यक्ष, राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली एवं दीक्षांत समारोह अभिभाषक डॉ वेदप्रकाश मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में दो दिन में 9 करोड़ का गांजा पकड़ाया:लग्जरी कारों-बसों से हो रही तस्करी, रायगढ़, मनेंद्रगढ़ और सूरजपुर में कार्रवाई
रायगढ़/मनेंद्रगढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में पिछले 2 दिनों में कुल 8 करोड़ 65 लाख रुपए का गांजा पकड़ा गया है। अलग-अलग जिलों में लग्जरी कारों और बसों के जरिए से इसकी तस्करी हो रही थी।
शुक्रवार को 2 अलग-अलग कार्रवाई में कारों से गांजा मिला। रायगढ़ जिले में करीब 300 किलो गांजा मिला, जिसकी कीमत 1 करोड़ 50 लाख रुपए है।

मनेंद्रगढ़ में 6 क्विंटल गांजा पकड़ा गया, जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपए हैं। एक दिन पहले सूरजपुर जिले में पुलिस ने बस से 4.15 करोड़ के गांजे की गठरियां पकड़ी थीं। जिनका वजन 8 क्विंटल 30 किलो था।

रायगढ़ में 2 लग्जरी कारों से करीब 300 किलो गांजा बरामद हुआ।

मनेंद्रगढ़ में 6 क्विंटल गांजा पकड़ाया, जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ रुपए हैं।

सूरजपुर में बस में मिली थी गांजे की गठरियां।
केस 1- रायगढ़ में लग्जरी कारों में मिला गांजा
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (5 जून) सुबह पुलिस को सूचना मिली कि, ओडिशा के सोनपुर इलाके से गांजे की बड़ी खेप 2 सफेद कारों में भरकर मध्यप्रदेश के अनूपपुर ले जाई जा रही है।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने अलग-अलग रास्तों पर नाकेबंदी कर चेकिंग शुरू की। इसी दौरान कटकलिया मार्ग पर एक इनोवा क्रिस्टा और एक मारुति सुजुकी XL-6 को रोककर जांच की।
जांच के दौरान पुलिस ने देखा कि इनोवा क्रिस्टा में दो नंबर प्लेट लगी हुई थीं। गाड़ी में ओडिशा नंबर प्लेट OD-10-H-0050 के नीचे छत्तीसगढ़ नंबर CG-13-BY-6540 की दूसरी नंबर प्लेट लगी थी। इससे पुलिस को शक हुआ, जिसके बाद वाहन में सवार युवकों से पूछताछ शुरू की गई।
कार में मिला 300 किलो गांजा
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के दोनों कारों की तलाशी ली। जांच के दौरान दोनों वाहनों से करीब 300 किलो गांजा मिला। जब्त गांजा की कीमत बाजार में लगभग 1 करोड़ 50 लाख रुपए है।
1 करोड़ 86 लाख की संपत्ति जब्त
पुलिस तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर थाने पहुंची। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे गांजा की यह खेप मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में अपने साथियों तक पहुंचाने जा रहे थे।
इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने उनके पास से 300 किलो गांजा, दो कारें और पांच मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 1 करोड़ 86 लाख रुपए बताई जा रही है।
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b) और 29 के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल मामले की जांच और आगे की कार्रवाई जारी है।

रायगढ़ पुलिस ने कार सवार 3 तस्करों को गिरफ्तार किया।
आरोपियों को किया गिरफ्तार
धर्मेंद्र मौर्य (27) निवासी अनूपपुर (मध्यप्रदेश)
निखिल कश्यप (23) निवासी रामानुजगंज
रिंकु कश्यप (28) निवासी सरगुजा
केस 2 – मनेंद्रगढ़ में 3 करोड़ का गांजा पकड़ाया
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के नागपुर चौकी क्षेत्र में पुलिस ने 2 कारों से करीब 6 क्विंटल गांजा जब्त किया है। जिसकी कीमत करीब 3 करोड़ बताई जा रही है। पुलिस को देखते ही तस्कर गाड़ी छोड़कर भाग गए।
पुलिस गाड़ी नंबरों के आधार पर फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गांजा किस स्थान से लाया जा रहा था और इसे कहां पहुंचाया जाना था।

सूरजपुर में बस में गांजा भरकर तस्करी हो रही थी।
केस 3 – सूरजपुर में बस से पकड़ाया 4 करोड़ का गांजा
सूरजपुर जिले में गुरुवार को पुलिस ने बस से 4.15 करोड़ का गांजा जब्त किया था। 8 क्विंटल 30 किलो गांजा कपड़ों की गठरियों में छिपाकर रखा गया था। बस के जरिए झाड़ू बेचने की आड़ में गांजा कटनी भेजा जा रहा था। बस में महिला और पुरुष सवार थे।
पुलिस ने ड्राइवर समेत 6 महिलाओं को गिरफ्तार किया है। महिलाओं के साथ 4 दुधमुंहे बच्चे भी थे। मामले में 18 से 19 अन्य आरोपी फरार हैं। उनकी तलाश के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें जुटी हुई हैं। मामला जयनगर थाना क्षेत्र का है।
ड्राइवर ने कहा कि किसी बाबू ने बस अंबिकापुर के कालीघाट से बुक की थी। सामान मध्य प्रदेश के कटनी जिले के पिपरिया कला ले जाया जा रहा था। कालीघाट से करीब 20-22 लोग बस में बैठे थे।
कोरबा
हर पौधा बनेगा एक स्मृति, हर वृक्ष रचेगा हरित विरासत की नई कहानीः सीईओ राजेश कुमार सिंह
बालकोनगर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बालको टाउनशिप में ‘स्मृति उद्यान’ का शुभारंभ किया। बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार सिंह ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया। इसके उपरांत 100 से अधिक प्रतिभागियों ने अमलतास के पौधे रोपे। इस अवसर पर बालको के वरिष्ठ अधिकारी, यूनियन के पदाधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में उनके परिवारजन उपस्थित रहे।

‘स्मृति उद्यान’ केवल एक पौधारोपण पहल नहीं है, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक मंच है, जहां प्रत्येक पौधा उन प्रियजनों को समर्पित किया गया जिन्होंने जीवन को प्रेम, मार्गदर्शन और प्रेरणा से समृद्ध किया। वृक्ष केवल प्रकृति का उपहार नहीं हैं, बल्कि जीवन, आशा और निरंतरता के प्रतीक भी हैं। आज लगाया गया एक पौधा आने वाले वर्षों में छाया, स्वच्छ वायु और पर्यावरण संरक्षण का माध्यम बनेगा।

बालको के सीईओ एवं निदेशक राजेश कुमार सिंह ने कहा, “स्मृति उद्यान हमारे प्रियजनों की यादों को प्रकृति के माध्यम से सहेजने का एक अनूठा प्रयास है। यहाँ लगाया गया प्रत्येक पौधा अपने साथ एक व्यक्तिगत कहानी, एक भावना और एक स्मृति लेकर बढ़ेगा। आज रोपे गए अमलतास के पौधे स्मरण और प्रकृति के बीच एक स्थायी संबंध का प्रतीक हैं। यह पहल केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि जैव विविधता के संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरित एवं सस्टेनेबल भविष्य के निर्माण की दिशा में हमारा दीर्घकालिक निवेश है।”
स्मृति उद्यान विश्व पर्यावरण दिवस से प्रारंभ हुआ एक दीर्घकालिक अभियान है, जो आने वाले वर्षों तक लोगों की भावनाओं और प्रकृति को जोड़ता रहेगा। भविष्य में भी कर्मचारी, उनके परिवारजन एवं समुदाय के सदस्य अपने जीवन के विशेष अवसरों जैसे जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ, किसी उपलब्धि का उत्सव अथवा किसी प्रियजन की स्मृति पर यहाँ आकर पौधारोपण कर सकेंगे। आने वाले वर्षों में यह उद्यान कई कहानियों, स्मृतियों और वृक्षों का जीवंत संग्रह बन जाएगा।
स्मृति उद्यान में औषधीय गुणों से भरपूर अमलतास के पौधे लगाए गए हैं, जो आने वाले वर्षों में अपने आकर्षक सुनहरे पीले पुष्पों से टाउनशिप की सुंदरता को और बढ़ाएंगे। यह न केवल प्राकृतिक सौंदर्य को बढ़ाता है, बल्कि मधुमक्खियों एवं तितलियों जैसे परागणकर्ताओं को आकर्षित कर जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह वृक्ष पर्यावरणीय स्थिरता एवं जलवायु अनुकूलन के लिए भी उपयोगी माना जाता है।
कार्यक्रम के दौरान पौधारोपण में भाग लेने वाले सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र तथा उनके घरों एवं आसपास लगाए गए पौधों की देखभाल को प्रोत्साहित करने के लिए जैविक खाद भी वितरित की गई।
स्मृति उद्यान के अलावा बीते तीन महीनों में बालको द्वारा टाउनशिप के विभिन्न हरित क्षेत्रों में लगभग 4,000 पौधों का रोपण किया गया है, जिनमें 2,000 बोगनवेलिया एवं 2,000 पेंसिलवेनिया के पौधे शामिल हैं। इस पहल ने टाउनशिप की हरियाली और सौंदर्य को और समृद्ध किया है। टाउनशिप में पहले से ही फॉरेस्ट वॉकवे, नेहरू गार्डन तथा अन्य प्रमुख हरित स्थल मौजूद हैं। बालको का यह सतत प्रयास पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता को एक साथ जोड़ते हुए एक हरित एवं टिकाऊ भविष्य के निर्माण की दिशा’ में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के उद्योगों पर पर्यावरण विभाग सख्त:94 को नोटिस जारी, 3.03 करोड़ का वसूला जुर्माना; रायपुर की हवा में 4% सुधार
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में प्रदूषण फैलाने वाले इंडस्ट्रीज पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्ती बढ़ा दी है। पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले इंडस्ट्रीज के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।

जनवरी 2025 से मई 2026 के बीच रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 94 इंडस्ट्रीज को नोटिस जारी किए हैं, जबकि 82 इंडस्ट्रीज के उत्पादन बंद करने और उनके बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा 3.03 करोड़ रुपए का जुर्माना भी वसूला गया है। वहीं, राजधानी की हवा में लगभग 4 प्रतिशत सुधार दर्ज किया गया है।

पाल्यूशन फैलाने वाले उद्योगों पर पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने कार्रवाई की है।
इन जिलों में नियमित निगरानी
पर्यावरण संरक्षण मंडल के मुताबिक रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, महासमुंद और गरियाबंद जिलों के उद्योगों की लगातार जांच की जा रही है। जांच के दौरान जिन उद्योगों में हवा और पानी को प्रदूषित करने से जुड़े नियमों का उल्लंघन मिला, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।
यह कार्रवाई वायु प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1981 और जल प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम 1974 के तहत की गई।

रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने 94 इंडस्ट्रीज को नोटिस जारी किए हैं।
इंडस्ट्रीज पर करोड़ों का जुर्माना
जांच में 96 इंडस्ट्रीज पर कुल 2 करोड़ 40 लाख 65 हजार रुपए से ज्यादा का पर्यावरण जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा 136 उद्योगों और संस्थानों पर, जो बिना ढंके कच्चा माल, उत्पाद और कचरा ले जा रहे थे, उन पर 51 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया।
फ्लाई ऐश के गलत तरीके से परिवहन और डंपिंग के मामले में 2 उद्योगों पर 12 लाख रुपए की अतिरिक्त पेनल्टी भी लगाई गई। इस तरह कुल जुर्माना 3 करोड़ 3 लाख रुपए से अधिक पहुंच गया है।

प्रदूषण फैलाने वाले इंडस्ट्रीज पर पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सख्ती बढ़ा दी है।
सिंगल-यूज प्लास्टिक पर भी कार्रवाई
पर्यावरण मंडल ने प्रतिबंधित सिंगल-यूज प्लास्टिक के निर्माण और इस्तेमाल के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान एक उद्योग का उत्पादन बंद कराया गया और उस पर 87 हजार 500 रुपए का जुर्माना लगाया गया।
दूसरे उद्योग पर 6 लाख 25 हजार रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाई गई। इसके अलावा दो अन्य इकाइयों का भी उत्पादन बंद करने की कार्रवाई की गई है।
रायपुर की हवा हुई बेहतर
पर्यावरण विभाग की सख्ती का असर रायपुर की हवा पर भी दिखा है। साल 2024 में रायपुर का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 65.38 था, जो 2025 में घटकर 62.86 हो गया। यानी शहर की हवा में करीब 4 प्रतिशत सुधार हुआ है। यह स्तर संतोषजनक श्रेणी में आता है।
पर्यावरण संरक्षण मंडल ने साफ किया है कि पर्यावरण नियमों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। आगे भी नियम तोड़ने वाले उद्योगों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
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