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होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बावजूद भारत का कच्चा तेल आयात मजबूत

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत के कच्चे तेल आयात पर होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया तनाव का असर सीमित रहने की संभावना है। हालांकि, यदि क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है तो एलपीजी और एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हो सकती है तथा जहाजरानी लागत बढ़ सकती है। केप्लर के एक विश्लेषक ने यह बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संघर्षविराम संबंधी टिप्पणियों के बाद क्षेत्र में हुई ताजा झड़पों ने दुनिया के सबसे व्यस्त ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। 

केप्लर के विश्लेषक सुमित रितोलिया ने कहा कि भारत की कच्चे तेल आपूर्ति पर इसका असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय तेल शोधन कंपनियों ने आयात स्रोतों में विविधता लाई है। उन्होंने कहा, “हालिया तनाव बढ़ने से पहले भी होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये कच्चे तेल का प्रवाह पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ था। हालांकि, भारत के लिए पिछले 100 दिन में स्थिति काफी हद तक सामान्य रही है और तेल शोधन कंपनियों ने विविध आयात स्रोतों के जरिए आपूर्ति का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया है।” 

रितोलिया ने कहा कि भारत के कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी काफी अधिक बनी हुई है। वहीं, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से होने वाली आपूर्ति से ऊर्जा सुरक्षा को अतिरिक्त मजबूती मिलती है। इसके अलावा पश्चिम अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से मिलने वाले कच्चे तेल ने भी आयात स्रोतों में विविधता लाने में मदद की है। उन्होंने कहा कि जून में भारत का कच्चे तेल आयात बढ़कर रिकॉर्ड 49.3 लाख बैरल प्रतिदिन (बीपीडी) पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास आपूर्ति बाधित होने की आशंका से तेल शोधन कंपनियों ने अधिक खरीदारी की, जिससे आयात में वृद्धि हुई। 

रूस से भारत का कच्चे तेल आयात बढ़कर करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, जो जून में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का आधे से अधिक है। इससे रूस, भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। उन्होंने कहा कि संभावित आपूर्ति बाधाओं के बावजूद ईरान से कच्चे तेल की आपूर्ति भारतीय तेल शोधन कंपनियों के लिए निकट भविष्य में बड़ा स्रोत बनने की संभावना नहीं है। अमेरिकी प्रतिबंध नीति को लेकर अनिश्चितता, अनुपालन जोखिम और व्यावसायिक कारण इसके पीछे प्रमुख वजह हैं। 

रितोलिया ने कहा कि बाजार को अब एलपीजी (रसोई गैस) और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) आपूर्ति पर अधिक ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इनके लिए निकट भविष्य में वैकल्पिक स्रोत कम हैं और खाड़ी क्षेत्र से आपूर्ति तथा जहाजरानी में बाधाओं का इन पर अधिक असर पड़ सकता है।

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खरगे का Modi सरकार पर हमला: Galwan के बाद China का भारतीय अर्थव्यवस्था पर कब्जा, आत्मनिर्भर भारत फेल

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि गलवान घाटी की घटना के बाद केंद्र सरकार ने चीन के प्रति नरम रुख अपनाया, जिसके कारण कई महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की चीन पर निर्भरता बढ़ी है तथा राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा है।

 खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट कर यह भी दावा किया कि वर्ष 2020 में हुई गलवान की घटना के बाद वर्ष 2025-26 तक चीन से भारत का आयात 101.81 प्रतिशत बढ़ गया और दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा बढ़कर 112.1 अरब डॉलर तक पहुंच गया। उन्होंने आरोप लगाया, ”छह वर्ष पहले गलवान में 20 भारतीय सैनिकों के सर्वोच्च बलिदान के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन को “क्लीन चिट” दे दी थी।

भारतीय सैनिकों ने सर्वोच्च बलिदान दिया, लेकिन केंद्र सरकार ने भारत के हितों के समक्ष चीन के प्रति नरम रुख अपनाया।” खरगे ने कहा कि भारत के एंटीबायोटिक आयात का 86 प्रतिशत हिस्सा चीन से आता है। उनके अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्षेत्र में भारत के 66 प्रतिशत पुर्जों का आयात चीन से होता है, जबकि भारतीय ईवी में इस्तेमाल होने वाली लगभग 75 प्रतिशत लिथियम-आयन बैटरियां आयातित हैं और इनमें अधिकतर चीन से आती हैं। 

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत की निर्भरता चीन पर बनी हुई है। खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने अब चार चीनी कंपनियों को सरकारी बिजली परियोजनाओं के लिए निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति देकर चीन के लिए और अवसर खोल दिए हैं। 

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हटाए गए या खुद हटे? राम मंदिर ट्रस्ट से बाहर होते ही गोपाल राव का बड़ा दावा- ‘सोना-चांदी सब सुरक्षित, अफवाहों पर न दें ध्यान’

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अयोध्या। गोपाल नागरकट्टे उर्फ गोपाल राव ने दावा किया कि उन्हें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से नहीं हटाया गया बल्कि कुछ समय के लिए बैठकों से दूर रहने के लिए कहा गया था। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावा चोरी से संबंधित आरोपों को छोड़कर उनके खिलाफ सभी आरोप झूठे थे। मंदिर ट्रस्ट की हालिया बैठक के बाद पहली बार पत्रकारों से बात करते हुए राव ने कहा कि ट्रस्ट में कुछ आमंत्रित सदस्य हैं। इस विवाद के शुरू होने के बाद, दो लोगों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए।

गोपाल राव ने दिया सफाई में बड़ा बयान
उन्होंने कहा कि तब सभी ने फैसला किया कि मुझे कुछ दिन के लिए ट्रस्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं होना चाहिए। मैं नई व्यवस्था में सहयोग करूंगा। नई टीम जब कार्यभार संभाल लेगी तो मैं अलग हो जाऊंगा। उन्होंने कहा कि मंदिर की व्यवस्थाएं ठीक से काम कर रही हैं और लोग अफवाहों पर ध्यान न दें। राव ने दावा किया कि मंदिर का सोना, चांदी और दान सुरक्षित है और जो कोई भी इसे सत्यापित करना चाहता है वह ऐसा कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कथित चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई पुलिस की जिम्मेदारी है, ट्रस्ट की नहीं।

गोपाल राव ने खाली किया मंदिर परिसर का आवास
राव के बयान के एक दिन पहले ट्रस्ट ने कहा था कि पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा सोमवार को ट्रस्ट की बैठक में उनके इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद सदस्य नहीं रहे। कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने यह भी कहा था कि ट्रस्ट ने राव को प्रशासक और विशेष रूप से आमंत्रित सदस्यों की सूची से हटाने का फैसला किया है। इस बीच, मंदिर के सूत्रों ने कहा कि राव ने बुधवार को मंदिर परिसर में अपना आवास खाली कर दिया और कारसेवक पुरम में स्थानांतरित हो गए।

40 दिनों में सामने आए चोरी के 70 संदिग्ध मामले
सूत्रों ने कहा कि राव ने मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए उन्हें जारी किया गया वाहन पास भी सरेंडर कर दिया और बुधवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि से मुलाकात की। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल (SIT) अलग से मामले की जांच कर रही है। एसआईटी के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने 40 दिन की अवधि में चोरी के लगभग 70 संदिग्ध मामलों की पहचान की है और आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ मंदिर की दान-गिनती प्रणाली में कथित प्रक्रियात्मक व सुरक्षा खामियों की जांच की जा रही है।

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‘ट्रस्ट का असली LOGO, फर्जी रसीदें!’ राम मंदिर में दान चोरी का सबसे बड़ा पर्दाफाश, ऐसे ठगे जा रहे थे श्रद्धालु

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अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आरोपियों ने श्रद्धालुओं से धन एकत्र करने के लिए फर्जी रसीदों का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बुधवार को 3 आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया, जब एक स्थानीय अदालत ने उनकी हिरासत को मंजूरी दी।

श्रद्धालुओं की गाढ़ी कमाई पर ऐसे डाका डालते थे ठग
सूत्रों ने बताया कि पूछताछ के दौरान पुलिस ने एक पुरानी फर्जी रसीद बुक बरामद की, जो ट्रस्ट की पुरानी दान रसीदों जैसी दिखती है। सूत्रों के अनुसार, तीनों आरोपियों ने जांचकर्ताओं को बताया कि उन्होंने और एक अन्य आरोपी टिन्नू यादव ने शुरुआत में मंदिर में दान देने के इच्छुक श्रद्धालुओं से धन एकत्र करने के लिए इन फर्जी रसीदों का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने बताया कि रसीदें असली रसीदों से काफी मिलती-जुलती थीं और उन पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का लोगो भी था, जिससे श्रद्धालुओं के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल था।

सर्राफा व्यापारी के यहां भी रेड
आरोप है कि ट्रस्ट द्वारा ऑनलाइन रसीद प्रणाली शुरू किए जाने के बाद उन्होंने इस रसीद बुक का इस्तेमाल बंद कर दिया। एक सप्ताह पहले पुलिस ने अयोध्या के एक योग केंद्र से रामराज्य कोष नाम का एक दान पात्र जब्त किया था, जिस पर भुगतान के लिए सक्रिय क्यूआर कोड लगा हुआ था। आरोप है कि मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला पिछले 10 वर्ष से उसी योग केंद्र में रह रहा था। जांच के तहत पुलिस तीनों आरोपियों को 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के जौरा क्षेत्र में भी ले गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि वहां चोरी की गई नकदी की गिनती करके उसका बंटवारा किया जाता था। पुलिस ने अयोध्या के मिल्कीपुर क्षेत्र में छापेमारी करते हुए अनुकल्प मिश्रा के रिश्तेदारों से जुड़े परिसरों, एक सर्राफा व्यापारी और इनायतनगर के एक भवन निर्माण सामग्री कारोबारी के यहां तलाशी ली।

40 दिनों में 70 वारदातों की जांच शुरू
सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि आरोपियों द्वारा कथित रूप से खरीदी गईं संपत्तियों या सामान के भुगतान नकद किए गए थे या डिजिटल माध्यम से। इसके अलावा, विशेष जांच दल (SIT) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बड़े खर्चों से जुड़े बिलों और वाउचरों की भी जांच शुरू कर दी है। कथित चढ़ावा चोरी मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एसआईटी की प्रारंभिक जांच के दौरान 40 दिन की अवधि में चोरी की करीब 70 संदिग्ध घटनाओं के बारे में पता चला है। एसआईटी आरोपियों की भूमिका के साथ-साथ मंदिर की दान राशि गिनने की व्यवस्था में कथित प्रक्रियागत और सुरक्षा संबंधी गड़बड़ियों की भी जांच कर रही है।

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