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रेमंड रियल्टी ने मुंबई में आवासीय परियोजना के विकास के लिए जमीन मालिक के साथ किया समझौता

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नई दिल्ली, एजेंसी। रेमंड ग्रुप की इकाई रेमंड रियल्टी लि. ने मुंबई में एक लक्जरी आवासीय परियोजना विकसित करने के लिए जमीन के मालिक के साथ भागीदारी की है। इस परियोजना से लगभग 8,500 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। कंपनी ने बुधवार को शेयर बाजार को दी सूचना में बताया कि उसने मुंबई के परेल इलाके में एक रिहायशी परियोजना बनाने के लिए संयुक्त विकास समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। रेमंड रियल्टी ने कहा कि इस परियोजना से लगभग 8,500 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है। 

कंपनी ने उस जमीन के मालिक का नाम नहीं बताया जिसके साथ उसने समझौता किया है। मुंबई शहर में कंपनी का यह 8वीं संयुक्त विकास परियोजना है। रेमंड ग्रुप के चेयरमैन गौतम हरि सिंघानिया ने कहा, ”परेल हमेशा से मुंबई के विकास का केंद्र रहा है और हमें इस रणनीतक संयुक्त विकास के जरिये रेमंड रियल्टी के बढ़ते कारोबार में एक और परियोजना जोड़ने पर गर्व है।” उन्होंने कहा कि कंपनी का विस्तार ‘एसेट-लाइट’ और ‘भागीदारी आधारित’ रुख से हो रहा है।  

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भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट का डेटा लीक:दावा- हैकर्स ने कंट्रोल रूम का लेआउट, सप्लायर्स की लिस्ट डार्क वेब पर डाली

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चेन्नई, एजेंसी। भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम से जुड़े हजारों दस्तावेज लीक हो गए हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, हैकर्स ग्रुप ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने डार्क वेब पर इन दस्तावेजों को अपलोड करने का दावा किया है।

इनमें पॉवर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की लिस्ट, कंट्रोल रूम और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक किए गए। सर्वर मई में हैक हुआ था, जून में दस्तावेज लीक का दावा किया गया। इसकी जानकारी अब सामने आई है।

तमिलनाडु के कुडनकुलम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने माना है कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा का सर्वर हैक किया गया। इसकी जानकारी सरकार को दे दी गई है।

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट तमिलनाडु में तिरुनेलवेली जिले के कुडनकुलम गांव के पास है।

कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट तमिलनाडु में तिरुनेलवेली जिले के कुडनकुलम गांव के पास है।

डेटा लीक कैसे हुआ…

  1. रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की यूनिट-3 और यूनिट-4 प्रोजेक्ट का ठेकेदार है।
  2. कंपनी का कुछ डेटा थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा के सर्वर पर मौजूद था।
  3. योट्टा ने सर्वर पर 29 मई 2026 को संदिग्ध गतिविधि देखी। दावा किया कि साइबर अटैक रोक दिया।
  4. जून के अंत में रिलायंस ने योट्टा को बताया कि वर्ल्ड लीक्स नामक हैकर समूह डेटा चोरी का दावा कर रहा है।
  5. डार्क वेब पर करीब 8.58 लाख फाइलों में से लगभग 19 हजार संवेदनशील दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया गया।
  6. लीक दस्तावेजों में कथित तौर पर ब्लूप्रिंट, सप्लायरों की जानकारी, निरीक्षण रिकॉर्ड, बैठकों के दस्तावेज की फाइलें शामिल हैं।

न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) रिलायंस के साथ मिलकर मामले की समीक्षा कर रहा है। भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम भी इस डेटा लीक की जांच कर रही है।

डेटा लीक कितना खतरनाक

परमाणु सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डार्क वेब पर मौजूद ये दस्तावेज अगर असली हैं, तो इनके जरिए कोई हमलावर न्यूक्लियर पावर प्लांट के सपोर्ट सिस्टम, सप्लाई चेन और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझ सकता है, जिससे सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है।

डार्क वेब क्या है, जहां डेटा अपलोड किया गया

  • डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है, जिसे सामान्य ब्राउजर (जैसे- क्रोम, एज या सफारी) से नहीं खोला जा सकता। इसे एक्सेस करने के लिए टोर ब्राउजर जैसे विशेष ब्राउजर की जरूरत होती है।
  • यह इंटरनेट का छिपा हुआ हिस्सा है। यहां वेबसाइटें और यूजर अपनी पहचान छिपाकर काम कर सकते हैं। हैक किए गए डेटा, रैनसमवेयर, अवैध खरीद-बिक्री और साइबर अपराध के काम यहां होते हैं।
  • इसलिए जब कोई हैकर डेटा चुराता है, तो वह अक्सर उसे डार्क वेब पर बेचने या सार्वजनिक करने की कोशिश करता है।

प्लांट पर 2019 में भी हो चुका साइबर हमला

साल 2019 में भी कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस समय NPCIL ने कहा था कि संयंत्र की परिचालन प्रणाली प्रभावित नहीं हुई थी।

न्यूक्लियर पावर प्लांट कैसे काम करता है?

1. यूरेनियम से ऊर्जा बनती है

रिएक्टर में यूरेनियम ईंधन का इस्तेमाल होता है। यूरेनियम के परमाणु टूटने (न्यूक्लियर फिशन) से बहुत अधिक गर्मी पैदा होती है।

2. पानी गर्म होकर भाप बनता है

यह गर्मी पानी को गर्म करती है। पानी भाप में बदल जाता है।

3. भाप टर्बाइन घुमाती है

तेज दबाव वाली भाप टर्बाइन को घुमाती है।

4. टर्बाइन से बिजली बनती है

टर्बाइन से जुड़ा जनरेटर घूमता है और बिजली पैदा करता है।

5. भाप फिर पानी बन जाती है

इस्तेमाल के बाद भाप को ठंडा करके दोबारा पानी बनाया जाता है। यही पानी फिर से रिएक्टर में इस्तेमाल होता है।

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डॉलर के आगे फिर फिसला रुपया, गिरावट के पीछे क्या है वजह?

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मुंबई, एजेंसी। रुपया बुधवार को 16 पैसे की गिरावट के साथ 96.32 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से घरेलू मुद्रा पर दबाव है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि घरेलू शेयर बाजारों में सकारात्मक रुख और डॉलर के कमजोर होने से रुपये में गिरावट सीमित रही। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 96.12 प्रति डॉलर पर खुला। 

कारोबार के दौरान यह 96.04 से 96.32 प्रति डॉलर के दायरे में रहा। अंत में यह 96.32 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर रहा जो पिछले बंद भाव की तुलना में 16 पैसे की गिरावट है। रुपया मंगलवार को 48 पैसे टूटकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.16 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। 

फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के कोष प्रमुख एवं कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा, ”कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत की आयात लागत और अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ाकर रुपए में मजबूती की गुंजाइश सीमित कर रही हैं। विकल्प बाजार की कीमतों से अब भी रुपए को लेकर कमजोर धारणा झलक रही है। इससे संकेत मिलता है कि कारोबारी भू-राजनीतिक जोखिमों और तेल कीमतों में और वृद्धि होने पर रुपए पर फिर दबाव बढ़ने की आशंका को लेकर चिंतित हैं।” उन्होंने कहा कि निकट अवधि में रुपया 95.80 से 96.50 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है। आने वाले दिनों में विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ने पर यह 95 प्रति डॉलर के स्तर की ओर मजबूत हो सकता है। 

इस बीच, दुनिया की छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.14 प्रतिशत की गिरावट के साथ 100.78 पर रहा। घरेलू शेयर बाजारों में सेंसेक्स 130.49 अंक या 0.17 प्रतिशत चढ़कर 77,185.43 अंक पर जबकि निफ्टी 26.45 अंक या 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,078.50 अंक पर रहा। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड का भाव 0.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 85.13 डॉलर प्रति बैरल पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) मंगलवार को शुद्ध बिकवाल रहे थे और उन्होंने 739.69 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।  

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अब बिना LPG कनेक्शन के भी मिलेगा सिलेंडर, इंस्टामार्ट और HPCL ने शुरू की नई सुविधा, जानिए नियम

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मुंबई, एजेंसी। अगर आपके घर में एलपीजी गैस कनेक्शन नहीं है, तो अब आपको गैस सिलेंडर के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत नहीं होगी। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के साथ साझेदारी कर ऐसी सुविधा शुरू की है, जिसमें ग्राहक बिना नियमित एलपीजी कनेक्शन के भी सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे।

इस साझेदारी के तहत देश में पहली बार किसी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर एलपीजी सिलेंडर की ऑन-डिमांड डिलीवरी सेवा शुरू की गई है। शुरुआत में यह सुविधा बेंगलुरु में उपलब्ध कराई गई है।

कैसे कर सकेंगे सिलेंडर बुक?

इंस्टामार्ट से एलपीजी सिलेंडर ऑर्डर करने के लिए ग्राहकों को पहले केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। पहचान सत्यापन के बाद ही ऑर्डर को मंजूरी दी जाएगी। डिलीवरी के समय सुरक्षा नियमों के तहत जरूरी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। रिफिल के लिए ग्राहक को खाली सिलेंडर वापस करना होगा।

इंस्टामार्ट पर किए गए सभी ऑर्डर एचपीसीएल के अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क के जरिए पूरे किए जाएंगे। प्रशिक्षित डिलीवरी कर्मचारी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए सिलेंडर पहुंचाएंगे।

कौन-कौन से सिलेंडर मिलेंगे?

इस सुविधा के तहत ग्राहक एचपीसीएल का 10 किलोग्राम HP Navya कंपोजिट एलपीजी सिलेंडर और 5 किलोग्राम वाला मेटल एलपीजी सिलेंडर ऑर्डर कर सकेंगे। यह सुविधा खासतौर पर छात्रों, किराए के घरों में रहने वाले लोगों, छोटे परिवारों और कामकाजी लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है।

सुरक्षा के लिए नए फीचर्स

HPCL के अनुसार, HP Navya कंपोजिट सिलेंडर पारंपरिक स्टील सिलेंडर की तुलना में हल्का और जंग से सुरक्षित है। इसकी पारदर्शी बॉडी की वजह से ग्राहक सिलेंडर में बची गैस का स्तर भी देख सकेंगे। कंपनी का कहना है कि इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प है, जिन्हें कम मात्रा में गैस की जरूरत होती है या जो अतिरिक्त सिलेंडर रखना चाहते हैं।

क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए एलपीजी डिलीवरी की यह पहल गैस सिलेंडर बुकिंग के पारंपरिक तरीके में बदलाव ला सकती है। 

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