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छत्तीसगढ़

रायपुर : रथयात्रा हमारी आस्था, संस्कृति और लोक परंपरा का जीवंत उत्सव: वित्त मंत्री ओपी चौधरी

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रायपुर। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने भगवान श्री जगन्नाथ की पावन रथयात्रा के अवसर पर प्रदेशवासियों एवं समस्त देशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि  सभी देशवासियों को रथयात्रा की बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। रथयात्रा हमारी भारतीय संस्कृति, आस्था और लोक परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है। भगवान श्री जगन्नाथ का जीवन समरसता, सेवा, करुणा और लोककल्याण का संदेश देता है, जो हमारे सामाजिक एवं सार्वजनिक जीवन के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहा है।
श्री चौधरी ने अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि उनके गांव में भगवान श्री जगन्नाथ का मंदिर है और बचपन से ही वे गांववासियों के साथ रथयात्रा में सहभागी होते आए हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, सेवा, सहयोग और सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है।
वित्त मंत्री ने कहा कि भगवान श्री जगन्नाथ की रथयात्रा हमें समानता, सद्भाव और जनसेवा का संदेश देती है। उन्होंने कामना की कि भगवान श्री जगन्नाथ की कृपा से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का संचार हो तथा प्रदेश और देश निरंतर विकास एवं जनकल्याण के पथ पर अग्रसर रहे।

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छत्तीसगढ़

सिंहदेव बोले- मंदिरों से हटाया जाए RSS का कब्जा:कहा-सुप्रीम कोर्ट एक्शन ले, जमीन घोटाले से लेकर अब तक जांच की मांग की

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सरगुजा, एजेंसी। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चंदे में कथित गड़बड़ी देश की आस्थावान जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मांग की कि राम मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों की प्रबंधन समितियों से आरएसएस से जुड़े लोगों को तत्काल हटाया जाए।

सिंहदेव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान ले, क्योंकि प्रबंधन समिति का गठन अदालत के आदेश से हुआ था। उन्होंने जमीन खरीद से लेकर चंदे में कथित अनियमितताओं तक की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की।

कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए टीएस सिंहदेव ने कहा कि पिछले तीन-चार दशकों से राम मंदिर को लेकर एक विशेष राजनीतिक अभियान चलाया गया। उस समय संसद में भाजपा की केवल दो सीटें थीं।

बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अदालत के फैसले में राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की अनुमति देते हुए एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति गठित करने का निर्देश दिया गया, ताकि मंदिर निर्माण और उसके प्रबंधन का कार्य निष्पक्ष रूप से किया जा सके।

पूर्व डिप्टी सीएम बोले- संत, पुजारियों को बाहर कर RSS ने कब्जा किया

टीएस सिंहदेव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद राम मंदिर निर्माण के लिए एक स्वतंत्र प्रबंधन समिति बनाई गई। उनका आरोप है कि पहले रामलला की सेवा और देखरेख करने वाले संतों और पुजारियों को समिति में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई, जबकि प्रबंधन में आरएसएस से जुड़े लोगों को शामिल किया गया। उन्होंने कहा कि आरएसएस कोई संवैधानिक संस्था नहीं, बल्कि व्यक्तियों का एक समूह है।

सिंहदेव ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर से चंदा जुटाया गया, लेकिन चंदे की कुल राशि को लेकर भाजपा और आरएसएस से जवाब मांगे जाने पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 में सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर परिसर के विस्तार और जमीन खरीद में कथित करोड़ों रुपए के घोटाले का मुद्दा उठाया था, जिसे राजनीतिक बताकर खारिज कर दिया गया। राम मंदिर निर्माण के नाम पर जुटाए गए चंदे में गड़बड़ी हुई।

आस्था के साथ खिलवाड़ का आरोप

टीएस सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, चंपत राय और ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य मौजूद थे।

उन्होंने कहा कि देश के शंकराचार्यों ने मंदिर का शिखर और निर्माण कार्य पूरा नहीं होने का हवाला देते हुए उस समय प्राण प्रतिष्ठा नहीं करने की बात कही थी, लेकिन चुनावी लाभ के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया।

सिंहदेव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में गड़बड़ी कर लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया। उन्होंने दावा किया कि 40 दिनों में 70 बार वित्तीय अनियमितताएं हुईं और लाखों रुपये की हेराफेरी सामने आई।

उनके अनुसार, प्रबंधन समिति से जुड़े चंपत राय सहित कुछ पदाधिकारियों ने जवाबदेही स्वीकार करते हुए इस्तीफा दिया, लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई।

राम मंदिर ट्रस्ट की जांच और प्रबंधन में बदलाव की मांग

टीएस सिंहदेव ने कहा कि राम मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। उनका आरोप है कि राम मंदिर सहित कई प्रमुख मंदिरों की प्रबंधन समितियों में आरएसएस से जुड़े लोगों का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक संगठन से जुड़े व्यक्ति को ऐसे धार्मिक न्यासों की प्रबंधन समिति का सदस्य नहीं होना चाहिए।

सिंहदेव ने कहा कि यदि उनकी व्यक्तिगत छवि भी अच्छी मानी जाती है, तब भी उन्हें ऐसी समिति में शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, प्रबंधन समिति में चारों शंकराचार्यों के प्रतिनिधियों और बेदाग छवि वाले प्रतिष्ठित लोगों को स्थान मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक जन आंदोलन होना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े व्यक्ति को धार्मिक न्यासों की प्रबंधन समिति में जगह नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस पूरी तरह राजनीतिक संगठन की तरह कार्य कर रही है।

सिंहदेव ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले का स्वतः संज्ञान लेकर राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए चंदे और कथित वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश की निगरानी में कराए। उन्होंने कहा कि चूंकि प्रबंधन समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी थी, इसलिए जांच की जिम्मेदारी भी सुप्रीम कोर्ट को उठानी चाहिए।

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छत्तीसगढ़

सट्टे की कमाई से खरीदी 1,175 करोड़ की अमेरिकी कंपनी:विकास गर्ग ने दुबई-मॉरीशस के रास्ते घुमाया ब्लैक-मनी, 10 दिन की रिमांड पर

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रायपुर, एजेंसी। महादेव सट्टा ऐप और स्काई एक्सचेंज बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रायपुर की PMLA स्पेशल कोर्ट ने बुधवार को EBIX के चेयरमैन विकास गर्ग को 24 जुलाई तक 10 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया। ED का आरोप है कि सट्टे से कमाए गए पैसों को पहले शेल (फर्जी) कंपनियों और विदेशी निवेश के जरिए खपाया गया।

जांच एजेंसी के मुताबिक, इसके लिए Foreign Portfolio Investment (FPI) और Foreign Direct Investment (FDI) जैसे निवेश माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। बाद में इसी रकम का निवेश लिस्टेड कंपनियों में किया गया और करीब 1,175 करोड़ रुपए में अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी EBIX Inc. की हिस्सेदारी खरीदी गई। ED का दावा है कि अवैध धन को दुबई, मॉरीशस और अमेरिका के रास्ते घुमाकर मनी लॉन्ड्रिंग की गई।

दिल्ली से गिरफ्तार कर रायपुर लाया गया

ईडी की रायपुर जोनल ऑफिस की टीम ने मंगलवार को विकास गर्ग को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसके बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट से 24 घंटे की ट्रांजिट रिमांड लेकर उसे रायपुर लाया गया। बुधवार को विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश करने के बाद अदालत ने 24 जुलाई तक ईडी रिमांड मंजूर कर दी।

पहले सट्टे और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच, फिर सामने आया नया नेटवर्क

प्रवर्तन निदेशालय के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि, शुरुआती जांच महादेव ऐप के जरिए सट्टे से हुई कमाई और उसकी मनी लॉन्ड्रिंग तक सीमित थी। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि इस रकम को अलग-अलग जगह निवेश किया गया।

इसी दौरान स्काई एक्सचेंज नाम के नेटवर्क की जानकारी मिली, जिसके जरिए महादेव ऐप का पैसा कई निवेश माध्यमों में लगाया जा रहा था। पान्डेय ने बताया कि जांच में सामने आया कि विकास गर्ग ने हरीशंकर टिबरेवाल से जुड़े नेटवर्क के माध्यम से महादेव ऐप से कमाए गए पैसे को भारतीय अर्थव्यवस्था में शामिल किया।

कंपनी के वेबसाइट ने निकाली गई इमेज ।

कंपनी के वेबसाइट ने निकाली गई इमेज ।

दुबई, मॉरीशस, अमेरिका और ब्रिटेन में बनाई कंपनियां

ED एडवोकेट सौरभ पान्डेय ने बताया कि अवैध धन को FDI, पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट, सिक्योर इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टमेंट और बॉन्ड्स के जरिए खपाया गया। इसके लिए विकास गर्ग ने दुबई, मॉरीशस, अमेरिका और ब्रिटेन में कई कंपनियां रजिस्टर्ड कराईं और उन्हीं के माध्यम से निवेश किया।

हरीशंकर टिंबरेवाल का करीबी बताया

ईडी के अनुसार, विकास गर्ग को स्काई एक्सचेंज के कथित संचालक हरीशंकर टिंबरेवाल का करीबी सहयोगी बताया गया है। ईडी की पूछताछ के दौरान विकास गर्ग ने स्वीकार किया कि टिंबरेवाल के नियंत्रण वाली विदेशी कंपनियों ने करीब 765.77 करोड़ रुपए गर्ग से जुड़ी कंपनियों में ट्रांसफर किए थे।

यह पैसा कई विदेशी कंपनियों के जरिए घुमाकर भारत लाया गया और बाद में वैध कारोबारी निवेश के रूप में दिखाया गया।

विकास गर्ग 10 दिन की ईडी रिमांड पर ।

विकास गर्ग 10 दिन की ईडी रिमांड पर ।

EBIX खरीदने में लगाया गया सट्टे का पैसा

ईडी का आरोप है कि, इस पूरी मनी लॉन्ड्रिंग का सबसे बड़ा इस्तेमाल अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी EBIX Inc. को खरीदने में किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, विकास गर्ग की कंपनी Eraaya Lifespaces Ltd. ने अमेरिका की दिवालिया अदालत (Bankruptcy Court) की प्रक्रिया के जरिए अगस्त 2024 में करीब 1,175 करोड़ रुपए में EBIX Inc. की 97.5% हिस्सेदारी खरीदी।

EBIX खरीदने के लिए पैसा कहां से आया?

ईडी के मुताबिक विकास गर्ग ने पूछताछ में बताया कि EBIX खरीदने के लिए कई स्रोतों से रकम जुटाई गई। 300 करोड़ रुपए Vikas Lifecare Ltd. से करीब 250 करोड़ रुपए Qualified Institutional Placement से करीब 665 करोड़ रुपए Foreign Currency Convertible Bonds (FCCBs) के जरिए विदेशी निवेशकों से जुटाए।

ईडी का आरोप है कि FCCBs के जरिए जुटाए गए पूरे 665 करोड़ रुपए वास्तव में हरीशंकर टिंबरेवाल ने विदेशी कंपनियों के जरिए भेजे थे। एजेंसी का कहना है कि इसी रकम का बड़ा हिस्सा बाद में EBIX खरीदने में इस्तेमाल किया गया।

बैंक रिकॉर्ड में क्या मिला?

ED जांच में बैंक रिकॉर्ड से पता चला कि अगस्त 2024 में Eraaya Lifespaces के QIP एस्क्रो खाते में 248.50 करोड़ रुपए विदेशी निवेशकों से आए। बाद में यह रकम कंपनी के मुख्य खाते में ट्रांसफर कर EBIX अधिग्रहण में इस्तेमाल की गई।

इसके अलावा जून और जुलाई 2024 के दौरान Vikas Lifecare Ltd. से 292.41 करोड़ रुपए EBIX को भेजे गए। कंपनी के वित्तीय रिकॉर्ड में इन्हें लोन, एडवांस और निवेश के रूप में दर्ज किया गया।

940.77 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच

10 जुलाई को ED ने प्रेस नोट जारी कर संपत्ति अचैटमेंट की जानकारी दी है। ईडी ने डिजिटल साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और पीएमएलए की धारा-50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर 765.77 करोड़ रुपए को अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) माना है।

EBIX में Eraaya Lifespaces की 893.03 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी 47.74 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं। कुल अटैचमेंट 940.77 करोड़ रुपए का है।

ईडी का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क ऑनलाइन सट्टे से कमाए गए अवैध धन को बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों और विदेशी निवेश के जरिए वैध बनाने के लिए तैयार किया गया था। एजेंसी अब विकास गर्ग से पूछताछ कर इस पूरे मनी ट्रेल, विदेशी निवेश और अन्य आरोपियों की भूमिका की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

बयानों में विरोधाभास, इसलिए हुई गिरफ्तारी

ईडी के अनुसार, विकास गर्ग को कई बार धारा 50 के तहत नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया गया। कई बार वे पेश हुए, कई बार नहीं आए। पूछताछ के दौरान उनके अलग-अलग बयानों में विरोधाभास मिला और नए साक्ष्य भी सामने आए। इन्हीं तथ्यों के आधार पर आगे की पूछताछ आवश्यक मानते हुए दिल्ली में उन्हें गिरफ्तार किया गया।

सुनील भंडारी और अमित सारोगी के बयान भी बने सबूत

ईडी ने अपने केस में कारोबारी सुनील भंडारी और कोलकाता के एंट्री ऑपरेटर अमित सारोगी के बयानों का भी हवाला दिया है। एजेंसी के मुताबिक, सुनील भंडारी ने पूछताछ में बताया कि वह कमीशन लेकर FPI, Preferential Allotment और अन्य निवेश माध्यमों के जरिए लिस्डेट कंपनियों में पैसा लगवाता था।

ईडी का आरोप है कि विकास गर्ग और हरीशंकर टिंबरेवाल मिलकर शेल कंपनियों और विदेशी निवेश के जरिए सट्टे का पैसा शेयर बाजार में लगाते थे।

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कोरबा

सर्प पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा, विश्व सर्प दिवस पर सर्प संरक्षण पर दिया जोर – जितेंद्र सारथी

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कोरबा। विश्व सर्प दिवस के अवसर पर नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी (वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम कोरबा) ने आमजन से सर्पों के संरक्षण एवं सह-अस्तित्व का संदेश दिया, संस्था द्वारा वर्षों से वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर जिले में सर्प संरक्षण, सुरक्षित रेस्क्यू, जन-जागरूकता एवं मानव–सर्प संघर्ष को कम करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

संस्था के द्वारा अब तक हजारों सर्पों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है, साथ ही स्कूलों, महाविद्यालयों, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह बताया जा रहा है कि अधिकांश सर्प विषहीन होते हैं और बिना कारण किसी पर हमला नहीं करते, भय या अंधविश्वास के कारण सर्पों की हत्या करना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत दंडनीय भी हो सकता है।

सर्प प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण जीवों में से एक हैं, ये खेतों एवं जंगलों में चूहों और अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित करते हैं, जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है तथा खाद्य श्रृंखला एवं पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है, यदि सर्पों की संख्या कम हो जाए तो चूहों की आबादी तेजी से बढ़ सकती है, जिससे कृषि, खाद्यान्न भंडारण और मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

कोरबा जिला जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है, विशेष रूप से मध्य भारत (Central India) में किंग कोबरा (King Cobra) की उपस्थिति कोरबा जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है,यह विश्व का सबसे लंबा विषैला सर्प है और इसकी उपस्थिति स्वस्थ एवं समृद्ध वन पारिस्थितिकी का संकेत मानी जाती है, कोरबा वन मंडल एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी संयुक्त रूप से इसके संरक्षण, आवास सुरक्षा, निगरानी तथा जन-जागरूकता के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं, ताकि इस दुर्लभ एवं संरक्षित प्रजाति का प्राकृतिक अस्तित्व सुरक्षित रह सके।

छत्तीसगढ़ में कई प्रजातियों के सर्प पाए जाते हैं, जिनमें अधिकांश विषहीन हैं। प्रमुख विषैले सर्पों में किंग कोबरा, इंडियन कोबरा (नाग), कॉमन करैत, बैंडेड करैत, रसेल्स वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा) सहित कुछ अन्य प्रजातियां शामिल हैं, वहीं धामन (Rat Snake), इंडियन रॉक पाइथन (अजगर), चेकर्ड कीलबैक, ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक, सैंड बोआ, कॉमन वुल्फ, कैट स्नेक,कॉमन कुकरी सहित अनेक विषहीन सर्प भी राज्य की जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वनमंडलाधिकारी कोरबा (DFO) श्रीमती प्रेमलता यादव ने कहा कि सर्प प्रकृति के अभिन्न अंग हैं, वे खेतों एवं जंगलों में चूहों तथा अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बिना कारण किसी भी सर्प को मारना न केवल जैव विविधता के लिए हानिकारक है, बल्कि कई संरक्षित प्रजातियों को नुकसान पहुंचाना वन्यजीव संरक्षण कानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध भी हो सकता है।

वनमंडलाधिकारी कटघोरा DFO कुमार निशांत ने आम नागरिकों से अपील की है कि वर्षा ऋतु में सर्पों का बाहर निकलना प्रकृति का सामान्य व्यवहार है, ऐसे में किसी भी सर्प को देखकर उसे मारने के बजाय स्वयं सुरक्षित रहें और वन विभाग के हेल्प लाइन नंबर 18002331416,8817534455 पर तत्काल सूचना दें, सर्प हमारी जैव विविधता की अमूल्य धरोहर हैं, ये खेतों और जंगलों में हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, एक सर्प की रक्षा, प्रकृति के संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की रक्षा है साथ ही किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए, तो झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें बल्कि उस स्थिति में पीड़ित को तुरंत नजदीकी शासकीय अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि समय पर सही उपचार ही जीवन बचा सकता है।

उप वनमंडलाधिकारी दक्षिण (SDO) सूर्यकांत सोनी ने बताया कि कोरबा वन मंडल द्वारा सर्प संरक्षण, सुरक्षित रेस्क्यू, जन-जागरूकता एवं मानव–सर्प संघर्ष को कम करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, वन विभाग प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमों के माध्यम से सर्पों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने का कार्य कर रहा है।

जितेंद्र सारथी ने कहा कि सर्पों से डरने के बजाय उन्हें समझने की आवश्यकता है, किसी भी घर, कार्यालय या सार्वजनिक स्थान पर सर्प दिखाई देने पर उसे मारने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें, सुरक्षित रेस्क्यू ही मानव जीवन और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए सबसे उचित समाधान है।

विश्व सर्प दिवस के अवसर पर कोरबा वन मंडल , कटघोरा वन मण्डल एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि “सर्प बचेंगे, तभी प्रकृति का संतुलन बचेगा। आइए, भय नहीं बल्कि संरक्षण का संदेश अपनाएं।”

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