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कोरबा

एसईसीएल में सम्पन्न हुआ कोल इंडिया का तृतीय HR/IR कॉन्क्लेव “उत्कर्ष 2026” — पुलेला गोपीचंद के प्रेरक संबोधन के साथ समापन

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दो दिवसीय राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में खनन क्षेत्र के लिए Future-Ready HR Roadmap पर हुई सार्थक चर्चा

बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), बिलासपुर द्वारा आयोजित कोल इंडिया लिमिटेड का तृतीय HR/IR कॉन्क्लेव “उत्कर्ष 2026” दिनांक 10–11 अप्रैल 2026 को दो दिवसीय विचार-विमर्श के पश्चात सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के कॉन्क्लेव में कोल सेक्टर में मानव संसाधन (HR) एवं औद्योगिक संबंध (IR) के बदलते स्वरूप पर गहन चर्चा की गई।

“Shaping Minds, Strengthening Mines – Innovate, Excel, Rise” थीम पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में कोल इंडिया एवं उसकी सहायक कंपनियों के 100 से अधिक HR अधिकारियों के साथ-साथ देशभर से आए उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों एवं विचारकों ने भाग लिया।

समापन दिवस पर भारत के मुख्य राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच Pullela Gopichand के साथ एक अत्यंत प्रेरक Fireside Chat आयोजित किया गया। उन्होंने खेल और संगठनात्मक उत्कृष्टता के बीच समानताएं स्थापित करते हुए दृढ़ता, अनुशासन और निरंतर प्रयास को सफलता की आधारशिला बताया।

उन्होंने कहा, “आपको सफलता तब नहीं मिलती जब आप चाहते हैं, बल्कि तब मिलती है जब आप उसके योग्य बन जाते हैं,” और इस बात पर बल दिया कि विपरीत परिस्थितियों में भी निरंतर प्रयास ही वास्तविक उत्कृष्टता की पहचान है। इस सत्र का संचालन एसईसीएल के निदेशक (कार्मिक) बिरंची दास द्वारा किया गया।

कॉन्क्लेव के दूसरे दिन Change Adoption, “Mine to Mind” Transformation, Future HR Landscape तथा Strategic Workforce Planning जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ, जिसमें संगठनात्मक परिवर्तन में HR की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित किया गया।

इससे पूर्व, कॉन्क्लेव का उद्घाटन 10 अप्रैल को कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष बी. साईराम द्वारा वर्चुअल माध्यम से किया गया। उन्होंने “Reform, Perform, Transform” की दिशा में मानव संसाधन की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित किया।

अपने स्वागत उद्बोधन में एसईसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने people-centric culture को बढ़ावा देने तथा कर्मचारियों के सतत विकास एवं कल्याण पर बल दिया। वहीं कोल इंडिया के मुख्य सतर्कता अधिकारी ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने संगठन में ईमानदारी और सामूहिक पहचान के महत्व को रेखांकित किया।

कोल इंडिया के निदेशक (कार्मिक) डॉ. विनय रंजन ने अपने मुख्य भाषण “From Mind to Mine – The HR Shift Driving Mining Excellence” में HR की बदलती भूमिका को उत्पादकता, नवाचार एवं संगठनात्मक परिवर्तन के प्रमुख चालक के रूप में प्रस्तुत किया।

दोनों दिनों में आयोजित सत्रों में प्रतिष्ठित CHROs, HR विशेषज्ञों एवं शिक्षाविदों ने नेतृत्व में विश्वास निर्माण, HR के माध्यम से मूल्य सृजन, HR में Artificial Intelligence के जिम्मेदार उपयोग तथा भविष्य के कार्यस्थल के लिए सामाजिक संवाद को सुदृढ़ करने जैसे विषयों पर विचार साझा किए।

कॉन्क्लेव के दौरान कोल इंडिया एवं ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की HR पहलों एवं उपलब्धियों को प्रदर्शित करने हेतु एक विशेष प्रदर्शनी स्टॉल का भी उद्घाटन किया गया, जिसमें विभिन्न सहायक कंपनियों की नवाचारपूर्ण एवं कर्मचारी-केंद्रित पहलें प्रदर्शित की गईं।

“उत्कर्ष 2026” की एक विशेष उपलब्धि विभिन्न सहायक कंपनियों द्वारा प्रस्तुत concept papers एवं नवाचारपूर्ण HR पहलों का प्रदर्शन रहा, जिसने आपसी सीख एवं श्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया।

कॉन्क्लेव का समापन प्रतिभागियों के इस संकल्प के साथ हुआ कि वे एचआर प्रणालियों को और अधिक सुदृढ़ करेंगे, विश्वास एवं प्रदर्शन आधारित कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देंगे तथा कोल इंडिया के सतत एवं कुशल खनन के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप मानव संसाधन रणनीतियों को संरेखित करेंगे।

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संस्कृत विषय बचाओ अभियान: घोषणा को अमल में लाने संस्कृत शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

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कोरबा। प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी नोयन कुमार बुडेक, मनोज कुमार वर्मा, डॉ नारायण प्रसाद, गंगाराम साहू, हेमंत कुमार हिरवानी, दुर्गेश कुमार साहू, कुलेश्वर प्रसाद, दिनेश मंडावी, सुनील महार, ईश्वरी यदु कामिनी पिल्लई, रेणुका लदेर, शारदा साहू, सुरेखा सेन, सोमप्रभा साहू सहित प्रदेश के पांच शिक्षा संभाग के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची की भाषा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप संस्कृत विषय के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु उल्लेख किया गया है को ध्यान में रखते हुए गजेंद्र यादव शिक्षा मंत्री द्वारा 30 अप्रैल को विधानसभा से घोषणा किया गया कि संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर रहे हैं, जिनका लघु चलचित्र सोशल मीडिया पर बहुत प्रसारित हैं।

इसे देख सुनकर प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों में शासन की सौहार्द्रपूर्ण निर्णय से हर्ष की लहर है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, सभ्यता और संस्कार परक एक राष्ट्रभाषा है, जिनमें सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से समाहित है। संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 मई एवं 26 मई 2026 को नवा रायपुर स्थित एम -14 आवास में शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर घोषणा के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए शीघ्र अति शीघ्र शासकीय आदेश जारी करवाने हेतु मांग पत्र सौपा, जिससे शिक्षक आश्वस्त हो जावे तथा मंत्री द्वारा संस्कृत विषय को अनिवार्य करने विभागीय अधिकारी को निर्देश दिए यह शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है, किन्तु आज पर्यन्त कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पदाधिकारियों ने आगे बताया कि इस पावन कार्य के लिए निरंतर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायकगण, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरूण साव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , राज्यपाल रमेन डेका , संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम्, प्रदेश संयोजक व अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी फेड़रेशन कमल वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, डॉ अतुल कोठारी राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, आयुक्त राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा सहित 50 से भी अधिक आवेदन बारंबार संस्कृत विषय को पूर्व की भांति अनिवार्य करने तथा नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में रखने के लिए मांग पत्र ज्ञापन सौपा गया था। 25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं का संस्कृत विषय को अनिवार्य करने निर्देशित भी किया गया था। इसी क्रम में 07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपुरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा गया था। वहां पर अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत संकल्प का विषय है विकल्प का नहीं। संस्कृत भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा। एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रहा है। अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है।

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सुशासन  तिहार में जनमन सहित अन्य प्रचार समाग्री का किया गया वितरण

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कोरबा। सुशासन तिहार के उपलक्ष्य में जनसंपर्क विभाग द्वारा राज्य शासन की जन कल्याणकारी और महत्वकांक्षी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित तथा जिले के विकास कार्यों, उपलब्धियों  एवं नवाचारों पर आधारित प्रदर्शनी के साथ ही जिले के सभी पांच ब्लाक में आयोजित महत्वपूर्ण शिविर स्थल-ग्राम पिपरिया, जल्के, बसीबार, बैरा, चोढ़ा, चुईया, गिधौरी, केराकछार, सिरमिना, लमना, नगोई, मोरगा, निरधी, जटगा, छिंदपुर आदि स्थानों में शिविर के माध्यम से जनमन सहित अन्य पत्रिका का वितरण भी किया गया।

ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में शिविर का अवलोकन किया। शिविर के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों के जीवन मे हुए सकारात्मक बदलाव सहित जिले के अनेक विकास कार्यों, उपलब्धियों, नवाचार के संबंध में प्रचार सामग्री सुशासन के नवीन आयाम, तब और अब, विकसित भारत के बढ़ते कदम, बिल्डिंग टूमारो छ.ग.टूडे, अटल निर्माण वर्ष 2 साल (रिपोर्ट कार्ड) आदि का वितरण किया गया।

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31 मई को मनाया जाएगा विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

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कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदशन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी के नेतृत्व में कोरबा जिले में 31 मई 2026 को राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस मनाया जाएगा। इस अवसर पर जिले में तंबाकू सेवन एवं धुम्रपान  से हाने वाले दुष्प्रभावों के प्रति जनसामान्य को जागरूक करने हेतु विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिससे जनसामान्य में धुम्रपान और तम्बाकू सेवन करने की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
कार्यक्रम के अंतर्गत जागरूकता रैली, शपथ ग्रहण, जनजागरूकता अभियान, स्वास्थ्य परामर्श एवं तंबाकू मुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने संबंधी गतिविधयां आयोजित की जाएंगी। स्कूलों, महाविद्यालयों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं में विशेष जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं एवं आम नागरिकों को तंबाकू सेवन से दूर रहने हेतु प्रेरित किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि तंबाकू सेवन न केवल व्यक्तिगत स्वाथ्य के लिए हानिकारक है , बल्कि यह हमारे परिवारों और पर्यावरण को भी नुकसान पहॅंुचाता है वर्तमान समय में कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की गंभीर बिमारियॉं एवं अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण तंबाकू सेवन  है।
उन्होंने आमजन से अपील किया है कि वे स्वयं तंबाकू उत्पादों का सेवन न करें तथा अपने परिवार एवं समाज को भी इसके दुष्प्रभावो के प्रति जागरूक करें साथ ही विश्व तंबाकू निषेघ कार्यक्रम में सहभागिता कर तंबाकू मुक्त समाज निर्माण में सहयोग प्रदान करें।

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