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कोरबा

धनतेरस: अफसर व कर्मियों की छुट्टी, बच्चे जाएंगे स्कूल

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कोरबा। दीपोत्सव को लेकर हर घर में तैयारी जोरों पर है। 5 दिवसीय दिपावली की शुरुआत 18 अक्टूबर को धनतेरस पर्व से होकर भाई दूज तक रहेगी।

सरकारी अफसर हों या कर्मचारी वे त्योहार की खुशियां तो मनाएंगे, लेकिन स्कूल या कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षक धनतेरस पर ड्यूटी और छात्र-छात्राएं क्लास रूम में पढ़ाई करते दिखेंगे। क्योंकि स्कूल शिक्षा विभाग की बात हो या फिर उच्च शिक्षा विभाग दोनों विभागों ने इस बार धनतेरस पर अवकाश की घोषणा नहीं की है।

सरकारी अफसर व कर्मचारी इसलिए त्यौहार पर खुश दिखेंगे क्योंकि शनिवार को पहले ही छुट्‌टी रहेगी।उन्हें सप्ताह के दो दिन शनिवार व रविवार को अवकाश मिलता है। सौभाग्य से धनतेरस शनिवार को है। डीईओ टीपी उपाध्याय का कहना है कि अवकाश की घोषणा राज्य शासन से जारी होती है और इसका पालन कराना हमारा दायित्व है। इसमें स्थानीय स्तर पर संशोधन का अधिकार नहीं होता। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के सभी यूनिवर्सिटी के संबद्ध सरकारी या निजी कॉलेजों में दीपावली की छुट्‌टी 20 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक दी गई है। इसी तरह छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव आरपी वर्मा द्वारा 22 सितंबर को आदेश जारी किया गया है उसमें भी दिवाली की छुट्‌टी 20 से 25 अक्टूबर तक घोषित की है।

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कोरबा

सुदूर वनांचल लेमरू की मलेरिया मुक्त क्षेत्र की ओर प्रेरणादायक यात्रा

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कोरबा। कोरबा ब्लॉक का सुदूर वनांचल और पूर्व में सुविधाविहीन रहा क्षेत्र लेमरू, जो जिला मुख्यालय से लगभग 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, आज स्वास्थ्य जागरूकता और सामूहिक प्रयासों की बदौलत मलेरिया मुक्त होने की दिशा में अग्रसर है। यह क्षेत्र पहले घने जंगलों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण भारी मलेरिया प्रभावित माना जाता था, जहाँ हर वर्ष बरसात के मौसम में जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित पहुँच के कारण बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से बीमार हो जाते थे। इस क्षेत्र में मलेरिया का भय इतना गहरा था कि बाहरी व्यक्ति यहाँ आने से कतराते थे और आने से पहले अनिवार्य रूप से मच्छरदानी या बचाव की दवाओं की व्यवस्था करते थे। यहाँ तक कि समाज में यह भ्रांति व्याप्त थी कि लेमरू के पानी में ही मलेरिया है, जिसके डर से लोग इस क्षेत्र में अपनी बेटियों का विवाह तक करने से डरते थे। 
इस गंभीर चुनौती से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों के अभाव के बावजूद महामारी के समय शिविर लगाकर और लोगों को जागरूक कर इस बीमारी के आतंक को कम करने का प्रयास शुरू किया। स्वास्थ्य विभाग, मितानिनों और स्थानीय समुदाय के संयुक्त प्रयासों से लेमरू ने मलेरिया नियंत्रण में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। विभाग द्वारा एक प्रभावी रणनीति के तहत घर-घर सर्वे कर बुखार के संदिग्ध मरीजों की आरडी किट से तुरंत जाँच की गई और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से लोगों को मलेरिया के लक्षणों व बचाव के प्रति जागरूक किया गया। ग्रामीणों को घरों के आसपास जल-जमाव रोकने और स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया ताकि मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट किया जा सके।
अभियान के दौरान पूरे क्षेत्र में डीडीटी का छिड़काव सुनिश्चित किया गया और सभी घरों, हॉस्टलों तथा आश्रमों में मच्छरदानी वितरित कर उनके नियमित उपयोग की निगरानी की गई। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों ने शिविरों के माध्यम से स्थल पर ही क्लोरोक्वीन, पैरासिटामॉल और एसीटी किट का सेवन कराया। स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा क्षेत्र का निरंतर भ्रमण, कर्मचारियों का मुख्यालय में निवास और अस्पताल का 24×7 संचालन इस सफलता के मुख्य आधार रहे। इन संयुक्त प्रयासों और ग्रामीणों द्वारा इस लड़ाई को एक जन-अभियान बनाने का परिणाम यह रहा कि आज लेमरू में मलेरिया के मामलों में भारी कमी आई है। लेमरू की यह सफलता सिद्ध करती है कि सामूहिक प्रयास से कठिन से कठिन चुनौती को भी जीता जा सकता है और यह अन्य वनांचल क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन गया है।

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कोरबा

नगरीय क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति में नहीं होनी चाहिए लापरवाही, सभी निकाय रखें पूरी तैयारीः-कलेक्टर

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डीएमएफ और विभागीय योजनाओं के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश

सभी प्रगतिरत कार्य समयसीमा में गुणवत्ता के साथ पूरा करने व पूर्ण कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश

निर्धारित लक्ष्यानुसार राजस्व कर संग्रह सुनिश्चित करने हेतु किया निर्देशित

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने नगरीय निकायों की ली समीक्षा बैठक

आदिवासी विकास विभाग, जलसंसाधन, हसदेव बैराज और गृह निर्माण मंडल के कार्यों की भी की समीक्षा

कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिले के नगरीय निकायों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। उन्होंने विभागीय योजनाओं के तहत संचालित  कार्यो के क्रियान्वयन स्थिति, डीएमएफ के स्वीकृत कार्यो तथा महत्वपूर्ण विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। साथ ही आगामी वित्तीय वर्ष के लिए निकायों में प्रस्तावित  विकास कार्यों पर भी चर्चा की। इस दौरान निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय, अपर आयुक्त विनय मिश्रा सभी नगरीय निकायों के सीएमओ सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में नगरीय निकायों में पेयजल आपूर्ति, स्वच्छ भारत मिशन, मोर मकान मोर चिन्हारी, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), राजस्व वसूली, सामाजिक पेंशन के ई-केवाईसी सहित डीएमएफ अंतर्गत स्वीकृत कार्यों तथा अधोसंरचना मद के लंबित कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने डीएमएफ के अंतर्गत नगरीय निकायों में वर्ष 2016-17 से अब तक स्वीकृत, पूर्ण और प्रगतिरत निर्माण कार्यों की क्रमवार जानकारी ली। उन्होंने निकायों में पूर्ण हो चुके कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र शीघ्र प्रस्तुत करने के लिए कहा। साथ ही प्रगतिरत निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ तेजी से पूर्ण कराने तथा अप्रारंभ कार्यों को जल्द से जल्द प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी निकायों में स्वीकृत नए आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण कार्य को शीघ्रता से पूरा करने को कहा। स्कूल-कॉलेज में स्वीकृत
सायकल स्टैंड, विभिन्न शेड, डोम तथा बालक-बालिका शौचालय निर्माण, स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत ब्लड बैंक, रेडक्रॉस सोसायटी जैसे आवश्यक सुविधाओं के कार्य भी शीघ्र पूर्ण कराने हेतु निर्देशित दिए।
उन्होंने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए सभी शहरी क्षेत्रों में नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु सभी सीएमओ को निर्देशित किया। कलेक्टर ने कहा कि कहीं भी पानी की समस्या नहीं आनी चाहिए। विशेष रूप से स्लम एरिया एवं खदान प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरतने की बात कही। आवश्यक स्थानों में टैंकर से पानी सप्लाई कराने के लिए कहा। उन्होंने सभी सीएमओ को समय रहते अपने क्षेत्र के जलस्रोतों बोर का परीक्षण, टैंकर की उपलब्धता, मोटर की स्तिथि की जांच पूर्ण करने एवं सबमर्सिबल पंप का अतिरिक्त बैकअप तैयार रखने एवं आवश्यक स्थानों पर बोर कराने के निर्देश दिए। बैठक में शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए।  डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण बढ़ाने, नियमित साफ-सफाई बनाए रखने तथा शौचालय निर्माण कार्यों को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के कार्यों में प्रगति लाने तथा मोर मकान मोर चिन्हारी के तहत पूर्ण हो चुके मकानों को पात्र हितग्राहियों को शीघ्र आबंटित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सभी नगरीय निकायों को राजस्व वसूली बढ़ाने, निर्धारित लक्ष्य के अनुसार संपत्ति कर की वसूली करने तथा सामाजिक पेंशन योजना के छूटे हुए हितग्राहियों का ई-केवाईसी जल्द पूरा कराने के लिए भी निर्देशित किया। उन्होंने निकायों में अधोसंरचना मद अंतर्गत लंबित कार्यों की समीक्षा करते हुए सभी निर्माण कार्यों को समयावधि में गुणवत्ता के साथ पूर्ण कराने के  निर्देश दिए।  समीक्षा बैठक में नगरीय निकायों द्वारा आगामी वित्तीय सत्र के लिए डीएमएफ से प्रस्तावित कार्यों का भी प्रस्तुतिकरण किया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि प्राप्त प्रस्तावों का जिला स्तर पर परीक्षण कर प्राथमिकता के आधार पर आवश्यक कार्यों को स्वीकृति दी जाएगी।

लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करेंः कलेक्टर

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने आज आदिवासी विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, हसदेव बैराज तथा गृह निर्माण मंडल अंतर्गत स्वीकृत निर्माण कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) और विभागीय कार्यों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि सभी लंबित निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूरा किया जाए।
कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक पूर्ण कार्य के साथ फोटोग्राफ अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने विभागीय कार्यों की प्रगति से संबंधित समस्त जानकारी को पोर्टल में दर्ज करने तथा आगामी दिनों में सभी कार्यों के फोटोग्राफ पोर्टल पर अपलोड करने हेतु आवश्यक तैयारी करने के निर्देश भी विभागों को प्रदान किए।
कलेक्टर ने कहा कि समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य प्रगति प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता है तथा सभी विभाग यह सुनिश्चित करें कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूर्ण हों।

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कोरबा

रैम्प योजना अंतर्गत स्टार्टअप नीति पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित, छात्रों को मिली नवाचार एवं उद्यमिता की जानकारी

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कोरबा। उद्योग विभाग द्वारा संचालित रैम्प योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ स्टार्टअप नीति 2025-30 के विषय में आज मॉर्डन कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं को छत्तीसगढ़ शासन की स्टार्टअप नीति 2025-30 के अंतर्गत उपलब्ध विभिन्न प्रकार की सब्सिडी, वित्तीय सहायता एवं प्रोत्साहनों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा नवाचार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्टार्टअप इकाइयों को वित्तीय सहायता, प्रोटोटाइप विकास सहायता, विपणन सहायता, मार्गदर्शन (मेंटोरशिप) तथा अन्य अनेक प्रोत्साहन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह पहल युवाओं को अपने नवीन विचारों को व्यवसाय के रूप में विकसित करने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर देती है।

छत्तीसगढ़ स्टार्टअप नीति के अंतर्गत योग्य स्टार्टअप इकाइयों को प्रारंभिक चरण में आर्थिक सहयोग, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन तथा बाजार से जोड़ने की सुविधा प्रदान की जाती है, जिससे वे अपने नवाचार को सफल उद्यम में परिवर्तित कर सकें।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और स्टार्टअप से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछकर महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्राप्त कीं। विद्यार्थियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम युवाओं को स्वरोजगार, नवाचार तथा उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करते हैं।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य युवाओं में उद्यमिता की भावना को विकसित करना तथा उन्हें राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित करना था।

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