बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के बहुचर्चित फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट केस की जांच अब पूरी हो चुकी है। खुद को एमबीबीएस, एमआरसीपी और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट बताने वाला आरोपी डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट बनकर मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी करता रहा। जांच में फर्जी नाम, संदिग्ध डिग्री और पहचान पत्रों का एंगल भी सामने आया।
पुलिस ने आरोपी डॉ. नरेन्द्र के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दिया है, जबकि पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं मिलने पर अपोलो प्रबंधन को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। उधर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने इस जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है।
1. फर्जी डिग्री के दम पर कार्डियोलॉजिस्ट बनकर अपोलो में नौकरी
पुलिस जांच में सामने आया कि, आरोपी डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जॉन कैम ने खुद को एमबीबीएस, एमआरसीपी और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ बताया था। इसी आधार पर वह बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में काम करता रहा।
पुलिस रिमांड में उसने यह स्वीकार भी किया कि, उसने कई मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की, लेकिन अपनी विशेषज्ञता से जुड़े वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।
2. फर्जी नाम से आधार-पैन तक बनवाने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर “नरेन्द्र जॉन कैम” नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेज बनवाए थे। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज, दमोह पुलिस, सीएमएचओ और अपोलो अस्पताल समेत कई संस्थानों से दस्तावेज जुटाए गए, लेकिन उसके दावों की पुष्टि नहीं हो सकी।
3. 27 मरीजों की मौत का जिक्र, लेकिन कानूनी कड़ी कमजोर
पुलिस जांच में आरोपी के कार्यकाल के दौरान इलाज कराने वाले करीब 27 मरीजों की मौत का जिक्र सामने आया। हालांकि, इन मामलों में पर्याप्त मेडिकल रिकॉर्ड और औपचारिक शिकायतें उपलब्ध नहीं होने के कारण पुलिस इन मौतों को कानूनी रूप से सीधे आरोपी की कथित फर्जी विशेषज्ञता से नहीं जोड़ सकी। केवल दो लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी।
4. 27 जून 2025 को डॉक्टर के खिलाफ चार्जशीट
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज, कूटरचना, धोखाधड़ी और फर्जी तरीके से विशेषज्ञ चिकित्सक बनकर इलाज करने के आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर 27 जून 2025 को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी।
5. अपोलो प्रबंधन को क्लीन चिट, अब CBI जांच की मांग
अस्पताल प्रबंधन और चयन समिति की अलग जांच में पुलिस को ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी की नियुक्ति जानबूझकर या आपराधिक षड्यंत्र के तहत की गई थी।
इसी आधार पर उनके खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई। लेकिन दिवंगत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने इस जांच को अधूरा बताते हुए पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर दी है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की इलाज के दौरान हुई थी मौत।
बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में 2006 के दौरान कार्यरत रहे डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ एन जॉन केम पर फर्जी डिग्री के आधार पर इलाज करने का आरोप है। मामला तब फिर सुर्खियों में आया जब मध्यप्रदेश के दमोह से उसकी गिरफ्तारी हुई।
इसके बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिवंगत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के बेटे प्रो. प्रदीप शुक्ल ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनके पिता का इलाज भी इसी डॉक्टर ने किया था।
अपोलो अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2002 से 2006 के बीच राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का 13 बार इलाज हुआ। 1 जून 2006 को आरोपी डॉक्टर की अपोलो में नियुक्ति हुई। 21 जुलाई 2006 को शुक्ल को भर्ती किया गया और 2 अगस्त 2006 को आरोपी ने उनकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की।
प्रक्रिया के कुछ घंटे बाद उनकी हालत बिगड़ गई और 20 अगस्त 2006 को 18 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद उनका निधन हो गया। करीब 19 साल बाद अप्रैल 2025 में परिजनों को पता चला कि इलाज करने वाला डॉक्टर फर्जी डिग्री के मामले में गिरफ्तार हुआ है। इसके बाद शिकायत हुई, एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस जांच तेज हुई।
अब अदालत के रूख का इंतजार
फिलहाल, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ चालान पेश हो चुका है और मामला कोर्ट में है। दूसरी ओर, अपोलो प्रबंधन को मिली क्लीन चिट और पीड़ित परिवार की CBI जांच की मांग ने इस 17 साल पुराने केस को फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोर्ट पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करती है या इस मामले में आगे और जांच के निर्देश दिए जाते हैं।
एसएसपी बोले- कानूनी राय लेने के बाद क्लोजर रिपोर्ट पेश
एसएसपी रजनेश सिंह के मुताबिक, जांच सिर्फ आरोपी डॉक्टर तक सीमित नहीं रखी गई, बल्कि यह भी परखा गया कि उसकी नियुक्ति किन परिस्थितियों में हुई, उसके दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ और क्या अस्पताल प्रबंधन या चयन समिति ने जानबूझकर किसी तरह की लापरवाही या आपराधिक साजिश की थी।
इसी उद्देश्य से मामले की आगे जांच भी कराई गई, जिसके बाद कानूनी राय लेकर क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई है।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा है, लेकिन संघ स्वयंसेवकों से बड़ा है। संघ समुद्र की तरह है, जिसमें सभी सदस्य समाहित होते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तरह समुद्र की पहचान उसकी एक बूंद से होती है, उसी तरह सदस्यों से संघ की पहचान होती है। संघ का उद्देश्य राष्ट्रहित को सबसे ऊपर रखना है, इसलिए सदस्यों को संगठित और सजग होकर राष्ट्रहित में काम करना चाहिए।
दरअसल, RSS प्रमुख गुरुवार को कोनी स्थित सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि संघ हिंदुओं के भले के लिए काम करता है। लेकिन संघ केवल हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के भले के लिए काम करता है।
RSS प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को याद दिलाया कि संघ का मुख्य काम किसी के प्रति घृणा फैलाना नहीं है, बल्कि शुद्ध सात्विक प्रेम और सद्भाव के आधार पर पूरे हिंदू समाज और राष्ट्र को एकजुट करना है। वहीं, आज (शुक्रवार) 2 सत्रों में बैठकें हुई।
पहले सत्र में आगामी कार्यक्रमों, युवा वर्ग को जोड़ने और RSS-भाजपा के खिलाफ बनाए जा रहे नैरेटिव पर रणनीति तय हुई। दूसरे सत्र में संघ पदाधिकारियों के साथ भाजपा नेता शामिल हुए। इस दौरान मोहन भागवत ने प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह से मुलाकात की। इसके बाद मोहन भागवत अमरकंटक एक्सप्रेस से जबलपुर के लिए रवाना हुए।
RSS प्रमुख सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग में शामिल हुए।
पहले उपेक्षा हुई, अब जय-जयकार हो रही
बौद्धिक वर्ग कार्यक्रम में डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि 1925 में RSS की स्थापना के बाद शुरुआत में संघ की उपेक्षा हुई। फिर विरोध हुआ और अब जय-जयकार हो रही है। अब माहौल RSS के पक्ष में है, इसलिए स्वयंसेवकों को और सतर्क होकर काम करना है।
पिछले एक साल में शताब्दी वर्ष के तहत जो काम किए गए हैं, उन्हें आगे भी जारी रखना है। हर स्वयंसेवक को लक्ष्य दिया कि पहले किसी अनजान व्यक्ति को परिचित बनाएं। फिर उससे दोस्ती करें और दोस्त बनने के बाद उसे स्वयंसेवक बनाएं।
पानी के फॉर्मूले से समझाया स्वयंसेवकों और संघ का महत्व
मोहन भागवत ने कहा कि हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन के एक परमाणु (H2O) से पानी बनता है। उसी तरह स्वयंसेवकों से संघ बनता है। स्वयंसेवकों के बिना संघ की ताकत नहीं है। उन्होंने कहा कि हर स्वयंसेवक को डॉ. हेडगेवार के जीवन और विचारों को समझना चाहिए। उनका व्यक्तित्व आदर्श था।
RSS प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को दी नसीहत
भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन या आंदोलन का मकसद केवल राजनीतिक हित साधना या समाज में नफरत फैलाना नहीं होना चाहिए। आंदोलन हमेशा समाधान निकालने के लिए होने चाहिए। सभी काम संवैधानिक और कानूनी सीमाओं के दायरे में रहकर किए जाने चाहिए।
कार्यक्रम स्थल के बाहर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों से शाखाओं का विस्तार करें
मोहन भागवत ने कहा कि शताब्दी वर्ष के तहत किए गए कार्यक्रमों को भुलाना नहीं है। संपर्क बढ़ाने और शाखाओं का विस्तार करने का काम लगातार जारी रखना है। संघ के तीन आधार शाखा, कुटुंब और अपनत्व हैं। इन्हें लगातार मेहनत करके आगे बढ़ाना है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ के सभी आनुषांगिक संगठन स्वतंत्र और स्वावलंबी हैं। जब उन्हें विचारों की जरूरत होती है, तब संघ मार्गदर्शन देता है। बौद्धिक वर्ग में क्षेत्र संघ चालक डॉ. पूर्णेंदु सक्सेना, प्रांत संघ चालक टोपलाल वर्मा सहित संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विपक्ष के हमलों के बीच स्वयंसेवकों को सतर्क रहने का संदेश
मोहन भागवत के संबोधन में विपक्षी दलों की ओर से RSS पर हो रहे हमलों को लेकर चिंता दिखी। उन्होंने स्वयंसेवकों से सतर्क रहकर राष्ट्रहित में काम करने का आह्वान किया, ताकि किसी स्वयंसेवक की गलती से पूरे RSS के खिलाफ माहौल न बने।
उन्होंने संघ की स्थापना के समय का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेज समझ गए थे कि यह देशभक्त बनाने वाली संस्था है। इसलिए सरकारी कर्मचारियों के साथ-साथ उनके बच्चों के भी शाखाओं में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। बाद में विरोध के बाद यह प्रतिबंध हटाना पड़ा।
मोहन भागवत गोंडवाना इंटरसिटी एक्सप्रेस से गुरुवार को बिलासपुर पहुंचे थे।
सालभर में 2311 नई शाखाएं खुलीं, अब संख्या 5500 हुई
बौद्धिक वर्ग से पहले संघ के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसमें मुख्य शिक्षक, कार्यवाह, नगर, उपनगर और विभाग कार्यकारिणी से शताब्दी वर्ष में दिए गए कामों का लेखा-जोखा लिया गया। इस दौरान बताया गया कि सालभर में 2311 नई शाखाएं शुरू हुई हैं। अब इनकी संख्या बढ़कर 5500 हो गई है।
रायपुर के कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने पावभाजी बेचने वालों के लिए रात में शाखा शुरू की थी। यह रात्रि शाखा का पहला प्रयोग है। वहीं, मस्तूरी मंडल की एक शाखा के 10 स्वयंसेवकों ने 10 अलग-अलग जगहों पर नई शाखाएं खोलने की जानकारी दी।
मीडिया के साथ मोबाइल पर भी प्रतिबंध
RSS के बौद्धिक वर्ग में संघ से जुड़े सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और डॉक्टर भी शामिल हुए। इस दौरान मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध था। बौद्धिक वर्ग में शामिल होने के लिए पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रवेशिका जारी की गई थी। कार्यक्रम में जाने से पहले सभी सदस्यों के मोबाइल बाहर जमा करा लिए गए थे।
रेलवे स्टेशन से मोहन भागवत कार्यक्रम के लिए रवाना होते हुए।
RSS प्रमुख की सुरक्षा में 100 से अधिक जवान तैनात
गुरुवार को RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के आगमन पर रेलवे स्टेशन से कोनी तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सरस्वती महाविद्यालय परिसर और आसपास 100 से अधिक जवान तैनात किए गए थे।
सुरक्षा व्यवस्था में एडिशनल एसपी पंकज पटेल, एडिशनल एसपी मधुलिका सिंह, डीएसपी स्तर के अधिकारी और आधा दर्जन से अधिक निरीक्षक तैनात रहे।
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 50 एक्सप्रेस ट्रेनों को 27 नवंबर से 17 दिसंबर 2026 के बीच अलग-अलग तारीखों में कैंसिल किया गया है। वहीं, आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस राउरकेला तक ही चलेगी, जबकि उत्कल एक्सप्रेस का रूट बदल दिया गया है। इसके अलावा कई लंबी दूरी की ट्रेनें भी प्रभावित होंगी। आजाद हिंद एक्सप्रेस 14 दिसंबर को 2 घंटे देरी से रवाना होगी।
रेलवे के झारसुगुड़ा पैसेंजर यार्ड में काम के चलते ये फैसला लिया गया है। इसका असर छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों के यात्रियों पर पड़ेगा।
साउथ बिहार एक्सप्रेस राउरकेला तक ही चलेगी
13288 आरा-दुर्ग साउथ बिहार एक्सप्रेस: 28 नवंबर और 4 से 15 दिसंबर 2026 तक यह ट्रेन राउरकेला स्टेशन तक ही चलेगी। राउरकेला से दुर्ग के बीच ट्रेन रद्द रहेगी।
13287 दुर्ग-आरा साउथ बिहार एक्सप्रेस: 29 नवंबर और 5 से 16 दिसंबर 2026 तक यह ट्रेन राउरकेला स्टेशन से ही रवाना होगी। दुर्ग से राउरकेला के बीच ट्रेन रद्द रहेगी।
आजाद हिंद एक्सप्रेस 2 घंटे देरी से चलेगी
14 दिसंबर 2026 को पुणे से रवाना होने वाली 12129 पुणे-हावड़ा आजाद हिंद एक्सप्रेस 2 घंटे की देरी से चलेगी। रेलवे ने अपील की है कि यात्रा पर निकलने से पहले ट्रेन की सही स्थिति और समय की जानकारी रेलवे की आधिकारिक पूछताछ सेवा NTES या हेल्पलाइन नंबर 139 से जरूर ले लें, ताकि परेशानी से बचा जा सके।
सूरजपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में टीचर और उनके बेटे की हत्या के मामले में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी मृतका की सहेली का पति है। उसने 20 लाख रुपये का लोन लिया था। इसकी किस्त चुकाने के लिए टीचर से पैसे मांगे थे। मना करने पर उसने हत्या कर दी। बेटे को घर में उसके आने की जानकारी थी, इसलिए उसे भी मार डाला।
मामला जयनगर और विश्रामपुर थाना क्षेत्र का है। आरोपी ने टीचर के घर के बाथरूम में शैंपू की बोतल से उनके सिर पर वार किया। बेसुध होने पर गला घोंट दिया। वहीं, मृतका के बेटे को सुनसान जगह ले जाकर सीमेंट के टुकड़े से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी।
बेटे की लाश सड़क किनारे सुनसान जगह में मिली थी।
महिला सरकारी स्कूल में टीचर थी, उसकी लाश बाथरूम में मिली थी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
बेटे का शव सड़क पर मिला
जानकारी के मुताबिक, 10 अक्टूबर की सुबह जयनगर थाना क्षेत्र के महावीरपुर में नेशनल हाईवे-43 से लगी ग्रामीण सड़क के किनारे एक लड़के का शव मिला था। लड़के की हत्या के बाद शव सड़क किनारे फेंका गया था।
मृतक की पहचान बिश्रामपुर के कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में 12वीं के छात्र सुजल बरेठ (18) के रूप में हुई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि सुजल की स्कूटी घर से करीब 500 मीटर दूर एक पेट्रोल पंप पर लावारिस हालत में खड़ी थी।
मां का शव बाथरूम में मिला
देर रात पुलिस सुजल के घर पहुंची, तो मुख्य दरवाजे पर ताला लगा मिला। उसकी मां रजनी बरेठ का भी पता नहीं चल रहा था। इसके बाद बिश्रामपुर पुलिस ने सुजल के रिश्तेदारों को मौके पर बुलाया। उनकी मौजूदगी में घर का ताला तोड़ा गया। अंदर बाथरूम में सुजल की मां रजनी बरेठ (40) का शव भी संदिग्ध हालत में मिला।
मौके पर डॉग स्क्वायड की टीम को भी बुलाया गया।
पति से तलाक के बाद बेटे के साथ रहती थी
रजनी बरेठ बेलटिकरी के सरकारी स्कूल में टीचर थीं। पति से 5 साल पहले तलाक के बाद वह अपने बेटे सुजल के साथ विश्रामपुर थाना क्षेत्र के केशवनगर में किराए के मकान में रहती थीं। घटना के बाद पुलिस ने कई संदेहियों से पूछताछ की।
मामला ब्लाइंड मर्डर का होने के कारण साइबर सेल और सूरजपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने कई संदिग्धों से पूछताछ की। आसपास के CCTV फुटेज खंगाले गए और संदिग्धों के मोबाइल की लोकेशन भी निकाली गई।
सहेली के पति पर गया शक
जांच के दौरान रजनी बरेठ के स्कूल में पदस्थ एक महिला टीचर के पति परवेश उर्फ प्रवेश कुमार (36) की भूमिका संदिग्ध मिली। पुलिस को CCTV में एक व्यक्ति टीचर के घर की ओर जाते दिखा था। जांच के बीच संदिग्ध फरार हो गया था। इसके बाद 22 अक्टूबर को पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने हत्या करना कबूल कर लिया।
रजनी बरेठ और उनके बेटे सुजल ।
पैसे देने से मना करने पर मां की हत्या
पूछताछ में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ और सुजल बरेठ की हत्या करना स्वीकार किया। आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी और रजनी बरेठ एक ही स्कूल में टीचर थीं, जिसके कारण आरोपी का रजनी बरेठ के घर आना-जाना था।
आरोपी ने मोटर-पार्ट्स के व्यवसाय के लिए 20 लाख रुपये का लोन लिया था और उसे पैसों की जरूरत थी। उसे पता था कि रजनी बरेठ ने भी 19 लाख रुपये का लोन लिया है।
9 अक्टूबर की दोपहर आरोपी पैदल रजनी बरेठ के घर पहुंचा। रजनी शाम को ड्यूटी से लौटीं, तो सुजल ट्यूशन के लिए घर से चला गया। प्रवेश ने रजनी से पैसे मांगे। उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया।
बाथरूम में गला दबाकर मार डाला
पैसों के लालच में प्रवेश कुमार ने रजनी बरेठ से झूमाझटकी की। जब रजनी भागने लगीं, तो आरोपी ने उन्हें बाथरूम में खींचकर उनके सिर पर शैंपू की बोतल मारी और गला दबाकर उनकी हत्या कर दी।
आरोपी प्रवेश कुमार
सबूत मिटाने बेटे को मार डाला
आरोपी ने बताया कि बेटे सुजल को पता था कि घर पर उसकी मां और आरोपी मौजूद थे, इसलिए उसने सुजल को भी मारने की प्लानिंग की। वह रजनी के घर जाने वाले रास्ते के तिराहे पर करीब 3 घंटे तक सुजल का इंतजार करता रहा। रात करीब 9 बजे सुजल आया, तो उसने कहा कि तेरी मम्मी मेरे घर पर हैं।
आरोपी सुजल को कार में बैठाकर घुमाते हुए अंबिकापुर लेकर आया और उसे मैगी खिलाई। रात को वे राईं जंगल में बाथरूम जाने के बहाने रुके, जहां आरोपी ने सुजल के गले में स्टॉक कसकर उसे मारने की कोशिश की।
सीमेंट के टुकड़े से सिर-सीने पर मारा
सुजल भागने लगा, तो आरोपी ने सड़क किनारे पड़े सीमेंट के खंभे के टुकड़े से उसके सिर और सीने पर वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को कार में रखकर वह कालीघाट पहुंचा, जहां ग्रामीण सड़क के किनारे उसने सुजल का शव फेंक दिया।
सूरजपुर एसपी योगेश पटेल ने बताया कि पुलिस ने दोहरे हत्याकांड के आरोपी के कब्जे से मृतका का मोबाइल, ज्वेलरी एवं अन्य सामान बरामद किया है। घटना में प्रयुक्त कार भी जब्त की गई है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है।