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छत्तीसगढ़

फर्जी डॉक्टर नाम बदलकर करता रहा ऑपरेशन:27 मौतें हुईं, अपोलो को क्लीन चिट, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष की भी गई थी जान, CBI जांच मांगी

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के बहुचर्चित फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट केस की जांच अब पूरी हो चुकी है। खुद को एमबीबीएस, एमआरसीपी और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट बताने वाला आरोपी डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट बनकर मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी करता रहा। जांच में फर्जी नाम, संदिग्ध डिग्री और पहचान पत्रों का एंगल भी सामने आया।

पुलिस ने आरोपी डॉ. नरेन्द्र के खिलाफ चार्जशीट पेश कर दिया है, जबकि पर्याप्त आपराधिक साक्ष्य नहीं मिलने पर अपोलो प्रबंधन को क्लीन चिट देते हुए कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है। उधर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने इस जांच पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है।

1. फर्जी डिग्री के दम पर कार्डियोलॉजिस्ट बनकर अपोलो में नौकरी

पुलिस जांच में सामने आया कि, आरोपी डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ नरेन्द्र जॉन कैम ने खुद को एमबीबीएस, एमआरसीपी और इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ बताया था। इसी आधार पर वह बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट के रूप में काम करता रहा।

पुलिस रिमांड में उसने यह स्वीकार भी किया कि, उसने कई मरीजों की एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की, लेकिन अपनी विशेषज्ञता से जुड़े वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका।

2. फर्जी नाम से आधार-पैन तक बनवाने का आरोप

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर “नरेन्द्र जॉन कैम” नाम से आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेज बनवाए थे। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल, उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज, दमोह पुलिस, सीएमएचओ और अपोलो अस्पताल समेत कई संस्थानों से दस्तावेज जुटाए गए, लेकिन उसके दावों की पुष्टि नहीं हो सकी।

3. 27 मरीजों की मौत का जिक्र, लेकिन कानूनी कड़ी कमजोर

पुलिस जांच में आरोपी के कार्यकाल के दौरान इलाज कराने वाले करीब 27 मरीजों की मौत का जिक्र सामने आया। हालांकि, इन मामलों में पर्याप्त मेडिकल रिकॉर्ड और औपचारिक शिकायतें उपलब्ध नहीं होने के कारण पुलिस इन मौतों को कानूनी रूप से सीधे आरोपी की कथित फर्जी विशेषज्ञता से नहीं जोड़ सकी। केवल दो लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी।

4. 27 जून 2025 को डॉक्टर के खिलाफ चार्जशीट

पुलिस ने आरोपी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज, कूटरचना, धोखाधड़ी और फर्जी तरीके से विशेषज्ञ चिकित्सक बनकर इलाज करने के आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर 27 जून 2025 को न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी।

5. अपोलो प्रबंधन को क्लीन चिट, अब CBI जांच की मांग

अस्पताल प्रबंधन और चयन समिति की अलग जांच में पुलिस को ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी की नियुक्ति जानबूझकर या आपराधिक षड्यंत्र के तहत की गई थी।

इसी आधार पर उनके खिलाफ क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई। लेकिन दिवंगत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के परिजनों ने इस जांच को अधूरा बताते हुए पूरे मामले की CBI जांच की मांग कर दी है।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की इलाज के दौरान हुई थी मौत।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की इलाज के दौरान हुई थी मौत।

बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में 2006 के दौरान कार्यरत रहे डॉ. नरेन्द्र विक्रमादित्य यादव उर्फ एन जॉन केम पर फर्जी डिग्री के आधार पर इलाज करने का आरोप है। मामला तब फिर सुर्खियों में आया जब मध्यप्रदेश के दमोह से उसकी गिरफ्तारी हुई।

इसके बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिवंगत राजेंद्र प्रसाद शुक्ल के बेटे प्रो. प्रदीप शुक्ल ने सरकंडा थाने में शिकायत दर्ज कराई कि उनके पिता का इलाज भी इसी डॉक्टर ने किया था।

अपोलो अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक, 2002 से 2006 के बीच राजेंद्र प्रसाद शुक्ल का 13 बार इलाज हुआ। 1 जून 2006 को आरोपी डॉक्टर की अपोलो में नियुक्ति हुई। 21 जुलाई 2006 को शुक्ल को भर्ती किया गया और 2 अगस्त 2006 को आरोपी ने उनकी एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी की।

प्रक्रिया के कुछ घंटे बाद उनकी हालत बिगड़ गई और 20 अगस्त 2006 को 18 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद उनका निधन हो गया। करीब 19 साल बाद अप्रैल 2025 में परिजनों को पता चला कि इलाज करने वाला डॉक्टर फर्जी डिग्री के मामले में गिरफ्तार हुआ है। इसके बाद शिकायत हुई, एफआईआर दर्ज हुई और पुलिस जांच तेज हुई।

अब अदालत के रूख का इंतजार

फिलहाल, आरोपी डॉक्टर के खिलाफ चालान पेश हो चुका है और मामला कोर्ट में है। दूसरी ओर, अपोलो प्रबंधन को मिली क्लीन चिट और पीड़ित परिवार की CBI जांच की मांग ने इस 17 साल पुराने केस को फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कोर्ट पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करती है या इस मामले में आगे और जांच के निर्देश दिए जाते हैं।

एसएसपी बोले- कानूनी राय लेने के बाद क्लोजर रिपोर्ट पेश

एसएसपी रजनेश सिंह के मुताबिक, जांच सिर्फ आरोपी डॉक्टर तक सीमित नहीं रखी गई, बल्कि यह भी परखा गया कि उसकी नियुक्ति किन परिस्थितियों में हुई, उसके दस्तावेजों का सत्यापन कैसे हुआ और क्या अस्पताल प्रबंधन या चयन समिति ने जानबूझकर किसी तरह की लापरवाही या आपराधिक साजिश की थी।

इसी उद्देश्य से मामले की आगे जांच भी कराई गई, जिसके बाद कानूनी राय लेकर क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई है।

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रायपुर : रेडियो के ‘दीदी के गोठ’ से महिलाओं को आगे बढ़ने मिलती है प्रेरक और रोचक जानकारियां : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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एक वर्ष में 12 एपिसोड के माध्यम से हजारों महिलाओं तक पहुँची सफलता की कहानियां

मुख्यमंत्री ने ‘दीदी के गोठ’ कॉफी टेबल बुक, ‘बिहान वाणी’ त्रैमासिक पत्रिका एवं ‘मोर गांव मोर पानी’ पुस्तक का किया विमोचन

सफलता की कहानी साझा करने वाली दीदियों का किया सम्मान, प्रदर्शनी का अवलोकन कर जाना नवाचारों का सफर

एक वर्ष में 12 एपिसोड के माध्यम से हजारों महिलाओं तक पहुँची सफलता की कहानियां
एक वर्ष में 12 एपिसोड के माध्यम से हजारों महिलाओं तक पहुँची सफलता की कहानियां

रायपुर। ‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम प्रदेश की माताओं-बहनों के लिए प्रेरणा का सशक्त माध्यम बन गया है। इस कार्यक्रम के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भरता, आजीविका, नवाचार और स्वरोजगार से जुड़ी अत्यंत रोचक एवं प्रेरक जानकारियां मिल रही हैं। एक सफल दीदी की कहानी हजारों अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रही है और यही इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित ‘दीदी के गोठ’ वार्षिकोत्सव-2026 एवं संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

एक वर्ष में 12 एपिसोड के माध्यम से हजारों महिलाओं तक पहुँची सफलता की कहानियां

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर ‘दीदी के गोठ’ कॉफी टेबल बुक, ‘बिहान वाणी’ त्रैमासिक पत्रिका तथा ‘मोर गांव मोर पानी’ पुस्तक का विमोचन किया। उन्होंने अपनी सफलता की कहानी साझा करने वाली दीदियों को सम्मानित किया तथा ‘दीदी के गोठ’ के 12 एपिसोड पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन कर महिलाओं से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ऑडिटोरियम परिसर में आयोजित ‘दीदी के गोठ’ फोटो गैलरी का अवलोकन किया तथा स्व-सहायता समूहों की महिलाओं से संवाद कर उनके नवाचारों एवं आजीविका गतिविधियों की जानकारी ली और उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान दुर्ग जिले से वर्चुअल माध्यम से जुड़ीं लखपति दीदी श्रीमती विद्या निषाद से चर्चा की। श्रीमती निषाद ने बताया कि कोरोना काल में पति के निधन के बाद उन्हें बिहान समूह से प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन मिला। उन्होंने कपड़े एवं फैंसी स्टोर का व्यवसाय शुरू किया और आज प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने उनकी सफलता की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि ‘दीदी के गोठ’ ने एक वर्ष का सफल सफर पूरा कर लिया है और अब तक 12 एपिसोड प्रसारित हो चुके हैं। प्रत्येक माह के दूसरे गुरुवार को एक सफल दीदी अपनी संघर्ष एवं सफलता की कहानी स्वयं अपनी बोली में साझा करती है, जिससे प्रदेशभर की महिलाओं को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।

उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को देवी स्वरूप माना गया है। वेदों में कहा गया है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।” आज महिलाएं बिहान से जुड़कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। कोई ड्रोन दीदी बनी है, कोई राजमिस्त्री, कोई ऑर्गेनिक खेती कर रही है, तो कोई सेटरिंग प्लेट , पशुपालन एवं अन्य आजीविका गतिविधियों के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है। उन्होंने कहा कि आज की लखपति दीदियां आने वाले समय में करोड़पति बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं और विकसित भारत तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने सुशासन तिहार के दौरान आरंग क्षेत्र के भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां मातृशक्ति द्वारा संचालित ‘गोट यूनिट’ में बकरी, मुर्गी एवं मछली पालन का एकीकृत मॉडल विकसित किया गया है, जिससे वह लखपति बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे नवाचार पूरे प्रदेश की महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को ढाई वर्षों में पूरा किया है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्रदेश को 18 लाख आवासों की स्वीकृति मिली, जिनमें से 11 लाख आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा प्रतिदिन लगभग 1600 आवासों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना के तहत लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की राशि अंतरित की जा रही है। अब तक 28 किश्तों के माध्यम से लगभग 18 हजार करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में पहुंचाए जा चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन-1076 प्रारंभ की है, जहां नागरिक बिजली, पानी, राजस्व, पुलिस सहित विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए लगभग 8 हजार अधिकारी कार्य कर रहे हैं तथा वे स्वयं इसकी नियमित समीक्षा करते हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के माध्यम से दो वर्षों से बकाया बिजली उपभोक्ताओं को सरचार्ज में राहत प्रदान की जा रही है, जिसके तहत अब तक 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि माफ की जा चुकी है।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ‘दीदी के गोठ’ महिलाओं के लिए ज्ञान, नवाचार और प्रेरणा का मंच बन चुका है। राज्य सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को लखपति दीदी बनाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में बिहान समूहों की महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रदेश में 11 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण हो चुके हैं तथा इसके लिए राज्य सरकार ने 26 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।

उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से ‘36 कला’ ब्रांड विकसित किया गया है। राज्य सरकार सभी समूहों को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में कार्य कर रही है, जिससे महिलाएं अपने उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचा सकें और उन्हें अपने परिश्रम का पूरा लाभ मिले। उन्होंने खैरागढ़ की ड्रोन दीदी का उदाहरण देते हुए बताया कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से महिलाएं बेहतर आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद समाप्त होने के बाद बैंक सखी, पशु सखी, सीएससी संचालन तथा अन्य गतिविधियों के माध्यम से स्व-सहायता समूहों की भूमिका और अधिक बढ़ेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि आज प्रदेश की महिलाएं समूहों के माध्यम से आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बन रही हैं। महिलाओं का सशक्तिकरण ही समाज, प्रदेश और राष्ट्र के विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को लखपति से करोड़पति बनाने की दिशा में प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं।

कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में मातृशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका है। ‘दीदी के गोठ’ के माध्यम से प्रदेशभर की महिलाओं तक नवाचार, सफलता और स्वरोजगार की प्रेरक कहानियां पहुंच रही हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

एक वर्ष में 12 एपिसोड, प्रेरणा और नवाचार का सशक्त मंच

‘दीदी के गोठ’ कार्यक्रम का प्रसारण 31 अगस्त 2025 से प्रत्येक माह के दूसरे गुरुवार को किया जा रहा है। कार्यक्रम से प्रदेश के 25 जिलों की 38 दीदियां जुड़ी हुई हैं, जो अपनी स्थानीय बोली में नवाचार, आजीविका और सफलता की कहानियां साझा करती हैं। आज 9 जुलाई को कार्यक्रम का 12वां एपिसोड प्रदेशभर में प्रसारित किया गया।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत अब तक प्रसारित 12 एपिसोड में लखपति दीदी, नियद नेल्ला नार, वनोपज संग्रहण, प्रधानमंत्री आवास योजना में महिलाओं की भागीदारी, सरस मेला, ड्रोन दीदी, कृषि सखी एवं पशु सखी, नई चेतना 4.0, वित्तीय समावेशन, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी, जनप्रतिनिधि बनीं महिलाओं की सफलता की कहानियां, लाइवस्टॉक, साइबर अपराध एवं बैंकिंग फ्रॉड से बचाव, ‘छत्तीसगढ़ कला’ ब्रांड तथा ‘दीदी के गोठ’ की एक वर्ष की प्रेरणादायी यात्रा जैसे विषयों पर जानकारी प्रसारित की गई है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष नवीन कुमार अग्रवाल, उपाध्यक्ष संदीप यदु, गुरु सौरभ साहेब, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के संचालक तारन प्रकाश सिन्हा,  छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के मिशन संचालक अश्वनी देवांगन सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं बड़ी संख्या में बिहान की दीदियां उपस्थित थीं।

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छत्तीसगढ़

नशे में टल्ली होकर जमीन पर लुढ़के हेडमास्टर:ग्रामीणों से कहा- फालतू बात मत करो, पटककर मारूंगा, डीईओ ने किया सस्पेंड

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सूरजपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में प्राइमरी स्कूल का हेडमास्टर शराब के नशे में स्कूल पहुंच गया। हेडमास्टर इस कदर नशे में धुत था कि वह खुद को संभाल भी नहीं पा रहा था और स्कूल के बाहर जहां जूते-चप्पल बाहर रखे थे, वहीं जमीन पर लेट गया। हेडमास्टर ने बच्चों और ग्रामीणों से नशे की हालत में गाली-गलौज की।

वहां मौजूद ग्रामीणों ने हेडमास्टर को समझाया तो कहने लगा फालतू बात नहीं करना। मुझसे बात मत करना। ग्रामीणों ने जब कहा वीडियो कलेक्टर के पास पहुंच जाएगा। इस पर हेडमास्टर धमकाते हुए कहा पटककर मारूंगा। क्या कर लोगे मेरा। ग्रामीणों ने हेडमास्टर का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया।

जानकारी के अनुसार, नशे में धुत हेडमास्टर का नाम हरिनंदन सिंह है। वह रामानुजनगर ब्लॉक के प्राइमरी स्कूल खोरखोरीपारा में हेडमास्टर के पद पर पोस्टेड हैं। सूरजपुर डीईओ ने हेडमास्टर को सस्पेंड कर दिया है।

मामला रामानुजनगर ब्लॉक के खोरखोरीपारा प्राइमरी स्कूल का है। जानकारी के मुताबिक, यहां पदस्थ हेडमास्टर हरिनंदन सिंह गुरुवार (9 जुलाई) को शराब के नशे में लड़खड़ाते हुए स्कूल पहुंचे। स्कूल में वे बच्चों और शिक्षकों से गाली-गलौज कर रहे थे।

इसकी जानकारी जब ग्रामीणों को मिली तो वे स्कूल पहुंच गए। ग्रामीणों को देखते ही हेडमास्टर नशे की हालत में स्कूल परिसर में ही जमीन पर लेट गए।

जब ग्रामीणों ने कहा कि आप स्कूल के हेडमास्टर हैं। बच्चे आपके ऊपर आश्रित हैं और आप स्कूल शराब के नशे में आए हैं। बच्चों पर इसका बुरा असर होगा। इस पर हेडमास्टर ने फालतू बात नहीं करना। मेरे से बात मत करना।

इसी बीच ग्रामीणों ने कहा, वीडियो कलेक्टर को भेज देंगे तो गाली-गलौज करते हुए कहा, पटककर मारूंगा। क्या करोगे मेरा।

ग्रामीणों ने बनाया वीडियो, सोशल मीडिया पर किया वायरल

ग्रामीणों ने नशे की हालत में हेडमास्टर हरिनंदन सिंह का जमीन पर लेटे हुए वीडियो बना लिया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो में हेडमास्टर ठीक से बोल भी नहीं पा रहे थे। वे नशे में बच्चों की चप्पलों पर ही सिर रखकर सो गए थे।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने की जानकारी प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी लता बेक को मिली। इसके बाद उन्होंने रामानुजनगर बीईओ अवधेश कुमार साहू को जांच के लिए स्कूल भेजा। बीईओ ने स्कूल पहुंचकर शिक्षकों और ग्रामीणों के बयान दर्ज किए।

जांच में हेडमास्टर के नशे की हालत में स्कूल आने और बच्चों व शिक्षकों से गाली-गलौज करने की बात सही पाई गई। ग्रामीणों का कहना है कि हरिनंदन सिंह लंबे समय से इस स्कूल में पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी हेडमास्टर के शराब पीकर स्कूल आने की शिकायतें की जा चुकी हैं।

डीईओ ने किया सस्पेंड

बीईओ ने जांच रिपोर्ट तुरंत सूरजपुर डीईओ को भेज दी। रिपोर्ट के आधार पर प्रभारी डीईओ लता बेक ने हेडमास्टर हरिनंदन सिंह को सस्पेंड कर दिया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय बीईओ कार्यालय प्रतापपुर रखा गया है।

प्रभारी डीईओ ने बताया कि शराब के नशे में स्कूल आने वाले शिक्षकों की जानकारी जुटाई जा रही है। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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जांजगीर-चांपा में 3 दिन से लापता बुजुर्ग का शव मिला:घर से नहाने निकले थे, नदी किनारे मिली थी साइकिल, पुलिस ने जांच शुरू की

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जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले में तीन दिन से लापता एक बुजुर्ग का शव गुरुवार को महानदी में मिला। बिर्रा थाना क्षेत्र के बसंतपुर गांव निवासी 64 वर्षीय साहेबलाल पटेल 7 जुलाई से लापता थे। ग्रामीणों की सूचना पर बिर्रा पुलिस मौके पर पहुंची और शव को नदी से बाहर निकलवाया।

पुलिस ने मृतक की पहचान बसंतपुर निवासी साहेबलाल पटेल (64) पुत्र मलेछराम पटेल के रूप में की है। परिजनों ने बताया कि साहेबलाल 7 जुलाई की शाम घर से नहाने के लिए निकले थे। नदी किनारे उनकी साइकिल पड़ी मिली थी, जिसके बाद से परिवार और ग्रामीण लगातार उनकी तलाश कर रहे थे।

गुरुवार को किकिरदा गांव के पास महानदी में एक शव तैरता हुआ दिखाई दिया। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को नदी से बाहर निकाला, जिसकी शिनाख्त परिजनों ने साहेबलाल पटेल के रूप में की।

बिर्रा थाना प्रभारी राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

प्रारंभिक जांच में मौत का कारण पानी में डूबना प्रतीत हो रहा है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।

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