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कोरबा

सुशासन से सशक्त किसान, समृद्ध हो रहा छत्तीसगढ़’:’ट्रैक्टर से जोताई, खेतों में रोपा और कृषक कँवल सिंह का आत्मविश्वास’’

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समय पर खाद-बीज और कृषि आदानों की उपलब्धता से बिना बाधा आगे बढ़ रहा खेती का कार्य’
कोरबा। छत्तीसगढ़ की पहचान केवल अपने प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि खेतों में पसीना बहाने वाले अन्नदाताओं से भी है। बरसात के मौसम में जब गाँवों के खेत ट्रैक्टरों की गूंज से जीवंत हो उठते हैं और किसान नई फसल की तैयारी में जुट जाते हैं, तब ग्रामीण जीवन की वास्तविक तस्वीर सामने आती है। खेतों में जोताई करते किसानों के चेहरों पर दिखने वाली मुस्कान केवल अच्छी पैदावार की उम्मीद नहीं, बल्कि मजबूत कृषि व्यवस्था, समय पर उपलब्ध कृषि आदानों और अपनी उपज के सर्वाधिक समर्थन मूल्य मिलने के विश्वास का भी प्रतीक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में किसानों को कृषि से जुड़ी आवश्यक सुविधाएँ सरल, सुलभ और समयबद्ध रूप से उपलब्ध हो रही हैं, जिससे खेती के प्रति उनका विश्वास और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण समृद्धि निरंतर मजबूत हो रही है।

कोरबा जिले के ग्राम सकदुकला निवासी किसान कँवल सिंह अपने तीन एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करते हैं। इन दिनों वे अपने भतीजे के साथ खेतों में धान की रोपाई के कार्य में पूरी लगन और उत्साह के साथ जुटे हुए हैं। खेत में चल रहे रोपाई कार्य के बीच उनके चेहरे पर आत्मविश्वास और अच्छी फसल की उम्मीद साफ दिखाई देती है। उनका कहना है कि खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार की पहचान और भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी है।

श्री सिंह बताते हैं कि इस वर्ष मानसून समय पर आने से खेतों की जोताई और रोपाई का कार्य भी समय पर शुरू हो गया। इससे खेती का पूरा चक्र व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रहा है। वे मुख्य रूप से धान की खेती करते हैं और इस बार भी बेहतर उत्पादन की उम्मीद के साथ रोपाई का कार्य पूरा कर रहे हैं। परिवार के सदस्य भी खेती के कार्य में उनका पूरा सहयोग कर रहे हैं, जिससे कृषि कार्य समय पर संपन्न हो रहा है।

वे बताते हैं कि खेती के लिए आवश्यक कृषि आदान सामग्री समय पर उपलब्ध होने से इस बार किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। उन्होंने भैंसमा सहकारी समिति से डीएपी, यूरिया, सुपर फॉस्फेट सहित आवश्यक उर्वरक और अन्य कृषि सामग्री आसानी से प्राप्त की। समय पर खाद एवं उर्वरकों की उपलब्धता से खेती की तैयारियाँ बिना किसी रुकावट के पूरी हुईं और फसल की बढ़वार के लिए भी आवश्यक संसाधन सुनिश्चित हो सके।

उन्होंने कहा कि किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात समय पर कृषि संसाधनों की उपलब्धता और उपज का उचित मूल्य है। उनका मानना है कि धान का समर्थन मूल्य, अंतर की राशि का एकमुश्त भुगतान तथा सहकारी समितियों के माध्यम से खाद-बीज की सहज उपलब्धता जैसी व्यवस्थाओं ने किसानों का विश्वास मजबूत किया है। इन सुविधाओं के कारण खेती पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित, सरल और लाभकारी बनी है। वे पूरे विश्वास के साथ कहते हैं कि यदि इसी प्रकार किसानों को समय पर आवश्यक सुविधाएँ मिलती रहें, तो खेती न केवल अधिक समृद्ध होगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी और अधिक सशक्त बनेगी।

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कोरबा

सर्प पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा, विश्व सर्प दिवस पर सर्प संरक्षण पर दिया जोर – जितेंद्र सारथी

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कोरबा। विश्व सर्प दिवस के अवसर पर नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी (वाइल्डलाइफ रेस्क्यू टीम कोरबा) ने आमजन से सर्पों के संरक्षण एवं सह-अस्तित्व का संदेश दिया, संस्था द्वारा वर्षों से वन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर जिले में सर्प संरक्षण, सुरक्षित रेस्क्यू, जन-जागरूकता एवं मानव–सर्प संघर्ष को कम करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।

संस्था के द्वारा अब तक हजारों सर्पों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया है, साथ ही स्कूलों, महाविद्यालयों, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को यह बताया जा रहा है कि अधिकांश सर्प विषहीन होते हैं और बिना कारण किसी पर हमला नहीं करते, भय या अंधविश्वास के कारण सर्पों की हत्या करना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत दंडनीय भी हो सकता है।

सर्प प्रकृति के सबसे महत्वपूर्ण जीवों में से एक हैं, ये खेतों एवं जंगलों में चूहों और अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित करते हैं, जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है तथा खाद्य श्रृंखला एवं पारिस्थितिक संतुलन बना रहता है, यदि सर्पों की संख्या कम हो जाए तो चूहों की आबादी तेजी से बढ़ सकती है, जिससे कृषि, खाद्यान्न भंडारण और मानव स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

कोरबा जिला जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है, विशेष रूप से मध्य भारत (Central India) में किंग कोबरा (King Cobra) की उपस्थिति कोरबा जिले के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है,यह विश्व का सबसे लंबा विषैला सर्प है और इसकी उपस्थिति स्वस्थ एवं समृद्ध वन पारिस्थितिकी का संकेत मानी जाती है, कोरबा वन मंडल एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी संयुक्त रूप से इसके संरक्षण, आवास सुरक्षा, निगरानी तथा जन-जागरूकता के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं, ताकि इस दुर्लभ एवं संरक्षित प्रजाति का प्राकृतिक अस्तित्व सुरक्षित रह सके।

छत्तीसगढ़ में कई प्रजातियों के सर्प पाए जाते हैं, जिनमें अधिकांश विषहीन हैं। प्रमुख विषैले सर्पों में किंग कोबरा, इंडियन कोबरा (नाग), कॉमन करैत, बैंडेड करैत, रसेल्स वाइपर, सॉ-स्केल्ड वाइपर (फुरसा) सहित कुछ अन्य प्रजातियां शामिल हैं, वहीं धामन (Rat Snake), इंडियन रॉक पाइथन (अजगर), चेकर्ड कीलबैक, ब्रॉन्जबैक ट्री स्नेक, सैंड बोआ, कॉमन वुल्फ, कैट स्नेक,कॉमन कुकरी सहित अनेक विषहीन सर्प भी राज्य की जैव विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

वनमंडलाधिकारी कोरबा (DFO) श्रीमती प्रेमलता यादव ने कहा कि सर्प प्रकृति के अभिन्न अंग हैं, वे खेतों एवं जंगलों में चूहों तथा अन्य हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बिना कारण किसी भी सर्प को मारना न केवल जैव विविधता के लिए हानिकारक है, बल्कि कई संरक्षित प्रजातियों को नुकसान पहुंचाना वन्यजीव संरक्षण कानून के अंतर्गत दंडनीय अपराध भी हो सकता है।

वनमंडलाधिकारी कटघोरा DFO कुमार निशांत ने आम नागरिकों से अपील की है कि वर्षा ऋतु में सर्पों का बाहर निकलना प्रकृति का सामान्य व्यवहार है, ऐसे में किसी भी सर्प को देखकर उसे मारने के बजाय स्वयं सुरक्षित रहें और वन विभाग के हेल्प लाइन नंबर 18002331416,8817534455 पर तत्काल सूचना दें, सर्प हमारी जैव विविधता की अमूल्य धरोहर हैं, ये खेतों और जंगलों में हानिकारक जीवों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, एक सर्प की रक्षा, प्रकृति के संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की रक्षा है साथ ही किसी व्यक्ति को सर्पदंश हो जाए, तो झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू उपचार के भरोसे समय बर्बाद न करें बल्कि उस स्थिति में पीड़ित को तुरंत नजदीकी शासकीय अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि समय पर सही उपचार ही जीवन बचा सकता है।

उप वनमंडलाधिकारी दक्षिण (SDO) सूर्यकांत सोनी ने बताया कि कोरबा वन मंडल द्वारा सर्प संरक्षण, सुरक्षित रेस्क्यू, जन-जागरूकता एवं मानव–सर्प संघर्ष को कम करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं, वन विभाग प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमों के माध्यम से सर्पों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने का कार्य कर रहा है।

जितेंद्र सारथी ने कहा कि सर्पों से डरने के बजाय उन्हें समझने की आवश्यकता है, किसी भी घर, कार्यालय या सार्वजनिक स्थान पर सर्प दिखाई देने पर उसे मारने का प्रयास न करें, बल्कि तत्काल वन विभाग अथवा प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें, सुरक्षित रेस्क्यू ही मानव जीवन और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए सबसे उचित समाधान है।

विश्व सर्प दिवस के अवसर पर कोरबा वन मंडल , कटघोरा वन मण्डल एवं नोवा नेचर वेलफेयर सोसायटी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि “सर्प बचेंगे, तभी प्रकृति का संतुलन बचेगा। आइए, भय नहीं बल्कि संरक्षण का संदेश अपनाएं।”

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वेतन भुगतान न होने से भड़के ठेका श्रमिक, SECL गेवरा के श्रमिक चौक पर 6 घंटे जमकर नारेबाजी, 5 दिनों से काम पूरी तरह ठप

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​कोरबा/गेवरा। एसईसीएल (SECL) गेवरा प्रोजेक्ट के अंतर्गत SILO तथा CHP निर्माण कार्य में लगे बंसल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के लगभग 150 ठेका श्रमिकों का आक्रोश फूट पड़ा है। पिछले 5 दिनों से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। जून माह का वेतन (मेहनताना) समय सीमा पर नहीं मिलने से नाराज सैकड़ों श्रमिकों ने आज गेवरा के प्रसिद्ध श्रमिक चौक पर एकत्रित होकर कंपनी प्रबंधन और एसईसीएल के खिलाफ 6 घंटे प्रदर्शन करते हुए जोरदार विरोध किया और जमकर नारेबाजी की ।

​श्रमिकों ने बताया कि करीब दो माह पूर्व उन्होंने अपनी मांगों को लेकर एसईसीएल गेवरा के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) कार्यालय का घेराव किया था, उस दौरान एसईसीएल के एरिया पर्सनल मैनेजर (APM) बंसल कंपनी प्रबंधन और श्रमिकों के बीच यह समझौता हुआ था कि हर महीने की 7 से 10 तारीख के बीच सभी श्रमिकों के वेतन का अनिवार्य रूप से भुगतान कर दिया जाएगा, इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन द्वारा समझौते का उल्लंघन करते हुए इस माह भी समय पर भुगतान नहीं किया गया, जिससे श्रमिकों के समक्ष जीवन-यापन का गहरा संकट खड़ा हो गया है ।

जुलाई-अगस्त खर्चों का भरमार, लेकिन कंपनी प्रबंधन उदासबिन

​श्रमिकों का कहना है कि जुलाई और अगस्त का समय घरेलू और सामाजिक रूप से भारी आर्थिक दबाव का होता है। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई-लिखाई (स्कूल खर्च), कृषि कार्य, बिजली बिल, गैस सिलेंडर और राशन जैसी रोजमर्रा की अनिवार्य आवश्यकताओं के लिए पैसों की सख्त जरूरत होती है, इसके बावजूद कंपनी प्रबंधन मजदूरों की इन मूलभूत समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रहा है और कुंभकर्णी नींद सोया हुआ है ।

जब पेमेंट आएगा तब काम पर आना, प्रबंधन के रवैये से बढ़ा आक्रोश

श्रमिकों के अनुसार चालू माह की 10 तारीख को जब उन्होंने वेतन भुगतान को लेकर बंसल कंपनी प्रबंधन से सीधी चर्चा की थी, तब प्रबंधन ने आश्वासन दिया था कि सोमवार से बुधवार तक शत-प्रतिशत भुगतान हो जाएगा, लेकिन वादे के मुताबिक भुगतान नहीं हुआ। जब श्रमिकों ने पुनः प्रबंधन से संपर्क किया तो जिम्मेदार अधिकारियों ने अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि जब पेमेंट आएगा तब काम में आना, इस दो टूक जवाब के बाद पिछले 5 दिनों से परियोजना का कार्य पूरी तरह बंद है ।

​उग्र आंदोलन की दी चेतावनी, नुकसान की जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी

आज श्रमिक चौक पर हुए आंदोलन सुबह 9 से 3 बजे तक लगभग 6 घंटे प्रदर्शन में श्रमिकों ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि उनके हक की गाढ़ी कमाई का भुगतान तत्काल नहीं किया जाता है, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए विवश होंगे। श्रमिकों ने मुख्य महाप्रबंधक (CGM) को लिखित सूचना पत्र सौंपकर तत्काल मानदेय दिलवाने की मांग की है, साथ ही आग्रह किया है कि इस आंदोलन के कारण परियोजना के कार्य की प्रगति या किसी भी प्रकार की शासकीय संपत्ति व उत्पादन का नुकसान होता है, तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी बंसल इंफ्राटेक प्रबंधन और एसईसीएल प्रबंधन की होगी ।

​इस विरोध प्रदर्शन और मुख्य महाप्रबंधक को सौंपे गए पत्र की प्रतिलिपि स्थानीय थाना प्रभारी (दीपका), सी.आई.एस.एफ. (CISF) गेवरा कमांडेंट और कटघोरा क्षेत्र के विधायक कार्यालय को भी सूचनार्थ प्रेषित की गई है, ताकि इस गंभीर समस्या पर प्रशासन तत्काल संज्ञान ले सके ।

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बंद कमरे से मिला भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट:कोरबा में बदबू फैलने पर ग्रामीणों ने खोला राज, पुलिस-स्वास्थ्य विभाग जांच में जुटा

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कोरबा। कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र के तरदा गांव में एक बंद मकान से तेज दुर्गंध आने के बाद ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। जब ग्रामीणों ने घर के अंदर देखा तो वहां भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट पड़ा मिला। सूचना मिलते ही पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्रामीणों के अनुसार, तरदा गांव का यह मकान कुछ दिन पहले किराए पर लिया गया था। पिछले कई दिनों से घर से लगातार दुर्गंध आ रही थी। गुरुवार को बदबू इतनी अधिक हो गई कि आसपास रहना मुश्किल हो गया। इसके बाद ग्रामीण एकत्र होकर मौके पर पहुंचे और घर खुलवाया।

बदबू से परेशान ग्रामीणों ने खोला मकान

घर के अंदर बड़ी संख्या में इंजेक्शन, सिरिंज, दवाओं की खाली शीशियां और अन्य मेडिकल वेस्ट थैलियों में भरा हुआ मिला। गंदगी और मेडिकल कचरा देखकर ग्रामीणों ने तत्काल उरगा थाना पुलिस को सूचना दी। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और ग्रामीणों ने इसका विरोध भी जताया।

मेडिकल वेस्ट के अस्थायी स्टोरेज की बात आई सामने

प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट के उठाव का ठेका बिलासपुर की एनवायरो केयर कंपनी को मिला हुआ है। कंपनी प्रतिदिन अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट एकत्र कर उसे बिलासपुर के सेंदरी गांव स्थित मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में नष्ट करती है।

कंपनी से जुड़े सूत्रों के अनुसार, तरदा गांव का यह मकान अस्थायी स्टोरेज के रूप में किराए पर लिया गया था। गाड़ी खराब होने या अन्य आपात स्थिति में मेडिकल वेस्ट को यहां रखकर अगले दिन बिलासपुर भेजने की व्यवस्था बनाई गई थी। हालांकि, उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण मेडिकल वेस्ट जमा होता गया और पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल गई।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए जांच के निर्देश

घटना की जानकारी मिलने के बाद जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी ने कहा कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। जांच के लिए टीम भेजी जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पर्यावरण विभाग ने भी मांगी जानकारी

पर्यावरण अधिकारी प्रसन्न सोनकर ने बताया कि मेडिकल वेस्ट को किसी स्थान पर स्टोर करने के लिए पर्यावरण विभाग की अनुमति लेना अनिवार्य है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित कंपनी ने इस स्थान पर मेडिकल वेस्ट रखने के लिए आवश्यक अनुमति ली थी या नहीं।

फिलहाल पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारी पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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