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इजराइल को धमकी देने के बाद ईरानी अफसर की मौत:कहा था- नेतन्याहू के लिए सरप्राइज तैयार, कुछ घंटे बाद एयरस्ट्राइक में मारे गए

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रवक्ता जनरल अली मोहम्मद नैनी की शुक्रवार को हवाई हमले में मौत हो गई। IRGC ने एक बयान जारी कर उनकी मौत की पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नैनी को हालिया हमले में निशाना बनाया गया।

नैनी ने अपने आखिरी बयान में कहा था कि इजराइल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए ‘सरप्राइज’ तैयार है। उन्होंने दावा किया था कि ईरान की मिसाइल क्षमता अपने चरम पर है और दुश्मन को जल्द ही इसका असर देखने को मिलेगा।

नैनी ने यह भी कहा था कि युद्ध के बावजूद ईरान लगातार मिसाइल उत्पादन कर रहा है और उसके पास पर्याप्त भंडार मौजूद है। लेकिन उनका यह बयान सामने आने के कुछ ही घंटों बाद IRGC ने पुष्टि की कि नैनी अमेरिकी-इजराइली हमले में मारे गए।

ईरान ने इस हमले को ‘कायराना’ करार देते हुए कहा कि यह उसके शीर्ष सैन्य नेतृत्व को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा है।

ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इजराइल की एक सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोप ने शुक्रवार को लेबनान के दक्षिणी हिस्से की ओर गोले दागे।

इजराइल की एक सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोप ने शुक्रवार को लेबनान के दक्षिणी हिस्से की ओर गोले दागे।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने गुरुवार को अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को निशाना बनाया था।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने गुरुवार को अमेरिकी F-35 फाइटर जेट को निशाना बनाया था।

ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कई हवाई हमले किए।

ईरान ने गुरुवार रात इजराइल पर कई हवाई हमले किए।

कतर के रास लाफान गैस प्लांट पर गुरुवार को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के दौरान भीषण आग लग गई।

कतर के रास लाफान गैस प्लांट पर गुरुवार को ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले के दौरान भीषण आग लग गई।

इजराइल ने बुधवार को ईरान की पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था।

इजराइल ने बुधवार को ईरान की पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था।

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IAEA की बड़ी चेतावनीः उत्तर कोरिया तेजी से बढ़ा रहा परमाणु हथियार ! नई यूरेनियम फैक्ट्री से टेंशन में दुनिया

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वियना/ऑस्ट्रिया,एजेंसी। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी एजेंसी IAEA की दुनिया के लिए चिंता बढ़ाने वाली एक नई रिपोर्ट सामने आई है।  रिपोर्ट  में बताया गया है कि उत्तर कोरिया (North Korea) अपनी परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को तेजी से बढ़ा रहा है। संयुक्त राष्ट्र की निगरानी एजेंसी IAEA के प्रमुख Rafael Grossi ने कहा है कि उत्तर कोरिया ने इस दिशा में “बहुत गंभीर प्रगति” की है। उन्होंने सियोल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि उत्तर कोरिया के प्रमुख परमाणु केंद्र योंगब्योन परमाणु परिसर (Yongbyon Nuclear Complex) में गतिविधियां काफी बढ़ गई हैं। यहां पांच मेगावाट का रिएक्टर, रीप्रोसेसिंग यूनिट और लाइट वॉटर रिएक्टर सक्रिय हैं। इसके अलावा एक नई इमारत भी देखी गई है, जो यूरेनियम संवर्धन (enrichment) संयंत्र जैसी लगती है।

इस रिपोर्ट को और मजबूती उस समय मिली जब रणनीतिक और अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन केंद्र (Center for Strategic and International Studies) ने सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर बताया कि एक नई संभावित यूरेनियम संवर्धन सुविधा लगभग पूरी हो चुकी है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम का विस्तार कर रहा है। IAEA प्रमुख ने यह भी कहा कि उत्तर कोरिया के पास पहले से ही “कुछ दर्जन” परमाणु हथियार होने का अनुमान है। अब नई गतिविधियों के बाद यह संख्या और बढ़ सकती है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। 

विशेषज्ञों के अनुसार, यूरेनियम संवर्धन परमाणु हथियार बनाने का एक अहम तरीका है। इससे हथियार-ग्रेड सामग्री तैयार की जा सकती है, जो प्लूटोनियम के विकल्प के रूप में भी इस्तेमाल होती है। इसका मतलब है कि उत्तर कोरिया अब परमाणु हथियार बनाने के लिए एक से अधिक रास्तों पर काम कर रहा है। उन्होंने रूस के साथ उत्तर कोरिया के सहयोग पर भी बात की और कहा कि अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है कि रूस की तकनीक सीधे तौर पर उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार कार्यक्रम में इस्तेमाल हो रही है। हालांकि इस मुद्दे पर नजर रखी जा रही है।

इस बीच  IAEA ने उत्तर कोरिया  की परमाणु-संचालित पनडुब्बी बनाने की योजना पर भी चिंता जताई है। एजेंसी का कहना है कि इस तरह की परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले परमाणु ईंधन की निगरानी करना मुश्किल होता है, इसलिए इससे हथियारों के प्रसार का खतरा बढ़ सकता है। IAEA ने दक्षिण कोरिया से इस मामले में सहयोग करने और पारदर्शिता बनाए रखने की अपील की है।  विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की यह बढ़ती परमाणु गतिविधि एशिया में तनाव को और बढ़ा सकती है। इससे न केवल अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ेगी, बल्कि क्षेत्र में हथियारों की होड़ भी तेज हो सकती है।

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तुर्किये के स्कूल में फिर गोलीबारी; 4 लोगो की मौत, 24 घंटे में School shooting की दूसरी घटना

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कहरामनमारस, एजेंसी। तुर्केए के दक्षिणी प्रांत कहरामनमारस (Kahramanmaras) के एक सेकेंडरी स्कूल में बुधवार को हुई गोलीबारी में कम से कम  4 लोगों  की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। स्थानीय गवर्नर Mukerrem Unluer ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा, “दुर्भाग्य से 4 लोगों की मौत हुई है।” मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले में कम से कम छह लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 

यह घटना इसलिए और भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि (Turkey) में स्कूलों में बढ़ती हिंसा ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। इससे ठीक एक दिन पहले भी तुर्किये में एक और स्कूल शूटिंग हुई थी। उस घटना में एक हमलावर ने 16 लोगों को घायल कर दिया था और बाद में खुदकुशी कर ली थी। लगातार दो दिनों में हुई इन घटनाओं ने देश में स्कूल सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल छात्रों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज में डर और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करती हैं।  

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अमेरिकी नाकेबंदी को ठेंगाः होर्मुज पार कर गया ईरान का ब्लैकलिस्ट तेल टैंकर, ट्रैकिंग सिस्टम भी रखे चालू

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तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच  अमेरिका द्वारा ब्लैकलिस्ट एक विशाल क्रूड ऑयल टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद Strait of Hormuz को पार कर सुरक्षित ईरान के तट तक पहुंच गया। ईरान (Iran) के   इस दावे ने अमेरिका (United States) की समुद्री रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

भारत में मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास  के अनुसायह “वेरी लार्ज क्रूड कैरियर (VLCC)” अपनी पूरी यात्रा के दौरान ट्रैकिंग सिस्टम चालू रखे हुए था। ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर  जानकारी देते हुए कहा कि जहाज ने अपनी लोकेशन छिपाने की कोई कोशिश नहीं की और खुलेआम अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र से होकर गुजरा।

दूतावास के मुताबिक, यह सुपरटैंकर लगभग 20 लाख बैरल तक कच्चा तेल ले जाने में सक्षम है। इसके बावजूद अमेरिकी नाकेबंदी इसे रोकने में असफल रही और जहाज बिना किसी नुकसान के अपने गंतव्य तक पहुंच गया। इससे पहले अमेरिका ने दावा किया था कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़ी नाकेबंदी लागू कर दी है। इसके तहत ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जाएगा। इन जहाजों में वो जहाज भी शामिल हैं जिन्होंने ईरान को किसी प्रकार का शुल्क (टोल) दिया है।

अमेरिका का कहना था कि इस नाकेबंदी के जरिए वह ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना चाहता है, क्योंकि ईरान का लगभग 90% अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। ईरान के इस दावे से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह प्रभावी है या उसमें खामियां हैं। अगर एक ब्लैकलिस्टेड जहाज खुले तौर पर इस मार्ग से गुजर सकता है, तो यह अमेरिका की रणनीतिक पकड़ पर बड़ा सवाल है। 

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