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छत्तीसगढ़

कोरिया : जल संरक्षण का कोरिया मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने की सराहना

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कोरिया मॉडल की देशभर में गुंज- प्रधानमंत्री ने बताया जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण

कोरिया का प्रयास बना राष्ट्रीय उदाहरण: जल संरक्षण को जनभागीदारी से सशक्त करना हमारा संकल्प- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

जल संरक्षण का कोरिया मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की सराहना

कोरिया। कोरिया जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देते हुए “कैच द रेन” तथा राज्य शासन के मोर गाव मोर पानी महा अभियान अभियान के अंतर्गत में “आवा पानी झोंकी” अभियान संचालित किया गया। इस पहल ने जल संरक्षण को केवल एक सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर व्यापक जनभागीदारी पर आधारित आंदोलन बना दिया है।

जल संरक्षण का कोरिया मॉडल बना राष्ट्रीय उदाहरण- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने की सराहना

इस अभिनव प्रयास को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान तब मिली, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम “मन की बात” में कोरिया मॉडल की सराहना की और इसे जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय स्तर पर भी इस मॉडल को सराहना प्राप्त हुई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी आर पाटिल द्वारा भी कोरिया मॉडल को अन्य राज्यों में लागू किए जाने योग्य पहल के रूप में उल्लेखित किया गया, जिससे इसकी उपयोगिता और विस्तार की संभावनाएँ स्पष्ट होती हैं।

पृष्ठभूमि

कोरिया जिले में लगभग 1370 मिमी वार्षिक वर्षा होने के बावजूद भू-आकृतिक परिस्थितियों के कारण जल का तीव्र बहाव होता था, जिससे भूजल पुनर्भरण सीमित था। 

कोरिया मॉडल: जन आंदोलन की अवधारणा

“जल संचय जन भागीदारी अभियान” के अंतर्गत लागू 5% मॉडल के तहत किसानों ने अपनी भूमि का 5% भाग छोटी सीढ़ीदार जल संरचनाओं के लिए समर्पित किया साथ ही सोखता गड्ढे और मनरेगा के अंतर्गत  संरचनाएं बनाईं गईं।

सामुदायिक एवं वैज्ञानिक समन्वय

महिलाओं ने नीर नायिका, युवाओं ने जल दूत के रूप में भूमिका निभाई और ग्राम सभाओं के माध्यम से विकेंद्रीकृत योजना को सशक्त बनाया। इससे समुदाय स्वयं कार्यान्वयनकर्ता बना। 

2025 की उपलब्धियाँ (जल पुनर्भरण)

जिले में कुल लगभग 2.8 MCM (28 लाख घन मीटर) जल का भूजल में पुनर्भरण हुआ। यह जल मात्रा लगभग 230–235  (12000 m³/ तालाब) बड़े तालाबों के बराबर और 1800 से अधिक (1500 m³/ डबरी) डबरियों के बराबर है। (गणनाएं मानक वैज्ञानिक मानकों एवं सावधानीपूर्वक किए गए आकलन पर आधारित हैं।)

भूजल स्तर में सुधार

CGWB की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में कोरिया जिले के  भूजल स्तर में 5.41 मीटर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जो इस मॉडल की प्रभावशीलता को दर्शाती है। 

2026 में प्रगति

20,612 से अधिक जल संरक्षण कार्य पूर्ण/प्रगति पर हैं जिनके अंतर्गत 17,229 सामुदायिक कार्य तथा 3,383 मनरेगा आधारित संरचनाएँ शामिल हैं।

कलेक्टर का वक्तव्य

जिला कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा—

“कोरिया मॉडल की सफलता का मूल आधार जनभागीदारी है। जब समाज स्वयं जल संरक्षण का संकल्प लेता है, तो परिणाम स्थायी और व्यापक होते हैं। हमारा प्रयास है कि हर बूंद को संजोकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।”
कोरिया मॉडल यह प्रमाणित करता है कि जब जनभागीदारी,  वैज्ञानिक योजना, शासन और प्रशासनिक नेतृत्व एक साथ कार्य करते हैं, तो जल संरक्षण को एक स्थायी जन आंदोलन में परिवर्तित किया जा सकता है— और यही मॉडल अब राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनाए जाने की दिशा में अग्रसर है।

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कोरबा

कोरबा जिले में तूफानी बारिश का कहर:तीन आदिवासी किशोरों की मौत

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कोरबा/पाली। शाम 04.00 बजते ही मौसम ने अचानक करवट ली। तेज आंधी से चारों तरफ धूल के गुबार दिखाई दे रहे थे, वहीं जिले के कई हिस्सों में बड़े-बड़े पेड़ के डगाल टूट गए। जिले के कई हिस्सों में अंधेरा छा गया और आंधी-तूफान प्रारंभ होते ही बिजली गुल हो गई।

पाली ब्लाक के पहाड़ गांव में आंधी-तूफान ने कहर बरपा दिया। एक बड़े पेड़ का डगाल टूटने से तीन आदिवासी किशोरों की दबने से मौत हो गई। ग्राम पंचायत पहाड़ गांव के आश्रित गांव बाइसेमार के तीन आदिवासी बच्चे कमलेश कुमार, दिनेश तिर्की और शिव टेकाम आंधी-बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे रूक गए। तेज आंधी के कारण पेड़ का डगाल टूट गया, जिससे तीनों बच्चे दब गए। गांव वालों को जानकारी होने पर उन्हें तत्काल सीएचसी पाली ले जाया गया, जहां एक बच्चा तत्काल घटना स्थल पर ही मौत को गले लगा लिया, दो अन्य बच्चे अस्पताल पहुंचते ही दम तोड़ दिया।

इस घटना ने पहाड़ गांव सहित जिले को हिला कर रख दिया। गांव में पसरा सन्नाटा और परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है। सीएचसी में तीनों शव मर्च्युरी में रखा गया है, पुलिस आवश्यक वैधानिक कार्यवाही कर रही है।

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कोरबा

खाद वितरण में पारदर्शिता व नियमों का कड़ाई से पालन करें सुनिश्चित – कलेक्टर कुणाल दुदावत

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सहकारी समिति व निजी उर्वरक विक्रेताओं की बैठक में कलेक्टर ने दिए निर्देश, अवैध जमाखोरी एवं नियम उल्लंघन पर होगी कार्रवाई

शासन द्वारा निर्धारित मात्रा अनुसार किसानों को पूर्ण पारदर्शिता के साथ खाद प्रदान करने के दिए निर्देश

किसानों की सहायता हेतु जिला स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित, हेल्पलाइन नंबर सभी समितियों में प्रदर्शित करने  किया निर्देशित

कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जिले में किसानों को रासायनिक उर्वरकों की सुचारु एवं पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सहकारी समिति प्रबंधकों एवं निजी उर्वरक विक्रेताओं की समीक्षा बैठक लेकर खाद के भंडारण एवं विक्रय संबंधी नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए । उन्होंने किसानों को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्धारित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने हेतु खाद वितरण में पारदर्शिता और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने निर्देशित किया। साथ ही  उर्वरक नियंत्रण आदेशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि किसानों को निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बैठक में बताया गया कि  जिले में खरीफ 2026 के लिए रासायनिक उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है तथा किसानों को आवश्यकता अनुसार खाद उपलब्ध कराने के लिए विभाग सतत निगरानी की जा रही है।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों के भंडारण, परिवहन एवं विक्रय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग एवं जिला स्तरीय उर्वरक नियंत्रण दल द्वारा नियमित एवं आकस्मिक निरीक्षण की जाएगी। निरीक्षण के दौरान पीओएस मशीन में उपलब्ध स्टॉक और वास्तविक भंडार में अंतर, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर विक्रय, बिना लाइसेंस उर्वरक वितरण, अनुदान प्राप्त खाद का दुरुपयोग तथा अनुचित स्थानों पर भंडारण जैसी अनियमितताएं पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर श्री दुदावत ने सभी समिति प्रबंधको को निर्देश देते हुए कहा कि पंजीकृत किसानों से संपर्क  कर उन्हें अग्रिम खाद उठाव के लिए प्रोत्साहित करें तथा खाद वितरण की प्रक्रिया में अपेक्षित गति लाएं। उन्होंने निर्देशित किया कि समितियों में उपलब्ध उर्वरकों का शासन द्वारा निर्धारित मानकों एवं मात्रा के अनुसार किसानों को पूर्ण पारदर्शिता के साथ वितरण किया जाए तथा वितरण व्यवस्था से संबंधित किसी भी प्रकार की शिकायत की स्थिति निर्मित न हो। सभी इसका विशेष ध्यान रखें।

कलेक्टर ने खाद उठाव एवं वितरण कार्य की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश देते हुए कहा कि  किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना सभी संबंधित अधिकारियों एवं प्रबंधकों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।  उन्होंने सभी समिति प्रबंधकों को खाद वितरण एवं उठाव की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार लाने के निर्देश दिए।
बैठक में निजी उर्वरक विक्रेताओं एवं दुकान संचालकों को निर्देशित करते हुए कलेक्टर श्री दुदावत ने स्पष्ट किया कि उर्वरकों के विक्रय में शासन द्वारा निर्धारित नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की अवैध जमाखोरी, कालाबाजारी अथवा अनियमितता पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने किसानों को निर्धारित मात्रा में ही उर्वरक विक्रय करने तथा कृषक पंजी का अनिवार्य रूप से संधारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही निजी विक्रेताओं को किसानों को उर्वरकों के साथ किसी अन्य सामग्री, जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व, रसायन, बीज, कीटनाशक अथवा दवाओं की टैगिंग या दबावपूर्ण बिक्री नहीं की जाएगी। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित विक्रेता का लाइसेंस निरस्त या निलंबित की कार्यवाही की जाएगी। कलेक्टर ने कहा कि सभी निजी उर्वरक विक्रेता अपने प्रतिष्ठानों पर पीओएस  मशीन में दर्ज स्टॉक एवं भौतिक स्टॉक का नियमित मिलान बनाए रखें, जिससे वितरण व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहे तथा किसी प्रकार की विसंगति की स्थिति उत्पन्न न हो।

कलेक्टर ने सहकारी समितियों को खरीफ 2026 के दौरान किसानों को उर्वरक वितरण की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिसमें सीमांत किसानों को पिछले वर्ष वितरित उर्वरक  यूरिया की 80 प्रतिशत एवं डीएपी की 60 प्रतिशत मात्रा एकमुश्त,  लघु किसानों को निर्धारित मात्रा में से यूरिया दो किश्त में तथा बड़े कृषकों को निर्धारित मात्रा में से यूरिया तीन किश्तों में उपलब्ध कराने निर्देशित किया।  जिससे खरीफ सीजन में खाद की उपलब्धता बनी रहे।
बैठक में किसानों की सुविधा एवं शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। कलेक्टर श्री दुदावत ने निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम के हेल्पलाइन नंबर का प्रदर्शन सभी सहकारी समितियों एवं संबंधित संस्थानों में प्रमुखता से किया जाए, ताकि किसानों को आवश्यक जानकारी एवं सहायता समय पर प्राप्त हो सके।  समितियों को धान खरीदी वर्ष 2025-26 के लिए पंजीकृत, किसान पुस्तिका तथा भू-अधिकार पुस्तिका धारक किसानों की यूआरडी सूची से शत-प्रतिशत आधार सीडिंग सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही समितियों के गोदामों में उपलब्ध उर्वरक की जानकारी संबंधित समितियों में प्रदर्शित करने को कहा गया।
इस अवसर पर उप संचालक कृषि डी पी एस कंवर, उप पंजीयक सहकारी संस्थान एम मिंज, डीएमओ ऋतुराज देवांगन, सहायक नोडल सहकारी केंद्रीय बैंक मुकेश कुमार पटेल  सहित सभी सहकारी समिति प्रबंधक एवं निजी खाद विक्रेता एवं अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

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कोरबा

रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा निलंबित

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कोरबा। कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), बिलासपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीबी/ईओडब्ल्यू इकाई बिलासपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के अंतर्गत दर्ज अपराध क्रमांक 0/2026 की कार्रवाई में कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा को 29 मई 2026 को प्रार्थी अमृत बघेल से 40,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी मिश्रा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा द्वारा यह माना गया कि उनका यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत है।
फलस्वरूप, प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, कटघोरा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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