कोरबा/पाली। कोरबा जिले में कुछ व्यक्तित्व ऐसे हैं, जो असंभव को भी संभव करने की जिद्द रखते हैं और क्षमता से अधिक कर दिखाते हैं। ऐसे लोग समाज का आईना होते हैं और समाज को नई दिशा देने के लिए प्रेरित ही नहीं करते, खुद प्रेरणा बन जाते हैं। कोरबा जिले के पाली ब्लाक मुख्यालय में स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल के निदेशक डॉ. गजेन्द्र तिवारी एक विद्वत व्यक्तित्व हैं और अपना पूरा जीवन शिक्षा को समर्पित कर रहे हैं और कम फीस में क्षेत्र के बच्चों को उत्कृष्ठ शिक्षा छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल के माध्यम से दे रहे हैं। डॉ. गजेन्द्र तिवारी अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना तिवारी और पुत्र सौर्य सहित भरापूरा परिवार के साथ सादगी से जीवन यापन करते हुए शिक्षा और समाजसेवा को अपना ध्येय बनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाने में लगे हुए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर होता है और एक सामान्य जीवन असामान्य हो जाता है। डॉ. गजेन्द्र तिवारी के खुशहाल जीवन में एक ऐसा आघात लगा, कि वे टूट से गए। 21 अप्रैल 2021 को डॉ. गजेन्द्र तिवारी के लिए काला दिन साबित हुआ। 21 अप्रैल 2021 से पूर्व मार्निंगवाक के लिए अपनी धर्मपत्नी श्रीमती कल्पना के साथ निकले थे, कि सड़क किनारे चल रहीं श्रीमती कल्पना तिवारी को एक वाहन ने ठोकर मारकर आगे बढ़ गया। श्रीमती तिवारी का ईलाज हुआ और वह स्वस्थ भी हो गई, लेकिन 21 अप्रैल को घर में काम करते-करते सीने में दर्द हुआ और कुछ ही मिनटों में हृदयाघात से उनका निधन हो गया। श्रीमती कल्पना तिवारी के बिना डॉ. गजेन्द्र तिवारी अधूरे से हो गए, लेकिन हिम्मत नहीं हारा और अपनी धर्मपत्नी की प्रेरणा को ही सम्बल बना लिया। स्व. श्रीमती कल्पना तिवारी की पे्ररणा से वे अपने विद्यालय में नि:शुल्क कन्या शिक्षा योजना की शुरूआत की और आज 05 साल से संसाधन के अभाव में भी बालिका नि:शुल्क शिक्षा को आगे बढ़ा रहे हैं। डॉ. गजेन्द्र तिवारी की इस पहल से पाली ब्लाक की निर्धन बालिकाएं बेहतर शिक्षा ग्रहण कर आगे अपने जीवन को स्वर्णीम बनाने में लगी हुई हैं। नि:शुल्क बालिका शिक्षा योजना अनवरत रखने वाले डॉ. गजेन्द्र तिवारी से खास बातचीत के कुछ अंश-
प्रश्न 1. आदिवासी क्षेत्रों में निशुल्क बालिका शिक्षा शुरू करने का विचार आपको कैसे आया? उत्तर: आदिवासी क्षेत्रों में भ्रमण के दौरान मैंने देखा कि अनेक प्रतिभाशाली बालिकाएँ आर्थिक अभाव के कारण शिक्षा से वंचित रह जाती हैं। यह स्थिति मेरे लिए चिंताजनक थी। तभी यह संकल्प लिया कि बेटियों को शिक्षा से जोड़ने के लिए निशुल्क बालिका शिक्षा अभियान चलाया जाए। प्रश्न 2. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है? उत्तर: हमारा उद्देश्य है कि कोई भी बालिका केवल आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे। हम उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य के अवसर प्रदान करना चाहते हैं। प्रश्न 3. आदिवासी क्षेत्रों में बालिका शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या हैं? उत्तर: आर्थिक कमजोरी, जागरूकता की कमी, विद्यालयों की दूरी, सामाजिक रूढ़ियाँ तथा प्रारंभिक अवस्था में पढ़ाई छोड़ देना प्रमुख चुनौतियाँ हैं। प्रश्न 4. आपके विद्यालय में कितनी बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा का लाभ दिया जा रहा है? उत्तर: हमारे विद्यालय में प्रतिवर्ष चयनित बालिकाओं को निशुल्क शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाती है। हम इस संख्या को निरंतर बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक बेटियाँ लाभान्वित हो सकें। प्रश्न 5. क्या इस योजना में केवल शुल्क माफी है या अन्य सुविधाएँ भी प्रदान की जाती हैं? उत्तर: शुल्क माफी के साथ-साथ शैक्षणिक मार्गदर्शन, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सहभागिता और व्यक्तित्व विकास के अवसर भी उपलब्ध कराए जाते हैं। प्रश्न 6. ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की इस पहल के प्रति क्या प्रतिक्रिया रही है? उत्तर: परिवारों ने इस पहल का स्वागत किया है। अब अभिभावक अपनी बेटियों को विद्यालय भेजने के प्रति अधिक उत्साहित और जागरूक दिखाई देते हैं। प्रश्न 7. बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने में समाज की क्या भूमिका होनी चाहिए? उत्तर: समाज को बेटा-बेटी में भेदभाव समाप्त कर शिक्षा को समान अवसर के रूप में स्वीकार करना चाहिए। सामाजिक सहयोग से ही शिक्षा का वास्तविक विस्तार संभव है। प्रश्न 8. क्या आर्थिक अभाव के कारण पढ़ाई छोड़ने वाली बालिकाओं की संख्या में कमी आई है? उत्तर: हाँ, हमारी पहल के बाद कई बालिकाएँ पुनः शिक्षा से जुड़ी हैं और विद्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति में सकारात्मक कमी देखने को मिली है। प्रश्न 9. आदिवासी बालिकाओं की शिक्षा और सशक्तिकरण के लिए भविष्य में आपकी क्या योजनाएँ हैं? उत्तर: हम छात्रवृत्ति, कैरियर मार्गदर्शन, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास कार्यक्रमों को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। प्रश्न 10. सरकार और निजी शिक्षण संस्थानों को इस दिशा में क्या कदम उठाने चाहिए? उत्तर: अधिक छात्रवृत्तियाँ, बेहतर शैक्षणिक सुविधाएँ, जागरूकता अभियान तथा बालिका शिक्षा के लिए विशेष सहयोगात्मक योजनाएँ संचालित की जानी चाहिए। प्रश्न 11. कोई ऐसी सफलता की कहानी बताइए जिसने आपको प्रेरित किया हो। उत्तर: कई बालिकाएँ जो कभी आर्थिक कठिनाइयों के कारण पढ़ाई छोड़ने की स्थिति में थीं, आज उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। उनकी सफलता हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है। प्रश्न 12. शिक्षा प्राप्त करने के बाद बालिकाओं के जीवन में क्या परिवर्तन देखने को मिले हैं? उत्तर: उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है, निर्णय लेने की क्षमता विकसित हुई है और वे अपने परिवार तथा समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। प्रश्न 13. आप बालिका शिक्षा को समाज के विकास से किस प्रकार जोड़ते हैं? उत्तर: एक शिक्षित बालिका केवल स्वयं शिक्षित नहीं होती, बल्कि वह पूरे परिवार और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षित और जागरूक बनाती है। प्रश्न 14. जो अभिभावक आज भी बेटियों की शिक्षा को महत्व नहीं देते, उन्हें आप क्या संदेश देना चाहेंगे? उत्तर: बेटी को शिक्षा देना सबसे बड़ा निवेश है। शिक्षित बेटी परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास की मजबूत आधारशिला बनती है। प्रश्न 15. आपकी दृष्टि में शिक्षित बालिका आदिवासी समाज के भविष्य को कैसे बदल सकती है? उत्तर: शिक्षित बालिका सामाजिक जागरूकता, आर्थिक आत्मनिर्भरता और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। प्रश्न 16. आगामी पाँच वर्षों में बालिका शिक्षा को लेकर आपका सपना क्या है? उत्तर: मेरा सपना है कि हमारे क्षेत्र की कोई भी बालिका शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक बेटी को अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले। प्रश्न 17. देश के अन्य विद्यालयों और संस्थानों को आप क्या संदेश देना चाहेंगे? उत्तर: शिक्षा को सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व के रूप में देखें। यदि प्रत्येक संस्था कुछ बालिकाओं की शिक्षा का दायित्व ले, तो बड़ा परिवर्तन संभव है। प्रश्न 18. शिक्षा के क्षेत्र में आपका अगला बड़ा लक्ष्य क्या है? उत्तर: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, डिजिटल सशक्तिकरण, बालिका शिक्षा का विस्तार तथा आदिवासी अंचलों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना मेरा प्रमुख लक्ष्य है। निदेशक का संदेश – डॉ. गजेंद्र तिवारी “जब एक बेटी शिक्षित होती है, तब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा परिवार, समाज और राष्ट्र प्रगति की ओर अग्रसर होता है। हमारी कोशिश है कि शिक्षा का प्रकाश अंतिम पंक्ति में खड़ी बालिका तक पहुँचे।”
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में तीज पर्व पर मायके जाने की तैयारी कर रही महिलाओं और दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जाएगा।
इसके चलते 13 और 14 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, गेवरा रोड और इतवारी के बीच चलने वाली 10 ट्रेनें रद्द रहेंगी। वहीं 2 मेमू ट्रेनों का परिचालन बिलासपुर तक सीमित रहेगा। रेलवे के मुताबिक यह काम उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना के तहत उरकुरा स्टेशन के यार्ड रीमॉडलिंग के लिए किया जा रहा है।
यात्रियों के लिए जरूरी बात
तीजा पर्व के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार मायके आने-जाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में 13 और 14 सितंबर को यात्रा से पहले ट्रेन नंबर जरूर चेक कर लें। रद्द ट्रेन से यात्रा की योजना है तो वैकल्पिक ट्रेन या बस की व्यवस्था पहले कर लेना बेहतर होगा।
कोरबा/बालको नगर। बालको में सितंबर 2008 बैच के कर्मचारियों ने 18 वर्षों की सेवा पूरी होने पर वार्षिक मिलन समारोह का आयोजन किया। समारोह में बैच के 35 कर्मियों ने हिस्सा लिया और अपने बालको में बिताए 18 साल के अनुभव साझा किए। उपलब्धियां और चुनौतियों को सामने रखा। बालको कर्मियों ने अपने सेवाकाल के कई यादगार किस्से सुनाए। पुराने साथियों से मिलकर माहौल उत्साह से भरा रहा।
इस आयोजन से कर्मियों के बीच आपसी स्नेह, सौहार्द, भाईचारा, एकजुटता मजबूत हुई। समारोह में राजशेखर साहू, गगन गुप्ता, टिकेश्वर चेलक, अमित शर्मा, कमलेश बोहरपी, ज्ञानेंद्र, सुमन यादव, देवेंद्र प्रताप, सुमित सोनी, कुंदन, आशीष शुक्ला, आशीष दुबे, मधुरेश श्रीवास्तव, संजय न नारवानी, जितेंद्र द्विवेदी, अभिषेक साहू, दुर्गेश साहू, पूर्णानंद साहू, केशव साहू, हेमंत वर्मा, अरविंद, विकास गुरुदीवान, लेखराज लोधी, प्रकाश ठाकुर, प्रकाश रघुवंशी समेत अन्य उपस्थित थे।
कोरबा/कटघोरा। पेट्रोल-डीजल से भरे टैंकर में गुरुवार को आग की लपटें उठी तो विस्फोट की आशंका पर आसपास घरों को खाली कराया गया। हालांकि समय रहते आग पर काबू पा लेने से बड़ा हादसा टल गया। लेकिन कटघोरा- अंबिकापुर हाइवे पर लगभग 2 घंटे आवाजाही थमी रही।
कोरबा से तेल से भरी टैंकर कटघोरा-अंबिकापुर नेशनल हाइवे के रास्ते से वाड्रफनगर जाने रवाना हुआ। बांगो थाना क्षेत्र के गुरसिया ढाबा के पास टैंकर चालक ने खाना खाने वाहन रोका। कुछ देर बाद वहां से चालक आगे बढ़ने टैंकर स्टार्ट किया, तभी बैटरी में चिंगारी उठी और केबिन तक आग की लपटें उठने लगी। संभवत: शार्ट सर्किट से आग वाहन तक फैली होगी। टैंकर में 12 हजार लीटर तेल भरने की कैपिसिटी है। सूचना पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। हाइवे पर आवाजाही को रोकवाया। साथ ही आसपास के घरों को खाली कराया गया। इस तरह सुरक्षा के जरूरी ऐहतियात बरते गए।
सूचना पर बांगो, कटघोरा नगर पालिका, सीएसईबी कोरबा की दमकल टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद दमकल कर्मियों ने पानी और फोम से आग बुझाई। इसमें करीब दो घंटे लग गए। आग पर काबू पा लेने के बाद हाइवे पर आवाजाही सामान्य हुई। एनएएआई की टीम को सूचना देने के बाद भी मौके पर नहीं पहुंची। कटघोरा-अंबिकापुर हाइवे के साथ बायपास पर दो साल के भीतर वाहनों में आग लगने की यह तीसरी घटना है। इसी महीने कटघोरा-बायपास के हुकरा क्षेत्र में एक तेज रफ्तार 407 वाहन रोड किनारे पेड़ से टकराया। इसके बाद वाहन में आग लगने की घटना सामने आई। चालक ने कूदकर अपनी जान बचाई थी। साल 2024 में 28-29 दिसंबर की रात अंबिकापुर-कटघोरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बांगो थाना क्षेत्र के चोटिया टोल प्लाजा के पास ट्रक और कार में भिड़ंत हो गई थी। इस दुर्घटना में ट्रक पलट गया, वहीं कार सवार दो युवकों की वाहन में आग लगने पर जलकर मौत हो गई।