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छत्तीसगढ़

रायपुर : नवरात्रि पर जेलों में आध्यात्मिक माहौल, बंदियों को मिली विशेष सुविधाएं

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धार्मिक आस्था के अनुरूप उपवास एवं पूजा-अर्चना हेतु की गई व्यवस्था

नवरात्रि पर जेलों में आध्यात्मिक माहौल, बंदियों को मिली विशेष सुविधाएं

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सभी जेलों में नवरात्रि पर्व को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर परिरुद्ध बंदियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं, जिससे वे धार्मिक आस्था के अनुरूप उपवास एवं पूजा-अर्चना कर सकें।

         प्रदेश की जेलों में कुल 2397 बंदी नवरात्रि का उपवास कर रहे हैं, जिनमें 2125 पुरुष एवं 272 महिला बंदी शामिल हैं। यह आंकड़ा न केवल आस्था की गहराई को दर्शाता है, बल्कि जेलों में सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण के सृजन का भी परिचायक है। इसमें रायपुर संभाग के 1140 बंदी, दुर्ग संभाग में 243 बंदी, बिलासपुर संभाग में 407 बंदी, सरगुजा संभाग में 361 बंदी, बस्तर संभाग में 246 बंदी अपनी आस्था अनुसार उपवास का पालन कर रहे हैं।

       नवरात्रि के दौरान जेल प्रशासन द्वारा बंदियों को फलाहार, स्वच्छ पेयजल, पूजा सामग्री एवं निर्धारित समय पर आरती-पूजन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही, धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों के मनोबल को सुदृढ़ करने और उनमें सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। यह पहल न केवल बंदियों की धार्मिक आस्था का सम्मान है, बल्कि उनके मानसिक एवं आध्यात्मिक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। 

        विगत दिनों विधानसभा में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया था कि जेलों को अब सजा घर नहीं बल्कि सुधार एवं पुनर्वास गृह के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिसमें उन्हें विभिन्न कलाओं को सिखाकर आत्मनिर्भर बनाने के साथ समाज से जोड़ने और बेहतर जीवन के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : विशेष-लेख : बाल विवाह के खिलाफ छत्तीसगढ़ की निर्णायक लड़ाई

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हजारों पंचायतों की बदली तस्वीर

बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान बन रहा सामाजिक बदलाव की मिसाल

  •   डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर, उप संचालक, जनसंपर्क संचालनालय
बाल विवाह के खिलाफ छत्तीसगढ़ की निर्णायक लड़ाई

छत्तीसगढ़ में बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान को केंद्र में रखकर शुरू किया गया बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब सामाजिक बदलाव की बड़ी मिसाल बनती जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस अभियान को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखते हुए जनभागीदारी का व्यापक आंदोलन बना दिया है। गांव-गांव में जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के जरिए बाल विवाह जैसी कुरीति पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में लगातार ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं। 10 मार्च 2024 से शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ बाल विवाह रोकना नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना भी है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षक, मितानिनें और महिला स्व-सहायता समूह लगातार जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करने में जुटे हुए हैं। यही वजह है कि अभियान अब प्रशासनिक कार्यक्रम से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना का हिस्सा बनता दिखाई दे रहा है।

राज्य सरकार ने वर्ष 2028-29 तक पूरे छत्तीसगढ़ को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। चरणबद्ध योजना के तहत 2025-26 तक 40 प्रतिशत, 2026-27 तक 60 प्रतिशत, 2027-28 तक 80 प्रतिशत और 2028-29 तक सभी ग्राम पंचायतों तथा नगरीय निकायों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने की तैयारी है। अभियान की प्रगति भी उत्साहजनक रही है। 

31 मार्च 2026 तक राज्य की 11 हजार 693 ग्राम पंचायतों में से 7 हजार 498 पंचायतें बाल विवाह मुक्त घोषित की जा चुकी हैं, जो कुल पंचायतों का लगभग 64 प्रतिशत है। वहीं 196 नगरीय निकायों में से 85 निकाय इस श्रेणी में शामिल हो चुके हैं।

राज्य के बालोद जिले ने इस दिशा में सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए खुद को पूर्णतः बाल विवाह मुक्त घोषित कराया है। प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों से मिली यह सफलता अब दूसरे जिलों के लिए प्रेरणा बन रही है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लगातार यह संदेश दे रहे हैं कि विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियां ही होंगी। इसी सोच के साथ सरकार बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू कर रही है। 

कम उम्र में विवाह होने से बालिकाओं की पढ़ाई प्रभावित होती है, स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ते हैं और उनके भविष्य की संभावनाएं सीमित हो जाती हैं। यही कारण है कि अभियान के तहत किशोरियों और अभिभावकों को लगातार जागरूक किया जा रहा है ताकि समाज में स्थायी बदलाव लाया जा सके।

पंचायत आधारित जनभागीदारी, सतत निगरानी और सामाजिक जागरूकता के प्रभावी मॉडल के कारण बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। राज्य सरकार का यह प्रयास केवल एक सामाजिक कुरीति को समाप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बेटियों के सम्मान और सशक्तिकरण का व्यापक संकल्प बनकर उभर रहा है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर छत्तीसगढ़ का ऐतिहासिक कदम

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महिलाओं के नेतृत्व में संचालित होगी ‘द्वीप्ति योजना’

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा क्षेत्र में सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक युगांतकारी निर्णय लिया है। राज्य शासन द्वारा वर्ष 2026 से 2031 तक की अवधि के लिए महत्वाकांक्षी ‘द्वीप्ति योजना’ को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। यह योजना प्रदेश में न केवल नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार करेगी, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा संपत्तियों की स्वामी, संचालक और तकनीकी प्रबंधक के रूप में नई पहचान दिलाएगी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में महिला नेतृत्व आधारित हरित ऊर्जा क्रांति का सूत्रपात करना है।

‘सोलर दीदी’ ग्रामीण ऊर्जा परिवर्तन का चेहरा

         योजना के तहत ग्राम स्तर पर ‘सोलर दीदी’ (ऊर्जा सखी) का एक समर्पित कैडर तैयार किया जाएगा। चयनित महिलाओं को सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना, संचालन और तकनीकी रखरखाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रशिक्षित सोलर दीदी गांव स्तर पर सोलर मिल, कोल्ड स्टोरेज, सिंचाई प्रणालियों और अन्य सौर संपत्तियों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगी। यह पहल दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में तकनीकी खराबी की समस्या का स्थायी समाधान बनेगी, जिससे ग्रामीण अधोसंरचना हमेशा क्रियाशील रहेगी।

 कलस्टर लेवल फेडरेशन CLF बनेंगे ‘महिला ऊर्जा सहकारी समितियां’

        योजना के अंतर्गत क्लस्टर लेवल फेडरेशन को सशक्त बनाकर उन्हें महिला नेतृत्व वाली ऊर्जा सहकारी समितियों के रूप में रूपांतरित किया जाएगा। ये समितियां सामूहिक रूप से ऊर्जा संपत्तियों का प्रबंधन करेंगी। इन्हें प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अधिकृत विक्रेता और चौनल पार्टनर के रूप में जोड़ा जा रहा है। महासमुंद और बस्तर जिले के CLF पहले ही विक्रेता के रूप में पंजीकृत हो चुके हैं। राज्य स्तर पर उपकरणों की थोक खरीद से लागत कम होगी, जबकि स्थानीय स्तर पर सोलर दीदी बिक्री और सर्विसिंग का कार्य संभालेंगी।

सस्ती ऊर्जा हेतु अभिनव भुगतान मॉडल

         ग्रामीण उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए ‘द्वीप्ति योजना’ में ‘पे-पर-यूज़’ (Pay-per-Use) और ‘पे-एज़-यू-गो’ (Pay-as-you-go) मॉडल अपनाए गए हैं। इसके तहत उपभोक्ताओं को केवल उपयोग की गई ऊर्जा का ही भुगतान करना होगा। महिला ऊर्जा उद्यमों की आर्थिक मजबूती के लिए शासन ने पंचायतों के रखरखाव अनुबंधों में 25 प्रतिशत कार्य विशेष रूप से इन समितियों के लिए आरक्षित रखने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

‘बिहान’ नेटवर्क और तकनीकी समन्वय

          योजना का प्रारूप ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया  के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया है। इसका व्यापक क्रियान्वयन राज्य के प्रसिद्ध ‘बिहान’ नेटवर्क के माध्यम से किया जाएगा। इसमें प्रदेश के लगभग 2.7 लाख स्व-सहायता समूहों की सक्रिय भागीदारी होगी। यह मॉडल न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देगा, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आजीविका और नेतृत्व के नए द्वार खोलेगा। ‘द्वीप्ति योजना’ छत्तीसगढ़ को महिला नेतृत्व आधारित ‘हरित विकास मॉडल’ (Green Development Model) के रूप में राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दिलाने वाली दूरदर्शी पहल साबित होगी।

          “छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में हमारी मातृशक्ति का योगदान सदैव अनुकरणीय रहा है। ‘द्वीप्ति योजना’ के माध्यम से हम राज्य की ग्रामीण महिलाओं को ऊर्जा के क्षेत्र में ‘उपभोक्ता’ से ‘स्वामी’ और ‘प्रबंधक’ बनाने जा रहे हैं। यह योजना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘नेट जीरो’ और ‘हरित भारत’ के संकल्प को पूरा करने में छत्तीसगढ़ की एक बड़ी भागीदारी है।

           हमारी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर गांव ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बने और इस बदलाव का नेतृत्व हमारी ‘सोलर दीदियाँ’ करें। जब ग्रामीण महिलाएं आधुनिक ऊर्जा प्रणालियों का प्रबंधन खुद संभालेंगी, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण विकास को एक स्थायी और स्वच्छ आधार मिलेगा। ‘द्वीप्ति योजना’ विकसित छत्तीसगढ़ की ओर हमारा एक और मजबूत कदम है।”

विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

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कोरबा

कोरबा में सड़क हादसों में दो की मौत,पांच घायल:कहीं बाइक ने मारी टक्कर,तो कहीं तेज रफ़्तार कार ने स्कूटी को ठोका

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कोरबा। कोरबा जिले में गुरुवार रात से शुक्रवार तक तीन अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हो गए। सभी हादसे तेज रफ्तार के कारण हुए। घायलों का उपचार जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल में चल रहा है।

पहली घटना सीएसईबी चौकी क्षेत्र के कोहड़िया मुख्य मार्ग पर गुरुवार रात करीब 9 बजे हुई। छतराम दोन्द्रो (48)अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। उनकी बाइक एक यात्री बस से टकरा गई, जिससे छतराम गंभीर रूप से घायल हो गए।

हॉस्पिटल के बहार रिलेटिव्स की भीड़

हॉस्पिटल के बहार रिलेटिव्स की भीड़

डॉक्टर्स ने घायल को मृत घोषित कर दिया गया

उन्हें तत्काल जिला मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। जिला अस्पताल चौकी पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया। रिलेटिव ने बताया कि छतराम राजमिस्त्री का काम करते थे और परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।

दूसरी घटना

शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे सीएसईबी चौकी क्षेत्र के अप्पू गार्डन के पास हुई। एक तेज रफ्तार कार ने पहले एक्टिवा सवार दो युवतियों पूजा कंवर और किरण वैष्णो को टक्कर मार दी। दोनों कोरबा निवासी हैं और किसी काम से जा रही थीं। टक्कर से वे सड़क पर गिरकर घायल हो गईं और एक्टिवा क्षतिग्रस्त हो गई।

इसके बाद, उसी कार ने एक बाइक सवार को भी चपेट में ले लिया। इस हादसे में कुल चार लोग घायल हुए, जिनमें से दो को गंभीर चोटें आई हैं। कार चालक मौके से फरार हो गया।

तीसरी घटना

कटघोरा थाना क्षेत्र के जेन्जरा मुख्य मार्ग पर हुई। पतरापाली निवासी परदेसी राम (60) साइकिल से जा रहे थे, तभी बाइक सवार प्रताप कंवर ने उन्हें टक्कर मार दी।

घायल परदेसी राम को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस हादसे में बाइक सवार प्रताप कंवर भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

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