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छत्तीसगढ़

सुकमा : भटके कदमों को नई दिशा: सुकमा में पुनर्वास से विकास की कहानी लिख रही है सरकार

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद

मोबाइल, आवास की चाबी और नियुक्ति पत्र का वितरण, ‘पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद

सुकमा। नक्सल आतंक से लंबे समय तक प्रभावित रहे सुकमा में अब शांति, विश्वास और विकास की नई तस्वीर उभर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां संचालित पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित लोगों से आत्मीय संवाद कर उनके अनुभव जाने और उन्हें मुख्यधारा से जुड़कर नया जीवन प्रारंभ करने के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हमारी सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और आगे बढ़ने के समान अवसर देने के लिए दृढ़संकल्पित है। उन्होंने कहा कि पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने पुनर्वास केंद्र का किया अवलोकन, पुनर्वासितों से किया आत्मीय संवाद

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की प्रभावी नक्सल पुनर्वास नीति के चलते सुकमा सहित बस्तर क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है, जिनमें से 361 पुनर्वासितों ने नया जीवन प्रारंभ कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि इन नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, स्थायी रोजगार और समाज में बराबरी का अवसर प्रदान करना है। पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, कपड़ा सिलाई, कृषि उद्यमिता और वाहन चालक जैसे विभिन्न ट्रेडों में कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है, वहीं मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह 10 हजार रुपये का स्टाइपेंड भी प्रदान किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए गए हैं, जिससे वे डिजिटल और संचार माध्यमों से जुड़कर आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें। विशेष रूप से 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल प्रस्तुत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री श्री साय  ने कहा कि नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी राहत प्रदान करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के तहत पुलिस विभाग में 20 तथा जिला प्रशासन द्वारा 95 लोगों को शासकीय सेवा में रोजगार के अवसर दिए गए हैं। 

कार्यक्रम के दौरान ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना, नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला सहित अन्य हितग्राहियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके अतिरिक्त शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री साय ने पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल, राजमिस्त्री किट, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबियां तथा पूर्णता प्रमाण पत्र वितरित किए।  इस अवसर पर 25 हितग्राहियों को आवास की चाबी सौंपकर उन्हें सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री ने नक्सल पुनर्वास की सफलता की प्रेरणादायक कहानियों को दर्शाती ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। साथ ही, पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर महेश कश्यप  सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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कोरबा

तड़के मानिकपुर खदान पहुँचे एसईसीएल सीएमडी हरीश दुहन, उत्पादन, गुणवत्ता एवं मानसून तैयारियों की ली विस्तृत समीक्षा

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कोरबा। साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के सीएमडी हरीश दुहन ने आज प्रातः 6 बजे कोरबा क्षेत्र का विस्तृत दौरा कर मानिकपुर ओपनकास्ट परियोजना सहित विभिन्न परिचालन गतिविधियों का निरीक्षण किया। दौरे के दौरान उन्होंने उत्पादन, उत्पादकता, गुणवत्ता प्रबंधन एवं मानसून पूर्व तैयारियों की गहन समीक्षा की।

मानिकपुर परियोजना में निरीक्षण के दौरान श्री दुहन ने खदान में संचालित उत्पादन कार्यों, मशीनों की कार्यक्षमता तथा गुणवत्ता मानकों का स्थल पर जाकर विस्तृत मूल्यांकन किया। उन्होंने मानसून को ध्यान में रखते हुए जल निकासी व्यवस्था, हॉल रोड की स्थिति, मशीनों की उपलब्धता, सुरक्षा प्रबंधन एवं परिचालन तैयारियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को सभी व्यवस्थाएँ समयबद्ध एवं प्रभावी रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि वर्षा ऋतु के दौरान उत्पादन गतिविधियाँ निर्बाध रूप से संचालित होती रहें।

सीएमडी श्री दुहन ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों से संवाद करते हुए बेहतर समन्वय, सतर्कता एवं कार्यकुशलता के साथ कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन एसईसीएल की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है तथा परिचालन दक्षता बनाए रखते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करना आवश्यक है।

दौरे के पश्चात टीम कोरबा के साथ आयोजित विस्तृत समीक्षा बैठक में आगामी उत्पादन लक्ष्य, मानसून रणनीति, परिचालन योजनाओं तथा उत्पादकता वृद्धि से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। बैठक में संसाधनों के प्रभावी उपयोग, योजनाबद्ध कार्यप्रणाली तथा टीम भावना के साथ कार्य करते हुए निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

इस अवसर पर जे. एकाम्बरम, महाप्रबंधक (खनन) / स्टाफ अधिकारी, मानिकपुर एवं कार्यवाहक एजीएम, यू. एन. झा, महाप्रबंधक (ऑपरेशन) सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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कोरबा

एसईसीएल मुख्यालय में “समर कैंप 2026” का शुभारंभ

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बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु 21 दिवसीय रचनात्मक एवं शिक्षाप्रद पहल

बिलासपुर/कोरबा। साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) द्वारा कर्मचारियों के बच्चों के लिए आयोजित बहुप्रतीक्षित “एसईसीएल समर कैंप 2026” का शुभारंभ  एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में उत्साहपूर्ण एवं गरिमामय वातावरण में किया गया। एसईसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया।

डीएवी पब्लिक स्कूल, एसईसीएल वसंत विहार, बिलासपुर में आयोजित उद्घाटन समारोह के साथ “21 डेज़ ऑफ फन, फिटनेस एंड लर्निंग” थीम पर आधारित इस 21 दिवसीय समर कैंप की शुरुआत हुई। यह कैंप 18 मई 2026 से 10 जून 2026 तक एसईसीएल के विभिन्न संचालन क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा।

इस अवसर पर एसईसीएल मुख्यालय के विभागाध्यक्षगण, जेसीसी प्रतिनिधि, वेलफेयर कमेटी, एससी/एसटी काउंसिल तथा सिस्टा/ओबीसी एसोसिएशन के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

अपने संबोधन में निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के व्यक्तित्व विकास, आत्मविश्वास संवर्धन एवं रचनात्मक क्षमता के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ खेल, कला, संस्कृति एवं नवाचार आधारित गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया।

समर कैंप के दौरान बच्चों के लिए फिटनेस एवं खेलकूद, कला एवं शिल्प, संगीत, नृत्य, रचनात्मक गतिविधियाँ, रोबोटिक्स, व्यक्तित्व विकास तथा विभिन्न शिक्षाप्रद एवं मनोरंजक सत्र आयोजित किए जाएंगे। यह कैंप बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने, नई विधाओं को सीखने तथा टीम भावना एवं नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर प्रदान करेगा।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान बच्चों में विशेष उत्साह एवं ऊर्जा देखने को मिली। रंगारंग एवं प्रेरणादायी वातावरण ने पूरे परिसर को सकारात्मकता और आनंद से भर दिया।

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कोरबा

जिला प्रशासन और बालको के सहयोग से सड़क एवं पुल के निर्माण को मिलेगी नई गति

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बालकोनगर। कोरबा जिले में सड़क विकास को नई गति देते हुए जिला प्रशासन ने बजरंग चौक से रिसदा पुल (परसाभाठा मार्ग) के उन्नयन कार्य को आगे बढ़ाया है। इसमें भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) सहयोगी भागीदार के रूप में जुड़ा है। यह मार्ग बालको क्षेत्र से जुड़े ग्रामीण बस्तियों, जिनमें परसाभाठा, नेहरू नगर, भद्रापारा सहित आसपास के अन्य समुदाय शामिल हैं, के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क की कड़ी है। यह सड़क जामबहार समुदाय को रूमगरा समुदाय से जोड़ते हुए बालको-कोरबा और बालको-कटघोरा के बीच एकमात्र संपर्क मार्ग के रूप में कार्य करती है तथा आगे भारत सरकार की भारतमाला परियोजना से भी जुड़ाव प्रदान करेगी।

परियोजना के अंतर्गत फोर-लेन सीमेंट कंक्रीट (सीसी) सड़क, जिसके मध्य डिवाइडर, आधुनिक स्ट्रीट लाइटिंग, सुव्यवस्थित ड्रेनेज सिस्टम सहित अन्य आवश्यक नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा। यह परियोजना क्षेत्र में सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित आवागमन सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों के जीवनस्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। अभी तक यह सड़क टू-लेन का कोलतार से बना है। इसके साथ-साथ आम जनता के सुलभ आवागमन के लिए बेलगिरी एवं रिसदा पुल का मरम्मत कार्य भी बालको के सहयोग से जिला प्रशासन द्वारा किया जाएगा। इस निर्माण कार्य से ट्रैफिक समस्या में सुधार और दुर्घटना में कमी आएगी।
परियोजना का क्रियान्वयन जिला प्रशासन द्वारा किया जाएगा, जिससे गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित होगा। बालको निरंतर जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर स्थानीय समुदाय के जीवनस्तर में सुधार और क्षेत्र के सतत विकास हेतु सहयोग करता रहा है। पिछले वर्षों में भी प्रशासन के मार्गदर्शन और सहयोग से लालघाट सड़क, बजरंग चौक से रेलवे क्रॉसिंग तथा बालको पुलिस थाना से सेक्टर-4 के वन विभाग के बैरियर तक सड़क नवीनीकरण जैसे कई कार्य किए गए हैं। इसके अतिरिक्त यातायात सुविधा को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न पार्किंग जिसमें एल्यूमिना गेट पर दोपहिया पार्किंग, कोयला ट्रकों के लिए कोल गेट एवं फ्लाई ऐश पॉन्ड क्षेत्र में पार्किंग तथा भारी वाहनों के लिए अतिरिक्त पार्किंग सुविधाओं का निर्माण भी किया गया है।
जिला प्रशासन और बालको की यह साझेदारी स्थानीय समुदाय के साथ विश्वास, सहयोग और साझा विकास की भावना को सुदृढ़ करेगी। यह परियोजना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करती है।
बालको स्थानीय समुदाय के जीवन स्तर को बेहतर बनाने हेतु नागरिक सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण में निरंतर अग्रसर है। नेहरू पार्क, बालको स्टेडियम, आधुनिक बालको अस्पताल, विद्यालय, चौड़ी सड़कें, फुटपाथ, फॉरेस्ट वॉक वे का निर्माण, जुबली पार्क के सौंदर्यीकरण और नए इंडियन कॉफी हाउस जैसी सुविधाएँ बालकोनगर को समृद्ध बना रही हैं, जिससे सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा और नागरिकों को बेहतर जीवन अनुभव मिल रहा है।

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