विदेश
ट्रम्प का दावा- ईरान जल्द सरेंडर करेगा:उसके मिसाइल-ड्रोन खत्म होने वाले हैं, इराक में 4 अमेरिकी सैनिकों की मौत
तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान जल्द सरेंडर कर सकता है। न्यूज वेबसाइट एक्सियोस के मुताबिक G7 नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक में ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका-इजराइल के सैन्य अभियान से ईरान पर भारी दबाव बना है।
ट्रम्प ने कहा कि ईरान की नौसेना और वायुसेना को बड़ा नुकसान हुआ है और उसकी मिसाइल व ड्रोन क्षमता तेजी से खत्म की जा रही है। उन्होंने ऑपरेशन “एपिक फ्यूरी” का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान से बड़ा असर पड़ा है।
इसी बीच पश्चिमी इराक में अमेरिकी एयरफोर्स का KC-135 रिफ्यूलिंग विमान क्रैश हो गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक विमान में सवार 6 में से 4 सैनिकों की मौत हो गई है, जबकि 2 अभी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है।
इस घटना के बाद ईरान के साथ जारी युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।
दावा- ईरान के नए सुप्रीम लीडर का पैर काटना पड़ा
कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं और कोमा में हैं।
ब्रिटिश मीडिया द सन की रिपोर्ट के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हमले में घायल होने के बाद उन्हें तेहरान के सिना यूनिवर्सिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि उनकी हालत बेहद गंभीर है।
रिपोर्ट के मुताबिक हमले में चोट इतनी गहरी थी कि उनका एक पैर काटना पड़ा और लिवर को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। अस्पताल के एक हिस्से को पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां भारी सुरक्षा तैनात है।
मुजतबा खामेनेई को उनके पिता और ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद 9 मार्च को देश का नया सुप्रीम लीडर बनाया गया था। अली खामेनेई की 28 फरवरी को मौत हुई थी।
विदेश
अफगानिस्तान का पाकिस्तान पर जवाबी हमला:खैबर पख्तूनख्वा में सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, बीती रात पाकिस्तानी हमले में 6 अफगानी मारे गए
इस्लामाबाद,एजेंसी। अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि अफगान वायुसेना ने शुक्रवार को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हवाई हमला किया। मंत्रालय के मुताबिक यह कार्रवाई पाकिस्तानी सेना की बीती रात किए गए हमलों के जवाब में की गई।
रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि कोहाट क्षेत्र में पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को टारगेट किया गया। साथ ही सैन्य किले को भी निशाना बनाया गया। हालांकि हमले से किसी के मारे जाने या घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
दरअसल, पाकिस्तान ने गुरुवार रात अफगानिस्तान की राजधानी काबूल और कंधार में हवाई हमले किए थे। तालिबानी अधिकारियों के मुताबिक, हमले में 6 लोगों की मौत और 15 घायल हुए हैं। इसमें महिलाएं और बच्चे शामिल है। साथ ही कई घरों को भी नुकसान पहुंचा है।
पाकिस्तान ने अफगान के फ्यूल डिपो पर हमला किया था
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद के मुताबिक, पाकिस्तान ने प्राइवेट एयरलाइन ‘काम एयर’ के फ्यूल डिपो पर हमला किया था, जो सिविलियन विमानों और UN के विमानों को भी फ्यूल सप्लाई करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस हमले का जवाब दिया जाएगा।

काबुल में शुक्रवार की रात पाकिस्तानी हवाई हमले में क्षतिग्रस्त हुए एक घर के बाहर घायल अफगान नागरिक बैठे हुए।

तालिबानी अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान ने कई नागरिक इलाकों को भी निशाना बनाया है।
पाकिस्तान ने तालिबान नेताओं के गढ़ को निशाना बनाया
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि पाकिस्तानी हमले कंधार और पक्तिका प्रांतों में भी किए गए। कंधार तालिबान नेताओं का गढ़ माना जाता है।
वहीं, तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज कर दिया है। उसका कहना है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने दिया जाएगा।
दरअसल, पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच जंग जैसे हालात
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में संघर्ष की शुरुआत 22 फरवरी को हुई थी। पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की थी।
पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने दावा किया था कि सीमावर्ती इलाकों में TTP के ठिकानों पर कार्रवाई में कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 तक पहुंचने का दावा किया था। इसके जवाब में अफगानिस्तान ने 27 फरवरी को पाकिस्तान पर हमला किया।
अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि पाकिस्तान को ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ दिया जाएगा। मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया था।
पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर दबाव बनाता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से ऑपरेट हो रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 415 तालिबान लड़ाके मारे
पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के खिलाफ हमले को ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन नाम दिया था और काबुल समेत कई प्रांतों में हमले किए। ‘गजब लिल हक’ का मतलब है, अपने हक के लिए खड़े होना।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के मुताबिक अब तक –
- 415 तालिबान लड़ाके मारे गए
- 580 से ज्यादा घायल हुए
- 182 पोस्ट तबाह की गईं
- 31 पोस्ट पर कब्जा किया गया
- 185 टैंक और सैन्य वाहन तबाह किए गए
पाकिस्तानी वायुसेना ने दावा किया था कि उसने नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाया।
वहीं तालिबान का कहना है कि उसके सिर्फ 8 से 13 लड़ाके मारे गए और कुछ घायल हुए। उसने दावा किया था कि 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा किया गया।
1 लाख लोग घर छोड़ने को मजबूर हुए
पिछले कुछ हफ्तों में अफगान और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच सीमा पर कई बार झड़पें हो चुकी हैं। संयुक्त राष्ट्र के अफगानिस्तान मिशन (UNAMA) के अनुसार 26 फरवरी से 5 मार्च के बीच पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाइयों में 56 नागरिक मारे गए हैं। इनमें 24 बच्चे भी शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के मुताबिक इन हमलों के कारण करीब 1.15 लाख लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने को मजबूर हुए हैं।
पाकिस्तान और TTP में लड़ाई क्यों?
- 2001 में अमेरिका के अफगानिस्तान पर हमले के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया। इससे TTP नाराज हो गया, वह इसे इस्लाम के खिलाफ मानता था।
- TTP का मानना है कि पाकिस्तान सरकार सच्चा इस्लाम नहीं मानती है, इसलिए वो उसके खिलाफ हमला करता है।
- TTP का अफगान तालिबान के साथ गहरा जुड़ाव है। दोनों समूह एक-दूसरे को समर्थन देते हैं।
- 2021 में अफगान तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने TTP को निशाना बनाकर अफगानिस्तान में हमले किए।
ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स में पाकिस्तान दूसरे नंबर पर
- ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 के मुताबिक, बुर्किना फासो के बाद पाकिस्तान दुनिया का दूसरा सबसे आतंक प्रभावित देश बन चुका है, जबकि 2024 में यह चौथे स्थान पर था।
- TTP के हमलों में 90% की वृद्धि हुई है।
- बलूच आर्मी (BLA) के हमलों में 60% बढ़ोतरी हुई है।
- इस्लामिक स्टेट- खुरासान (IS-K) ने अब पाकिस्तानी शहरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
दोनों देशों के बीच पहले भी हुआ है तनाव
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से विवाद है। दोनों देश एक-दूसरे पर हमले और आतंकियों को छिपाने का आरोप लगाते रहते हैं। 2021 में अफगानिस्तान हुकूमत पर तालिबान के कंट्रोल के बाद से तनाव और बढ़ गया है।
बिज़नस
भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा
वॉशिंगटन,एजेंसी। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन समेत अपने 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई जांच शुरू कर दी है। ‘सेक्शन 301’ अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैक्स बढ़ाने की शक्ति देता है, जो उसकी कंपनियों को नुकसान पहुंच रहे हो।
पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ को अवैध बताने के बाद, प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों से टैरिफ का दबाव वापस बनाने की तैयारी में है।
यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, इस जांच के कारण इस साल गर्मियों तक भारत, चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
विदेश
होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों को सुरक्षा नहीं देगा अमेरिका:ऊर्जा मंत्री बोले- हमारी नौसेना तैयार नहीं, फिलहाल ईरान को निशाना बनाने पर फोकस
तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। अमेरिका फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों को सैन्य सुरक्षा नहीं देगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि उनकी नौसेना अभी टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार नहीं है।
CNBC न्यूज से बातचीत में राइट ने कहा कि अमेरिका का फोकस इस समय ईरान की आक्रामक क्षमताओं और उन्हें सपोर्ट करने वाले उद्योगों को निशाना बनाने पर है। इसी वजह से टैंकरों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट मिशन अभी शुरू नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जल्द लागू हो सकती है और अमेरिकी नौसेना महीने के अंत तक इस मिशन के लिए तैयार हो सकती है। इस मामले पर रक्षा अधिकारियों के साथ चर्चा जारी है।
अमेरिका फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों को सैन्य सुरक्षा नहीं देगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि उनकी नौसेना अभी टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार नहीं है।
CNBC न्यूज से बातचीत में राइट ने कहा कि अमेरिका का फोकस इस समय ईरान की आक्रामक क्षमताओं और उन्हें सपोर्ट करने वाले उद्योगों को निशाना बनाने पर है। इसी वजह से टैंकरों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट मिशन अभी शुरू नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जल्द लागू हो सकती है और अमेरिकी नौसेना महीने के अंत तक इस मिशन के लिए तैयार हो सकती है। इस मामले पर रक्षा अधिकारियों के साथ चर्चा जारी है।
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