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कोरबा

स्वच्छता ही सेवा के तहत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छाग्रहियों द्वारा डोर टू डोर कचरा संग्रहण का किया जा रहा कार्य

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ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थों के सुरक्षित निपटान हेतु आम नागरिकों को किया जा रहा जागरूक

कोरबा। स्वच्छता ही सेवा (स्वच्छ भारत अभियान) के तहत कलेक्टर सौरभ कुमार के मार्गदर्शन में जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छाग्रहियों द्वारा डोर टू डोर कचरा संग्रहण का कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है। साथ ही उनके द्वारा मोहल्ले एवं वार्डाे की भी साफ सफाई की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में नगर निगम कोरबा के कोसाबाड़ी जोन वार्ड क्रमांक 22 व 23 एवं रविशंकर जोन क्रमांक 24 में स्वच्छता अभियान चलाया गया। अभियान के तहत नगर के टैक्सी स्टैण्ड, खेल मैदान, सामुदायिक भवन के साथ-साथ सुभाष चौक के आस-पास क्षेत्र के आवासीय परिसरों, सड़कों के किनारे फैले हुए अपशिष्ट पदार्थाे, मलबा, कचरा आदि की सफाई किया गया तथा घरों, दुकानों से उत्सर्जित अपशिष्ट को सड़कों तथा सार्वजनिक स्थलों पर नहीं फेंकने हेतु नगर वासियों में जागरूकता अभियान चलाया गया। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्वच्छाग्रहियों द्वारा ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन के सभी दिशा पर कार्य करते हुए ग्रामों को स्वच्छ एवं सुन्दर बनाने का कार्य कर रहे हैं। स्वच्छाग्रहियों द्वारा गांव को स्वच्छ रखने हेतु ग्रामीणों को जागरूक करने के लिये जागरूकता अभियान चलाकर गीले एवं सूखे कचरे का पृथक-पृथक निपटान करने की जानकारी दी जा रही है। ग्राम पंचायतों में जल स्रोतों के समीप एकत्रित होने वाले गंदे पानी के सुरक्षित निपटान हेतु सोख्तापिट सहित अन्य संरचनाओं का निर्माण भी किया जा रहा है। स्वच्छता जागरूकता हेतु महिलाएं ग्रामों में बैठकें, जागरूकता रैली के माध्यम से ग्रामीण परिवेश में स्वच्छ वातावरण तैयार कर रहे हैं। साथ ही ग्राम वासियों को बीमारियों से बचाने हेतु स्वच्छता की महत्ता बताने का कार्य किया जा रहा है एवं सामूहिक श्रम दान के माध्यम से मंदिर, बस स्टैण्ड, तालाब आदि सार्वजनिक स्थलों की सफाई की जा रही है।

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कोरबा

‘सेवा सेतु’- छत्तीसगढ़ में सुशासन और डिजीटल प्रशासन का नया अध्यायआम नागरिक डिजीटल सेवा का उठा सकते हैं लाभ-कलेक्टर

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कोरबा। छत्तीसगढ़ में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में “सेवा सेतु” एक महत्वपूर्ण पहल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रशासनिक सेवाओं को आम नागरिकों तक सरल,त्वरित और डिजिटल माध्यम से पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। इसी सोच का परिणाम है कि अब आय,जाति, निवास प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, भू-नकल सहित 441 से अधिक शासकीय सेवाएं एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जा रही है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सेवा सेतु अन्तर्गत उपलब्ध सेवाओं का आन लाईन माध्यम में लाभ उठा सकते हैं। इसमें समय सीमा निर्धारित है।

डिजिटल सुशासन का प्रभावी माध्यम

 पहले नागरिकों को अलग-अलग विभागों की सेवाओं के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। प्रमाण-पत्र बनवाने जैसी मूलभूत सेवाओं में समय, श्रम और आर्थिक संसाधनों की बड़ी खपत होती थी। “सेवा सेतु” ने इस पारंपरिक व्यवस्था को बदलते हुए नागरिकों को “वन स्टॉप सॉल्यूशन” उपलब्ध कराया है। अब लोग ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर रहे हैं और निर्धारित समय-सीमा में सेवाओं का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

राज्य शासन की यह पहल केवल तकनीकी परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रशासनिक संस्कृति में बदलाव का भी संकेत है। यह व्यवस्था नागरिकों को यह भरोसा दिला रही है कि शासन उनकी सुविधा और अधिकारों को प्राथमिकता दे रहा है।

86 से बढ़कर 441 सेवाएं

छत्तीसगढ़ में पहले ई-डिस्ट्रिक्ट प्लेटफॉर्म के माध्यम से केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं। समय की आवश्यकता को देखते हुए इसका उन्नत संस्करण “सेवा सेतु” विकसित किया गया,जिसमें अब 441 सेवाएं जोड़ी जा चुकी हैं। इनमें 54 नई सेवाएं शामिल हैं, जबकि विभिन्न विभागों की 329 री-डायरेक्ट सेवाओं का भी सफल एकीकरण किया गया है। तीस से अधिक विभाग इस प्लेटफॉर्म से जुड़े हुए हैं, जिससे नागरिकों को अलग-अलग पोर्टल या कार्यालयों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा। इससे प्रशासनिक प्रक्रियाएं अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनी हैं।

समयबद्ध सेवा का भरोसा

    छत्तीसगढ़ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं प्राप्त करने का अधिकार दिया गया है। “सेवा सेतु” इसी अधिकार को व्यवहारिक रूप से मजबूत कर रहा है। पिछले 28 महीनों के आंकड़े इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को दर्शाते हैं। इस अवधि में 75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया गया। इनमें 95 प्रतिशत से अधिक आवेदन तय समय-सीमा में निपटाए गए। यह आंकड़ा प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।

प्रमाण-पत्र सेवाओं की सबसे अधिक मांग

    चिप्स कार्यालय के अनुसार सबसे अधिक आवेदन आय प्रमाण-पत्र के रहे, जिनकी संख्या 32 लाख से अधिक है। इसके अलावा मूल निवास प्रमाण-पत्र, अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र, अनुसूचित जाति एवं जनजाति प्रमाण-पत्र, विवाह प्रमाण-पत्र और भू-नकल संबंधी सेवाओं का भी बड़े पैमाने पर उपयोग हुआ है।

    यह दर्शाता है कि नागरिकों की दैनिक जरूरतों से जुड़ी सेवाओं को डिजिटल माध्यम में लाना कितना आवश्यक था। अब ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोग भी कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और इंटरनेट आधारित सेवाओं के माध्यम से सुविधाओं का लाभ उठा पा रहे हैं।

    व्हाट्सएप तक पहुंची सरकारी सेवाएं तकनीक के बढ़ते उपयोग को देखते हुए अब “सेवा सेतु” की सेवाओं को व्हाट्सएप से भी जोड़ा गया है। इससे लोगों को जानकारी प्राप्त करने और सेवाओं तक पहुंचने में और अधिक सुविधा मिल रही है। अब तक 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जा चुके हैं। यह कदम डिजिटल इंडिया की अवधारणा को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने वाला माना जा रहा है।

पारदर्शिता और विश्वास का नया मॉडल

    “सेवा सेतु” केवल एक पोर्टल नहीं, बल्कि नागरिक और शासन के बीच भरोसे का नया सेतु बनता जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वर्कफ्लो प्रणाली के कारण आवेदन प्रक्रिया की निगरानी संभव हुई है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और अनावश्यक विलंब में कमी आई है। राज्य सरकार की यह पहल प्रशासनिक सुधार, तकनीकी नवाचार और नागरिक सुविधा का समन्वित उदाहरण है। यदि इसी गति से सेवाओं का विस्तार और गुणवत्ता सुधार जारी रहा, तो “सेवा सेतु” आने वाले समय में देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।

    डिजिटल युग में सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें समय पर और सरल तरीके से जनता तक पहुंचाना है। “सेवा सेतु” इसी सोच को साकार कर रहा है। यह प्लेटफॉर्म छत्तीसगढ़ में प्रशासन को अधिक मानवीय, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। निश्चित रूप से “सेवा सेतु” आने वाले वर्षों में राज्य की डिजिटल प्रशासनिक पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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कोरबा

कोयला गैसीकरण को मिली नई गति : केंद्र सरकार की 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी

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भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में भी संभावनाओं पर कार्य जारी

बिलासपुर/कोरबा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में सतही कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी प्रदान की है। यह योजना वर्ष 2030 तक 100 मिलियन टन कोयला गैसीकरण के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देने, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने तथा एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथेनॉल जैसे उत्पादों के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस योजना के अंतर्गत लगभग 75 मिलियन टन कोयला/लिग्नाइट गैसीकरण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत नई परियोजनाओं को प्लांट एवं मशीनरी लागत का अधिकतम 20 प्रतिशत तक वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा। परियोजनियों का चयन पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

केंद्र सरकार द्वारा कोयला गैसीकरण क्षेत्र में दी जा रही इस नई गति का प्रभाव देश की प्रमुख कोयला कंपनियों में भी दिखाई दे रहा है। इसी क्रम में साऊथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा भी कोयला गैसीकरण की संभावनाओं पर कार्य किया जा रहा है। SECL के भटगांव क्षेत्र स्थित महामाया खदान में कोल गैसीफिकेशन की संभावनाओं का परीक्षण एवं अध्ययन किया जा रहा है। यह पहल भविष्य में कोयले के वैकल्पिक एवं स्वच्छ उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

कोयला गैसीकरण तकनीक के माध्यम से कोयले को ‘सिंथेसिस गैस’ (Syngas) में परिवर्तित किया जाता है, जिसका उपयोग उर्वरक, रसायन, ईंधन तथा अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है। इससे न केवल आयातित ईंधनों पर निर्भरता घटेगी, बल्कि देश में वैल्यू एडिशन एवं औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

सरकार के अनुसार इस योजना से लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की संभावना है तथा लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। साथ ही कोयला उत्पादक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

भारत के पास लगभग 401 बिलियन टन कोयला एवं 47 बिलियन टन लिग्नाइट भंडार उपलब्ध हैं। ऐसे में कोयला गैसीकरण को ऊर्जा सुरक्षा, आत्मनिर्भर भारत एवं ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पहल माना जा रहा है।

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कोरबा

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय एवं रोटरी क्लब कोरबा के संयुक्त तत्वावधान में 18 मई को ‘खुशियों का पासवर्ड’ का शुभारम्भ

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कोरबा। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय एवं रोटरी क्लब कोरबा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम ‘खुशियों का पासवर्ड’ का शुभारम्भ दिनांक 18-05-2026 को संध्या 6:00 बजे को मंत्री छत्तीसगढ़ शासन लखन लाल देवांगन, कटघोरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक प्रेम चन्द पटेल एवं महापौर कोरबा श्रीमती संजू देवी राजपूत द्वारा इंदिरा गाँधी स्टेडियम टी.पी. नगर कोरबा परिसर में स्थित राजीव गाँधी इंडोर ऑडिटोरियम में होने जा रहा है। जिसके मुख्य वक्ता सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर, कॉर्पोरेट ट्रेनर, हिप्नोथेरेपिस्ट एवं लाइफ कोच डॉ. सचिन परब मुंबई होंगे । आपने देश-विदेश में मानवता के कल्याण के लिए एवं निराश, हताश तथा तनाव ग्रस्त लोगे के जीवन में अपने उदबोधन से नव उर्जा का संचार कर खुशियों से से आप्लावित कर दिया | त्रिदिवसीय कार्यक्रम के पूर्व उपरोक्त स्थान व समय पर ही कॉर्पोरेट जगत, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, रेड क्रॉस सोसाइटी आई.डी.ए एसोसिएशन, मीडिया प्रभाग 25 क्रास सोसायटरी व अन्य गणमान्य लोगो के लिए ‘हील योर माइंड हील योर लाइफ’ का कार्यक्रम दिनांक 17-05-2026 को एस.इ.सी.एल. बिलासपुर सिपत व डब्लू.सी.एल. नागपुर के उर्जावान सी.एम.डी हरीश दुहान के मुख्य आतिथ्य में सम्पादित होगा | दिनांक 19-05-26 के कार्यक्रम हेतु मुख्य अतिथि के रूप में कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत तथा पूर्व मंत्री जय सिंह अग्रवाल एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद होंगे तथा दिनांक 20-05-26 के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत से भी निवेदन किया गया है तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में आशुतोष पाण्डेय आयुक्त नगर पालिक निगम कोरबा एवं श्रीमती प्रेमलता यादव डी.ऍफ़. ओ कोरबा ।

अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय आबू पर्वत राजस्थान से ‘नशा मुक्त भारत अभियान रथ’ का शुभागमन होने जा रहा है जिसका विधिवत उदघाटन दिनांक 18-05-2026 को सम्पन्न होगा | इस रथ का मुख्य आकर्षण ऑडियो-विडियो एवं चित्र प्रदर्शनी के साथ साथ कुंभकर्ण के मॉडल द्वारा अज्ञानता की निद्रा में सुषुप्त जनमानस को इस ईश्वरीय सन्देश के द्वारा जागरुक करना है। इसके साथ ही इस अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शिक्षा जागरूकता और आध्यात्मिक सशक्तिकरण के माध्यम से नशे के दुरोपयोग को रोकना, जमीनी स्तर पर गतिविधियों और सोशल मीडिया के माध्यम से नशे के दुष्प्रभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाना, युवा सशक्तिकरण, विद्यालयों एवं विश्व विद्यालयों में नशा मुक्त परिसर बनाना, नशा मुक्त समाज के लिए सहयोग, आध्यत्मिक मार्गदर्शन और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से स्वस्थ जीवन को बढावा देना, रैली, सेमिनार और कार्यशालाओ का आयोजन तथा योग और ध्यान के माध्यम से स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ाना आदि है उक्त रथ कोरबा के शहरी और ग्रामीण अंचल के प्रमुख स्थानों पर जा कर कार्यक्रम आयोजित करने हेतु प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त बी. के. डॉ. सचिन परब द्वारा एन.टी.पी.सी टाउनशिप स्थित अम्बेडकर ऑडिटोरियम में त्रिदिवसीय शिविर “खुशियों का पासवर्ड” दिनांक 18 मई से 20 मई तक प्रातः 9 बजे से 10:30 बजे तक आयोजित है तथा अन्य कार्यक्रमों में जिला जेल कोरबा के बंदियों के लिए दिनांक 18-05-26 को दोपहर 12 से 01 बजे, गेवरा के सी.आई.एस. ऍफ़. केंद्र में सायं 4 से 5 बजे, दिनांक 19-05-26 को कोरवा ब्रांच ऑफ़ CIRC ऑफ़ ICAI के लिए टी.पी. नगर स्थित होटल गणेश इन् में दोपहर 12 से 1 बजे तथा सायं को एस.ई.सी.एल. क्लब कोरबा में समय सायं 4 से 5 बजे तक अपना कार्यक्रम देंगे इस अवसर पर संस्था की मुख्य संचालिका ब्रह्माकुमारी रुक्मणी के द्वारा कार्यक्रम का लाभ लेने के लिए समस्त कोरबा वासियों को आहवान किया गया है।

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